हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


सावन में चुदाई-2

Posted: 27 Feb 2013 07:58 PM PST


"आह रे, मर जावां रे… विजय, तुझे तो मुझ पर रहम भी नहीं आता?" उसकी सेक्स में बेचैनी उभर रही थी।

"रहम तो आपको नहीं आता है … कभी मौका तो दो…" मेरी सांसे तेज होने लगी थी।

"किस बात का मौका … बोलो ना?" वो तड़प कर बोली।

"आपको चोदने का … हाय मेरा लण्ड तड़प जाता है तुम्हारी चिकनी चूत को चोदने का !" मैंने अपने मन का गुबार निकाल दिया।

"हाय मेरे विजय … फिर से बोलो …" वो मेरी बात सुन कर बहक सी गई।

"आपकी भोसड़ी को चोदने का…" मैंने अपना लहजा बदल दिया।

"हाय, तुम कितने अच्छे हो … फिर से कहो !" वो पत्थर से उतर कर मुझसे चिपकने लगी।

"रश्मि … तुम्हारी गोल मटोल, चिकनी गाण्ड चोदना है !" मेरा लौड़ा तन्ना उठा था।

"मेरे प्यारे, अपना लण्ड चुसा दे मुझे … कितना रस भरा है रे !" वो लौड़ा देख कर मचल सी गई।

वो मेरी बातों से वासना में डूब सी गई। मुझे खड़ा करके मेरा लण्ड अपने मुख में लेकर चूसने लगी। मैं उससे चिपकता जा रहा था। अपनी गाण्ड को धीरे धीरे हिला कर मस्ती ले रहा था।

"साले तू कितना मस्त है … तेरी बातें कितनी प्यारी हैं !" मुंह में लण्ड को लेकर पुचक पुचक करके चूसते हुए बोली।

"रश्मि, अपनी चड्डी नीचे कर दे, अपना लौड़ा तेरी चूत में घुसेड़ दूँ, आह मेरी रानी…" मैंने ठेठ चवन्नी भाषा में बोला। वो मेरी बातों से मस्त हो गई थी। मैंने उसे खड़ी कर दिया और उसके जलते हुए होंठो पर अपने होंठ रख दिए। हम दोनों की आंखे बन्द होने लगी और दोनों के अधर आपस में भिड़ गए। उसने अपनी चड्डी नीचे खींच कर मेरा लण्ड अपनी चूत में रगड़ने लगी।

"आह, भोसड़ी की, मेरी जान निकाल देगी क्या … ?" मेरे मुख से आह निकल पड़ी।

"जान क्या, माल भी निकाल दूंगी … जरा मेरी चूत में इस डण्डे को घुसने तो दे !" रश्मि में अपनी शर्म छोड़ दी।

"साली, चोद चोद कर तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा !" मैंने जोश में कहा।

"सच, उईईई … जरा धीरे से … हां … बस ऐसे ही … कितना मस्त आनन्द आ रहा है, चल जोड़ दे इस डण्डे को मेरी भोसड़ी से !" इसी बात पर रश्मि को चूत में लण्ड घुसने का अहसास हुआ। मेरा लण्ड उसने अपनी चूत में निशाना लगा कर घुसेड़ लिया था। मैंने पास की चट्टान को उसका सहारा बना दिया और जोर लगा कर लण्ड घुसेड़ने लगा। एक तीखा सा, मीठा सा, करारा सा मजा आने लगा। पास में ठण्डा ठण्डा बहता पानी हमारे सुख में वृद्धि कर रहा था। इसी बीच एक जोड़ा हमे काम क्रीड़ा में लिप्त देख कर दूसरी ओर बढ़ गया था।

रश्मि के उरोज उछल उछल कर मेरी कामाग्नि को और बढ़ा रहे थे, उसके दोनों लचकदार नरम और गरम स्तन मेरे हाथों में मचक रहे थे। अब हम एक दूसरे से बुरी तरह लिपटे हुए थे। उसका एक पैर मेरी कमर में लिपटा हुआ था। दो जिस्म एक होने की कोशिश कर रहे थे। नीचे लण्ड से हम दोनों जुड़े हुए एक होने का अहसास दिला रहे थे। हमारी कमर तक बहते हुए पानी में तेजी से चल रही थी। लण्ड चूत पर जोरदार धक्के मार रहा था, प्रतिउत्तर में उसकी चूत भी लण्ड को लपक लपक कर ले रही थी।

"साले विजय, तेरा मोटा लण्ड मेरी तो जान ही निकाल देगा !" रश्मि में मस्ती भरी हुई थी।

"तेरी प्यारी भोसड़ी, आज तो मेरे लण्ड की मां चोद देगी रानी !" मैं भी मस्ती में चूर होता जा रहा था।

"चोद मेरे राजा, दे जोर से, फ़ाड़ दे मेरी फ़ुद्दी को, भेन चोद दे इसकी !" रश्मि ने अपनी फ़ुद्दी जोर से चलाते हुए कहा।

"उफ़्फ़्फ़, साली और दे गालियाँ, भेन की लौड़ी, चुदा ले जी भर के, निकाल ले अपना पूरा रस !" मैं भी पूरी तरह से लय में आ गया था।

"उईईई… चल भोसड़ा बना दे मेरी चूत को, मुझे मार डाल … मैय्या री , चुद गई मैं तो !" उसकी आंखें बन्द थी, शरीर जैसे थर्राने लगा था।

तभी रश्मि ने जोर से सांस भरी और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया, मेरी बाहों में झूल सी गई।

"हाय रे विजय, तुमने तो आज मुझे जीत ही लिया, मुझे मार ही दिया, मेरी तो मां चुद गई रे !" उसने जोर की सांस छोड़ते हुए कहा।

"रश्मि, बस एक दो झटके और … मेरा भी माल भी निकल आएगा।" मेरा शरीर भी अब अकड़ने लगा था। बस मेरा भी माल निकलने को ही था।

