The Role of Playful Sex Quotes in Enhancing Intimacy
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In the realm of intimate relationships, maintaining a healthy and vibrant
sex life is often a key component. To infuse a dose of excitement and
playfulne...
हिंदी सेक्सी कहानियां
हिंदी सेक्सी कहानियां |
- सेक्स का प्रैक्टिकल
- दूसरा लंड लेना है तो बेवफ़ाई
- रेशु आण्टी को चोदा-2
- रेशु आण्टी को चोदा-1
- आंटी के लिए वासना-2
| Posted: 05 Feb 2013 08:46 AM PST शाम के समय हर रोज मैं श्रेया, पीयू और निशा बायलोजी पढ़ने कालेज कैम्पस में ही सर के घर जाते थे। सर की उम्र करीब 30 साल थी और हमारी रही होगी अठारह उन्नीस ... ! पीयू सर पर लाइन मारती थी... कहती थी वो सर को प्यार करने लगी है। मैं और निशा उस पर हँसा करती थी.. पर निशा की भी नज़र सर पर थी... उस शाम भी सर पढ़ा रहे थे और पीयू सर को घूर रही थी... टॉपिक था : सेक्स इन एनिमल्स ! सर : फिर प्यूबर्टी में लड़की और लड़कों में यौनांगों का विकास होता है ! पीयू : लड़की में कैसे सर? सर : जैसे स्तन बड़े हो जाते हैं, प्यूबिक एरिया यानि वस्तिक्षेत्र पर बाल आने लगते हैं... पीयू : और सर... सर : लड़कियों में मासिक धर्म शुरू हो जाता है। पीयू : पर सर मासिक धर्म में क्या होता है? सर : योनि से रक्तस्राव होता है... पीयू : पर सर उससे तो पेशाब निकलता है... सर : नहीं ! वहाँ दो छिद्र होते हैं, ऊपर से पेशाब और नीचे से मासिक धर्म... यानि योनिमार्ग से रक्तस्राव ... यह देखो इस चित्र में ! निशा : सर समझ में नहीं आ रहा... अगर आप चाहे तो आप प्रैक्टिकल दिखाईये न... पीयू तैयार है... क्यूँ पीयू..? पीयू : हाँ हाँ सर ! कोई प्रॉब्लम नहीं... मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह हो क्या रहा है... ये दोनों क्या प्लान कर रही हैं.. यह तो बेशर्मी है... सर : ठीक है, अगर तुम तीनों को कोई प्रॉब्लम नहीं है तो मुझे क्या हो सकती है... कांसेप्ट बन जायेगा... सर ने दरवाज़ा बन्द किया... और सबसे पहले मुझे बुलाया... सर: श्रेया, सबसे पहले तुम इन्हें स्तन दिखाओ... श्रेया : जी जी ! सर... मैंने अपनी टी शर्ट खोली... ब्रा नहीं खुल रहा था तो सर ने अपने हाथ से खोल दी। मेरे बहुत मुलायम और बड़े बड़े चूचे हैं... सर की नज़र इन पर तो थी, यह तो पता था... साले ने आज देख भी लिए। सर : ये देखो स्तन.. ! प्यूबर्टी में लड़कियों के ये बड़े हो जाते हैं ! सर मेरे चूचे दबा रहे थे और निप्पल दिखा रहे थे, मज़ा तो आ रहा था पर गन्दी फीलिंग हो रही थी ! सर : अब तुम्हारी बारी निशा ... अपना मूत्र-द्वार सबको दिखाओ... निशा : ओ के सर ... ! मेज पर लेट जाऊँ? सर : हाँ... मैंने झटपट अपने कपड़े पहने...शुक्र है कमीने ने मेरी फुद्दी नहीं देखी... निशा लेट गई। सर ने अपने हाथों से उसका पैंटी उतारी... फुद्दी फैलाई... सर : यह देखो मूत्र द्वार... चूंकि बाल बहुत हैं योनि द्वार नहीं दिख रहा... पीयू तू शेव करती है वहाँ? पीयू : हाँ सर ! मेरा देख लो साफ़ है एकदम ! सर : तो फिर लेट जाओ। साली तैयार रहती है पीयू चुदने के लिए, पर हमें क्यूँ फंसाया ... मैं आज इसे चुदवा कर ही रहूँगी। पीयू ने सिर्फ ऊपर के कपड़े पहने थे... नीचे से नंगी पड़ी थी मेज पर... साला सर का भी करेक्टर ढीला है.. क्यूँ न दोनों को मज़े चखाऊँ... मैं : सर तो यह है योनि द्वार ! क्या यहीं मेल ऑर्गन घुसता है? सर : बिल्कुल सही श्रेया ! निशा : सर आपका ऑर्गन कैसा है? सर : अभी दिखाता हूँ... यह देखो पेनिस कहते है इसे? मैं : मतलब लड़के जिसे लण्ड या लौड़ा कहते हैं? सर : हाँ ! इसे लिंग, शिश्न भी कहते हैं। मैं : इश्स... ! इतना बड़ा कैसे घुसता है? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता !! सर : अरे यह पोसिबल है, यहीं घुसता है ! मैं : नहीं आई डोंट एग्री... क्या यह पीयू के छिद्र में चला जायेगा? सर : बिल्कुल... मैं : फिर दिखा दो ना प्रैक्टिकल करके... पीयू : पर श्रेया..? यहाँ...? ये...? निशा : हाँ, दिखाओ न सर... सर : ओके ... पीयू जरा जांघें फैलाओ... सर उंगली डाल के उसे गरम कर रहे थे... चुदने का मन तो निशा को भी था... सो वो सर का लण्ड मसल रही थी... उसने भी नीचे सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी ! सर : लम्बी लम्बी सांसें लो ... और घुसने दो मेरे पेनिस को .... अह्ह्ह अह पीयू : अह सर ! दर्द हो रहा है... सर : होता है... शुरू शुरू में... पहले करवाया है क्या? पीयू : अहह बहुत पहले गाँव में अंकल ने मारी थी... निशा : सर धीरे धीरे करो... उसे दर्द हो रहा है... क्या मुझे भी होगा? सर : क्या तुमने पहले कभी नहीं मरवाई? निशा : नहीं सर ... पर आज मन बहुत है प्रैक्टिकल का... निशा और पीयू दोनों एक जैसी थी किसी से भी चुदने को तैयार ! गाँव से शहर पढ़ने आई थी.. डॉक्टर बनने.. और सर .. साला ठरकी ...