हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


नादान कलियों का दीवाना

Posted: 10 Mar 2013 11:14 PM PDT



बात कई साल पुरानी है लेकिन है बिल्कुल सच्ची। उस समय में बीएससी सैकिंड ईयर में हास्टल में रहकर पढ़ रहा था। मेरी उम्र करीब उन्नीस साल की रही होगी। कालेज में कुछ दिनों की छुट्टियां हो जाने के कारण मै गांव जाने का कार्यक्रम बनाकर हॉस्टल से शहर में आ गया। शहर से हॉस्टल करीब दस किमी दूर बाहर था। शहर में मेरे पिताजी की मौसी रहती थी।

वक्त दोपहर का था, मैंने सोचा क्यों कुछ देर पापा की मौसी के यहां रूक कर फ़िर गांव चला जाए। शहर से गांव ६५ किमी दूर था यही सोचकर मैं उनके घर चला गया। उनके घर पर गया तब पापा की मौसी नहाने की तैयारी कर रही थी। वो इतनी साफ सफाई वाली बुजर्ग महिला थीं कि उन्हें नहाने में दो घंटे से कम नहीं लगते थे। घर पहुंचने पर उन्होंने मेरे हाल चाल पूछे। फ़िर बैठने के लिए कहा। मैं इत्मीनान से उनके यहां बैठ गया।

उस समय उनके घर उनके सिवाय उनकी बड़ी बेटी की दूसरे नंबर की लड़की चेतना थी जोकि रिश्ते में मेरी बहन ही लगती थी। उस समय वह १२वीं कक्षा में पढ रही थी। जिसकी उम्र लगभग १८ साल के आसपास रही होगी। उसके उभार संतरे जैसे थे। चूतड़ों पर भी मांस आ जाने से गदराने लगे थे। चेतना का चेहरा और होठ तो इतने रसीले थे कि कोई भी देखे तो किस करने का मन करने लगे, बड़ी-बड़ी आंखें, कुल मिलाकर उसकी हाईट कम थी परंतु थी अल्हड़ जवानी में कदम रखने को बिल्कुल तैयार। पापा की मौसी को हम लोग भी मौसी ही कहते थे।

मेरे पहुंचने पर चेतना से उन्होंने पानी देने को कहा। चेतना उस समय अंदर वाले कमरे में किवाड़ बंद करके छोटी सी चारपाई पर टीवी देख रही थी। उसने उस समय फ़्रॉक पहन रखी थी, जोकि टाईट होने के कारण उसकी संतरा जैसी चूची और ठोस गदराए चूतड़ों को सेक्सी बना रही थी। उसने मुझे भइया कहकर नमस्ते किया, पहले पानी पिलाया फ़िर चाय बनाकर पिलाई। फ़िर जाकर लेटकर टीवी देखने लगी। मैंने जल्दी से चाय खत्म कर दी।

मौसी ने नहाना शुरू कर दिया। वह बूढ़ी होने के कारण नंगी होकर नहाती थी। यही सोचकर उन्होंने मुझसे कहा कि गांव शाम को चला जाना, दोपहरी हो रही है। चेतना के पास आराम कर ले।

तब तक मेरे दिमाग में चेतना के लिए कोई गलत विचार नहीं थे। मैं मौसी के कहने पर दरवाजा खोलकर कमरे के अंदर चला गया। चेतना चारपाई पर टीवी की तरफ करवट लेकर लेटे हुए टीवी देख रही थी। मैं भी पैन्ट-शर्ट पहने जूते उतार कर चेतना की बगल से लेट गया। उस समय टीवी पर श-थीम नाम का कार्यक्रम चल रहा था जिसमें फ़िल्मी समाचार और जानकारियाँ आ रहीं थीं।

मुझे भी कार्यक्रम देखने का मन हुआ तो मैंने चेतना की तरफ करवट ले ली। क्योंकि चारपाई छोटी थी। इस कारण मेरी छाती चेतना की पीठ और मेरा छह इंच का लंड चेतना की मस्त गदराई गांड से पूरी तरह से सट गया। कार्यक्रम में कुछ फ़िल्मी हीरो-हीरोईन के बारे में गरमा गरम जानकारी मय चित्रों के दिखाई जा रही थी। इसे देखकर मेरा चेतना की गाण्ड से सटा लंड पैन्ट के भीतर से खड़ा होना शुरू हो गया। कुछ ही देर में वह पूरी तरह से खड़ा हो गया। किसी लड़की से इस तरह सटने का यह मेरा पहला अनुभव था।

मेरे लंड के दबाब और कार्यक्रम को देखते हुए चेतना की श्वांसे भी गरम होने लगीं। धीरे-धीरे मैंने चेतना के चूतड़ों पर हाथ फ़िराना शुरू कर दिया। जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो मेरा हौंसला बढ़ गया। इसके बाद मैंने उसके संतरे जैसे चूचों को फ़्रॉक के उपर से सहलाना शुरू कर दिया। इसके बाद चेतना आंखें बंद कर मजा लेने लगी। परंतु मुझे यह डर लग रहा था कि कहीं यह रोने न लगे और मेरी शिकायत कर दे। परंतु उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया।

