हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


सेठानी की चुदाई

Posted: 14 Mar 2013 11:36 AM PDT


हाय दोस्तो, मेरी उम्र 27 साल है, मैं कोइम्बटोर तमिलनाडु में नौकरी करता हूँ।

आज पहली बार मैं सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ।

मेरे सेठ के परिवार में मेरे सेठजी, सेठानी और उनका एक लड़का जो 8 साल का तीसरी कक्षा में पढ़ता है, रहते हैं। कुल मिला कर 4 लोग हैं, सेठजी की दुकान पर वैसे तो और भी 3-4 लोग काम करते हैं लेकिन वे सब तमिल हैं जो अपने-अपने घर चले जाते हैं, सिर्फ मैं सेठजी के घर पर रहता हूँ।

हमारा काम सुबह 9.30 बजे दुकान आना और रात को 8.00 बजे दुकान बंद करके घर पर चले जाना है।

मेरे सेठजी की उम्र 40 और सेठानी की 32 है। सेठजी पूरा दिन दुकान में लगे रहते हैं और अपनी सेहत का ख्याल न रखने की वजह से 45-50 के लगते हैं, वहीं हमारी सेठानी ब्यूटी पार्लर और योग से अपने फिगर को पूरा ख्याल रखती है। मेरी सेठानी का फिगर 38-26-36 का है।

दोपहर को मैं घर जाकर सेठानी के हाथ का बढ़िया खाना खाकर सेठजी का खाना टिफिन में लेकर दुकान चला आता हूँ।

एक दिन की बात है, दोपहर को जब मैं घर गया तो सेठानी स्नान कर रही थी। स्नान करते समय उसका पाँव फिसल गया तो वो ज़ोरों से दर्द से चिल्लाई... उ इ माँ, मर गई।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो बोली- पाँव में मोच आ गई है आयोडेक्स लाओ।

फिर मैंने सहारा देकर उन्हें हॉल तक पहुँचाया। उसने मेरे कन्धों पर हाथ रख दिया और मैंने उनकी कमर में।

वाह क्या जन्नत थी मेरे लिए, उस क्षण मेरा लंड एकदम से खड़ा होकर खम्भा हो गया था। उन्हें सोफे पर बिठा कर मैं उसके पाँव पर आयोडेक्स लेकर मालिश करने लगा। उसके गोरे-गोरे पाँव इतने हसीन थे कि मन क़ाबू में करना मुश्किल हो रहा था। मेरे हाथ काँप रहे थे मालिश करते हुए।

सेठानी ने प्यार से कहा- मालिश ढंग से, जोर से करो, तो ही मोच जाएगी।

और उन्होंने अपना गाउन घुटनों तक ऊपर उठा दिया।

वाह क्या नज़ारा था, उसकी गोरी-गोरी पिंडलियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मालिश मैं कर रहा था, मज़ा दोनों को आ रहा था। अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी और मेरा हाथ घुटनों तक पहुँच रहा था। सेठानी आँख बंद करके सोफे पर लेटी हुई थी।

धीरे-धीरे मेरा हाथ घुटनों से ऊपर जाने लगा तो सेठानी ने पूछा- क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- सेठानी जी, आज मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूँ, प्लीज़ आज मुझे मत रोकिए।

सेठानी बोली- कोई देख लेगा तो?

उनके इतना कहते ही मैं समझ गया कि आग दोनों ओर बराबर की लगी है। फिर मैंने दरवाजा बंद किया और सेठानी को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। सेठानी जान चुकी थी कि आज उसकी चुदाई होकर रहेगी।

मैंने हिम्मत करके पूछा- सेठजी चोदते हैं क्या?