उसकी नज़र मेरे ऊपर थी। सर : यह देखो श्रेया... अब पता चला कि कैसे घुस जाता है... तुमने तो घुसवाया होगा...? शहरी हो... बॉयफ्रेंड भी होंगे...! साला ठरकी ! मन में तो आया पापा को सब बता देने का ! आज मैं तीनो की पोल ऐसा खोलूँगी कि याद रखेंगे तीनों ... क्लासरूम जैसे पवित्र स्थान में यह कर रहे हैं.. मैंने तो बस उसकाया था ताकि इनके अन्दर का शैतान बाहर आ जाये... पता तो पहले से था। सर और पीयू दोनों नंगे मेज पर चोदम-चुदाई खेल रहे थे... निशा बगल में खड़ी थी चुदने के लिए... सर : श्रेया, तू दूर क्यूँ खड़ी है..? पास आकर देख ... तेरे को भी प्रैक्टिकल चाहिए? निशा : नहीं सर, पहले मेरा चांस है... पीयू : अभी मेरा मन नहीं भरा ... और घस्से मारो ना ! तीनों का पोल खोलने के लिए मैं तुरंत बगल वाले कमरे में चल रही केमिस्ट्री क्लास में चली गई... और हल्ला कर दिया- सर और स्टुडेंट सेक्स कर रहे हैं। बहुत सारे लड़के और टीचर घुस गए कमरे में। सर चोद रहे थे पीयू को... शायद चरमोत्कर्ष पर थे.. झड़ने ही वाला था... तभी चौकीदार ने सर के चूतड़ों पर ज़बरदस्त डंडे बरसाए... सर का लण्ड बाहर निकल गया.. सर को स्टाफ ने घेर लिया खूब गाली-गलौच हुई... और सर के लण्ड पर मुक्के चले, डंडे बरसे ... नंगा परेड के लिए निकला गया... देखने लायक था.. .मजनूं सर की पिटाई... नंगे और मुँह काला ! पीयू नंगी भागने को थी पर लड़कों ने घेर लिया... गोदी उठा कर लड़के उसे एक कोने ले गए... पीयू : मैंने कुछ नहीं किया ! वो श्रेया के कहने पर ... सर ही गंदे हैं... निशा भी भागना चाह रही थी... पर लड़कों की एक टोली उसे उठा कर ले गई। निशा : जाने दो ! ऐसा कभी नहीं करुँगी। आनन-फानन में कुछ लड़कों ने निशा की फुद्दी और गाण्ड में लंड घुसा दिया और जमकर चोदने लगे। वहीं पीयू भी मज़े लेकर चुद रही थी... तभी पुलिस आ गई और सर को हिरासत में ले लिया ... काफ़ी मशक्कत के बाद भीड़ पर काबू पाया गया... पीयू निशा को भी पुलिस जीप में बिठा कर ले गए... shreyaahujacool1@rediffmail.com sexygirl4uonly16@gmail.com |
| Posted: 05 Feb 2013 08:34 AM PST मेरा नाम करुणा है, अपने पति को मैं प्यार से गुड्डू कहती हूँ। यूँ तो हमारी शादी को 4 साल हो गए हैं और मेरी एक साल की बेटी भी है। वैसे तो मैं सुखी हूँ पर लगता था कि कुछ कमी सी है, मेरे वो बहुत सीधे हैं और मैं भी उनको बहुत प्यार करती हूँ, मैं भी अपनी कॉलेज लाइफ में बहुत सीधी रही हूँ, न मैंने किसी लड़के को घास डाली और न डालने दी पर जब वो कभी-2 "हिंदी सेक्सी कहानियां" की कहानी मुझे पढ़ कर सुनाते तो मुझे लगने लगता कि मुझे भी कोई दूसरा प्यार करने वाला चाहिए जो एक बार मुझे कस कर अपनी बांहों में लेकर ज़ोरदार तरीके से कुछ नया तरीका अपना कर मुझे चोद सके। पर क्या करूँ, मेरी हिम्मत ही नहीं होती थी, जब वो मुझे कभी ब्ल्यू फ़िल्म दिखाते और कोई लड़की दो मर्दों से चुदती दिखती तो मेरे अंदर की प्यास और जग जाती, उस रात मैं गुड्डू से दो बार तो चुदवाती ही थी पर शायद अभी मेरी किस्मत में दूसरा लन्ड नहीं लिखा था तो मैंने यह विचार मन से निकालना ही बेहतर समझा। पर क्या करती जब भी इनसे कोई कहानी सुनती या बीएफ़ देखती तो ये उमंगें ज़ोर पकड़ लेती। वैसे मैं ज्यादा सुंदर तो नहीं हूँ पर मेरा शरीर बहुत शानदार है, 38-30-36 ! मेरे मम्मे भी बहुत भारी हैं जब वो इनके बीच में लंड घुसा कर मेरे मम्मों को चोदते हैं तो मजा आता है, और जब उनकी पिचकारी ऐसे में मेरे मुँह तक आती है तो और भी मजा आता है, मेरा दिल झूम उठता है। पर कहते हैं न कि सच्चे मन से कुछ मांगो तो भगवान भी सुन लेता है। मेरे इनके एक दोस्त हैं सुनील ! वो अक्सर हमारे यहाँ इनके सामने और इनके पीछे भी आते रहते हैं। एक दिन मैं मेरी बेटी को दूध पिला रही थी और सुनील हमारे यहाँ आ गये। मैं अकेली थी, ये ऑफिस गये थे तो मैं थोड़ा फ्री होकर बैठी थी और मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि कोई आएगा तो मेरे लगभग दोनों मम्मे बाहर ही थे। और सुनील अचानक चला आया तो मैं संभाल भी न सकी। पर क्या करती वो मुझे देख कर मुस्कराया और नमस्ते की। मैंने तुरंत अपने आपको संभाला और उसको बैठने की लिए कहा। उसने लपक कर मेरे बेटी को सहलाने का बहाना करके थोड़ा मेरे मम्मों को भी सहला दिया और मैं कुछ भी ना कह सकी। उसके बाद सुनील ने कहा- भाभी, चाय पिला दो ! मैंने बेटी को उसको दिया और मैं चाय बना कर ले आई। मैंने तब सोचा कि कहीं सुनील मेरी प्यास बुझाने के लिए सही रहेगा क्या? या कहीं यह मुझे बाद में बदनाम तो नहीं कर देगा? मैंने सोचा कि जल्दबाज़ी ठीक नहीं रहेगी। फिर मैं सुनील के सामने बैठ कर चाय पीने लगी। थोड़ी देर शांति रही, फिर सुनील बोला- भाभी, एक बात है, भैया प्रसन्न तो रहते हैं? मैंने पूछा- क्या बात है? वो तो हमेशा ही खुश रहते हैं। तो वो बोला- जिसके पास ऐसी सुंदर पत्नी हो वो हमेशा खुश ही रहेगा ! और वो फिर पड़ोस वाली लड़की की बात बताने लगा कि उसका उसके साथ चक्कर है और वो 3 लड़कों से भी मिलती है, कुछ इस तरह की बात ! मैंने कहा- तुम्हारा किसके साथ चक्कर है, यह तो बताओ? तो वो बोला- आपसे ही चलाने की सोच रहा हूँ। मैं मन ही मन तो खुश हुई पर मैंने कहा- गुड्डू से मिल कर फिर सोचना ! तो वो बोला- इसीलिए तो आज तक नहीं चला पाया हूँ। मैंने सोचा कि आज तो सुनील पीछे ही पड़ गया, चलो देखते हैं कि क्या होता है। तभी मैंने कहा- तुम्हारे भैया के आने का समय हो गया है। तो वो बोला- रहने दो, आज मैं चलता हूँ, कल दोपहर में आऊँगा। मैंने कहा- ठीक है ! अगले दिन सुनील दो बजे आ गया और एकदम बनठन कर आया था। मैंने सोचा कि आज तो यह मुझे चोद कर ही जाएगा और यह सोच कर मेरा मन भी उसकी तरफ आसक्त होने लगा। मैंने कहा- बैठो आप ! और वो बैठ गया, उस समय मैं गुड़िया को सुला रही थी और वो मुझे बैठा-बैठा देखने लगा और मुस्कराने लगा। मैंने पूछा- क्या बात है? तो क़हने लगा- आज आपको लाइन मार रहा हूँ। अब मैंने भी सोच लिया कि एक बार इसका ले ही