इसके बाद मैंने उसकी फ़्रॉक को उसके चूतड़ों से उपर तक सरका दिया और उसकी नंगी चूचियों और चड्डी के भीतर हाथ डालकर उसकी बिना बालों की चूत को सहलाना शुरू कर दिया, वह पूरी तरह से मस्ती में आकर आंखें मूंदे पड़ी रही। यह सब करते हुए मैं उससे पूछता- चेतना ! तो वह सिर्फ हां कहकर चुप हो जाती। मैने जमकर उसकी चूचियों को मसला दबाया। उसकी चूचियां बहुत सख्त थी। जैसे भीतर मांस की कोई गांठ हो।

मैं इस दौरान उससे पूछता- चेतना मजा आ रहा है?

तो वह हूं कहकर सिर हिला देती थी। मैने अपनी पैन्ट की चेन खोलकर लंड बाहर निकाल लिया। इसके बाद पीछे से उसकी चूत और गांड पर फ़िराने लगा वह मारे उत्तेजना के गर्म-गर्म श्वांसे छोड़ने लगी। उसकी चड्डी इतनी ढीली थी कि मैं चड्डी को सरकाकर लण्ड को उसकी चूत में डालने का प्रयास करने लगा। साथ ही साथ उसकी चूचियों से भी जमकर खेल रहा था। इसी दौरान कई बार उसको चूमा और उसके रसीले औंठ भी चूसे। पर वह बिना कोई हलचल किए आंखे बंद किए चुपचाप करवट लिए लेटी रही।

मैं बार-बार उसकी चूत में लंड डालने का प्रयास कर रहा था। क्योंकि चेतना का भी इतनी उम्र में यह पहला अनुभव रहा होगा। चूत में लण्ड डालने का प्रयास करते समय मेरे दिमाग में यह बात बार बार आ रही थी कहीं पूरा लण्ड घुस गया तो इसकी चूत न फट जाए और तेज दर्द के यह चिल्लाने लगे। यही कारण था कि मैं चाह कर भी लंड चेतना की चूत में घुसाने के लिए पूरा जोर नहीं लगा पा रहा था। परंतु मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में उपर से जा रहा था।

मैं जबरदस्त मजे में आ गया चेतना की श्वांसे गहरी हो गई। मैं चूचियों को मसलते हुए उसके मुँह पर अपना मुंह रगड़ते हुए लंड का सुपाड़ा तेजी से उसकी चूत में आगे पीछे करने लगा। कुछ ही देर में मेरा पानी निकलने को हुआ। मैंने सोचा अगर पानी ऐसे ही चूत के ऊपर छोड़ा गया तो चेतना की चड्डी खराब हो जाएगी। इससे कहीं मौसी को मालूम चल गया तो बदनामी के साथ पिटाई भी होगी। इस कारण मैंने अपना पूरा का पूरा पानी चेतना की चूत में से लंड निकाल कर अपने अंडरवीयर के भीतर छोड़ दिया और ऐसे ही चेतना से लिपटे-लिपटे लेटा रहा।

लेकिन कुछ देर बाद मेरा लंड़ फ़िर खड़ा हो गया तो मैने फ़िर से चेतना की चूत में लंड डालने का प्रयास किया तो उसने करवट ले कर ऐसे दिखाने लगी जैसे उसे कुछ मालूम नहीं है और सोकर जगी है। तब तक मौसी की आवाज आ गई और वह उठकर बाहर चली गई। कुछ ही देर बाद मैं भी वहां से गांव चला आया।

मेरे मन में चेतना की असफल चुदाई का दृश्य बार-बार कोंधता रहा। इसके बाद मैं कई बार वहां गया लेकिन हर बार चेतना मुझसे नजरें छुपाकर दूर-दूर रहने लगी। कुछ वर्षों बाद चेतना के घर वालों ने कम उम्र में उसकी शादी भी कर दी। लेकिन दुर्भाग्य से वह दो साल के भीतर एक बेटी को लेकर विधवा हो गई। विधवा होने के बाद भी उसके ससुर ने उसका विवाह करा दिया।

चेतना अब कभी भी मिलती है तो मुझसे नजरें चुराती है। जबकि आज भी मासूमियत भरी जवानी को मैं चोदना चाहता हूं।

दोस्तों "हिंदी सेक्सी कहानियां" के लिए यह मेरी पहली सच्ची कहानी है। मुझे कालेज लाइफ से ही मासूम नादान लड़कियां बहुत अच्छी लगती हैं। और मैं जब भी मौका लगता है कभी चूतड़ों पर तो कभी चुचियों पर हाथ फ़िरा कर मजा लेने से नहीं चूकता हूं।

