मिस यू सोनिया



मैंने जब उसके बारे में पूछा तो उसने बस अपना नाम बताया, उम्र भी नहीं बताई और कहा- बाद में बता दूँगी। मेरे बारे में सब पूछा।अब वो मेरे समय पर, जब मैं ऑनलाइन रहता, तब ही वो आती और मेरे से बात करती।उसने बताया कि वो अपने माँ बाप की एकलौती बेटी है, उसके पापा रोहन 40 साल के और माँ दिव्या 38 साल की।मैंने अंदाजा लगा लिया कि इसकी भी उम्र 20 से कम होगी, उसका नाम सोनिया था। सोनिया दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। धीरे धीरे हमारी बात बढ़ने लगी, अब उसने अपना नंबर मुझे दे दिया और मेरा नंबर ले लिया। अब वो जब भी फ्री होती थी तब मेरे से बात करती थी। उसने मुझे बताया कि मेरे घर में कोई कुछ नहीं बोलता चाहे कुछ भी करूँ। हम काफी अमीर हैं, घर में नौकर-चाकर हैं। हम खूब बातें करने लगे। रात दिन सुबह 5 बजे से रात के एक-दो बजे तक।सोनिया कहने लगी कि मुझे न नींद आती है, न भूख लगती है, न कहीं मन लगता है।शायद उसको मुझसे प्यार हो गया था।एक दिन कह ही दिया उसने मुझे- आई लव यू !वो मेरे बारे में सारा जानती थी लेकिन मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानता था इसलिए मैंने उससे कहा- मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जाता, फिर तुम्हें कैसे जवाब दे सकता हूँ।उसके कहा- ठीक है, कोई नहीं, जब मिलोगे तब बता देना।दो महीने में हम एक दूसरे के करीब आ गए। वो मेरा खूब ख्याल रखती थी, खाना खाया या नहीं, अपना ध्यान रखो, और भी बहुत कुछ !मुझे भी अब लग रहा था कि मुझे उससे प्यार हो गया है, मैंने भी उसे प्यार का इजहार कर दिया, उसने भी हाँ कर दी। हमने एक दूसरे को अभी तक देखा नहीं है। अब हम थोड़ी थोड़ी सेक्स की बातें करने लगे। जैसे एक दिन की बात है:सोनिया- तुम्हारा कितना बड़ा है।मैं- मिलोगी तो अपने आप देख लेना।सोनिया- फिर भी बता दो।मैं- छः इंचमैं- तुम्हारी चूची कितनी बड़ी हैं?सोनिया- छोटी हैं, बड़ी नहीं है, निम्बू जैसी।मैं- चूत कैसी है? बाल है वहाँ पे?सोनिया- कसी हुई, बाल नहीं है।सोनिया- तुम मुट्ठ मारते हो?मैं- कभी कभी जब ज्यादा मन करता है और कोई नहीं होती।मैं- और तुम उंगली करती हो?सोनिया- नहीं, लेकिन रब करती हूँ कभी कभी।मैं- मेरा लोगी?सोनिया- हाँ जरूर ! तीनों छेदों में ! लेकिन प्यार से डालना। अभी कच्ची कलि हूँ, कुंवारी हूँ, कहीं जान न निकल जाये।मैं- जानू, तुम तो मेरी जान हो, तुम्हारी जान कैसे निकालूँगा मैं !उसकी सहेली भी काफी अमीर थी। मैं उसके घर गया और घंटी बजाई, उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला। उसकी नौकरानी करीब 25 साल की होगी। मोटे मोटे चूचे, मस्त गांड।मैंने सोचा कि नौकरानी इतनी मस्त है तो मालकिन कैसी होगी।उसकी नौकरानी ने मुझे अंदर बुलाया और बैठाया और कहा- छोटी मालकिन अभी आ रही हैं।और वो मुझे बार बार घूर कर देख रही थी।तभी दो लड़कियों के हंसने की आवाज आई। वो दोनों सीढ़ियों से आ रही थी। उसकी सहेली का नाम नेहा था, दोनों आई, एक ही उम्र 18 की होंगी।एक ने कहा- पहचानो कौन है वो जो आपके सपनों में आती है?वो मुस्कुरा रही थी और कभी मुझे और कभी दूसरी को देखती।मैंने कहा- मेरे सपनों में जो आती है आज तो वो चुपचाप खड़ी है, बोल भी नहीं रही।तभी सोनिया बोली- मैं बस देख रही थी कि तुम मुझे पहचानते हो या नहीं।फिर नेहा सोनिया के कान में कुछ बोली और नौकरानी को जाने को बोल कर कहने लगी- मुझे कुछ काम है, मैं बाहर जा रही हूँ, 2-3 घंटे लगेंगे।वो चली गई।सोनिया आज क़यामत लग रही थी, लहंगा-चोली पहन रखी थी उसने, मानो ऐसा लग रहा था जैसी किसी पार्टी में जा रही हो।वो मेरे साथ बैठ गई और बातें करने लगे। उसने अपनी उम्र 18 साल बताई। मैंने उससे कहा- यार तुम मेरे से 2 साल छोटी हो।सोनिया ने कहा- प्यार उम्र नहीं देखता। मैं इसलिए मिलने से मना कर रही थी लेकिन तुम ही जिद कर रहे थे। अब तुम मेरे से प्यार करो या मत करो लेकिन मैं तुमसे ही प्यार करती रहूँगी।इतना कहते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए और चुम्बन करने लगी। मैं इसके लिए तैयार नहीं था लेकिन थोड़ी देर में मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी साथ देने लगा था पर मैं यह सब अभी नहीं करना चाहता था, मैं उससे प्यार करने लगा था, सेक्स के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं। मैंने उससे प्यार किया था उसके बदन से नहीं !