रश्मि मुस्कराई और मेरे लण्ड को पानी अन्दर कस कर दबा दिया और जोर से रगड़ दिया। मेरे मुख से एक धीमी सी चीख निकल गई और पानी में वीर्य निकल पड़ा। वो मेरे पूर्ण स्खलित होने तक उसे दबाती रही, रगड़ती रही।

"हो गया ना …" रश्मि में मुस्करा कर पूछा।

"हां हो गया … मजा आ गया रश्मि… मेरी भी आज तो मां चुद गई, भोसड़ी की आप तो मस्त है यार…" मैंने रश्मि की तारीफ़ की।

"अब चुप … देखो बीस पच्चीस मिनट हो गए है … अब चले…" अब वो होश में आ चुकी थी।

हम दोनों चट्टान की आड़ से बाहर निकले, यहां वहां सतर्कता से देखा। एक जोड़ा हमें पास में ही नजर आ गया, यह वही जोड़ा था जो हमे देख कर आगे बढ़ गया था। उस जोड़े ने मर्द और युवती दोनों ने मुस्करा कर हमें हाथ हिला कर अभिवादन किया। हमने भी उसे हाथ हिला कर अभिवादन किया। वो दोनों फिर से काम क्रीड़ा में मग्न हो गए। हमने अपने गीले कपड़े किनारे आ कर बदल लिए और वैन की तरफ़ चल दिए। कमलेश दारू के नशे में सो रहा था।

हमने उसे उठाया और खाना लगा दिया। हम दोनों शाम तक यूँ ही मस्ती करते रहे पर दूसरी बार चुदाई नहीं कर पाए। कमलेश को भी पानी में खेलना अच्छा लगा। संध्या होते होते हम घर लौटने की तैयारी करने लगे। घर पहुँचते ही उसने मोबाईल की तरफ़ इशारा किया। रश्मि ने कमलेश को दो पेग और पिलाया और डिनर में दिन का बनाया हुआ खाना लगा दिया।

ट्यूशन के बहाने चुदाई

Posted: 27 Feb 2013 07:31 PM PST


मेरा नाम रोहित है। बात उस समय की है जब मैं 18 साल का था, स्कूल में नया दाखिला लिया था, मैं बहुत खुश था।

मेरे स्कूल में एक मैडम थी जिसका नाम लीना था, उसकी अभी अभी नई शादी हुई थी, वो देखने में बहुत सुन्दर थी और उसका फिगर 34-28-36 था।

जब वो चलती थी तो सबके लौड़े उसके चूतड़ों को देख कर सलामी देने लगते थे।

उसका पति एक डॉक्टर था, जो घर से दूर जॉब करता था। मैं तो उस पर मिटा था। मैं जब उसे देखता तो मेरा मन उसे चोदने को करता था। पर मैं क्या करता। जब वो हमें केमिस्ट्री पढ़ाने आती तो मैं उसे देखता रहता, वो मेरे अन्तर्मन की भावनाओं को समझने लगी थी।

एक दिन वो हमारी लैब ले रही थी। उस दौरान जब वो पढ़ाते हुए पीछे आ रही थी तो मैं जानबूझ कर उसके साथ पीछे से चिपक गया जिसके कारण मेरा लौड़ा जो करीब 7 इंच का था उसकी गाण्ड में धंस गया, जिससे वो घबरा कर एकदम हट गई और मुझे घूर कर देखने लगी। मैं डर गया कि अब यह मुझे डांटगी। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं और वो वहाँ से चली गई।

मुझे पता लग गया कि इससे उसे भी थोड़ा मज़ा आया है क्यूंकि उसका पति काफी दिनों बाद उससे मिलने आता जिसके कारण उस में भी सेक्स की भूख जगती होगी। मैंने फैसला कर लिया कि मैं इसे चोद कर ही रहूँगा।

तो मैंने एक योजना बनाई जिससे मैं उसे आसानी से चोद सकूँ। मैंने उससे टयूशन पढ़ने का बहाना लगाया और वो मान गई।

मैं बड़ा खुश हुआ कि मैंने एक किला तो फतह कर लिया है, बाकी की बाद में देखी जायेगी।

मैं उसके घर पढ़ने पहुँचा। वो बहुत ही सुन्दर नजर आ रही थी, मन तो कर रहा था कि उसे वहीं पकड़ कर चोद डालूं लेकिन हिम्मत नहीं पड़ रही थी, इसलिए मैंने जल्दबाजी ना करने की सोची।

मुझे देख कर वो बहुत खुश हुई और मुझे बैठने के लिए बोला। मैं उसे सब्जेक्ट की प्रोब्लम बताने लगा।

जब वो पढ़ा रही थी तो मैं बस उसे ही देख रहा था जिसका उसे पता लग गया था।

वो मुझे पूछने लगी- क्या रोहित, ऐसे क्यूँ देख रहे हो?

तो मैंने कहा- मैडम, मैं देख रहा था कि आप बहुत सुन्दर हो ! मन करता है कि आपको देखता ही रहूँ।

ना जाने मुझमें इतनी हिम्मत कहाँ से आ गई थी।

मैं डर गया कि कहीं मैडम बुरा ना मान जाए लेकिन हुआ इसका उल्टा ! वो मुस्कुराने लगी और चाय बनाने के लिए कह कर वहाँ से चली गई।

मैंने ज़िन्दगी में इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था। लेकिन ना जाने उस दिन इतनी इच्छा कहाँ से जाग गई थी।

जब वो जा रही थी तो मैं उसके चूतड़ों को हिलते हुए देख रहा था और मेरा लौड़ा एकदम तयार हो गया था उसकी चूत चोदने के लिए लेकिन मैंने जैसे तैसे खुद पर काबू किया।

मैडम चाय बना कर लाई और हम चाय पीने लगे।

चाय पीते पीते मैं उसके शरीर को देख रहा और सोच रहा कि काश ऐसी चूत मुझे चोदने को मिल जाती तो मौजाँ ही मौजाँ हो जाती।

