हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


हवस भरा प्यार

Posted: 17 Feb 2013 09:27 AM PST


मेरा नाम अयन है, यह घटना मेरे साथ सच में हुई है। यह मेरी पहली कहानी है जो मैं यहाँ लिख रहा हूँ अपने पहले प्यार का अनुभव !

धैर्य से पढ़िए, यह आपके लण्ड और बुर से पानी निकाल देगी।

मैं एक लड़की के साथ बहुत दिनों से ऑनलाइन बात कर रहा था, उसका नाम शीना है। हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे, मैं चेन्नई में पढाई कर रहा था और वह बंगलौर में। वह मुझसे हर बात कर लेती थी और मैं उसके साथ।

एक दिन मैंने उसके सामने अपने प्यार का इज़हार किया और उसके लिए मेरे दिल में जो भी था मैंने उसे सब सच बता दिया। वह भी मुझ से प्यार करती थी और उसने मुझे हाँ कह दिया।

शीना : शीना बहुत ही सुंदर लड़की है, उसकी तनाकृति 34-27-36 है, कद 5'6", गोरा रंग, मस्त होंठ, अच्छे नयन-नक्श, नए जमाने के घर की आधुनिक बेटी थी। उसे टीशर्ट पहनना पसंद है और टीशर्ट में उसके वक्ष बहुत ही सुंदर दिखते हैं, मानो वो उस शर्ट को फाड़ कर बाहर आना चाहते हों। उसकी कमर को कोई अगर देख ले तो बस देखता ही रह जायेगा। बस मस्त माल है।

मैं : मैं भी दिखने में अच्छा हूँ, मेरा कद 5'7" है, मुझे बॉडी बिल्डिंग का शौक है बचपन से, अपने ६ पैक्स पर मुझे बहुत नाज़ है और मेरा लंड 7.5" लंबा और 3" मोटा है।

हमारी मुलाक़ात और प्यार :

हम दोनों की परीक्षाएँ खत्म होने के बाद हमने मिलने की योजना बनाई और मैं उसे मिलने बंगलौर गया। वह मुझे लेने बस स्टैंड आई। जब मैंने उसे पहचाना तो मैं उसे देखता ही रह गया। वह मुझे किसी परी जैसी लग रही थी।

उस दिन हम दोनों बहुत घूमे और बहुत मस्ती की।

रात में हम दोनों एक होटल में कमरा लेकर रुक गए। कमरा बहुत सुन्दर था और दिल की आकृति का बेडरूम था। दोनों खाना खाकर बातें करते करते सो गए।

बीच रात को मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि शीना मुझे कसकर पकड़ कर सो रही थी और उसके वक्ष मेरी छाती से दब रहे थे, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैंने भी उससे कस कर पकड़ लिया, उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। तब मुझे लगा कि वह नींद में है और मैं उसके स्तनों को अपनी छाती से दबाने लगा।

मैं धीरे-धीरे उसके पेट को सहलाने लगा और अपना हाथ उसके वक्ष पर फिराने लगा, उसने तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं की। कमरे में नाइट बल्ब जला हुआ था, मैंने उसके होटों को देखा तो मेरा मन उन्हें चूमने को करने लगा। मैंने हिम्मत करके उसके होटों को अपने होटों से छूने के लिए अपना मुँह उसके मुँह से छुआ ही था कि उसने भी मुझसे चुम्बन करना शुरु कर दिया।

मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और हम बहुत देर तक चूमते रहे। मैं उसकी जीभ चूसने लगा और वो मेरे होटों को चूसे जा रही थी।

उसे चूमते हुए मैं उसके स्तन भी दबा रहा था और पेट को भी सहला रहा था। फिर मैं धीरे धीरे अपना हाथ उसकी स्कर्ट में डालने लगा तो उसने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं कुछ देर रुक गया फिर उसका टॉप उतारने लगा। उसने मुझे नहीं रोका। अब उसके चूचे मेरे सामने उसकी ब्रा में थे, मैं उन्हें देख कर पागल हो रहा था और उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। वह भी धीरे-धीरे मस्त होने लगी।

मेरा मन उसके चूचों को चूसने को कर रहा था तो मैं उसकी ब्रा खोलने के लिए अपने हाथ उसकी कमर पर ले गया लेकिन उसकी ब्रा में बहुत सारे हुक थे जिसमें आखरी हुक नहीं खुल रहा था, तो शीना ने यहाँ मेरी मदद की और जैसे ही उसकी ब्रा खुली, उसने मुझे कस कर गले लगा लिया।

फिर मैंने उसे लेटाया और उसके स्तनों के चारों ओर चुम्बन करने लगा, मैं उसे तड़पाना चाहता था थोड़ी देर !