जबकि उस समय वो ऐसी लग रही थी मानो स्वर्ग से आई हो, किसी की भी नीयत उस वक्त ख़राब हो सकती थी उस पे। मैंने उसे रोकना चाहा, उसे अपने से अलग किया और कहा- यह ठीक नहीं है।इतना सुनते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई और कमरा बंद किया, मुझे बिस्तर पर धक्का दिया, बिस्तर फूलों से सजाया हुआ था और अपने कपड़े उतारने लगी और थोड़ी ही देर में नंगी हो गई, आकर मेरे से चिपक गई, बेहिसाब चूमने लगी।आखिर मैं भी इंसान हूँ, कब तक सब्र करता, मेरा भी सब्र का बाँध टूट गया, मैं भी अब उसका साथ देने लगा।उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैं भी उसके सामने बिल्कुल नंगा था, मैं उसकी चूची चूस रहा था जो सच में निम्बू जैसी ही थी, कभी दाईं चूची, कभी बायीं चूची।मैं धीरे धीरे नीचे आया जहाँ चूत होती है और चूत चाटने लगा। एकदम साफ़ और गुलाबी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था। सोनिया सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मजा आ रहा था।इसी बीच सोनिया झर गई। अब मेरे लंड को पास से देखते ही बोली- यार, ये क्या मेरे में चला जायेगा/मैंने कहा- मुँह में डाल कर दखो, अगर मुँह में चला जायेगा तो चूत में भी चला जायेगा।इतना कहने पर वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। कभी मुँह में रख कर टाफी की तरफ चूसती तो कभी आगे पीछे करके चूसती, तो कभी गोलियों को चूसती। मुझे खूब मजा आ रहा था, मैं झरने वाला था, उससे पूछा- कहाँ लोगी मेरा माल? मुँह में या बदन पे?उसने कहा- स्वाद तो ले के देखने दो कि कैसा लगता है।और मेरा पूरा माल अंदर ले गई। वो बाहर गई और रसोई से दो बीअर ले आई। दोनों ने बैठ कर बीयर पी, उसने आधी बोतल, मैंने डेढ़ बोतल।दोनों को हल्का सा सरूर छा गया, हम एक दूसरे को चूमने लगे।मैं फिर उसकी चूत चाटने लगा, कुछ देर बाद वो मेरा लंड चूसने लगी।अब उसने कहा- अब नहीं रहा जाता, डाल दो अपना सांप मेरे बिल में !मैंने थोड़ा तेल लगाया अपने लंड पर और उसकी चूत में !एक-दो बार धक्के दिए, पर अंदर नहीं गया। उसकी चूत उम्र के हिसाब से कसी थी। फिर मैंने उसे जोर से पकड़ कर एक धक्का दिया, आधा लंड अंदर चला गया।वो बहुत तेज चिल्लाई, उसकी चूत से खून की धारा बहने लगी और आँखों से आँसुओं की धारा !मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसे चूमने लगा, उसकी चूची चूसने लगा, सहलाने लगा।जब थोड़ा आराम हुआ तो मैंने एक और धक्का दिया और पूरा सांप बिल में ! पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी सांस एकदम रुक सी गई।मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और चूमने लगा। कुछ देर बाद वो नीचे से गांड हिलाने लगी तब मैंने भी उसका साथ देना शुरू किया और आगे-पीछे होने लगा।फिर 15 मिनट तक लंड और चूत की लड़ाई होती रही और चूत लंड के सामने पानी पानी हो गई और लंड ने एक बौछार चूत में फेंक दी और चूत उसकी दीवानी हो गई।हम दोनों आराम से पड़े हुए थे, सोनिया उठी और बिस्तर और अपने आप को देख कर घबरा गई। उसकी गांड-चूत खून से सनी हुई थी और बिस्तर भी।मैंने उसे बताया- पहली बार होता है, बाद में सब ठीक हो जाता है।उसे चलने में दिक्कत हो रही थी। फिर हम नहाये, कपड़े पहने और बाहर गए, होटल में खाना खाया, मूवी देखी, खूब घूमे और फिर आ गए वही चोदा-चादी का खेल खेलने।तब नेहा घर पर ही आ चुकी थी, हमारी सारी आवाजे उसको सुनाई दे रही थी।उसके बाद हमें जब भी मौका मिला, मजे किये, गांड-चूत में हमने ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ हमने एक दूसरे को छोड़ा हो। उसको सेक्स का भूत सवार हो गया था, हफ्ते में दो बार उसको सेक्स करना ही है और वो भी मेरे साथ, कहती है किसी का ख्याल मैं आज तक अपने दिल में नहीं लाई।वो मुझ से सच में प्यार करने लगी थी उसकी कोई सेक्स की भूख नहीं थी, सेक्स तो शरीर की जरुरत है।मैं उसे कहता- प्यार सेक्स से बड़ी चीज है, प्यार जिंदगी भर क्या, सदियों का होता है और सेक्स दो पल का मजा।मैं भी उसे बहुत प्यार करता था लेकिन एक दिन उसका एक्सीडेंट हो गया और वो मुझे छोड़ कर चली गई।लेकिन उसकी याद अभी भी मेरे दिल में बसी हुई है।




 

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