लेते हैं, किसको पता चलेगा, इससे एक बार चुदा ही लेते हैं, क्या फरक पड़ेगा। सो मैंने कहा- मारो लाइन ! देखें पटा पाते हो या नहीं? सुनील बोला- अगर तुम बुरा न मानो तो मैं अभी पटा लूँ। मैंने सोचा अगर उनका नाम लिया तो यह वैसे ही डर कर भाग जाएगा तो मैंने कहा- मैं बुरा नहीं मानूँगी ! इतना कहते ही वो मेरे पास आकर बैठ गया और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोला- मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। मैंने कुछ नहीं कहा और सिर्फ नजरें झुका ली, इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गई और वो मेरे और पास आ गया। मैं अंदर ही अंदर काफी खुश थी, थोड़ा डर भी था, पर एक दिल कर रहा था कि कर ले बेवफ़ाई अगर दूसरा लंड लेना है तो ! उसने मेरा हाथ अपने हाथों में ले लिया और वो मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे गाल पर चूमने लगा। अब मेरे से शायद रुकना मुश्किल था पर मैं शांति से बैठी रही, मन बहुत तरंगित हो रहा था, मन में इच्छा थी कि आज मुझे मनचाहा मिलने वाला है। उसके बाद उसने मेरे होठों को चूमना शुरू किया। अब मेरे लिए रुकना नामुमकिन था, मैंने भी उसे बांहों में भर लिया और मैं भी उसके चेहरे, होंठ, गाल पर जोरदार चुम्बन करने लगी, मुझे सुनील में गुड्डू नज़र आने लगा। अब वो पूरी तरह खुल चुका था। ऐसा करीब 15 मिनट तक हम करते रहे, मेरी और उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थी, न वो कुछ कह पा रहा था और न मैं कुछ, बस एक दूसरे को चूम रहे थे और प्यार कर रहे थे। तभी मुझे ध्यान आया कि मेरा घर खुला हुआ है, मैंने सुनील से कहा- तुम बैठो एक मिनट ! वो बैठ गया, मैंने घर के बाहर जाकर देखा, कोई घर के बाहर नहीं था तो मैंने अंदर आकर अपना गेट बंद किया और गेट बन्द करते ही तो मानो सुनील सब समझ गया और वो शुरू हो गया। सबसे पहले उसने मेरे मम्मों को आज़ाद किया और उनको चूसना शुरू कर दिया। मैंने रोका उसको कि मेरी बेटी के हिस्से का दूध मत पी, इनको हाथ से सहला ले और दाब ले, जीभ से चाट ले ! उसने ऐसा ही किया और करीब वो 15 मिनट तक उनको सहलाता रहा और चाटता रहा। तभी उसने मेरी साड़ी खोल दी और पेटीकोट भी उतार दिया। अब मैं पैंटी में उसके सामने थी और वो मेरे सामने घुटनों के बल बैठा था। मैंने कहा- सुनील, यह सही है क्या? वो मेरा मतलब समझ गया और उसने अपने कपड़े भी खोल दिये ! काफी शानदार शरीर था उसका पर मेरे गुड्डू जैसा नहीं ! उसका लंड मुझे जरूर मोटा लग रहा था पर लंबा ज्यादा नहीं था। अब उसने मेरे पास बैठ कर मेरी चड्डी भी उतार दी और मेरी चूत पर हाथ फेरने लगा। अभी हम खड़े ही थे कि मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया, इसका लंड मोटा था। तभी वो घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत को प्यार करने लगा। मुझे लगा कि मैं कहीं खो रही हूँ, और कभी वो उसको सहलाते हुए उंगली भी कर देता था, कभी भग्नासा को छेड़ता था जिससे मेरे बदन में आग सी लगती जा रही थी और मैं सुनील को उकसा रही थी, कह रही थी- सुनील, अब तो चोद दे यार ! अब नहीं रहा जाता ! अब उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी टाँगों को फ़ैला दिया, मेरी आँखें बंद थी और मैं सोच रही थी कि यह मुझे तरसा क्यों रहा है, चोद क्यों नहीं देता। तभी वो मेरे ऊपर लेट गया और अब उसका लंड मेरी चूत में अड़ रहा था, काफी मोटा था, करीब 2" का तो होगा। तभी उसने अपना सुपारा मेरे अंदर सरका दिया, मैं एकदम चिहुँक उठी, मेरे दांत भिंच गए, कुछ दर्द महसूस हुआ, पर क्या करती, चुदवाना था तो दर्द पी कर पड़ी रही। वो शायद समझ चुका था इस बात को तो वो थोड़ी देर रुका और मुझे चूमने लगा, मेरी जीभ को उसने अपने मुँह में ले लिया और एक करारा शॉट मारा। मैं एकदम निढाल हो गई, बस यही शुक्र था कि उसका लंड गुड्डू से लंबा नहीं था नहीं तो मैं शायद मर ही जाती। अब वो धीरे-2 धक्के मारने लगा और मुझे भी मस्ती आने लगी थी। कमरे में धप-धप का संगीत गूंज रहा था और मस्ती में मेरी आँखें मिची जा रही थी। तभी मेरे शरीर में अकड़न शुरू हो गई और मैं झड़ने लगी थी। मैंने सुनील को कस कर भींच लिया पर वो कहाँ रुक रहा था, वो तो दनादन शॉट मार रहा था। थोड़ी देर बाद उसने मेरी टांगें ऊंची उठा दी और फ़िर से एक झटके में अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया पर अब मेरी चूत गीली थी सो आराम से लंड अंदर चला गया और वो शुरू हो गया। मेरे मुँह से आह आह की आवाज निकल रही थी और साथ ही मैं बोल रही थी- ज़ोर से करो ! और इसे सुन कर सुनील के शॉट और तेज हो रहे थे। तभी मेरे शरीर में फिर अकड़न होने लगी, मैंने सुनील से कहा- मैं फिर से झड़ रही हूँ।तभी वो बोला- मैं भी आ रहा हूँ। और वो एकदम मेरे पैरों को सीधे करके शॉट मारने लगा और मेरे साथ ही उसने अपना वीर्य मेरी योनि में छोड़ दिया। हम काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर मैंने उसे उठने को बोला और कहा- वो तौलिया लाओ, मेरी भी पौंछों और अपना भी ! इसके बाद उसने कपड़े पहने, मैंने भी पहने ! और चाय पी, फिर वो चला गया। क्यों दोस्तो, कैसी लगी यह मेरी बेवफाई ! अब तो मैं काफी चुदाती हूँ। आगे की कहानी बाद में सुनाऊँगी। lavshaily@rediffmail.com sexygirl4uonly16@gmail.com |