"कभी-कभार करते भी हैं तो उनका लंड अन्दर जाते ही झड़ जाता है, फिर मैं ऊँगली डाल कर अपनी प्यास बुझाती हूँ, वो तो आराम से खर्राटे मारते हैं।"

"सेठानी जी अब आप चिंता मत करो, जब भी आप चाहो, आपकी चुदाई मैं करूँगा।"

"बाथरूम में मेरा कोई पाँव नहीं फिसला था, वो तो एक बहाना था तुम्हें झाँसे में लेने का। मेरा तो उसी दिन से तुमसे चुदने का मन था जिस दिन तुम हमारे यहाँ पहले दिन नौकरी पर लगे थे।" - सेठानी ने रहस्योद्घाटन किया।

अब मैंने सेठानी का गाऊन ऊपर कर उतार दिया। ब्रा और चड्डी में सेठानी वाकई हसीन लग रही थी। सेठानी भी मेरे कपड़े उतारने लगी, मेरा लंड देखते ही वो बड़ी खुश हुई और अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई।

मैंने कहा- आराम से चूसो, दाँत मत चुभोना, नहीं तो दर्द होगा।

उसके चूसने का अंदाज़ महसूस करके मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था। मैं एक हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था, दूसरा हाथ चूत पर सहला रहा था।

अब तक सेठानी गर्म हो चुकी थी, सेठानी ने कहा- अब सहा नहीं जाता, जल्दी से मेरी खुजली शांत कर दो !

मैंने सेठानी को कहा- अब आप मेरे ऊपर आ जाओ।

सेठानी तुंरत मेरे ऊपर आकर लंड को हाथ से चूत का दरवाजा दिखा रही थी। मैंने कमर से एक धक्का ऊपर की ओर दिया और सेठानी ने नीचे की ओर, और लंड चूत के अन्दर।

अब सेठानी आराम से धक्के लगा रही थी और मुझे स्वर्ग का आनंद आ रहा था। मैं दोनों हाथों से अब सेठानी की चूचियाँ पकड़ कर मसल रहा था। सेठानी आनंद विभोर हो रही थी। करीबन दस मिनट के बाद मैं सेठानी को नीचे लिटा कर उनके ऊपर आ गया और लंड एक बार फिर चूत में घुसा दिया।

सेठानी बोली- चोदो राजा, ज़ोर से चोदो, बहुत मज़ा आ रहा है। ऐसा मज़ा तो कभी नहीं मिला।

मैंने धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर सेठानी चूतड़ उठा कर साथ दे रही थी। दस मिनट बाद सेठानी हाँफने लगी ओर कहा- अब मैं झड़ने वाली हूँ।

तो मैंने कहा- मुझे कस कर पकड़ लो, मैं भी गया।

और हम दोनों शिथिल अवस्था में कुछ देर पड़े रहे।

उसके बाद जब भी मौक़ा मिलता, मैं सेठानी को बीवी की तरह ही चोदता। सेठानी भी मुझे बहुत खुश रखती थी। तरह-तरह के पकवान व्यंजन बना कर खिलाती थी। मैं दुकान की वसूली, बैंक के काम का बहाना बना कर सेठानी को चोद कर आ जाता था। सेठजी को भनक तक नहीं पड़ती थी।

अब सेठानी सेठ का भी ख्याल न रख के मेरा ध्यान अधिक रखती थी। मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे। मुफ़्त की चूत, अच्छा खाना, और सेठ जी से तनख्वाह। सेठ मेरे काम से खुश, सेठानी मेरे लंड से खुश !

मैं दोनों खुशियों से बहुत खुश।

यह कहानी आपको कैसी लगी और.. आप कैसी कहानी पढ़ना पसंद करते हैं ?

ms.man300@rediffmail.com

रंडी रेखा चाची

Posted: 14 Mar 2013 09:27 AM PDT


मेरा नाम अनमोल है, मैं 25 साल का हूँ। मेरी चाची का नाम रेखा है, वो 40 वर्ष की हैं। चाची, चाचा अपने चार बच्चों के साथ फिरोजपुर में रहते हैं। मैं भी पास के ही एक शहर में रहता हूँ।

जब मैं 15 का था, तब चाचा की शादी हुई थी। चाची को पहली लड़की हुई, दूसरी बार में भी लड़की हुई। तब तक मेरी उम्र 18 से ऊपर हो गई थी, मैं चाची से हंसी मजाक करता रहता था, चाची भी मुझसे खुलकर बात कर लेती थी। कभी कभी चाची मजाक में मेरी शादी की बात करती तो मैं भी कह देता- चाची, अभी मैं बड़ा कहाँ हुआ हूँ।

चाची भी चालू थी, कहती- तो फिर मैं बड़ा कर दूँ?