दोस्तों मैं छात्र जीवन में मासूम चिकने लड़कों की गाण्ड मारने का भी बहुत शौकीन रहा हूं और मैने दर्जनों लड़कों की जमकर गांड मारी है। और अब अपनी बीबी की भी गांड मारता हूं। ऐसी कई और मेरी सच्ची कथाएँ हैं जिसमें मैंने अपनी चचेरी बहन दीपा, चचरे भाई की मासूम लड़की मोनी, चेतना की मौसी की लड़की पारूल से कैसे मजा लिया है के बारे में विस्तार से बतांऊगा।

sexygirl4uonly16@gmail.com

सौ लौड़ों से चुद चुकी हूँ

Posted: 10 Mar 2013 10:45 PM PDT


मैं उन दिनों अपने चाचा जान के यहाँ वाराणसी आई हुई थी। उनके लड़का अब्दुल बड़ा ही खूबसूरत था। गोरा चिट्टा, दुबला सा, लम्बा सा, उसे देखते ही मेरा दिल उस पर आ गया था।

यूँ तो कानपुर में मुझे चोदने वाले कम नहीं थे, पर उनमें ज्यादातर तो गाण्ड मारने के शौकीन थे। गाण्ड मरवाने में मुझे अच्छा तो लगता था पर असल में तो चूत चुद जाये उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं है ना।

अब्दुल को देख कर मुझे उससे चुदवाने की इच्छा बलवती होने लगी। अब्दुल भी मेरी हसीन जवानी पर फ़िदा तो था, पर रिश्ते में उसकी बहन जो लगती थी मैं !!!

उसे यह पता नहीं था कि कानपुर में तो कोई यह रिश्ता रखता ही नहीं था। उसे यह बात बताना जरूरी था वरना तो मुझे देख कर बस मुठ ही मार कर रह जायेगा। रात को मैं बिस्तर के अन्दर ही घुस कर उसके नाम की अंगुली चूत में घुसा कर पानी निकाल देती थी।

कहावत है ना, दिल को दिल से राहत होती है, यह बात हम में ज्यादा दिनों तक अन्दर नहीं रह पाई। एक दूसरे की नजरें आपस में लड़ती और दिल का फ़ूल खिल उठता था। नजरें आपस में आपस में सब कुछ कह जाती थी, पर दिल तड़प कर रह जाते थे।

मैं जान बूझ कर के कसी जीन्स और तंग और चिपका हुआ बनियान-नुमा टॉप सिर्फ़ उसके लिये ही पहनती थी, इसमें मेरे जिस्म की सारी गोलाईयाँ उभर कर सामने दिखने लग जाती थी। मेरी मस्त चूंचिया देख कर तो वो अपनी नजरें हटा ही नहीं पाता था। अब मैं हिम्मत करके उसे देख कर मतलब से मुसकराया करती थी।

उस बेचारे को यह नहीं पता था कि मैं उसे सिर्फ़ अपनी वासना शान्त करने के लिये काम में लाना चाहती हूँ, एक नया जिस्म, एक नया मस्त कड़क लण्ड, नई जवानी, नया अनुभव, नया सुख, नई मस्ती.... सभी को यही तो चाहिये ना।

एक दिन शाम को सभी घर वाले शादी के खाने पर गए हुए थे। मैंने सोचा- खाने का समय नौ बजे का होता है तो मैं देरी से चली जाऊंगी। पर वहाँ पर घर वालों का कार्यक्रम बदल गया, वो लोग जल्दी खाना खाने के बाद दूसरी शादी में भी हाजिरी देना चाह रहे थे। उन्होने अब्दुल को मुझे लेने घर भेज दिया।

मैं उस समय अकेलेपन का फ़ायदा उठा कर कम्प्यूटर पर "हिंदी सेक्सी कहानियां" पर कहानी पढ़ रही थी। किसी को आया देख कर मैंने कम्प्यूटर बन्द कर दिया और बाहर आ गई। अकेले अब्दुल को देख कर मैं चौंक गई। मन में सोचा कि शायद इसको मेरे अकेले होने का फ़ायदा उठाना है, इसलिये इसने मौका देख कर इधर आया है। मैं भी इस मौके को नहीं जाने देना चाह रही थी। मैं दिल ही दिल में इसके लिये मैं अपने आप को तैयार करने लगी।

मैं ढीला ढाला पुराना सा कुरता पहने थी और अच्छी भी नहीं लग रही थी, मुझे अपने आप पर बहुत खीज आई।

"अरे ! ऐसे ही हो अब तक, तैयार तो हो लो, जल्दी चलना है।" उसने मेरे जिस्म को ऊपर से नाचे तक देखा।

"हां, अन्दर आ जाओ, अभी तैयार हो जाती हूँ !" मैं उसे मतलब से घूरने लगी।

"मैं कुछ मदद करूं क्या, कुछ लाना हो तो ?"

"बस दरवाजा बन्द कर दो.... और कुछ नहीं !" उसने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।

"बस, ठीक है ना.... सुनो बानो, नाराज नहीं हो तो एक बात कहूं ?" उसने हिम्मत दिखाई और मेरा दिल धक धक करने लगा।

"अरे कहो ना, भाई हो, शरमाते क्यूँ हो ?" भाई का शब्द सुनते ही उसका सारा जोश ठण्डा पड़ गया।

"नहीं बस यूँ ही, कुछ नहीं !" उसका प्यारा सा मुखड़ा लटक गया।

"अच्छा भाई नहीं दोस्त हो बस, अब कहो...."