| Posted: 05 Feb 2013 08:19 AM PST "अरे बाप रे, रेशू आण्टी, मुझे तो देर हो गई।" कॉलेज में देर हो जाने से मैं घबरा गया था। "रेशू जी, लौट कर आऊँगा तो प्यार करेंगे।" "अरे नहीं, उनके सामने नहीं करना, अकेले में चुपके से, यानि कल सुबह को, उनके ऑफ़िस जाने के बाद।" "हाँ ठीक है... ठीक है..." कुछ सुना अनसुना सा करके मैंने झटपट कपड़े पहने और कॉलेज की ओर दौड़ लगा दी। मुझे नहीं पता था कि यह प्यार तो अकेले में करने का होता है और इस तरह का प्यार तो छुप छुप के ही हो सकता है। मैं तो मन ही मन सोच रहा था रेशू आण्टी कितनी अच्छी है, मुझे तो वो खूब प्यार करती हैं। दूसरे दिन सवेरे का मैं बेसब्री से इन्तज़ार करता रहा, शायद मेरे से अधिक रेशू को इन्तज़ार था। उसके तन बदन अनबुझी आग बाकी थी, मैंने सुबह उठते ही रसोई की तरफ़ दौड़ लगा दी। सवेरे रेशू आण्टी वहीं होती थी। मैंने उन्हें जोर से प्यार कर लिया- आण्टी, मेरा लण्ड पकड़ो ना ! वो एकदम से घबरा गई- यह क्या कर रहे हो गज्जू? कोई देख लेगा ! "ओहो ... पकड़ो ना मेरा लण्ड आण्टी, कल तो बहुत प्यार किया था ना आपने !" "क्या हुआ रेशू डार्लिंग... क्या पकड़वाना है... लाओ मैं मदद कर दूँ !" अंकल ने रसोई में आते हुये कहा। रेशू घबरा सी गई। "अरे नहीं नहीं, कुछ भी नहीं ... ये गज्जू है ना ... इसे नाश्ता चाहिये।" "गज्जू, आण्टी को काम करने दो चलो, यहाँ टेबल पर आ जाओ।" मैं मन मार कर मेज के पास आकर बैठ गया। नाश्ता वगैरह करके अंकल तो फ़्रेश होने चले गये। नौ बजते बजते अंकल ऑफ़िस चले गये। अंकल के जाते ही रेशू आण्टी ने मुझे फ़टकार पिलाई। अंकल के सामने ही गड़बड़ करने लगे थे। "क्यों आण्टी जी, लण्ड पकड़ने को ही तो कहा था?" रेशू के चेहरे पर हंसी बिखर गई, वो हंसते हुये बोली- अरे मेरे लल्लू जी, वो तुम्हें लण्ड नजर आता होगा, ये तो खासा पहलवान लौड़ा है लौड़ा ! रेशू आण्टी ने फिर से मेरा लण्ड थाम लिया... फिर पजामे में से बाहर निकालते हुये बोली- देखो तो ये लण्ड है या लौड़ा...? फिर वो धीरे से लण्ड दबाने लगी। मुझे एक तेज गुदगुदी सी हुई। इस समय तो वो तो सिर्फ़ एक पेटीकोट और कसे हुये ब्लाऊज में थी, कोई ब्रा नहीं थी। वो मेरे से चिपकती हुई मेरे जिस्म को सहलाने और दबाने लगी। बीच बीच में रेशू आण्टी की सिसकारी भी सुनाई दे जाती थी। मैं भी जैसे तैयार था। बिल्कुल नंगा, मात्र बनियान पहने हुये। लण्ड तो चूत में घुसता है ना ... अब पजामा तो आण्टी ने उतार ही दिया था। बिल्कुल साफ़ सुथरा स्नान करके, गुप्तांगों की सफ़ाई करके... हाँ जी एकदम साफ़ सुथरा ... हो कर आया था। रेशू के लिपटते ही मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था। मैं अब सब कुछ समझ चुका था। फिर तो मैं एक अभ्यस्त मर्द की भांति उसे आलिंगन में ले कर उसके अधरपान करने लगा। रेशू ने प्यार से मेरे बालों पर हाथ फ़ेरा और मेरा चेहरा को झुका कर अपनी एक चूची मेरे मुख में दबा दी- चूस ले मेरे गज्जू, हाँ इस दूसरे को भी... उसके कठोर चूचक को मैं चूसने लगा, उसके बोबे की गोलाइयों को मैं हाथ दबाता भी जा रहा था। उसने भी मेरी बनियान को खींच कर उतार दिया और नंगा कर दिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पर घिसने लगी। मैंने उसके गाण्ड की गोलाइयों को दबा दिया। "कितना प्यारा लण्ड है, एकदम लोहे की तरह..." "यह तो नूनी ही है रेशू जी, लण्ड तो गाली होती है।" "यह लण्ड है और ये चूचियां है। मेरे नीचे चूत है समझे मेरे भोले पंछी !" मैंने अपनी समझ के अनुसार यूं ही सिर हिला दिया, जैसे मैं कुछ जानता ही नहीं हूँ। पर जी नहीं, मैं इतना भी अनाड़ी नहीं था। मुझे सब कुछ समझ आता था। पर फिर भी कुछ आनन्द को मैं नहीं जानता था और ना ही उसके बारे में सुना था। फिर उसने मुझे सीधा खड़ा किया और नीचे बैठ गई। मेरे लण्ड को हिलाने लगी। मुझे गुदगुदी होने लगी। तभी उसने मेरा लण्ड अपने मुखश्री में भर लिया। "छिः छिः, ये क्या कर रही हो, ये तो गन्दा है।" मैंने उसे हटाने की कोशिश की। "उहुं, खुशबूदार है ये तो, मस्त लौड़ा है !" रेशू ने अपनी मस्ती जारी रखी। तभी उसने मेरे चूतड़ों को अपने हाथ में भर लिया और उसे अपनी दबा कर लण्ड को पूरा ही मुख में समा लिया। मुझे असहनीय आनन्द की पीड़ा होने लगी। मेरे मुख से अस्फ़ुट स्वर फ़ूट पड़े। मेरी कमर अपने आप ही चलने लगी और उसके मुखश्री को चोदने लगी। उसने तुरन्त मेरे लण्ड को मुख में से निकाल दिया, शायद उसे लगा होगा कि कहीं मेरा माल फिर से निकल जाये। वो खड़ी हो गई और उसने झटपट अपना ब्लाउज उतार फ़ेंका और अपना पेटीकोट को खोल दिया। उसने मुझे प्यार किया और मुझे ले कर बिस्तर की ओर बढ़ गई। "रेशू जी, अब क्या करना है...?" "बिस्तर पर तो चलो... तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं है... आओ लेट जाओ, बिलकुल सीधे, और अपने लण्ड को सीधा कड़क रखो।" "तो... अब लेट कर कल की तरह प्यार करेंगे क्या?" "हूं, चुदाई करेंगे..." वो मुस्काई। "छीः आप तो गाली देने लगी।" उसने मेरे मुख पर अंगुली रख दी। मैं मन ही मन में अपने आप को बहुत समझदार समझने लगा था। उसने मुझे लेटा दिया और अपनी चूत को मेरे मुख पर रख दिया। "लो तुम भी थोड़ा सा चूस लो।" "अरे हटो ना, ,ऐसे मत करो ..." मैं थोड़ा सा कसमसाया। पर उसके चूत में एक प्रकार की मधुर खुशबू थी, उसकी चूत पूरी गीली थी। उसने मेरा हाथ दोनों तरफ़ से दबा दिया और अपनी नंगी गीली चूत की फ़ांक को मेरे होंठों पर रख दिया। ना चाहते हुये भी मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया। मेरे चूसने से वो आनन्द के मारे किलकारियाँ भरने