हम हर बात आपस में शेयर करते थे। एक बार चाची ने कहा- तेरे चाचा लड़का चाहते है पर दो बार लड़की ही हुई।

मैंने कहा- चाचा को बोलो, इस बार अच्छी तरह करें।

चाची जानते हुए भी भोली बनकर बोली- क्या करें?

मैंने कहा- वही, जो आपने चाचा के साथ पहले दो बार में किया।

चाची ने कहा- तो तुझे पता है?

मैंने कहा- हाँ !

"तुझे आता है अच्छी तरह करना?"

चाची अब खुल कर बात करने लगी। मैं भी अब जोश में आ गया। चाची की उम्र उस समय 33 साल की थी। रंग गोरा, कद 5'5", क्या फिगर था, एक दम सही शेप में, और मोम्मे जैसे खरबूजे !

जब चाची ब्रा नहीं पहनती थी तो चुच्चों का उभार जैसे दूध की बोतल के निप्पल।

चाची के ऐसा कहने पर कि तुझे आता है अच्छी तरह कैसे होता है, मैंने कहा- हाँ, जैसे वीडियो में करते हैं।

चाची ने कहा- वीडियो?

मैंने कहा- हाँ।

मुझे नहीं पता था कि चाची ने कभी ब्ल्यू फिल्म देखी है या नहीं।

तब मैंने अपने मोबाईल पर एक छोटी वीडियो दिखाई जिसमें लड़का लड़की किस कर रहे थे।

चाची पहले शरमाई, फिर बोली- शरारती ! तू मोबाईल में ये सब देखता है?

मैंने पूछा- चाची, क्या आपने पहले कभी ऐसी वीडियो नहीं देखी?

एक प्यारी मुस्कुराहट के साथ चाची बोली- हाँ ! तेरे चाचा एक दो सीडी लाए थे।

मैंने कहा- कौन सी?

कुछ देर बाद चाची एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी ले आई। इसके बाद हम खुल गए। अब चाची मुझसे सीधे ही लौड़े चूत की बात करने लगी।

बाद में हमने एक ब्ल्यू फिल्म भी देखी जिसमें लड़का अंत में अपने 8 इंच लम्बे लण्ड से वीर्य की मोटी धार लड़की के चेहरे पर फ़ेंक देता है।

एक साल बाद चाची एक और लड़की हो गई।

मेरी छुट्टियाँ थी तो पापा मुझे अपने साथ बच्चे को देखने लाए। अगले दिन पापा घर चले गए, मैं चाचा के घर रुक गया।

क्योंकि चाचा भी दुकान पर जाते थे। घर में मैं और चाची ही रहते थे, बच्चे स्कूल चले जाते।

चाची ने कहा- देखा, इस बार भी लड़की हुई।

चाची परेशान थी, चाची ने कहा- काश, कोई ऐसा रास्ता होता कि लड़का पैदा होता।

चाची बच्चे को दूध पिलाने लगी। कमीज ऊपर करते ही चाची का मोम्मा मटकता हुआ नीचे आया। हाय गोल, गोरा, चिकना खरबूजा ऊपर से काले रंग का जामुन जैसा निप्पल काफी मोटा उभरा हुआ था।

एक हफ़्ते बाद मैं घर आ गया पर चाची अब मेरे दिल में समा गई। मेरा लण्ड अब चाची को चोदना चाहता था।