"मैं चाहता हूँ कि बस एक बार .... बस एक बार.... मेरे गाल पर प्यार कर लो !"

"बस इतनी सी बात ...?"

मुझे लगा मौका है, बात आगे बढ़ा लो ....

मैं उसके पास गई, और उसके गाल पर एक गहरा सा चुम्मा ले लिया।

"थेंक्स.... अच्छा लगा !"

"बस एक ही....एक दो बार और कर दूँ ...." मैंने एक किस गाल पर और दूसरा होंठ पर कर दिया। इतना उसे भड़काने के लिये बहुत था।

"मुझे भी करने दो ना सिर्फ़ एक बार !" मैंने अपनी आंखे बन्द कर दी और चेहरा ऊपर कर दिया।

उसने धीरे से मेरे निचले होंठ दबा कर चूस लिये और उसके हाथ मेरी कमर पर कस गए।

उसका लम्बा किस खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरे मन की कली खिल उठी। मैंने सोचा कि ये तो गया काम से, चक्कर में आ ही गया। हो सकता है शायद वो यह सोच रहा हो कि उसने मैदान मार लिया।

"अब्दुल, बस कर न, कोई आ जायेगा....हाय अब्बा.... चल छोड़ दे अब !"

"बानो, बस थोड़ा सा और.... ! ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा ना, सब घर में रहते हैं और आप ऊपर मेरे कमरे में आती ही नहीं हैं !"

"हायऽऽ बसऽऽ मेरे अरमान जाग जायेंगे, अब्दुल, बस कर !" मैंने उसे और भड़काया।

मेरा मन खुशी के मारे उछल रहा था। उसे छोड़ने का दिल बिल्कुल ही नहीं कर रहा था। हम दोनों प्यार में एक दूसरे से लिपट पड़े। वो मेरे होंठो को बेतहाशा चूमने लग गया था, जैसे सब्र का बांध टूट गया हो। उसका जिस्म मेरे जिस्म से रगड़ खा कर उत्तेजित होने लगा था। जाने कब उसके हाथ मेरे उभरे अंगों तक पहुंच गए और उसे सहलाने और दबाने लगे।

ढीले कुरते का यह फ़ायदा हुआ कि उसके हाथ मेरी नंगी चूंचियों तक सरलता से पहुंच गये और अब मुझे भरपूर मजा दे रहे थे। मेरी चूत गीली हो उठी।

"अब्दुल अब तक तू कहाँ था रे ? मुझसे दूर क्यों रहा था? हाय तुझे पा कर मुझे कितना अच्छा लग रहा है ! कब से तो मैं तुझे लाईन मार रही थी !" मैंने अपनी दिल की बात उससे कह दी।

"मैं भी कबसे आपको प्यार करता हूँ.... मैंने भी तो कितनी बार आपको देखा, पर हिम्मत नहीं होती थी, .... बानो सच तुम मेरी हो, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है !"

"हाय अब्दुल, सच में मुझे प्यार करोगे.... करो ना.... मेरे दिल की हसरत निकाल दो, प्लीज !" मुझे लग रहा था कि शादी वादी की ऐसी की तैसी, अभी टांगे चौड़ी करके उसका लण्ड घुसा लूँ।

"देर हो जायेगी बानो, रात को आ जाना ऊपर मेरे कमरे में.... मुझे भी अपनी दिल की हसरतें पूरी करनी हैं !"

"मेरे अब्दुल.... !" और एक बार फिर से हम लिपट कर चुम्मा चाटी करने लगे।

उसके लण्ड का भी बुरा हाल था और मेरी चूत तो पानी टपकाने लगी थी। प्यार और वासना की एक मिली जुली आग लगी हुई थी, जिस्म मीठी आग में झुलसने लगा था। लग रहा था कि अभी चुदवा कर सारा पानी निकाल दूँ पर मेरे रब्बा ....हाय.... अभी इस आग में मुझे थोड़ी देर और जलना था।

रात को लगभग घर लौटते लौटते साढ़े ग्यारह बज रहे थे। मेरा मन सब जगह खाली खाली सा लग रहा था, बस अब्दुल ही नजर आ रहा था। इंतजार खत्म हुआ। हम सभी कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगे ....

और मैं ....

जी हाँ, चुदने की तैयारी कर रही थी। चूत में और गाण्ड में चिकनाई लगा कर मल रही थी। चूंचियो में भी क्रीम लगा कर उसे खुशबूदार और चमकदार बना लिया था। बस एक हल्का सा नाईट गाऊन ऊपर से यूँ ही लटका लिया और समय का इन्तजार करती रही।

साढ़े बारह बजे तक जब मुझे यकीन हो गया कि अपने अपने कमरों में सब सो गये होंगे। तब मैं दबे पांव बैठक में से निकल पड़ी। पास के कमरे में सिसकारियों की आवाज से लगा कि भाभी और भैया का चुदाई का कार्यक्रम चल रहा था। आज सब औरते फ़्रेश थी, घर के काम से छुट्टी थी, सारी ताकत को चुदाई में लगा रही थी।

मैं बरामदे की सीढ़ियों से ऊपर आ गई। अब्दुल के कमरे की लाईट जली हुई थी। मैंने दरवाजा खोला तो अब्दुल तौलिया लपेटे खड़ा था। शायद अभी नहाया था, साबुन की खुशबू से मैंने अन्दाजा लगाया। मुझे ये अच्छा लगा,कि अब मैं उसके साफ़ सुथरे शरीर का पूरा आनद ले पाउंगी।

"बानो, तेरा तो अन्दर का सब कुछ दिख रहा है, बड़ी मस्त लग रही है तू !"