लगी। मुझे लगा कि ऐसा करने से औरतों को आनन्द आता है। सो मैं और भी जोर जोर से चूसने लगा। उसकी चूत का गीलापन मेरे मुख से लिपट गया। फिर उसने अपनी चूत वहाँ से हटा ली और मेरी टांगों को दबा कर उस पर बैठ गई। मेरे लण्ड का बुरा हाल था। ऐसा लग रहा था कि कठोर हो कर फ़ट जायेगा। रेशू ने मेरे लण्ड का सुपारा खोल दिया। फिर वो विस्मित हो उठी। मुस्कराहट उसके चेहरे पर तैर गई। मेरी तरफ़ मतलब भरी नजरों से देखते हुये वो मेरे लण्ड पर बैठ गई। "मेरे अनाड़ी बालमा, आ, आज तेरी मैं पहली बार इज्जत उतार दूँ?" मुझे हंसी आ गई उनकी बात पर, इज्जत तो औरतों की उतारी जाती है, और ये मेरी ... उंह ! तभी रेशू की चूत का दबाव मेरे लण्ड पर पड़ा। मुझे आश्चर्य हुआ कि रेशु ये क्या कर रही है। पर जल्दी समझ गया कि शायद चुदाई इसे ही कहते हैं। वो मुझे टेढ़ा-टेढ़ा देख कर मुस्करा रही थी। उसने अपने होंठों को एक तरफ़ से दांतों से दबाते हुये अपनी गीली चूत हल्के से दबा दी और मेरे कड़क लण्ड को अन्दर ले लिया। मुझे असीम आनन्द आ गया।तभी रेशू ने अपने आपको सेट करके अपना पोज बनाया और मेरे पर झुक गई। "पहली चुदाई मुबारक हो !" उसे भला कैसे पता कि यह मेरी पहली चुदाई है। उसके शरीर ने जोर लगाया और मेरा लण्ड चूत में पूरा उतर गया। मेरे लण्ड में एक तेज जलन हुई। मेरे कुंवारेपन की चमड़ी फ़ट चुकी थी। रेशू पहले तो मेरे बनते बिगड़ते चेहरे को देखते रही फिर उसकी कमर चल पड़ी। वो कब मेरे पर तरस खाने वाली थी। पहले तो मैं तकलीफ़ से तिलमिलाता रहा, फिर मुझ पर चुदाई की मीठी लहर ने काबू पा लिया। जब मुझे आराम सा आ गया तो मेरी कमर भी चुदाई में ताल से ताल मिलाने लगी। रेशू खुश होकर तेजी से धमाधम मुझे चोदने लगी थी। जाने कब तक हम चुदाई के घोड़े पर सवार हो कर चुदाई करते रहे। हमारी सांसें तेज हो गई थी। पसीना चेहरे पर छलक आया था। उसकी तड़पती हुई कठोर चूचियों को मैं जोर जोर से घुमा घुमा कर मसल रहा था। उसकी सीत्कार कमरे में जोर से गूंज रही थी। तभी रेशू छटपटा पर झड़ गई। फिर उसने मेरा लण्ड पकड़ कर घिस कर मेरा भी वीर्य अपने मुखश्री में निकाल लिया। इस बार के वीर्य स्खलन में बहुत रस था। मुझे लगा कि जैसे मेरे भीतर तक की आग शान्त हो गई है। जीवन में जवान होते ही मैंने चुदाई का पहली बार रस लिया था। मुझे तो लग रहा था ही जीवन में चुदाई से बढ़कर और कोई दूसरा आनन्द नहीं है। मैं रेशू आण्टी का सदा आभारी रहूँगा कि उनके द्वारा मुझे यह अलौकिक आनन्द प्राप्त हुआ। रेशू और मैंने शहर में तीन साल की पढ़ाई के दौरान बहुत चुदाई की, सभी आसनों में चोदाचादी की। रेशू की चिकनी गाण्ड मैंने बहुत बार चोदी क्योंकि उसके बिना वो मानती भी तो नहीं थी। उसका कहना था कि शान्ति सभी छिद्रों से मिलनी चाहिये, चाहे वो मुखश्री का छेद हो या मस्त गाण्ड का। चूत तो सदाबहार मुख्यद्वार है ही चुदाई का... sexygirl4uonly16@gmail.com |
| Posted: 05 Feb 2013 08:01 AM PST मैं अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिये गांव से अपनी आण्टी रेशू के यहाँ शहर में आ गया था। अब तक मुझे सेक्स के बारे में जरा भी ज्ञान नहीं था, यहाँ तक कि मेरा कभी वीर्य पात तक नहीं हुआ था। पर हाँ, मेरे दोस्त लण्ड चूत की बात करते थे। कुछ चोदने या चुदाई की बातें भी किया करते थे। पर मैं अब तक उनका मतलब नहीं जानता था। मेरे शहर पहुँचते ही जैसे रेशू आण्टी खुश हो गई। उसकी नजरें मुझ पर पड़ गई थी और वो मेरे गठीले शरीर को बहुत ही चाव से निहारती थी। मैं एकदम से उन्हें समझ नहीं पाया... उनकी वासना भरी निगाहें तो मुझे प्यार भरी नजरें लगती थी। मैं तो गांव के और लोगों की भांति पैंट के अन्दर धारीदार कच्छा ही पहनता था। नहाता भी खुले आंगन में था। मेरी नूनी जिसे हम लण्ड कहते हैं, वो अनजाने में कभी कभी बस यूं ही खड़ी हो जाया करती थी, कभी नहाते समय तो कभी सवेरे सो कर उठते समय भी। रेशू तो सवेरे सवेरे मेरी खड़े हुये लण्ड को देखने ही आती थी और देर तक निहारती रहती थी। मेरी खड़ी हुई डण्डी को देख कर बस मुस्कराती रहती थी जैसे मन ही मन में वो उसके साथ कुछ करने की कोशिश करती हो। एक बार तो नहाते समय रेशू आण्टी से रहा नहीं गया, उन्होंने मेरी नूनी को जैसे हल्का सा हाथ मार कर कह ही दिया, तभी मुझे एक विचित्र सी अनुभूति भी हुई थी। "इसे नीचे ही रखा करो, तुम्हें शरम नहीं आती?" रेशू की आवाज में मजाक का पुट अधिक था। मैं भोला भाला सा लड़का, कुछ समझा ही नहीं, सोचा कि आण्टी मजाक ही कर रही है। मैंने अपना खड़ा हुआ लण्ड उनसे कभी छुपाया नहीं था। उन्होंने इसका मतलब भी कुछ और ही निकाल लिया था। जब उन्होंने मेरा कोई विरोध नहीं पाया तो उनका साहस खुलने लगा। एक दिन जब मैं कॉलेज जाने की तैयारी में था, तब वो अचानक मेरे कमरे में आ गई। मैं पैंट पहन ही रहा था कि उन्होंने मुझ रोक दिया। "पहन लेना कपड़े, ऐसी जल्दी क्या है?" और वो मेरे समीप आ गई, मेरी खड़ी नूनी को थोड़ा सा हिला कर बोली- यह क्या ऐसे ही खड़ा रहता है...? उनके इस अजीब से प्रश्न पर मैं चौंक सा गया। पर उनके लण्ड पर हाथ लगाने से मुझे एक सुहानी सी सिरहन हुई। वो मेरी हालत देख कर हंस पड़ी। "आण्टी, ऐसे ना करो ऐसे, गुदगुदी लगती है !" पर मुझे लगा कि वो ऐसा और करे। "अच्छा बैठ जा ... और अब बता, सच में गुदगुदी लगती है तुझे?" मुस्करा कर उन्होंने मेरी डण्डी को पकड़ कर और हिला दिया। मेरा लण्ड सख्त होने लगा था। मेरे शरीर में जैसे सनसनाहट सी होने