शाम के सात बज गए थे और हमें पढ़ते पढ़ते दो घंटे हो गए थे, मैं मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं इसे चोदने का मौका मिलेगा या नहीं लेकिन शायद भगवान् भी यही चाहता था।

मैं जैसे ही अपने घर के लिए जा रहा था, तभी उस समय बारिश शुरु हो गई। बारिश बहुत जोर से लगी थी जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।

मेरा घर मैडम के घर से काफी दूर था इसलिए मुझे बस पकड़ कर जाना था लेकिन बारिश की वजह से मैं लेट हो रहा था।

मैडम ने कहा- अगर बारिश नहीं रूकती तो तुम आज यहीं रुक जाओ, कल चले जाना।

मैंने उनका प्रस्ताव एकदम मान लिया और वहीं उनके घर रूक गया। मैं बहुत खुश था कि आज मौका है आज मैडम को चोदने का।

मुझे सर दर्द होने लगा था तो मैंने मैडम सर दर्द की दवाई मांगी, मैडम ने मुझे दवाई दी और मैं दवाई खाकर लेट गया।

मैडम थोड़ी देर में खाना लेकर आई और खाना खाकर हम दोनों टीवी देखने लगे। मैडम घर मे अकेली थी और हम मैडम के कमरे में ही बैठे थे।

9 बजे टीवी देखते देखते मुझे नींद आ रही थी, मैं सोच रहा था कि सरदर्द भी आज ही होना था जब इतना अच्छा मौका हाथ से चला जा रहा था।

रात के करीब 11 बजे थे जब मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि मैडम बिस्तर पर मेरे ही बगल में सोई हैं। मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ने लगी और मैंने सोचा कि अब नहीं तो कभी नहीं।

और मैंने धीरे-धीरे अपना काम करना चालू कर दिया, मुझे डर बहुत लग रहा था लेकिन मैंने फिर भी ठान ली कि मैं आज यह मौका नहीं गवाऊँगा।

मैं धीरे से मैडम की रजाई में घुस गया। मैंने अपना लौड़ा निकाला जो एकदम लोहे की तरह सख्त हो गया था। मेरा लौड़ा ढाई इंच मोटा है।

मैंने लौड़ा निकल कर मैडम के चूतड़ों की दरार में घुसेड़ दिया और देखने लगा कि मैडम की इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है। लेकिन शायद मैडम गहरी नींद में थी या फिर नाटक कर रही थी।

पर क्या गाण्ड थी, एकदम मुलायम ! मैं तो सातवें आसमान पर पहुँच गया था। फिर मैंने मैडम की चूचियाँ पकड़ ली और उन्हें मसलने लगा और थोड़ी देर बाद चूचियाँ एकदम सख्त हो गई।

मैडम थोड़ा पीछे होकर मेरे लौड़े को और अंदर अपनी गाण्ड में धंसवाने लगी। मैं समझ गया कि मैडम जागी हुई हैं।

और कुछ ही देर में मैडम ने मेरा लौड़ा पकड़ लिया। इशारा मिलते ही, क्यूंकि मैं एकदम गर्म था, मैंने फटाफट काम निपटाने की सोची और मैडम की सलवार खोल कर उनकी चूत में अपना लौड़ा डालने के लिए उन पर सवार होने लगा लेकिन मैं इस खेल में अनाड़ी था, मेरा लौड़ा चूत का रास्ता ढूंढ नहीं पाया।

फिर मैडम ने अपने हाथ में मेरा लौड़ा लेकर अपनी चूत के मुँह पर रखा और मैंने बिना कुछ सोचे लौड़ा चूत में धकेल दिया और लौड़ा चूत को चीरता हुआ जड़ तक जा पहुँचा। मैडम के मुँह से चीख निकल गई, चूत काफी तंग थी, लगता था मैडम के पति ने उसे बहुत कम चोदा था।

फिर मैं जोर जोर के झटके देने शुरू हो गया, मैडम ने मेरे कान में कहा- धीरे करो ! दर्द हो रहा है।

लेकिन मैं नहीं रूका और पाँच मिनट में अपना वीर्य उनकी चूत में छोड़ कर उन पर गिर गया। वो अभी झड़ी नहीं थी।

फिर उन्होंने कहा- तुम अभी इस खेल में अनाड़ी हो, मैं तुम्हें सिखाती हूँ कि किसी औरत को कैसे संतुष्ट किया जाता है।

फिर उन्होंने मुझे उनकी चूचियाँ चूसने को कहा और उनकी चूत चाटने को कहा।

मैंने वो सब कुछ किया जो उन्होंने मुझे कहा लेकिन मैंने शर्त रखी कि मैं यह सब रोशनी में ही करूंगा, जो उन्होंने मान ली।

मैंने जैसे ही बत्ती जलाई, तो मैं उस अप्सरा का जिस्म देख कर पागल सा हो गया।

एकदम गोरा जिस्म और चूत पर एक भी बाल नहीं। मैं उनकी चूचियों पर टूट पड़ा और 15 मिनट उनकी चूचियाँ चूसने के बाद उनकी चूत चाटने लगा। वो भी मेरे लौड़े को चूस कर खड़ा करने में लग गई और आधे घंटे में हम दोनों फिर अगले दौर के लिए तैयार हो गए थे।

फिर मैडम ने कहा कि अब उनसे सहन नहीं होता और मैं उन्हें चोदना शुरू करूँ।

और उन्होंने मुझे अच्छा और लम्बे समय तक सेक्स करने का तरीका भी बताया।

उन्होंने कहा कि मेरा लौड़ा बहुत लम्बा और मोटा है मेरी उम्र के हिसाब से ! जिसे सुन मैं बहुत खुश हुआ।