और जब उसके चुचूक कड़े हो गए तो मैंने अचानक से उन्हें बहुत तेज तेज चूसना शुरु कर दिया और उन्हें हल्के-हल्के काटने लगा।

शीना भी बहुत मस्त हो चुकी थी और मेरे सर के बालों को पकड़ रही थी, उन्हें खींच रही थी। करीब दस मिनट तक मैं उन्हें चूसता रहा, मेरे लण्ड का बहुत बुरा हाल हो चुका था, वो पैन्ट फाड़ कर बाहर आना चाहता था तो मैंने शीना का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। उसने मेरे लण्ड को कस के पकड़ लिया और उसे दबाने लगी।

अब मैंने अपना हाथ फिर से शीना की स्कर्ट में डालना चाहा तो शीना ने फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया लेकिन इस बार उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। मैंने अपना हाथ फिर उसकी स्कर्ट में घुसा दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से उसे सहलाने लगा, उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर डाला और उसकी योनि में ऊँगली डालने लगा। शीना तो बिल्कुल जैसे पागल ही हो गई, वो मस्त होकर सिसकारियाँ लेने लगी और इधर उधर तड़पने लगी।

अब मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैंने धीरे धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए, फ़िर उसकी स्कर्ट और पैंटी एक ही झटके में उतार दी, उसकी योनि देख कर मेरे तन बदन काम वासना से जलने लगा। उसकी योनि पर बहुत हल्के-हल्के सुनहरे बाल थे। फिर में एक भूखे शेर की तरह उसकी चूत को चूसने लगा, उसमें अपनी जीभ डालने लगा, चाटने लगा, काटने लगा, शीना को अपनी जीभ से चोदने लगा। मैंने अपनी आँखें ऊपर करके देखा तो शीना अपने हाथों से अपने स्तन कसकर दबा रही थी और अपनी योनि को उठा उठा कर मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर रही थी।

थोड़ी देर बाद शीना फिर से झड़ गई.....

मैंने उसका सारा पानी चाट लिया और उसकी बुर को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता था, मैंने अपना पूरा खड़ा लण्ड उसकी बूर में डालना चाहा पर जा ही नहीं रहा था, मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं शीना दर्द से चिल्लाने न लगे, आखिर मैंने कस कर एक धक्का मारा और मेरा एक इन्च लण्ड उसकी बूर में चला गया, शीना बहुत जोर से रोने लगी और चिल्लाने लगी, और लण्ड को बाहर निकालने के लिए कहने लगी।

मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होटों को चूसने लगा ताकि वो आवाज़ न करे।

थोड़ी देर मैं उसे चूमता रहा। जब मुझे लगा कि उसका दर्द कम हो गया है तो मैंने एक जोर का झटका फिर से लगा दिया। इस बार तीन इन्च लण्ड उसकी बुर में चला गया।

शीना चिल्लाना चाहती थी पर मैंने उसके होटों को अपने होटों में ले रखा था। इसी तरह 3-4 धक्के लगाने के बाद मेरा पूरा का पूरा लण्ड शीना की बुर में चला गया और उसका बहुत बुरा हाल हो गया, वो बहुत रो रही थी...

फिर कुछ देर के बाद मैंने हिलना शुरु किया और लण्ड आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद शीना भी मेरा साथ देने लगी और उसे भी बहुत मज़ा आने लगा....

15 मिनट तक मैंने शीना को बहुत प्यार से चोदा, उसके बाद मैं एक जानवर बन चुका था और पूरे जोर-शोर से उसकी चुदाई कर रहा था। शीना भी बहुत मस्ती से मुझसे चुद रही थी और बहुत आनन्द ले रही थी, अपनी गांड उठा उठा के मेरे लण्ड को अपनी बुर से खा रही थी।

इस रफ़्तार से मैंने उसे 15 मिनट तक और चोदा इस दौरान शीना तीन बार झड़ चुकी थी। जब मुझे लगा कि मैं आने वाला हूँ तो मैंने शीना से कहा- मैं आ रहा हूँ !