लगी। मैंने अपने पांव समेट लिये और नूनी पर अपना हाथ रख कर उसे छुपा लिया। "अरे आण्टी आप जब हाथ लगाती हैं तो नूनी में बहुत जोर से गुदगुदी लगती है... पर जब मैं हिलाता हूँ तो बिल्कुल नहीं लगती है।" मैंने कुछ शरमा कर कहा। "सुन, अपना हाथ नूनी पर से हटा और मुझे आण्टी मत कहा कर, रेशू कहा कर !" मैंने ज्योंही हाथ हटाया तो रेशू ने मेरी नूनी कठोरता से पकड़ ली। उनकी आँखों में गुलाबीपन आ गया। उनके शरीर में एक कंपकंपाहट सी होने लगी। उनके सीने की चोली कसने सी लगी, तब उन्होंने उसे हिला कर सेट किया। छातियाँ तेज सांस के कारण ऊपर नीचे होने लगी थी। मैं तो जैसे ऊपर से नीचे तक कांप गया। एक नया अनुभव, एक नई तरंग... एक नया आनन्द... "रेशू जी, मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है... ये मुझे क्या हो रहा है?" मैंने उसका हाथ कलई पर से पकड़ लिया, पर अपना लण्ड नहीं छुड़ाया, मजा जो आ रहा था। "गज्जू, अपना कच्छा तो थोड़ा उतार... तेरा लण्ड तो शानदार लगता है।" ओह, तो लण्ड इसे कहते है। इससे तो लड़कियों को चोदा जाता है, मैं कुछ कहता उसके पहले ही रेशू ने धारीदार चड्डी का मेरा नाड़ा वो खींच चुकी थी। रेशू ने चड्डी नीचे कर दी और मेरी डण्डी पकड़ कर उसे ललचाई नजर से देखने लगी। "आह, गज्जू, इतना बड़ा है तेरा लण्ड तो, तूने कभी किसी लड़की को चोदा है क्या?" "जी, क्या चोदा? आप ठीक से बतायें रेशू जी।" रेशू की चोदने वाली बात मेरी समझ से परे थी। कभी किसी को चोदा जो नहीं था ना। वो थोड़ा सा उठी और मेरी गोदी में बैठ गई और मेरे चेहरे को थाम कर मुझे प्यार करने लगी, चूमने लगी। मेरा खड़ा लण्ड उसके चूतड़ों के बीच दरार में धंसा जा रहा था। "आप मुझे बहुत प्यार करती है रेशू जी?" मुझे ये सब बहुत भाने लगा था। मेरा लण्ड कठोर हो कर बहुत जोर मार कर उसकी गाण्ड के छेद तक को ठोकर मार रहा था। "हाँ हाँ ! बहुत सारा प्यार करती हूँ, चल बिस्तर पर चल, तुझे सिखाती हूँ कि प्यार कैसे करते हैं।" मुझे तो रेशु के इस काम में बड़ा ही आनन्द आ रहा था। सारा शरीर एक अजीब सी गुदगुदी और रोमान्च से भरा जा रहा था। मेरा शरीर जैसे मीठी सी अग्नि में सुलग सा रहा था। तभी मेरा ध्यान रेशू के उन तड़पते हुये सीने के उभारों पर चला गया। मुझे याद आया कि दोस्त चूचियों के लिये भी दबाने को कहते थे। अनजाने में ही मेरे हाथ उस ओर बढ़ चले और रेशू के तने हुये कठोर वक्ष को मैंने दबा डाला। रेशू जैसे तड़प गई। "इसे दबाते हैं ना रेशु जी?" "हाय, जालिम, मेरी जान निकाल देगा क्या, और जरा मस्ती से दबा ... आह..." उसने मुझे घसीटते हुये बिस्तर पर ला पटका। मेरा कच्छा मेरे पांव से फ़िसलत हुआ नीचे उतर गया। रेशू ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरे नंगे शरीर पर सवार हो गई। अपना पेटीकोट ऊंचा करके मेरी कड़क डण्डी पर अपनी नंगी चूत को घिसने लगी। मैंने भी जोश में उन्हें लिपटा लिया और अपने आप ही उनके होंठों को अपने होंठो में भर लिया। रेशू जैसे अपने होश में नहीं थी। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर ऊपर नीचे करके घिसने लगी। मेरा शरीर वासना की आग में जलने लगा, मेरा लण्ड बहुत ही कड़क हो चुका थी, लग रहा था कि कोई उसे जोर से रगड़ कर घिस डाले। मेरा तन वासना से भर गया ... मुझे जाने कैसा कैसा लगने लगा, जिन्दगी में पहली बार कोई युवती मुझसे इस प्रकार लिपट कर प्यार कर रही थी। जैसे मेरी जान निकलने को थी। एकाएक मेरा लण्ड उसकी गीली सी चूत में घुस सा गया। पर फिर बाहर निकल आया। इसी लण्ड को तोड़ने और मरोड़ने ने मेरी डन्डी ने जैसे आग उगल दी। मुझे लगा कि मेरा पेशाब या कुछ ऐसा ही मेरे लण्ड में से जोर से छूट गया। यह मेरा प्रथम वीर्यपात था ... प्रथम स्खलन... मेरा सारा जोश तेजी से ठण्डा पड़ता जा रहा था। रेशू को भी पता चल गया था कि मेरा माल निकलता जा रहा है। वो थोड़ा सा खीजती हुई मेरे ऊपर से उतर गई। उसकी वासना की आग बुझ नहीं पाई थी। "अरे बाप रे, रेशू आण्टी, मुझे तो देर हो गई।" कॉलेज में देर हो जाने से मैं घबरा गया था। "रेशू जी, लौट कर आऊँगा तो प्यार करेंगे।" "अरे नहीं, उनके सामने नहीं करना, अकेले में चुपके से, यानि कल सुबह को, उनके ऑफ़िस जाने के बाद।" "हाँ ठीक है... ठीक है..." कुछ सुना अनसुना सा करके मैंने झटपट कपड़े पहने और कॉलेज की ओर दौड़ लगा दी। मुझे नहीं पता था कि यह प्यार तो अकेले में करने का होता है और इस तरह का प्यार तो छुप छुप के ही हो सकता है। मैं तो मन ही मन सोच रहा था रेशू आण्टी कितनी अच्छी है, मुझे तो वो खूब प्यार करती हैं। कहानी जारी रहेगी। प्रेम सिंह सिसोदिया sexygirl4uonly16@gmail.com |