"तू भी तो मस्त लग रहा है, ये सिर्फ़ तौलिया ही है ना या अन्दर और भी है कुछ?" मैंने उसका तौलिया खींच लिया।

वो नंगा हो गया। उसका कड़क लण्ड सीधा खड़ा था। मेरा मन डोल उठा चुदने के लिये।

"चल आ मस्ती करें ! शावर के नीचे पानी में चलें, गीली गीली में करने से मजा आयेगा !"

मैंने देखा उसकी सांसे उखड़ने लगी थी। उसकी धड़कनें बढ़ गई थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और जा कर शावर के नीचे खड़ी हो गई। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और नीचे बैठ गई। उसके लौड़े को हाथ से सहलाने लगी। उसकी सुपाड़े की स्किन फ़टी हुई थी, मतलब वो पूरा मर्द था, किसी को चोद चुका था।

"किसी के साथ किया था.... बता ना !" मैंने लण्ड मुँह में लेते हुए कहा।

"नहीं अभी तक तो नहीं .... पर ये क्या कर रही हो, हटो !" उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। शायद उसे ये अच्छा नहीं लगा।

"क्यूँ क्या हुआ....मजा नहीं आ रहा है क्या ?"

"बस ये नहीं करो...." मुझे बाहों से पकड़ कर उठा लिया, और हम पानी की बौछार में फिर से लिपट पड़े।

"अच्छा पर तुमने कुछ तो किया है ना, अन्दर तो घुसाया ही है तुमने?"

"बानो, तुमने तो पकड़ लिया मुझे ! पर सच में ! वो यूसुफ़ है ना वो बड़ा खराब है !"

"अच्छा, क्या गाण्ड मरवाई थी उसने ?" मैंने उसे और खोलने की कोशिश की।

"चुप बानो, ऐसे क्या बोलती है !" उसने मुझे ऐसे कहने से मना किया।

"बोल ना, गाण्ड मारी थी उसकी....?" मुझे तो मजा लेना था।

"हाँ, कोशिश की थी, पर जोर से लग गई थी यहाँ पर ! बहुत तकलीफ़ हुई थी !"

"तो फिर क्या उसने तेरी गाण्ड चोदी थी ?"

"अब तुमने गाली बोली तो ठीक नहीं होगा !" उसने मुझे आगाह किया। पर मैं तो वासना में बह निकली थी। मुझे चुदाई की ऐसी बातें ही चाहिये थी।

"बता ना ! तूने गाण्ड मराई थी ना?" मैंने फिर जिद की।

"हाँ, उसने मेरी गाण्ड मार दी थी, बहुत दर्द हुआ था !" उसने शिकायत भरे लहजे में कहा।

"मुझे गीली करके चूत मारेगा या गाण्ड मारेगा?" मेरी चूत लपलपा उठी, चिकना पानी भर गया चूत में।

मेरी बातों को सुनकर वो नाराज हो गया और वहां से कमरे में आ गया और बिस्तर पर लेट गया।

"बानो क्या हो गया है तुम्हें ? ऐसी गालियाँ क्यूँ निकाल रही हो?" उसने फिर से शिकायत की।

पर मुझे अपना मजा लेना था।

मैं उसके पास आ गई और अपनी एक टांग ऊपर उठा कर उसके गले के पास रख दी और अपनी भीगी हुई चूत को उसके मुँह से लगा दिया। मेरी चिकनी चूत का पानी उसके मुँह के आस पास लग कर फ़ैल गया। वो कुलबुला उठा।

"अब्दुल, चल चूस ले, मुझे मस्त कर दे भेन-चोद, ये दाना हौले से मसल डाल !" मैं अपनी असलियत पर आती जा रही थी।

"चल हट ना, तू तो बेशरम हो गई है !"

"भोसड़ी के ! गाण्ड मरवा सकता है, चूत से परहेज कर रहा है? चूतिया है तू तो !"

मैंने उसके दुबले शरीर को कस कर भींच लिया। और उस पर चढ़ गई। उसका लौड़ा तो पहले से ही तन्ना रहा था। उसे अपनी चूत में दबा लिया और देखते ही देखते वो चूत में घुस गया।

"हरामी साले ! बड़े नखरे दिख रहा है रे ! एक लौड़ा क्या मिल गया तेरे को ! तो क्या खुदा हो गया है रे? मादरचोद ! तेरे जैसे सौ लौड़ों से चुद चुकी हूँ मैं !!" मैं उत्तेजना में बह चली।

मै ऊपर को धक्के लगाने लगी।

"अरे छोड़ दे रण्डी, छिनाल मुझे ! तेरी भेन चोदूँ ! साली हरामी, हट जा !"