शीना ने भी अपनी गति बढ़ा दी और हम दोनों साथ साथ झड़ गए और मैं थक कर शीना के वक्ष पर सर रख कर उसके उपर लेट गया।

उस रात शीना और मैंने चार बार प्यार किया...

हम लोग आज भी बहुत सेक्स करते हैं...

मुझे और बहुत सी गर्लफ्रेंड मिली और मैंने सबकी बुर की प्यास अपने लण्ड के पानी सी बुझाई।

अगर इस कहानी को पढ़ कर आपके लौड़ों और बुरों से पानी निकला हो या तो मुझे जरुर बताइए।

मुझे मेल करें

ayan.the.satisfaction@gmail.com

अर्चना की चूत

Posted: 17 Feb 2013 09:12 AM PST


दोस्तो, मेरा नाम राज है, मैं हिंदी सेक्सी कहानियां का नियमित पाठक हूँ तो सोचा क्यों न अपनी भी कहानी आपको बताऊँ...

बात आज से एक साल पहले की है, मेरी नौकरी एक प्राइवेट कंपनी में लगी, मुझे टीम लीडर की पोस्ट मिली थी। यूँ तो मैं लड़कियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था मगर वहाँ एक लड़की जॉब पर नई नई लगी थी नाम था अर्चना, काफी सुन्दर थी, मोटे मोटे चूचे, मस्त गांड, देखने में बिलकुल केटरीना कैफ.. कंपनी के सारे लड़के उस पर मरते थे।

अब इसे संजोग कहो या मेरी किस्मत कंपनी के मैनेजर ने उसे मेरे विभाग में ट्रान्सफर कर दिया... वो मेरे विभाग में काम करने लगी...

हालांकि मुझे तो काम से मतलब था तो मैं उसे एक कर्मचारी की तरह से ही देखता था.. लेकिन उसके आ जाने से मेरे विभाग के बाकी कर्मचारी उसके चक्कर में बहकने लगे और लडको में आपस में लड़ाइयाँ होने लगी, जो मुझे पसंद नहीं आया।

मैंने उससे एक दिन यूँ ही बातों बातों में कहा- देखो अर्चना, तुम काफी सुन्दर भी हो मगर तुम्हारे होने से मेरे ऑफिस का माहौल बिगड़ रहा है जो मुझे पसंद नही है, मुझे अच्छा तो नहीं लगेगा मगर तुम्हें यहाँ नौकरी नहीं करनी चाहिए.. यह मेरी निजी राय है। यहाँ के लड़के तुम्हें गलत निगाहों से देखते हैं और न जाने टोइलेट में जाकर क्या क्या करते हैं, मैंने ये सब सुना है।

उसने मेरी ओर गुस्से में देखा और कहा- आप टोइलेट में कुछ नहीं करते मेरे बारे में सोचकर?

मैंने कहा- क्या ???

तो वो मुस्कुरा कर बोली- मैं यहाँ जॉब करने आई हूँ ! मुझे किसी से क्या मतलब है।

यह सुनकर मैं चुप हो गया और अपने काम पर लग गया।

इस बात को दो दिन हो गये थे, हम सब ऑफिस में ही थे कि अचानक तेज बारिश पड़ने लगी.. शाम हो गई मगर बारिश नहीं रुकी। ऑफिस से छुट्टी होने के बाद सबकी तरह मैं भी अपनी बाइक लेकर घर जाने लगा कि अर्चना मेरे पास आई..

बारिश में भीगी हुई वो क्या लग रही थी ! उसका कमीज भीग कर शरीर से चिपक गया था और ब्रा में कैद चूचे साफ़ दिखाई दे रहे थे और ऊपर से टाईट जीन्स ! मैं उसे देखता ही रह गया और वो अपने बारिश में भीगे होंठों से बोली- राज सर, क्या आप मुझे आज घर छोड़ देगे... तेज बारिश हो रही हैं और इस समय बस भी नहीं मिलेगी !

मैंने कहा- और भी तो लड़के आपके घर की तरफ ही तो जा रहे हैं, आप उनके साथ चली जाओ।

वो बोली- नहीं, मुझे उन पर विश्वास नहीं है, घर की जगह कहीं ओर ले गये तो...