| Posted: 05 Feb 2013 06:29 AM PST आंटी बोली- अंशु बेटा, कहाँ लगी? चलो, रोते नहीं ! चलो उठो ! मैंने अपने दोनों हाथ उनके कंधों पर रख लिए और उनके खुले हुए वक्ष से चिपक कर रोने लगा। फिर हम दोनों धीरे धीरे आंटी के बेडरूम जाने लगे, बेडरूम बाथरूम के बगल में था। चलते चलते मैंने अपने हाथ आंटी के बदन पर फिराना शुरु कर दिए, मैं अपना सीधा हाथ आंटी की गुलबदन पीठ पर फ़िरा रहा था और बायें हाथ से उनकी रसीली गांड को सहला रहा था। कमर पर हाथ फेरते फेरते मेरा हाथ थोड़ा सा उनके पेटीकोट के अंदर चला गया। पता नहीं आंटी को कुछ पता चल रहा था या नहीं लेकिन वो बहुत ही घबराई हुई थी। मेरा चेहरा कभी उनके बूब्स पर तो कभी उनकी गर्दन से छू जाता था। धीरे धीरे हम बिस्तर तक पहुँच ही गए लेकिन तब तक मैंने आंटी के बदन के स्पर्श का काफ़ी मज़ा ले लिया था, अब तो बस मेरा उनको चोदने का मन कर रहा था। बिस्तर पर बैठते ही मैंने उनसे पूछा- आंटी, मेरी जांघ में मोच आई है, कोई दर्द का मलहम है क्या? आंटी बोली- हाँ है, अभी ला देती हूँ। "आप प्लीज़ कोई तौलिया भी ला दीजिये, मैं तौलिया लगाकर मलहम खुद ही लगा लूँगा।" आंटी ने कहा- ठीक है। आंटी तौलिया ले आई, आंटी ने कहा- तुम मलहम लगा लो, मैं दूसरे कमरे में चली जाती हूँ। मलहम लगाने के लिए मैंने अपनी पैंट उतारी, फिर चड्डी उतारी फिर ऊपर से तौलिया लपेटी और जानबूझ कर नीचे गिर गया। उसके बाद मैंने जोर जोर से फिर रोना शुरु कर दिया। आंटी बंटी को विडियो गेम में लगाकर और उसका कमरा बंद करके आ गई। आंटी ने मुझे उठाया, मैंने आंटी से कहा- आप बहुत अच्छी हो ! आंटी हल्का सा मुस्करा दी। उस समय चार बज रहे थे, मैंने आंटी से कहा- आप प्लीज़ मलहम लगा दीजिये। आंटी ने कहा- तू खुद लगा ले ! मैंने कहा- मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है। थोड़ी ना नुकुर के बाद आंटी बोली- ठीक है, लगा देती हूँ। मैं आंटी के सामने बेड पर अपनी जांघ दिखाकर बैठ गया, और आंटी फर्श पर बैठ गई और तौलिया ऊपर करके मलहम लगाने लगी, आंटी के पूरे बूब्स के दर्शन हो रहे थे मुझे और मेरा लंड भी तनकर खड़ा हो चुका था। मैंने धीरे से अपने तौलिये की गांठ खोल दी और आंटी से कहा- आंटी अब दूसरी टांग पर लगा दीजिये ! दूसरे टांग उनकी तरफ करने के लिए जैसे ही उठा, तौलिया नीचे फर्श पर गिर गया। अब मेरा सात इंच लम्बा, दो इंच मोटा लण्ड आंटी के मुंह के पास खड़ा सलामी दे रहा था। आंटी सकपका गई, उनके मुँह से कुछ नहीं निकल रहा था, थोड़ी देर बाद बोली- तुमने चड्डी क्यूँ नहीं पहनी? मैं डरा हुआ था, मैं तुरंत आंटी से चिपक गया, दर्द का नाटक करके रोने लगा और कहा- सॉरी आंटी, मैं आज चड्डी पहनना भूल गया था। मैंने आगे कहा- आंटी, मुझे बहुत डर लग रहा है। इसके बाद मैं आंटी से बुरी तरह से चिपक गया, अपने दोनों हाथ उनके जिस्म पर फेराने लगा, आंटी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वो कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। अब मैं आंटी की दिल की धड़कनें भी सुन सकता था, उनका दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था। फिर मैंने आंटी की मखमली चिकनी कमर पर हाथ फेरते हुए आंटी की तारीफ करना शुरु की, मैं बोला- आंटी, आप बहुत सुन्दर हो, आप एकदम हिरोइन दिखती हो, आपके जितनी सुन्दर मैंने किसी को भी नहीं देखा। आंटी गुस्से से बोली- तुम अब घर जाओ, तुम्हारा ये सब करना अच्छी बात नहीं है, अभी तुम्हारी उम्र बहुत छोटी है। मैंने आंटी की गांड कस कर पकड़ते और अपने लंड की तरफ स्पर्श देते हुए कहा- आंटी, मैं तो बस आपकी सेवा करना चाहता हूँ, मुझे बस एक मौका दे दीजिये। आंटी घबरा कर बोली- नहीं नहीं ! अंशु यह सब ठीक नहीं है। और वो मेरा हाथ हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरी पकड़ भी बहुत मजबूत थी वो जिसे छुड़ा नहीं पा रही थी। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने कहा- ठीक है लेकिन मैं आपको होंठों पर किस करना चाहता हूँ, वो कर लेने के बाद ही में यहाँ से जाऊँगा। वो कुछ नहीं बोली, मैंने उसी समय अपने दोनों होंठ उनके होंठों पर रख दिए और उनको किस करने लगा, साथ में मेरा सीधा हाथ उनके पेटीकोट के अंदर जाकर उनकी मखमली रसीली गांड सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर उनके बूब्स दबाने लगा। थोड़ी देर बाद आंटी भी किस करने में मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने उनको बेड पर गिरा दिया और उनके ऊपर आकर उनके बूब्स किस करने लगा लेकिन आंटी अभी भी शरमा रही थी और बार बार मेरे हाथ और मुंह अपने बूब्स से हटाने लगी और कहने लगी- बस अंशु बस, अब और आगे मत करो। मैंने कहा- संगीता आंटी, मैं तो सिर्फ आपको मजा देना चाहता हूँ, आप इतनी सेक्सी हो कि किसी का भी मन आपके लिए मचल जाये ! यह कहते हुए मैंने उनका ब्लाऊज़ खोल दिया, अब वो सिर्फ ब्रा और साड़ी में थी, उनके कसे हुए बूब्स हरी ब्रा में बड़े मस्त लग रहे थे, मैंने उनके बूब्स को चाटना शुरु कर दिया, उनके मुँह से सिसकारियों की हल्की-हल्की आवाज़ आने लगी उसके बाद मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ उनकी चूत की तरफ बढ़ाने लगा कि तभी मेरा हाथ उन्होंने पकड़ लिया और मुझे मना करने लगी। मैंने एक उनको एक किस उनकी नाभि में दिया और उनका पेट सहलाया, उनके मुंह से सिसकारियाँ निकल गई, अब मैं उनकी नाभि चूम रहा था और पेटीकोट के अंदर उनकी चूत सहला रहा था और वो सिसकारियाँ भर रही थी। उनकी चूत गीली हो चुकी थी, मैंने अपना गीला हाथ उनकी चूत से बाहर निकाला और उसे चाटने लगा, मुझे उनकी चूत का रस चाटता देखकर वो शरमा गई तो मैंने बाकी बचा रस उनके होंठों पर लगा दिया फिर उसको हम दोनों ने मिलकर चाटा। अब मैंने अपनी शर्ट खोल दी और आंटी की साड़ी हटाई फिर उनका पेटीकोट उनके बदन से जुदा किया। वो सिर्फ ब्रा और काले रंग की पैंटी में थी, मैं पूरा नंगा हो चुका था। आंटी को मैंने नीचे से चूमना शुरु किया और चूमते चूमते उनकी जांघ तक आ गया। फिर मैंने उनकी चड्डी उतार दी और उनसे कहा- संगीता, आई लव यूअर चूत ! और उनकी चूत चाटने लगा, वो आह आह करने लगी मगर मैं चाटता रहा, उनकी दोनों जांघों को हाथ से फैलाकर चूत में अपनी जीभ रगड़ता रहा। आंटी आह-आह सिसकारियाँ भरती रही। मैं बड़े प्रेम से उनके जांघों को सहलाते हुए उनकी चूत चाटे जा रहा था और उनकी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थी, वो साथ में कहती जा रही थी- और चाट,और चाट आह आह आह आह.. थोड़ी देर में उनकी चूत से पानी आने लगा और मैं उनकी चूत से पानी चाटने लगा, थोड़ा पानी मैंने आंटी के मुँह में भी चटा दिया और वो मेरी उंगली बड़े मजे से चाटने लगी। मैं संगीता की चाहत समझ गया, मैंने उसका मुँह पकड़ा एक जोरदार किस किया, फिर बोला- संगीता, मेरा लंड चूमो/ आंटी बोली- तुम कैसे बोल रहे हो? मैंने कहा- तुम तो मेरी रानी हो रानी ! और अपनी डार्लिंग से में ऐसे ही बोलता हूँ ! संगीता आंटी खुश हो गई, उन्होंने मेरे लण्ड की गुलाबी टोपी पर प्यार से चूमा, मेरे मुँह से आह निकल गई। फिर उन्होंने पूरा लंड धीरे धीरे अपने मुँह के अंदर लिया और वो जोर जोर से चूसने लगी। मेरे अंदर उत्तेजना कि भट्टी और तेज होने लगी, मैंने आंटी के गाल सहलाये फिर उनके बाल सहलाने लगा। मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, मैं कह रहा था- संगीता जोर से ! और जोर से, आह आह ! मैं मर रहा था, आंटी मेरी तरफ देख कर चूस रही थी, मुझे तड़पता देख कर और तेजी से चूसने लगी, मैं तड़प रहा था, मुझसे रहा नहीं गया, मैंने आंटी के मुंह में ही अपना माल छोड़ दिया, पूरा मुठ आंटी के चेहरे और मुंह में था, आंटी उसे चाटने लगी। आंटी ने मेरा लंड जीभ से चाट चाट कर साफ़ कर दिया था। फिर मैं बोला- संगीता उठो, मेरे पास आओ ! आंटी उठकर मेरे पास आ गई, मैंने अपनी जीभ से चाट कर अपना मुठ आंटी के चेहरे से साफ़ किया और फिर अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी और फिर से एक जोरदार चुम्बन किया। हम दोनों पूरे नंगे बिस्तर पर बैठे थे, अब तक आंटी भी पूरी बेशर्म हो चुकी थी, आंटी को मैंने अपनी बाहों में भर लिया था और आंटी मुझसे पूरी तरह चिपकी हुए थी। उसके बाद मैंने आंटी को बोला- आंटी मैं आपका पूरा बदन चूमना चाहता हूँ। आंटी बोली- अब सब कुछ तेरा है जो चाहे कर, बस मुझे प्यार कर ! फिर मैंने आंटी को उल्टा लिटा दिया और उनका पूरा रसीला बदन एक एक अंग करके चूमा। फिर सीधा करके पहले उनके रसीले निप्पल चूमे, उनके स्तन दबाये। आंटी सिस सिस करती जा रही थी, वो कहने लगी- बस अंशु, अब मुझे चोद दे। मैं बोला- थोड़ा सब्र करो संगीता ! जी भर कर बूब्स चूमने के बाद उनकी चूत एक बार फिर से चाटी, उनकी बुर के होंठों को किस किया और जीभ से चाटना शुरु कर दिया। उसके बाद बोला- संगीता, अब चुदने के लिए तैयार हो जाओ। आंटी बोली- हाँ मेरी जान, मेरी यह तड़प पूरी कर दे। मैंने आंटी की चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाली और उन्हें उंगलियों से चोदना शुरु कर दिया, फिर तीन उंगलियों से चोदा। आंटी आह आह करे जा रही थी, मेरी उंगलियाँ फिर गीली हो गई थी, मैं उंगलिया चाटता हुआ बोला- जान,तुम्हारी चूत बहुत कसी हुई और रसीली है। आंटी खुश होकर बोली- अंशु, अब और अपनी जान को मत तड़पा ! मैं बोला- अभी लो जान ! फिर मैं आंटी के ऊपर आ गया, आंटी मेरे नीचे, मैं आंटी के ऊपर, मेरा लंड आंटी की कसी चूत के ऊपर, मैंने आंटी के होंठों पर एक किस किया, फिर उनकी कमर को पकड़ कर लंड को एक धक्का दिया और लंड अंदर चला गया। आंटी चिल्लाई-आह ! मार डाला ! मैंने कहा- डरो मत जान, अभी मजा आयेगा ! आंटी आह आह किये जा रही थी। मैं कभी उनके बूब्स को किस करता तो कभी उनके होंठों पर लेकिन आंटी सिसकारियाँ लेती जा रही थी, वो कह रही थी- साला कितना बड़ा लंड है तेरा ! आह आह आह ! मार डाला ऊह आह ऊह आह। फ़िर थोड़ी देर बाद उनको मजा आने लगा, वो कहने लगी- और और कर, मेरे जानू, पूरा अंदर डाल दे, तेरे लंड में तो जादू है जादू, आह आह ! मैंने कहा- अब मजा आया ना ! अब मेरा लंड पूरी तरह से अंदर-बाहर आ-जा रहा था और चूत की कसावट के कारण हम दोनों को ही मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने कहा- जान, अब तुम ऊपर आ जाओ। फिर हम दोनों पलट गए, अब संगीता आंटी मेरे ऊपर उछल रही थी, उनकी नर्म रसीली गांड का स्पर्श मेरी जांघों से हो रहा था, मैं मस्त हुआ जा रहा था और थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए फिर हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे, फिर दोनों ने एक दूसरे को जमकर चूमा। संगीता ने मुझे मेरे कपड़े पहनाये, फिर मैंने भी उसके बदन को चाटते और चूमते हुए उसे ब्रा और पैंटी पहनाई। तैयार होकर जब मैंने टाइम देखा तो साढ़े छः बज चुके थे। संगीता मुझे गेट तक छोड़ने आई, वो अपनी नज़रें नीचे किये हुई थी और मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी। मैंने उसे फिर से अपनी बाहों में भर लिया और एक जोरदार किस होंठों पर दिया, उसके चूतड़ सहलाते हुए कहा- जान घबराओ नहीं, मैं किसी को नहीं बताऊँगा, तुम तो मेरी रानी हो रानी ! मैं तुम्हारी रसीली चूत का एक सेवक हूँ। आंटी खुश हो गई और मेरे बदन से चिपक गई। मैंने उनको गालों पर प्यार किया और एक प्यारी किस देकर घर आ गया। दोस्तो, उस दिन के बाद, मैंने आंटी को लगभग हर दूसरे दिन चोदा और आंटी के लिए अपनी वासना की आग शान्त की। ..और साथ ही साथ आंटी को खुश भी किया और उनकी रसीली गांड को और भी रसीली बना दिया। आंटी भी अब और ज्यादा मस्त लगने लगी हैं। suavetits@gmail.com sexygirl4uonly16@gmail.com |
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