हमारा अगला दौर 15 मिनट तक चला और मैडम उस बीच दो बार झड़ चुकी थी। मैडम की चूत इतनी कसी थी कि मेरे लौड़े को अन्दर कस कर जकड़ ले रही थी जिससे मेरा लौड़ा और भी फूल गया था और मैं जोरदार झटके दे रहा था जिससे मैडम तकलीफ हो रही थी लेकिन बाद में मैडम गाण्ड उछाल कर जोर से चोदने के लिए कह रही थी।मैडम के कहने पर उस रात हमने कई बार सेक्स किया।

मैडम से सुबह उठ कर ढंग से चला भी नहीं जा रहा था। मैंने मैडम को घर में नंगा ही घूमने को कहा और मैडम ने वैसा ही किया। सुबह जब मैडम नहा धोकर चाय बनाने लगी तो मैं उनकी मटकती गाण्ड देख कर खुद संभल नहीं पाया और किचन में उन्हें घोड़ी बनाकर पीछे से चोद डाला।

मैडम ने बताया कि उनके पति के जाने के बाद वो सेक्स के लिए बहुत प्यासी थी और उस दिन लैब मैं मेरी हरकत ने उन्हें और भी उतावला कर दिया था।

इसके बाद रोज ही हम ट्यूशन के बहाने चुदाई करने लगे। सारे स्कूल के दोस्तों को मुझ पर और मैडम पर शक हो गया क्यूंकि मैडम ने मेरे अलावा किसी और को ट्यूशन पढ़ाने से मना कर दिया।

हम दोनों में सम्बन्ध को अभी तीन ही महीने हुए थे कि मैडम ने मुझे बताया कि वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है जिसे सुन कर मैं बहुत खुश हुआ, परेशान भी हुआ कि कहीं किसी को शक ना हो जाए। लेकिन मेरी परेशानी देख मैडम ने मुझसे कहा कि वो किसी तरह अपनी पति से चुदवा लेंगी और किसी शक भी नहीं होगा।

ठीक 9 महीने बाद मैडम ने एक सुन्दर लड़के को पैदा किया और वो बिल्कुल मेरी तरह था।हम दोनों बहुत खुश हुए।

अगले एक साल तक हम चुदाई करते रहे। फिर मैडम का तबादला हो गया और वो मुझे छोड़ कर चली गई।

लेकिन उनके जाने के 20 दिन बाद मुझे मैडम का फ़ोन का फ़ोन आया कि वो फिर से माँ बनने वाली हैं। और उन्हें दूसरी बार लड़की हुई।

मैडम से सीखे तजुर्बे से मैंने बहुत सी भाभियों और कॉलेज की लड़कियों को चोदा। लेकिन किसी ने मुझे मैडम जैसा मजा नहीं दिया।

वो मैं अगली कहानी में बताऊँगा।

आपका प्यारा रोहित

trivium_katoch@yahoo.com

होली में भाभी को चोदा

Posted: 27 Feb 2013 06:48 PM PST


आपने मेरी पहली सच्ची कहानी पढ़ी होगी जिसमे मैंने पहली बार अपनी चाची की चुदाई की थी उसके बाद पिछले 13 सालों से उसे चोदता आ रहा हूँ,जिसके वजह से मुझे सेक्स की आदत ही पड़ गई यानि मैं पूरा चुदक्कड़ बन गया !

उसके बाद मैं जिसे भी देखता उसको चोदने के बारे में ही सोचता ! वैसे हमारा खानदान बड़ा होने की वजह से मेरी करीब 14 भाभियाँ थी और तीन सेक्सी चाचियाँ भी थी। वैसे सभी एक नंबर की माल थी और मैं सभी को चोदने के तरीके ढूंढ रहा था लेकिन कोई हाथ नहीं आ रही थी। मैंने मेरी चाची को जैसे चोदा था (रात को साथ में सोने के बाद गर्म करके चोदने का तरीका) वही तरीका मुझे बेहद पसंद है लेकिन वो मौका मुझे इनके साथ मिल नहीं रहा था, अब नया तरीका सोच रहा था !

साल 2004 में मैं अमरावती में जॉब करता था लेकिन कोई भी ऐसा त्यौहार नहीं रहा कि मैं गाँव में नहीं जाता था।

ऐसे ही मैं होली के त्यौहार के लिए गाँव गया हुआ था। रंगपंचमी की दिन सुबह उठा और मुँह-हाथ धोकर दोस्तों के साथ खेत में दारू पीने और रंग खेलने चले गया। दारू पीने के बाद धीरे धीरे नशा बढ़ने लगा और बातों बातों में दोस्तों ने चुदाई के किस्से सुनाने चालू किये जिससे मेरा लंड खड़ा होने लगा और मेरे दिमाग में चाची को चोदने की इच्छा हुई और वहाँ से उठ कर मैं वापस घर आ गया।

मैं चाची के यहाँ गया और चाची को चूमने लगा तो उसने बोला- अभी नहीं, घर पर सब लोग हैं, रात को जितनी मर्जी, उतना चोद लेना !

और मुझे उसने बाहर जाने के लिए बोला।

मैं बाहर तो निकल गया लेकिन मेरा लंड अभी भी तना हुआ था,बार-बार मुझे चोदने की इच्छा हो रही थी !