मैंने कहा- ठीक है।

और उसे घर छोड़ने के लिए पर लिफ्ट दे दी... वो मुझसे चिपक कर बैठ गई और मेरी धड़कनें तेज होने लगी.. मैं सोचने लगा- काश ! मौका मिल जाये तो इसे चोद दूँगा..

मैंने उसे घर छोड़ा तो वो बोली- सर, ठण्ड बहुत हो रही है, आप काफी पीकर जाना..

ठण्ड ज्यादा थी तो मैं उसे मना नहीं कर पाया..

उसने घर का दरवाजा खोला, मैंने कहा- क्या आप अकेली रहती हो?

वो बोली- नहीं, दीदी और मम्मी दिल्ली गई हैं, एक दो दिन में लौट आयेंगी।

मैंने कहा- तो मैं चलता हूँ.. ऐसे आपके साथ अकेले घर में आना ठीक नहीं !

वो बोली- क्यों? क्या मैं आपका बलात्कार कर दूँगी?

मैंने कहा- लेकिन..

उसने कहा- लेकिन-वेकिन कुछ नहीं, चलो।

मैं अन्दर आ गया...

उसने कहा- मैं कपड़े बदल कर आपके लिए काफी लाती हूँ, आप बैठो..

मैं सोफे पर बैठ गया और सोचने लगा कि काश आज इसकी चूत मिल जाये !

मैं चुपके से उठा और उसके कमरे में झांकना शुरू कर दिया, देखा तो वो अपने कपडे बदलने जा रही थी, उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था।

उसने जैसे ही अपनी कमीज उतारी और ब्रा देखकर तो मैं मदहोश हो गया ! क्या मस्त चूचियाँ थी ! 34" इंच रही होगी। देखते ही मुँह में पानी आ गया, दिमाग गर्म हो गया और लंड खड़ा हो गया।

मैंने झट से दरवाजा खोल दिया और जाकर उसका उसका हाथ पकड़ लिया और बोला- आज तो तुम बिल्कुल जन्नत की हूर लग रही हो।

इतना कहते हुए मैंने उसे अपनी बाहों में भीच लिया।

वो बोली- क्या कर रहे हो? यह गलत है ! मैं शोर मचा दूंगी।

मैंने कहा- कुछ गलत नहीं होता, सब सही है !

और उसकी चूचियाँ दबाने लगा और कस कर चूमने लगा। कुछ देर तक वो ना-नुकुर करती रही फिर उसे भी मज़ा आने लगा और उसकी साँसें तेज़ होने लगी। मैं चूचियों को तेज़ी से मसल रहा था और वो गर्म हो रही थी।

अब उसने भी अपना हाथ मेरी पैंट में डाल दिया था, जैसे ही उसने मेरे लंड को छुआ, मुझे करंट सा लगा और मज़ा आने लगा, मेरा 4 इंच का सिकुड़ा लंड अब 7 इंच का हो चला था और पैंट के अन्दर ही फनफना रहा था !

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और चूचियों को ब्रा की कैद से आज़ाद कर दिया, वो अब काफ़ी बड़ी हो गई थी और कसी थी। अपने जीवन में अब तक इतनी मस्त चूची कभी नहीं देखी थी मैंने !

और अब वो सही समय आ गया था कि मैं उसे वो सुख दूँ जिसके लिए वो इस हद को पार कर गई थी।

मैंने एक चूची को मुँह में ले लिया और वो सिसकारने लगी। उसे पूरा मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उसे अब बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी पैंटी भी उतार दी और एक उंगली उसके चूत में डाल दी। वो और ज्यादा मस्त हो गई और उफ़ उफ़ उफ़ आह आह कर रही थी। वो पूरे चरम पर थी पर मैं धीरज से काम ले रहा था। उसकी चूचियाँ एकदम तन गई और चुचूक कड़े हो गए। अब उससे रहा नहीं जा रहा था और कह रही थी- प्लीज़ ! प्लीज़ !

मैंने अपना 8 इंच का लंड उसके चूत पर धीरे से रखा और हल्का सा जोर दिया, वो उचक पड़ी और बोली- निकालो बाहर ..! मैं मर जाऊँगी !

और उसने रोना शुरू कर दिया।

फिर मै वहीं रुक गया और उसकी चूचियाँ जोर जोर से दबाने लगा जिससे उसका दर्द कम हो जाये।

और अगले ही मिनट दर्द कम हुआ और फिर मैंने एक झटका जोर से दिया और लंड अन्दर जा घुसा, वो चीख पड़ी- उईईईई आआअ मार डाला !

उसके खून बहना शुरु हो गया पर मैंने बाहर नहीं निकाला। दो मिनट के बाद दर्द चला गया। अब उसे मज़ा आने लगा था, वो मदहोश थी। अब मैं ऊपर नीचे कर रहा था।

धीरे धीरे उसने भी साथ देना शुरू कर दिया और हिल हिल कर आह आह करने लगी। उसकी चीखों से पूरा कमरा गूंज उठा !

करीब दस मिनट के बाद मैं अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर ही पड़ा रहा।

फिर मैंने उसकी गांड कैसे मारी, यह मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊँगा..

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल कर के जरूर बताना..

आपका राज अरोड़ा

rajarora028@gmail.com

लच्छेदार झांटों वाली मम्मी की चुदाई

Posted: 17 Feb 2013 08:59 AM PST


हेलो मेरा नाम श्रुति है, मेरी उम्र 18 साल है, वैसे तो कालेज में मेरा नाम प्रज्ञाली सिंह है। मैं हिंदी सेक्सी कहानियां की नियमित पाठिका हूँ। इसीलिये मैंने यह सोचा कि क्यों ना अपनी आप बीती सभी को बताऊँ !

मैं लखनऊ में अपने परिवार के साथ रहती हूँ। मेरे परिवार में पापा दिलीप उम्र 56 साल, मम्मी उमा 38 साल, भाई नीरज 20 साल और मैं एक किराये के मकान में रहते हैं, वहीं उसी मकान में दूसरे कमरे में एक लड़का रानू उम्र 26 साल रहता है, हम उसे चाचा कहते हैं। मेरे पापा भौत सीधे या यों कहें कि बेवकूफ थे, दिन भर पूजापाठ में लगे रहते थे, एक जवान औरत को क्या चाहिए, शायद उन्हें मालूम ही नहीं था।

मेरी मम्मी जवान, खूबसूरत एक सुडौल शरीर की मालकिन हैं, उनके वक्ष 34 के है पर वो 32 नम्बर की ब्रा पहनती हैं, कमर और चूतड़ों का आकार 34-36 है। मेरी मम्मी बहुत हँसमुख हैं।

कुछ दिन पहले की बात है, जब पापा बैंक चले जाते, तब चाचा घर पर आते और टीवी देखते थे। मम्मी उनके लिये चाय बना कर लाती थी। उस समय मम्मी अधिकतर साड़ी और ब्लाउज में चाचा के पास जाती थी और हमेशा अपने ब्लाउज का ऊपर वाला बटन खुला रखती थी, जिससे उनके गोल-गोल चूचे हमेशा सामने झलकते थे और उस पर काले मोतियों का छोटा सा मँगलसूत्र बहुत सेक्सी लगता था।

चाचा एक दिन मम्मी से कह रहे थे- क्या गजब लग रही हो रानी !

और मम्मी इस बात पर मुस्कुरा दी।

इस बात से मैं हैरान रह गई, मुझे पता ही नहीं चला कि दोनों के बीच कब प्यार हो गया, चाचा मम्मी से कह रहे थे- मैं तुमसे प्यार करता हूँ उमा !

मम्मी भी चाचा से कह रही थी- तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो रानू।

एक दिन घर में कोई नहीं था सिवाय मम्मी और मेरे ! तभी चाचा आए और अन्दर वाले कमरे में जाकर मम्मी को बाहों में लेकर चूमने लगे। मैंने यह चुपचाप देख बाहर वाले कमरे से कहा- मम्मी, मैं बगल वाली आँटी के पास जा रही हूँ, थोड़ी देर में आ जाऊँगी।