"लगा ले जोर, तुझे आज मैं नहीं छोड़ने वाली, साला बड़ा आया था आशिकी झाड़ने।" मैंने उसे और कस कर जकड़ लिया। उसने भी अपनी ताकत लगा दी। जैसे जैसे वो ताकत लगाता, उसका लण्ड भी जोर मारता।

मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरे में जाने कहा से इतनी ताकत आ गई कि उसे मैंने बुरी तरह से दबा लिया। वो कराह उठा। मेरी चूत तेजी से भड़क उठी, और कस कस के उसके लौड़े पर चूत पटकने लगी। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

अचानक मेरा पानी निकल पड़ा और मैं झड़ने लगी। मैंने उसे और जोर से नीचे भींच लिया।

"बानो मेरी सांस रुक रही है, छोड़ दे प्लीज !" मुझे अचानक लगा कि अरे मैंने ये क्या कर दिया। अब्दुल का तो जैसे बलात्कार कर ही कर दिया। मैंने उसका कड़क लण्ड बाहर निकाला और उस पर से हट गई।

अब्दुल थका सा उठा, पर उठते मुझ पर झपट पड़ा और मुझे बिस्तर पर उल्टा पटक दिया।

"तेरी मां का भोसड़ा, अब बताता हू मैं...." उसने मुझे गाली देते हुये मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया। पर उसे क्या पता था कि मैं तो पूरी तैयारी से आई थी। लण्ड गाण्ड में घुसते ही मुझे मजा आ गया।

"हाय रे.... मेरी गाण्ड बजायेगा ना, देख धीरे बजाना, लग जायेगी मुझे !"

"हरामी तेरी माँ चुद जायेगी अब, तेरी गाण्ड फ़ाड़ कर रख दूंगा.... साली चुद्दक्कड़ .... मेरी माँ चोद दी तूने.... तेरी तो फ़ोड़ कर रख दूंगा !" गुस्से में वो कस के गाण्ड चोद रहा था। मुझे मस्त किये दे रहा था। मुझे इसी तरह की चुदाई चाहिए थी। मुझे ऐसी ही तूफ़ानी तरीके से चुदना अच्छा लगता था।

हां मेरे चूंचे जरूर उसने रगड़ कर रख दिये थे जो टीस रहे थे। पर उसमें भी मजा था। वो मेरे चूंचे अभी भी बुरी तरह से खींचे जा रहा था। बहुत दर्द होने लगा था। गाण्ड में भी आस पास दुखने लगा था। मेरे गालों पर उसने काट लिया था। मेरे चूचुकों को दांतो से कुचल दिया था।

और अब वो अंतिम चरण में था। कुछ ही देर में उसके लण्ड ने फ़ुफ़कार भरी और पिचकारी छोड़ दी, ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा और मेरे चूतड़ो पर फ़ैल गया। वो बार बार जोर मार कर लौड़े से अपना वीर्य बाहर फ़ेंक रहा था। कुछ ही पलो में वो पूरा झड़ गया।

मैं तुरन्त उसे धक्का दे कर अलग हो गई और खड़ी हो गई।

"मजा आया मेरे अब्दुल?"

"आप बहुत खराब हैं बानो, तुम भी युसुफ़ की तरह ही निकली.... देख मेरा लौड़ा, अब दर्द कर रहा है।"

"तू तो साला न तो लण्ड पीने दे और ना ही चूत का रस पीए, तो फिर जबरदस्ती करनी ही पड़ती है ना ! कोई एक और साथ में होती तो तेरे से जबरदस्ती अपनी रसीली चूत चुसवाती।"

"हाँ और ये लण्ड में दर्द जो हो रहा है, साली ऊपर से मुझे पूरा चोद दिया।" उसने अपना लौड़ा मुझे दिखाया। उसकी शिकायत पर मैं हंस पड़ी।

"दर्द तो तूने मेरी गाण्ड फोड़ी है ना उसका है, मेरी चूत तो देख अब तक रस से भरी खान है, लग ही नहीं सकती है तुझे।"

"तू अब जा बानो, मेरी तो तूने आज ऐसी तैसी कर दी !"

"और ये देख तूने तो मेरे चूचे लाल कर दिये, देख दोनों सूज के दुगने मोटे हो गए हैं, मर साले .... सुन अब्दुल, कल फ़िर ऐसे ही एक दूसरे को बजायेंगे !" कह कर मैं हंसी और धीरे से दरवाजा खोल कर दबे पांव नीचे अपने कमरे में आ गई।

मैंने जल्दी से अन्दर पेंटी पहनी और ब्रा डाल ली और बिस्तर में घुस गई। सब कुछ याद करके मुझे हंसी आ रही थी और खुशी भी हो रही थी अब्दुल को चोद कर, आज चुदाई करके मुझे मजा आ गया था, ऐसा जबरदस्ती वाला सुख मुझे जाने फिर कब मिलेगा।

मेरे चेहरे पर सुकून और शान्ति थी, चेहरे पर मुस्कान थी, दिल राजी था कि आज अब्दुल से चुदवा लिया, उसे फ़ड़फ़ड़ाता देख कर मजा भी आया था, पर हरामी ने मेरे चूंचो पर उसकी कसर निकाल दी थी........