मैं चुपचाप ऐसे ही बैठा हुआ था कि मेरे दिमाग में भाभियों को रंग लगाने की बात आ गई और मैं उठ कर एक-एक करके सबको रंग लगाने निकला ! अभी तक मेरा लंड वैसे ही हिचकोले मार रहा था।

मैंने सोचा कि रंग लगाने के बहाने से भाभियों को छूने का मौका तो मिल ही जायेगा और मैंने एक-एक के घर में जाकर रंग लगाना चालू किया। उस समय हर किसी के घर में कोई न कोई मौजूद था जैसे किसी का पति तो किसी के सास-ससुर और यह देख के मेरा दिमाग और ज्यादा ख़राब हो रहा था क्योकि मेरे लंड को ठंडक नहीं मिल रही थी।

अब मैं अपने चचेरे भाई के यहाँ जा रहा था उसकी अभी तीन महीने पहले शादी हुई थी, उसकी बीवी यानि मेरी भाभी का नाम अरुणा था वो दिखने में थोड़ी सांवली थी मगर बदन को देखा तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाये। उसका बदन 34-30-36 था, उसके चूचे तो दीवाना कर देते थे वैसे ही जब से उनकी शादी हुई थी तब से ही मैं उसको चोदने के लिए बेताब था।

उनके घर में उन दोनों के शिवाय कोई नहीं रहता था क्योंकि मेरे भाई के माता-पिता का देहांत हो चुका था। मैं अभी भी नशे में था लेकिन होश में था और यही सोच कर उसके घर जा रहा था आज मेरा भाई घर में न हो। मैं उनके घर के दरवाजे पर पहुँचा और सीधा अन्दर चले गया तब भाभी खाना बना रही थी। वो मुझे देखते ही समझ गई कि मैं उनको रंग लगाने के लिए आया हूँ।

भाभी बोली- अरे देवर जी, आप कब आये अमरावती से?

मैं बोला- कल शाम को आया भाभी ! अभी मैं आपको रंग लगाने आया हूँ।

वो बोली- मैं समझ गई थी कि आप होली खेलने के लिए आये हो लेकिन थोड़ा रुको, मुझे सब्जी का तड़का लगाने दो।

मैंने उनसे मेरे भाई के बारे पूछा तो वो बोली- आज कंपनी में काम होने की वजह से वो ड्यूटी पर गए हैं, शाम को 6 बजे आयेंगे।

वैसे ही मेरे दिमाग में ख्याल आया कि आज भाभी को तो चोदने का अच्छा मौका मिल गया है। देखते ही मेरा लंड फिर से तन गया और मेरे बरमुडे से बाहर निकलने लगा।

आज वैसे भी मैं बेफिक्र था क्योंकि अगर भाभी को बुरा लगा तो परिवार वालों को लगेगा कि दारू के नशे में रंग लगते वक़्त गलती से हाथ लग गया होगा।

उनके घर में दो कमरे थे, एक में मैं खड़ा था और दूसरे में वो खाना बना रही थी, उसी कमरे में उनका बेड भी था।

अब मैं उनके अन्दर के कमरे में चले गया और बेड पर बैठा उनके वक्ष को घूर रहा था।

क्या हसीन नजारा था, दो उभारों के बीच में पूरी खाई दिख रही थी। उसने लाल साड़ी और काला ब्लाऊज पहना था।

मैं धीरे धीरे अपने लंड को दबा रहा था, उतने में उनका ध्यान मेरी तरफ गया और मैंने फटाक से अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया। उन्होंने ये सब देख लिया और अनदेखा करके सब्जी बनाने लगी।

वो मेरे से तीन साल से छोटी थी लेकिन रिश्ते में भाभी होने की वजह से मैं उनको आप आप कहता था।

फिर 5 मिनट के बाद वो वहाँ से उठी बोली- अब आप रंग लगा लो।

मैं उनके पास गया और पीछे से दोनों हाथों से उनके चेहरे पर रंग लगाना चालू किया।

अभी मैं उनके शरीर से दूर ही था, धीरे से मैंने अपना लंड उनके गांड से चिपकाया और जोर जोर से उनको रंग लगाना चालू किया जिससे उसको लंड के धक्के समझ में नहीं आ रहे थे।

मेरा दिमाग दूर का सोच रहा था कि अब समय बर्बाद करने में मतलब नहीं और ऐसा मौका शायद मिले।

मैं अपना मुँह नीचे करके उनके गर्दन के पास लाया और अपने होठों से उसको चूमने लगा तो वो एकदम चकरा गई कि यह क्या हो रहा है।

वो बोलने लगी- देवर जी बस हो गया रंग लगाना, अब छोड़ो !

लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था, मैंने फिर से कस कर उनको पकड़ लिया और गर्दन और पीठ की चूमना चालू किया। साथ में पीछे से लंड भी गांड को ठोक रहा था !

अब मैंने उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया जिससे उसका ब्लाउज पूरा खुला हो गया। वो ना-नुकुर करने लगी...प्लीज छोड़ो ना... कोई आ जायेगा...प्लीज...

मैं यह सुनते ही समझ गया कि भाभी को यह सब अच्छा लग रहा है लेकिन वो डर रही है।

मैंने उनकी बातों को अनसुना करके अपने दोनों हाथों से ब्लाऊज के ऊपर से स्तन दबाना शुरु किया।

वाह ! क्या सख्त चूचे थे.... बहुत अच्छा लग रहा था ! अभी तक मैंने सिर्फ अपने चाची के ही चूचे दबाये थे जो बहुत ही नर्म थे !

अब मैं जोर जोर से स्तन दबा रहा था। वैसे ही भाभी की आवाज तेज हो रही थी वो सिसकारियाँ मार रही थी उसकी धड़कन भी तेज हो गई थी...आ...आ...हु...हु...आह्ह्ह.. ह्ह्ह....

अब मुझे पूरा यकीन हो गया था कि अब भाभी गरम हो गई है। मैंने उनका हाथ पीछे लेकर अपने लंड पर रख दिया अब वो मेरा लंड सहला रही थी और बीच-बीच में दबा भी रही थी।

और मैं दोनों हाथों से उसके स्तन दबा रहा था !

मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरु किया और खोलते ही उनकी काली ब्रा दिखने लगी, मैंने ब्रा के ऊपर से दबाना चालू रखा।

भाभी बोली- देवर जी, जो भी करना है कर लो लेकिन दरवाजा तो बंद करो !