इतना कह कर मैं बाहर चली आई। फिर कुछ देर बाद मैं दबे पैर अन्दर गई, तो देखा कि चाचा पूरे नन्गे थे और उनके 7" के लण्ड को मम्मी अपने हाथों में लेकर चूस रही थी। एक बार चाचा का 7" लण्ड देखके मेरा भी मन किया कि जाकर उसे चूसूँ पर हिम्मत नहीं की, बस अपनी चूत में उंगली डाल ली। पह्ली बार किसी मर्द का इतना लम्बा और मोटा लण्ड देखा था, बचपन में एक बार नीरज भैया को नंगे देखा था पर तब वो फ़ुन्नी था, अब भैया 20 के हो गये हैं, अब कभी मौका लगा तो उनके लण्ड के दर्शन करुँगी।

धीरे धीरे चाचा ने मम्मी की साड़ी उतार दी, अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी, उनके 34 इन्च के चूचे चाचा खूब जोर जोर से सहला रहे थे, और एकाएक उन्होने उनके बदन से उनका ब्लाउज उतार दिया और उनके चूचों को मुँह में लेकर चूसने लगे।

मम्मी ने चाचा से कहा- और जोर से चूसो मेरे राजा ! मेरी वर्षों से दबी जवानी की गर्मी निकाल दो मेरे राजा !, श्रुति के पापा तो अब बूढ़े हो गये हैं, 18 साल की भरी जवानी में एक 35 साल के मर्द से शादी हो गई थी। कई साल हो गये हैं, गर्मी शान्त कर दो ! चूसो रानू ! जमके चूसो ! ये जवानी के पहाड़ तुम्हारे हैं, चूसो, जमके चूसो !

चाचा काफ़ी देर तक मम्मी के उरोज चूसते रहे, सहलाते रहे फिर मम्मी झुकी और चाचा के लण्ड को चूसने लगी और जोर जोर से मुंह से आगे पीछे करने लगी।

चाचा बोले- और जोर से चूस ! मजा आ रहा है !

मम्मी बोली- हाँ रानू, मजा आ रहा है ! यार कितने दिनो बाद एक कुंवारा लण्ड चूसने को मिला है। कितना मस्त नमकीन सा स्वाद आ रहा है।

यह बात सुन कर मेरे मन में भी ख्याल आया कि काश मैं भी इस स्वाद का मजा ले सकती !

फिर मैंने तय किया कि एक दिन मैं भी चाचा के लण्ड का स्वाद चखूँगी।

15 से 20 मिनट तक मम्मी चाचा का लण्ड चूसती रही और अचानक एक तेज तर्राट पिचकारी चाचा के लण्ड से निकली और चाचा ने उसे मम्मी के मुख पर छोङ दिया, और देखते ही देखते मम्मी वो सफ़ेद क्रीम चट कर गई और बोली- कितने दिनों बाद कुंवारे लण्ड की क्रीम खाने को मिली है मेरे राजा !

चाचा बोले- साली, बुड्ढे की क्रीम का क्या करती थी?

मम्मी ने कहा- बुड्ढे की क्रीम तो शादी के बाद श्रुति और नीरज को पैदा करने में लग गई और जब ये दोनों हो गये तो बुड्ढे का लण्ड खड़ा नहीं होता था तो क्रीम कहाँ से निकलती।

यह सुनकर मैं हैरान हो गई कि मेरे पैदा होने से इस क्रीम का क्या सम्बन्ध, पर यह मैं बाद में समझ गई थी।

फिर चाचा का हाथ मम्मी के पेटीकोट के नाड़े पर गया और उसे भी उनके बदन से अलग कर दिया।

अब मम्मी पूरी नंगी थी चाचा के सामने, चाचा उनकी चूत को हाथों से सहला रहे थे और कह रहे थे- क्या मस्त चूत है ! इतनी गुद्देदार फ़ूली हुई चूत !

उन्होंने पहले कभी फोटो में भी ऐसी चूत नहीं देखी थी जिसमें इतने मस्त लच्छेदार काले बाल हों कह रहे थे- तुम्हारी लच्छेदार झांटों वाली चूत मुझे बहुत पसन्द आई उमा।

यह सुनकर मैंने भी तय किया कि मैं भी अपनी चूत पर लच्छेदार झांटे रखूँगी ताकि चाचा जैसे मर्द मेरी झांटों में फ़ंस जाएँ और मेरी चूत में ही घुसे रहें।

फिर वो मम्मी की चूत में अपनी अंगुली डाल कर अच्छी तरह से आगे-पीछे करने लगे।

10-12 मिनट के बाद मम्मी बोली- अब नही सहा जा रहा है मेरे राजा, चोद डालो इस प्यासी चूत को, फाड़ डालो, मुझे चोदो, जम कर चोदो, आज सारी प्यास बुझा दो, अब देर ना करो, चोद डालो इसे !