धन्यवाद !

shamimbanokanpur@gmail.com

बरसों की वासना

Posted: 10 Mar 2013 10:33 PM PDT


हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम रीमा है और यह मेरा बदला हुआ नाम है ! आज मैं आप लोगों को मेरी आप बीती कहानी सुनाती हूँ !

आप लोगों को मैं बता दूँ कि मेरा साइज़ है - ३८,२६,३६ और मेरी उम्र २७ साल है ! मैं शुरू से ही सेक्सी दिखाई देती हूँ और मेरी शादी के बाद तो मेरे स्तन और भी बड़े हो गये थे ! मैं जब भी बाहर जाती तो सभी की नज़र मेरी गांड पर और मेरे वक्ष पर होती थी ! मैंने एक शेख से शादी की थी और शादी के बाद दुबई चली गई !

मेरी शादी के कुछ ही महीनों बाद मेरे पति का एक सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया ! मेरे पति का एक गारमेंट शॉप भी था और उस की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई ! मैंने मेरे पति के निधन के १ महीने के बाद शॉप पुनः खोली तो उस वक़्त कोई भी वर्कर नहीं था दुकान में, जिससे मुझे काफी परेशानी उठानी पड़ती थी ! मैंने एक अखबार में इश्तहार दिया की मुझे सेल्समैन की ज़रूरत है और यह भी छपवा दिया कि उसे रहने और खाने की सहूलियत भी दी जायेगी !

कुछ दिन बाद एक लड़के ने मुझे फ़ोन किया और कहा," क्या आप को किसी सेल्समैन की ज़रूरत है ?"

तो मैंने कहा," हाँ !" मैंने उसे पूरी बात बता दी और उस ने कहा कि वो कल से काम पर आ जायेगा !

फिर वो दूसरे दिन काम पर आ गया ! मैंने उसे देखा तो बस देखती ही रह गई क्यूंकि वो एक दम हट्टा-कट्टा था ! उसकी बॉडी भी अच्छी शेप में थी ! वो मेरे पास आया और उस ने मुझसे पूछा,"क्या आप ही रीमा हैं ?"

मैंने कहा," हाँ !"

तो उसने कहा," मैंने आप को कल फ़ोन किया था और और आप ने मुझे काम पर आने को कहा था !"

मैंने उसे कहा," यहाँ काम सुबह १० बजे से रात को ९ बजे तक करना होगा !"

वो राजी हो गया और मैंने उसे तनख्वाह के बारे में भी बता दिया और उसने कहा,"आपने और कुछ भी छपवाया था !"

मैंने पूछा,"क्या ?"

उसने कहा,"खाने का और रहने का ??"

मैंने कहा,"यहाँ मेरे पास एक कमरा है और खाना भी मेरे ही यहाँ खाना होगा ! "

तो उसने कहा,"मैं अभी आता हूँ !" और वो कुछ २ घंटे के बाद एक बैग के साथ आया !

मैंने उससे पूछा," इस में क्या है?"

उसने कहा," यह मेरा सामान है ! " और वो काम पर लग गया ! रात को जब मैं दूकान बंद कर के घर जाने लगी तो उसने मुझे पीछे से आवाज़ लगाई," मैडम, मैडम ! "

मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वो समीर था और फिर हम लोग घर आ गये ! मैंने उसको खाना दिया और मेरे घर के बाहर एक कमरा भी दे दिया ! फिर मैं सोने चली गई !

फिर कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा ! रविवार को मैं दुकान बंद रखती थी तो उस दिन समीर अपने कमरे में कसरत कर रहा था ! मैं उसे मेरे बेडरूम में से देख रही थी ! उसे देखते ही न जाने मुझे क्या हो जाता था, मैं बस अपनी चूत को और अपने बूब्स को सहला देती थी और अपनी चूत में ऊँगली या मूली डाल कर चुदाई करती थी !

अब मैंने सोच लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं इस लड़के से चुदवा कर रहूंगी !

मैंने धेरे-धीरे अपना कपड़े पहनने का स्टाइल बदल दिया और एक दम लो-कट गाउन पहनती थी ! जब भी वो मेरे करीब होता तो मैं जानबूझ कर मेरा दुपट्टा हटा देती थी ताकि उसे मेरे आधे स्तन दिखाई दें ! वो मेरे बूब्स को देखता ही रह जाता था ! और फिर मैं उसे रोज़ अपने ही घर में खाने को बुलाती थी और घर पर मैं सिर्फ पारदर्शी गाउन पहनती थी जिस से उसे मेरा सारा बदन दिखाई दे !