और मैं उनको छोड़ कर दरवाजा बंद करने गया।

दरवाजा बंद करने के बाद मैंने उनकी पूरी साड़ी उतार दी और अपना बरमूडा भी उतार दिया। अब मेरे शरीर पर चड्डी और शर्ट के शिवाय कुछ नहीं था और उसके शरीर पर सिर्फ ब्रा, चड्डी और पेटीकोट ही था !

हम दोनों ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया और होठों को चूमना शुरु किया, साथ साथ में मैं उसकी गर्दन की भी पप्पी ले रहा था।

मुझे मालूम है कि औरत के गर्दन के पास चूमा तो वो जल्दी गर्म होती है ऐसा मुझे मेरी चाची ने बताया था।

मैंने अपने हाथों से उसके ब्रा के हुक भी खोल दिए और उसे निकाल कर बेड पर फेंक दिया ! ब्रा खोलते ही उसके बड़े बड़े चूचे मेरे सीने से चिपक गए। मैंने उसको थोड़ा सा दूर किया और हाथों से उनको दबाना चालू किया। उसकी निप्पल बहुत ही छोटी और गुलाबी रंग की थी !

उसने भी अपना एक हाथ मेरे चड्डी में डाल दिया और मेरे 6" के लंड को सहलाने लगी। थोड़ी देर मसलने के बाद मैंने उसकी एक एक करके दोनों चूचियों को मुंह से चुसना चालू किया, मैं जैसे जैसे चूसता वैसे वैसे वो मेरा लंड और जोरों से दबाती।

अब हम दोनों बिस्तर पर चले गए और 69 की अवस्था में हो गए। मैंने उनका पेटीकोट पूरा ऊपर कर लिया और उनके पैरों को चूमने लगा ! वो भी मेरे पैरों को चूमने लगी। पैर चूमते चूमते अब मैं उसकी चूत तक पहुँच गया, उस पर सिर्फ चड्डी ही थी। मैंने चड्डी के ऊपर से उसकी चूत सहलानी शुरु किया तो वो अपने पाँव खींचने लगी।

मैंने जबरदस्ती से उसके दोनों पावों को फैला कर उसके चूत को अपने मुँह से चूमना शुरु किया तो वो अपने हाथों से मुझे धकेलने लगी।

अब मैंने उसकी चड्डी को नीचे सरकाना शुरु किया और कुछ ही सेकंडों में उसकी चूत को पूरा खुला कर दिया।

क्या चूत थी भाभी की ! एक भी बाल नहीं था, पूरी चिकनी चूत थी !

उसी अवस्था में मैं उसके शरीर के ऊपर हो गया और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने की कोशिश करने लगा, चूत गीली हो गई थी !

वो भी मेरा लंड चड्डी से ही हिला रही थी, मैं जैसे जैसे उसकी चूत चाट रहा था, वैसे वैसे उसकी आवाज में बदल हो रहा था।

वो बोलने लगी- प्लीज... ऐसा मत करो... गुदगुदी हो रही है !

मैंने उसको बोला- भाभी आप भी मेरा लंड चूसो ना !

वो बोली- नहीं बाबा, मुझे यह सब गन्दा लगता है।

लेकिन मेरी विनती से उसने चड्डी से ही मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।अब मैंने एक उंगली उसके चूत में डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा। उसकी चूत बड़ी कसी थी लेकिन गीली होने की वजह से उंगली आराम से जा रही थी। कुछ देर अन्दर-बाहर करने के बाद उसकी सिसकारियाँ बढ़ने लगी।

उसने मेरी चड्डी उतार दी और मेरा लंड देखते ही वो खुश हो गई, बोली- आपका लंड तो बहुत ही बड़ा है, आपके भाई तो इससे भी छोटा और पतला है !

उसने अपने पेटीकोट से मेरा लंड पौंछा और उसे चूमना शुरु किया।

धीरे धीरे उसकी इच्छा उसे चाटने की भी हुई लेकिन वो थोड़ा ही चाट पाई !

इधर मैं जोर-जोर से उंगली अन्दर बाहर कर रहा था ! अब उसको सहन नहीं हो रहा था तो वो बोली- अब जल्दी से इसे मेरी चूत में डाल दो नहीं तो अगर कोई घर पर आ गया तो मेरी चूत ऐसे ही प्यासी रह जाएगी !

मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझा और उसे चोदने का मन बना लिया। शायद कोई आता तो मेरा भी लंड प्यासा का प्यासा ही रहता !

मुझे चाची के साथ सेक्स करते करते बहुत सारे आसन मालूम थे फिर भी मैंने भाभी को पूछा- आपको कौन से आसन में चुदवाना पसंद है?

तो वो बोली- आप जिसमें चोदोगे वो चलेगा बस अब चोदना चालू करो !

और मैंने उनको अपने ऊपर लेकर अपने लंड पर उसकी चूत को रखा और एक झटके के साथ उसे नीचे अपने लंड पर दबाया तो वो चिल्ला उठी- वोह्ह्ह्ह....वोह्ह्ह....बहुत दर्द हो रहा है ...

वो तड़फ रही थी- प्लीज निकालो बाहर ! नहीं तो मेरी चूत फट जाएगी।

लेकिन मैंने उसे पकड़ कर रखा था, अभी भी मेरा लंड उसकी चूत में था, कुछ सेकंड रुकने के बाद मैंने उसे अपने सीने पर झुका लिया और लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसको थोड़ा-थोड़ा दर्द हो रहा था। लेकिन उसे आनन्द भी आ रहा था, साथ में उसके होठों को भी चूम रहा था। फिर धीरे धीरे मैंने स्पीड भी बढाई और जोर-जोर से चोदने लगा।

अब वो भी अपनी गांड हिलाने लगी और अन्दर-बाहर करने लगी। ऐसा हमने करीब 5 मिनट किया।

उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा 6" का लंड उसकी चूत में डाल दिया।

वैसे ही वो चिल्ला उठी- अरे बाप रे ....मार डालोगे क्या?