पेपरों के बाद छुट्टियों में मैं चाची के घर आ गया। चाची मेरे आने से खुश थी। हम हंसी मजाक करते, बल्यू फिल्म भी देखते। मैंने बाथरुम के दरवाजे में छेद कर दिया, अब मैं चाची को नंगा भी देखने लगा। चाची की चूत पर बाल नहीं होते थे। शायद शेव करती थी।

पर एक दिन जब हम बल्यू फिल्म देख रहे थे तो चाची मेरे करीब आने लगी, चाची का हाथ मेरी जांघ पर आ गया। एक तो बल्यू फिल्म, ऊपर से चाची हाथ फेरने लगी, मेरा लण्ड खड़ा होकर कड़क हो गया। पजामे में पहाड़ जैसा उभार आ गया।

मैंने कहा- चाची, बस करो ! ये क्या कर रही हो?

चाची उदास थी, परेशान भी, थोड़ी हिचक के बाद चाची ने मन की बात बता दी- अनमोल, मैं परेशान हूँ और तेरे चाचा भी। लड़का न होने से उन्होंने मुझे तुम्हारे यहाँ आने से पहले रात भर बुरी तरह चोदा, मेरी चूत सूज कर गुब्बारा हो गई है।

मुझे पता है इस बार भी लड़का नहीं होगा इसलिए मैंने आई पिल गोली ले ली थी।

मैंने कहा- पर मैं इसमें क्या कर सकता हूँ।

चाची बोली- अब तुम मुझे चोद दो ! हो सकता तुमसे लड़का हो जाए।

मैंने कहा- अगर ना हुआ तो?

चाची बोली- कोई बात नहीं, नाम चाचा का ही आएगा, तुम्हारा और तुम्हारे चाचा का खून तो एक ही है। रिपोर्ट भी चाचा को ही बाप साबित करेगी।

मैं मान गया।

इसके बाद हमने कपड़े उतारे, मैंने पहले कभी सेक्स नहीं किया था।

चाची ने कहा- तुम घबराओ मत, बस लेट जाओ, चुदाई का काम मैं आप ही कर लूँगी।

ऐसा कह कर चाची मुझे जीभ से चाट चाट कर चूमने लगी। फिर चाची ने अपना मोम्मा मेरे मुँह में डाल दिया और चूसने को कहा। मैं भी चाची के दूध भरे जामुनों का मजा लेने लगा।

अब चाची ने मेरा तना हुआ लण्ड अपने हाथ में लिया और मुठ मारने लगी। मैं भी अपने लौड़े की मुठ्ठ मारा करता था।

अब मेरा पूरा चिपचिपा लेस वाला लौड़ा बड़े मजे से चूस रही थी।

फिर रेखा चाची ने अपनी चिकनी, पनियाली चूत मेरे लण्ड पर रखी और उछल उछल कर लण्ड को चूत के अंदर-बाहर करने लगी।

मेरा हाथ मेरी चुदक्कड़ चाची रेखा के बड़े कूल्हों पर सटे थे।

पूरे कमरे मे छपधप की आवाज आ रही थी। बीच-बीच में रेखा चाची के नर्म मोटे चूतड़ों को दबाता और गाण्ड के अन्दर उंगली डालता तो इससे चाची को काफी मजा आ रहा था।

10-15 मिनट बाद मेरा गरम गरम गाढ़ा वीर्य चाची की चूत में प्रवेश कर गया। अब चाची खुश थी।

चाची ने मुस्कुराते हुए मेरे होंठों पर बड़ा सेक्सी किस दिया।

और संयोग से पूरे समय के बाद चाची को लड़का हो भी गया। मैं बाप बन गया था। रेखा चाची अब मेरी रखैल बन गई थी।

अब मेरा जब मन करता, मैं अपनी रंडी रेखा चाची को चोद लेता और चाची को चाहते, ना चाहते हुए भी चुदवाना पड़ता।

anmol5233@yahoo.com




 

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