एक रात मैंने उसे कहा- मेरे सारे बदन में दर्द है ! उस दिन शनिवार था और दूसरे दिन दूकान बंद थी !

उसने कहा,"क्या मैं आपका बदन दबा दूं ?"

मैंने कहा,"ठीक है !"

मैं उसे अपने बेडरूम में लेकर आ गई और बेड पर पेट के सहारे लेट गई ! उस ने मेरी पीठ पर जैसे ही हाथ रखा ,मेरे तो तन बदन में जैसे एक आग दौड़ गई क्यूंकि मुझे किसी मर्द ने पूरे 6 महीने के बाद हाथ लगाया था ! उसने मेरी बरसों की वासना को फिर से भड़का दिया ! फिर कुछ देर पीठ को दबाने के बाद मैंने उसे कहा,"मैं अपना गाउन उतार देती हूँ ताकि तुम्हें आसानी हो बदन दबाने में !"

मैंने झट से अपना गाउन उतार दिया ! अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में ही थी और वो मुझे घूर-घूर कर देख रहा था ! मैंने भी उस का उभरा हुआ लंड देख लिया था ! अब मुझे और भी मज़ा आने लगा ! मैंने उसे कहा," क्यूँ न तुम भी अपने कपड़े उतार दो ....!"

पहले तो वो शरमाया लेकिन मेरे थोड़ा कहने पर उसने अपने कपड़े उतार दिए , सिवाए अंडरवियर के ! मैंने उसके अंडरवियर के अन्दर फूले हुए लण्ड को देखा ! फिर मैंने उसे कहा,"मेरी ब्रा भी खोल दो !"

उसने झट से ब्रा को खोल दिया और मैं पीठ के बल लेट गई ! वो मेरे बूब्स को देखता रहा !

मैंने उसे कहा," ज़रा मेरे बूब्स भी दबा दो............! "

उसने बड़े ही मुलायम हाथों से मेरे बूब्स को दबाया ! थोड़ी देर मेरे बूब्स दबाने के बाद मैंने उस का लंड पकड़ लिया तो वो हैरान हो गया ..............!

मैंने उससे कहा," इसमें हैरान होने की कोई बात नहीं है ! तुमने भी तो मेरे बूब्स को दबाया है ! अब मैं भी तुम्हारा लंड दबाउंगी! " मैंने उसका अंडरवियर उतारा और उसका लंड अपने मुंह में ले लिया और उसे चूस-चूस कर उस का पानी निकाल दिया !

फिर मैंने उसे कहा,"अब तुम्हारी बारी ......!"

उस ने मेरी पैंटी उतारी और अपनी ऊँगली से मेरी चूत को चोदने लगा ! मैं जोश के कारण , आआआआआ ऊऊऊऊऊऊऊ अहहहहहाहा म्म्म्म्म्म कर रही थी ! फिर मैं भी झड़ गई और उसने मेरा सारा पानी पी लिया ! फिर हम लोग एक दूसरे से लिपट कर सोये रहे !

फिर कुछ देर के बाद मैंने उस को एक स्प्रे दिया जो मेरा पति इस्तेमाल करता था ! वो स्प्रे लंड पर छिड़कने से लंड तकरीबन १ घंटे तक अपना पानी नहीं छोड़ता है ! फिर मैंने वो स्प्रे उसके लंड पर छिड़का और उस का लंड खड़ा हो गया ! अब मैंने अपनी टांगें फैला ली और उसे अपनी चूत का द्वार दिखाया ! मैंने उसे इशारा किया कि वो अपना लंड मेरी चूत में डाल दे ! उसने अपना लंड मेरी चूत के द्वार पर रखा और एक झटका मारा ! मेरे मुंह से एक चीख निकली, " आआआआआआआ " मैंने 6 महीने से लंड नहीं खाया था न, इसी लिए ! उसने एक और धक्का मारा जिससे कि उसका लंड मेरी चूत में समा गया ! मैंने उस का लंड वैसे ही अपनी चूत में रहने दिया और फिर २ मिनट के बाद उस ने मुझे चोदना शुरू किया !

"वाह ! क्या मज़ा आ रहा था ! मैं तो जैसे स्वर्ग में थी ! "

मेरे मुंह से आआआ ऊऊऊऊ म्म्म्म्म्म्म्ममअहहहहह की आवाजें निकलने लगीं ! जोश के कारण वो बोलने लगी,"और चोदो, और चोदो, और चोदो ! "

उसने कहा, "ले रांड ! और ले ! खा मेरा लंड ! फिर उस ने मुझे कुतिया बनाया और मुझे खूब चोदा ! फिर तकरीबन एक घंटे बाद वो झड़ने वाला था तो उसने मुझसे कहा," मैं झड़ने वाला हूँ !"

उसके झड़ने से पहले ही मैं तीन बार झड़ चुकी थी तो मैंने उसे कहा," मेरी चूत में ही झड़ जाओ !"

वो मेरी चूत में ही झड़ गया ! मैंने उस रात उस से 6 बार चुदवाई और आज भी मैं उससे रोज़ चुदाती हूँ !!!!

seema_khan791@yahoo.com




 

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