चाचा बोले- अभी लो मादरचोद, तेरी चूत की गर्मी निकालता हूँ !

इतना कह कर अपना लण्ड मम्मी की चूत में डाल दिया और तेजी के साथ चोदने लगे।

मम्मी के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी- उई माँअ उम्प्फ़ ! चोदो यार, क्या मस्त चुदाई करते हो, मजा आ रहा है और तेजी के साथ चोदो !

इतने में चाचा ने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज कर दी।

यह सब देख कर मेरे मन में कई सवाल उठे, मैं उनकी बातें सुनकर इतनी मस्त हो गई थी कि मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, मन कर रहा था कि जाकर चाचा के लण्ड पर अभी बैठ जाऊँ और अपनी चूत को भी चुदवा लूँ।

तभी मेरे हाथ लगने से खिड़की में रखी कटोरी गिर गई। मम्मी चुदाई में मस्त थी, उन्हें पता नहीं चला पर चाचा ने मुझे देख लिया पर उन्होंने ऐसे देखा कि कुछ हुआ ही ना हो, और फिर मम्मी की चुदाई में लग गये।

मैं खिड़की के पास से उन्हें देखती रही, चाचा ने 20 मिनट तक जम कर चुदाई की, फिर दहकता हुआ अपना लण्ड मम्मी की चूत से निकाला और मम्मी उसे सहलाने लगी और बोली- हो गया क्या?

चाचा बोले- नहीं उमा डार्लिंग ! अभी तो तुम्हारी गाँड मारनी है।

मम्मी बोली- नहीं उसमें नहीं यार ! दर्द होगा !

चाचा बोले- नहीं उमा डार्लिंग, जब तक कुतिया की तरह से तुम्हारी गाँड नहीं मारूँगा, तब तक मेरा लण्ड झड़ेगा नहीं क्योंकि चूत से ज्यादा गाँड में गर्मी होती है।

इतना कह कर चाचा ने मम्मी को कमर के सहारे पलट दिया, अब मम्मी की गाँड चाचा के लण्ड की ओर थी। चाचा ने लण्ड पर अयूर क्रीम लगाई और लण्ड को मम्मी की गाँड पर रखा और धीरे से धकेलने लगे।

मम्मी चिल्लाई- उई मां ! फाड़ डालेगा क्या? बहुत दर्द हो रहा है रानू !

चाचा ने मम्मी की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और पूरा का पूरा लण्ड मम्मी की गाँड में घुसेड़ दिया।

मम्मी चिल्लाई- उई मां ! गाँड है कोई म्यान नहीं कि पूरी तलवार डाल दी? बहुत दर्द हो रहा है जानू !

मैंने पहली बार गाँड मारने की बात सुनी थी, बस मन ही मन महसूस कर रही थी। चाचा मम्मी की गाँड तेजी के साथ मारने लगे, मम्मी दर्द से चिल्ला रही थी पर चाचा ने कोई ध्यान नहीं दिया, 10 मिनट बाद मम्मी को कस कर पकड़ लिया, शायद चाचा झड़ रहे थे !

तभी मम्मी बोली - सारा माल अन्दर ही मत छोड़ देना !

यह सुनकर चाचा ने अपना लण्ड निकाला, और मम्मी के मुँह में डाल दिया और सफ़ेद क्रीम मम्मी के मुँह में छोड़ दी। मम्मी उसे पूरा चट कर गई और चाचा के सीने में सर रख कर मुस्कराते हुए बोली- रानू, आज तुमने वर्षों की प्यास बुझा दी ! और वादा करो कि मेरा साथ हमेशा निभाओगे और ऐसे ही हमेशा चोदोगे।

चाचा बोले- मैं हमेशा ऐसे ही तुम्हारी चुदाई करूँगा।

यह मेरी सच्ची कहानी थी जो मेरे सामने आई। आपको मेरी कहानी कैसी लगी, अपने विचार जरूर भेजना !

मेरी अगली कहानी का इंतजार करना, मैं अपने साथ हुई सच्ची घटनाओं को ही कहानी के रूप में आपके सामने पेश करूँगी।

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