अब मैंने धीरे धीरे अन्दर-बाहर करना शुरु किया, अपने दोनों हाथों से उसके स्तन दबाना भी चालू रखा। इतने में वो झड़ गई। अब मुझे भी लग रहा था कि मैं जल्दी झड़ जाऊँगा तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और तुरंत दो मिनट के बाद मैं भी झड़ गया और अपना पूरा पानी भाभी की चूत में छोड़ दिया।

अब भाभी के चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी। हमने अपने अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया।

मैंने भाभी को बताया- मैं दस दिनों की छुट्टियों पर आया हूँ !

उसने भी मुझे बताया की मेरे भाई की अगले 7 दिन नाईट ड्यूटी है !

हमने तय किया कि रोज रात को 11 से सुबह के 4 बजे तक यही रासलीलायें खेलेंगे और एक चुम्बन के साथ मैं वहाँ से निकल गया।

अगले 7 दिन मैं ऐसे ही भाभी को चोदता रहा रोज रात को हम 3-4 बार सेक्स करते रहे और १० दिन के बाद मैं फिर से अपने ड्यूटी पर चला गया। भाभी को चोदने की बात सिर्फ मेरी चाची को ही मालूम है।

कुछ दिन के बाद भाभी का एक दिन फ़ोन आया कि वो माँ बनने वाली है, उसको 2005 में जनवरी में लड़की हुई।

अब कभी कभी जब मैं गाँव को जाता हूँ तो मौका मिलते ही भाभी को चोदे बगेर रहता नहीं !

अब उसको मेरा लंड चूसने से परहेज नहीं है और बड़े प्यार से पूरा लंड मुँह में लेकर चूसती है !

raj230180@gmail.com

सावन में चुदाई-1

Posted: 27 Feb 2013 06:37 PM PST


मेरी उम्र 24 वर्ष की हो चली थी। मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। अब तक की जिन्दगी में मैंने बस एक बार गाण्ड मरवाई थी और हाँ, उसी लड़के की मारी भी थी। पर लड़कियाँ मुझसे कभी नहीं पटी थी। यूँ तो मैं देखने में गोरा चिट्टा था, चिकना था, सुन्दर था, खेल में सबसे आगे रहता था, छः फ़ीट लम्बा युवक था। पर मेरी किस्मत … मेरे भाग्य में कोई भी ऐसी लड़की नहीं थी जिसे चोद सका। बस मैं अपने लण्ड के साथ बलात्कार करता रहता था। समय असमय बस जब भी लण्ड ने जोर मारा, साले को रगड़ कर चुप करा देता था। फिर मेरी किस्मत जागी, पर मिली भी तो मुझे अपनी पढ़ाई समाप्त करने के बाद, वो भी एक शादीशुदा महिला थी।

तब रश्मि कोई 26-27 वर्ष की रही होगी, नई नई शादी हुई थी, दिखने में सुन्दर है, शरीर के उभार आकर्षक हैं। मेरी उस छोटे से परिवार से बहुत बनती थी। उसका पति कमलेश एक सरकारी कार्यालय में अधिकारी था। वो बहुत खुश मिज़ाज़ किस्म का युवक था। यदि बाज़ार का कोई काम होता था तो वो अक्सर मुझसे कहता था कि यार तू अपनी भाभी को लेजा और शॉपिंग करवा ला।

रश्मि यह सुन कर खुश हो जाया करती थी। उसे मेरा साथ बहुत अच्छा लगता था। मेरी दिल की कलियाँ भी चटकने लगती थी। मेरी नजरें रश्मि के अंगों को घूरते हुये उसमें घुस सी जाती थी, रश्मि भी मेरी नजरों को पहचानने लग गई थी। शायद उसके मन में भी लड्डू फ़ूट रहे होंगे ! वो मुझे मतलबी नजरों से निहारती रहती थी, पर कहती कुछ भी नहीं थी।

बरसात के दिन थे, मौसम बहुत सुहाना हो चला था। रविवार के रोज रश्मि ने पिकनिक पर जाने की जिद कर दी। कमलेश बहुत ही सुस्त किस्म का था, छुट्टी के दिन उसे बस सोना पसन्द था। पर स्त्री-हठ के आगे किसकी चलती है, हम लोग खाना पैक करके एक बांध की तरफ़ चल दिये। गाड़ी मैं ड्राईव कर रहा था। कमलेश मारुति वैन में पीछे लेट गया था। रश्मि मेरे साथ आगे की सीट पर थी। कमलेश को सोया देख कर रश्मि शरारत के मूड में आ गई थी। वो मेरी जांघ पर हाथ मार मार कर हंसी ठिठोली करने लगी थी। मुझे उसकी हरकत से न जाने कैसा सरूर सा आने लगा था। मैंने एक बार तो उसका हाथ हटाया भी था, पर वो कहाँ मानने वाली थी। मेरे तन में सनसनी सी फ़ैल गई थी।

पिकनिक स्थल तक पहुंचते पहुंचते तो वो मेरी जांघ तक दबाने लगी थी। मेरे लण्ड के उठान को देख कर वो मन ही मन हर्षित भी हो रही थी। रश्मि की तड़प देख कर मैं भी खिल उठा था।

मैंने वैन को एक वृक्ष के नीचे खड़ा कर दिया। वैन के अन्दर ही रश्मि ने चाय निकाली। कमलेश ने चाय पीने को मना कर दिया और उसने अपनी व्हिस्की की बोतल निकाल ली। मुझसे पूछने पर मैंने मना कर दिया। एक दो पेग पीने के बाद वो तो नशे में खो गया। हमने उसे बहुत कहा कि चलो झरने के बहाव में पानी में खेलें। पर कमलेश ने मना कर दिया।

हमने अपने कपड़े लिये और पानी के बहाव की ओर चल दिये। वहीं पर दूर दो तीन जोड़े और भी थे जो पानी में अठखेलियाँ कर रहे थे।

"चलो पानी में खेलते हैं … अपने कपड़े उतार लो और चड्डी में आ जाओ !" रश्मि मेरी तरफ़ देख कर मुस्कराती हुई बोली।

"और आप रश्मि जी… ?" मैंने कपड़े उतारते हुये कहा।

"मैं तो बस ऐसे ही पानी में खेलूंगी।"

"यहाँ कौन देखने वाला है, तुम्हारे साहब तो नशे में टुन्न है, और वो लोग तो बहुत दूर हैं।"

"तुम तो हो ना … "

"मेरा क्या? मैं कोई गैर हूँ क्या?" मैंने मुस्कुरा कर कहा।

मेरी बात सुन कर वो जोर से हंस पड़ी।

"चल शैतान कहीं का !"

मेरे कपड़े उतारने पर चड्डी में मेरे तम्बू जैसे खड़े लण्ड को देख कर वो तो जैसे मन्त्र मुग्ध सी हो गई। फिर शरमा गई। उसने भी अपने कपड़े उतार लिये, ब्रा और एक छोटी सी पेन्टी में आ गई, कपड़े उतारते ही वो पानी में उतर गई और कमर तक पानी में चली गई। उसका जवान चिकना जिस्म देख कर मेरा दिल धड़क उठा। उसके भरे बदन का जादू मुझे घायल किये जा रहा था। मेरे तन में जैसे वासना की चिन्गारियाँ फ़ूटने लगी थी। शायद उसे भी पता था कि उसे क्या करना है, उसकी चूत भी तो लप लप कर रही थी !!!

"आ जाओ ना पानी में, बहुत मजा आ रहा है …! लाओ अपना हाथ मुझे दो !"

मेरा हाथ पकड़ कर रश्मि ने मुझे अपने पास खींच लिया। मैं भी धीरे से उसके पास आ कर खड़ा हो गया और उसके वक्षस्थल को देखने लगा।

"ऐसे क्या देख रहे हो … कभी देखे नहीं क्या?"

"नहीं वो… वो… कहीं कमलेश ने देख लिया तो?"

"उंहु … वो तो सो गये होंगे … मैं सुन्दर हूँ ना? " उसने डुबकी मारते हुये कहा।

उसका गीला बदन मेरे तन में आग भर रहा था। मुझसे यह सब सहन नहीं हो रहा था। मैंने पानी के अन्दर ही उसकी चिकनी जांघों को पकड़ लिया और सहलाने लगा।

"क्या कर रहे हो विजय … मुझे गुदगुदी हो रही है !" वो खिलखिलाती हुई बोली।

उसने अपनी ब्रा को ढीला कर लिया था। उसकी मद भरी चूचियाँ मुझे साफ़ नजर आ रही थी।

"गुदगुदी तो मुझे भी हो रही है … रश्मि तुम्हारा बदन कितना चिकना है !" मैंने यौवनावेश वश अपना मुख उसकी चूचियों पर रगड़ दिया और हाथ उसकी चूतड़ों की तरफ़ बढ़ा दिये। वो कांप सी गई। मेरा लण्ड तन्ना उठा, कुछ करने को बेताब हो उठा।

"तुम्हारा ये कैसा कैसा हो रहा है, देखो तो…" रश्मि ने नीचे देख कर हांफ़ते हुये शरमाते हुए कहा।

"उसे तो बहुत बेचैनी है … बेचारा तड़प रहा है ! क्या करें ?" मैंने वासना में डूबी हुई आवाज में कहा।

"एक बार इसे पकड़ कर देख लूँ?" वो लाज से लाल होते हुई बोली।

मैं कुछ कहता उसके पहले ही रश्मि का हाथ मेरी चड्डी की ओर बढ़ गया और धीरे से मेरे लण्ड को थाम लिया। मेरे दिल पर जैसे सैकड़ों तीर चल गये। अब वो खुलने लगी थी। हम सरकते हुये धीरे से पानी में एक चट्टान के पीछे पत्थर पर बैठ गये।

मैंने धीरे से उसके उरोजों को थाम लिया। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मेरे हाथ उसके उरोजों पर फ़िसलने लगे … उसके मुख से सिसकारी सी निकलने लगी। मेरा लण्ड उसके हाथ में था। उसे वो हौले हौले से ऊपर नीचे कर रही थी। मैं तो जैसे दूसरी दुनिया में खो चला था।

"विजय, इसे बाहर निकाल लूँ ?" उसने अपनी मद भरी अधखुली आँखों से मुझे निहारते हुये कहा।

"आह, रश्मि … क्या करोगी, रगड़ोगी इसे ?" मेरे तन में झुरझुरी सी चल गई।

"बस, देखो मैं इसे कैसा मस्त कर देती हूँ…" वो कुछ कुछ मेरे ऊपर सवार सी होते हुये बोली।

मैंने धीरे से चड्डी नीचे सरका दी … पानी के भीतर ही उसने मेरा सुपाड़ा खोल दिया और चमड़ी पलट कर पीछे खींच दी।

"आह रे, मर जावां रे… विजय, तुझे तो मुझ पर रहम भी नहीं आता?" उसकी सेक्स में बेचैनी उभर रही थी।

"रहम तो आपको नहीं आता है … कभी मौका तो दो…" मेरी सांसे तेज होने लगी थी।

"किस बात का मौका … बोलो ना?" वो तड़प कर बोली।

"आपको चोदने का … हाय मेरा लण्ड तड़प जाता है तुम्हारी चिकनी चूत को चोदने का !" मैंने अपने मन का गुबार निकाल दिया।

"हाय मेरे विजय … फिर से बोलो …" वो मेरी बात सुन कर बहक सी गई।

"आपकी भोसड़ी को चोदने का…" मैंने अपना लहजा बदल दिया।

"हाय, तुम कितने अच्छे हो … फिर से कहो !" वो पत्थर से उतर कर मुझसे चिपकने लगी।

दूसरे भाग में समाप्त !




 

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