हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


मेरी पत्नी की बहनें-3

Posted: 01 Mar 2013 08:42 AM PST


मैं मोनिका को चोदता रहा। थोड़ी देर में मोनिका के चूत से पानी निकलने लगा। मेरे लंड ने भी पानी छोड़ देने का सिगनल दे दिया,

मैंने मोनिका से कहा- बोल कहाँ गिरा दूँ माल?

वो बोली- मेरे मुँह में।

मैंने अपने लंड को उसके चूत से निकाला और अभी उसके मुँह में भी नहीं डाला था कि मेरे लंड ने माल छोड़ना चालू कर दिया। इस वजह से मेरे लंड का आधा माल उसके मुँह में और आधा माल उसके गाल और चूची पर गिर गया। फिर भी वो प्यासी कुतिया की तरह मेरा लंड चूसती रही।

उसने अन्नू को अपनी चूची दिखाई और कहा- अन्नू, ले माल को चाट ! मज़ा आएगा।

अन्नू ने बिना देर किये मोनिका की चूची को चाटना शुरू कर दिया और उस पर गिरे मेरे माल को चाट चाट कर खत्म कर दिया।

मुझे काफी मज़ा आ रहा था लेकिन मैंने गौर किया कि अन्नू भी काफी अंगड़ाई ले रही थी, इसका मतलब कि अब उसकी चूत में भी खुजली हो रही थी।

मैंने मोनिका को कहा- अब तेरी छोटी बहन की बारी है। देख तो कैसा अकड़ रही है?

मोनिका अपनी चूत को साफ़ करती हुई बोली- इसकी तड़प को रोकने का एक ही उपाय यह है कि इसे भी अभी चोद दीजिये। क्यों री अन्नू? चुदवायेगी ना? बहुत मज़ा आएगा।

अन्नू बोली- लेकिन दीदी, तू तो अभी कराह रही थी, लग रहा था कि तुझे काफी दर्द हो रहा था।

मोनिका- अरी पगली, वो दर्द नहीं ..मज़ा था री ! तू भी चुदवा कर देख ना !

अन्नू ने कहा- लेकिन दीदी तूने ही तो एक दिन कहा था कि चूत पर पहला हक पति का होता है?

मोनिका- धत पगली ! साली के चूत पर पहला हक तो जीजा का ही होता है न। चल अब ये सब छोड़ और लेट जा ! देख जीजू अभी तुझे जन्नत की सैर करायेंगे।

अब मैंने अन्नू को अपने नीचे लिटाया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा। मुझे पता था कि यह लड़की अभी गरम है। इसे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं है। मैं उसकी चूची को दबाने लगा, वो कुछ नहीं बोल रही थी सिर्फ मुस्कुरा रही थी।

मैं एक हाथ उसकी चूत पर हाथ ले गया।

ओह ! उसकी चूत तो बिल्कुल गीली थी। मैंने अब कोई तकल्लुफ नहीं किया अब वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी। मैं उसके होठों को बेतहाशा चूमने लगा। अब वो भी मुझे जोरदार तरीके से मेरे होठों को चूमने लगी। अब वो मेरा साथ देने लगी थी। वो भी मोनिका की चुदाई देख कर मस्त हो चुकी थी। उसकी चूचियाँ तो मोनिका से भी नरम थी। आखिर उसकी चूत का भी मैंने उद्धार किया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।

लेकिन जैसे ही मैंने डाला, वो चीखने लगी। उसकी चूत का छेद अभी छोटा था।

मोनिका ने कहा- एक मिनट जीजू ! यह क्रीम इसकी चूत में लगा लीजिये, तब चोदिये, तब इसे दर्द नहीं होगा।

मैंने अन्नू के चूत से अपना लंड निकाल लिया, मोनिका ने वैसलिन क्रीम को अन्नू की चूत पर अच्छी तरह से मला। अन्नू चुपचाप अपने चूत पर वैसलिन लगवा रही थी।

मैंने अन्नू की चूची को दबाते हुए कहा- मोनिका, तूने तो अपनी चूत पर वैसलिन नहीं लगाई थी?

मोनिका ने कहा- मुझे तो मोटे बैंगन अपने चूत में डालने की आदत है ना ! यह अन्नू की बच्ची तो सिर्फ मोमबत्ती ही डालती है अपनी प्यारी सी चूत में। इसलिए आपका मोटा लंड इसे चुभ रहा है लेकिन अब नहीं चुभेगा। मैंने वैसलिन लगा दी है इसकी चूत में, अब आप इसकी चूत में अपना लंड बेहिचक डालिए।

मैंने फिर से अन्नू के चूत में अपना लंड धीरे धीरे डालना शुरू किया, इस बार भी वो थोड़ी चीखी लेकिन जल्दी ही अपने आप पर काबू पा लिया।

4-5 झटकों में ही उसकी भी झिल्ली फट गई और उसकी चूत से खून निकलने लगा लेकिन मैंने लंड के धक्के से उसकी चुदाई जारी रखी। थोड़ी देर में ही उसकी चूत भी खुल गई, वो भी अपनी दीदी की तरह जोश में आ गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गर्दन को लपेट लिया और मेरे होठों को चूमने लगी।

उसकी जम कर चुदाई के बाद मेरे लंड से भरपूर माल निकला जो कि उसकी चूत में ही समा गया।

मैं अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसकी बगल में लेट गया।

तब मोनिका ने अन्नू की चूची को दबा कर बोली- क्यों बहना, मज़ा आया ना?

अन्नू ने कहा- हाँ दीदी ! एक बार फिर करो ना जीजू?

मोनिका ने कहा- नहीं, पहले मेरी चूत में भी रस डालिए तब अन्नू की बारी !

मोनिका मेरे बगल में लेट कर अपने दोनों टांगो को आजु-बाजू फैला कर अपनी चूत मेरे सामने पेश कर मुझे न्योता देने लगी।

मेरा लंड अभी थका नहीं था। मैं तीसरी बार चूत चोदने के लिए तैयार था। मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना लंड उसके चूत में प्रवेश करा दिया।

मोनिका- हाय राम ! जीजू कितना हरामी है रे तू? धीरे धीरे डाल न..

मैंने कहा- देख कुतिया, अभी मैं तेरी कैसी चुदाई करूंगा कि इस जन्म में दोबारा चुदाई का नाम ना लेगी तू।

मेरी बात सुन कर मोनिका ने हँसते हुए कहा- जा रे हिजड़े, तेरे जैसे दस लंड को मैं अपनी चूत में एक साथ डाल लूं तो भी मेरी चूत को कुछ नहीं होने वाला।

मैंने भी हँसते हुए कहा- तो ये ले.. सभाल इसे।

कह कर मैं काफी जोर जोर से उसके चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगा। पहले तो वो सिर्फ अपने होंठों को दांतों में दबा कर दर्द बर्दाश्त करती रही लेकिन थोड़ी देर में ही उसकी चीखें निकलने लगी, वो हल्के स्वर में चिल्लाते हुए कहने लगी- हाय रे ! मादरचोद, फाड़ डाला रे, साले जीजू, कुत्ता है तू ! एक नम्बर का रंडीबाज है। आदमी का लंड है या गधे का लंड। साले कुछ तो रहम कर मेरी नाजुक चूत पर !

मुझे उसकी गालियाँ काफी प्यारी लग रही थी। उसकी गालियाँ मेरा जोश बढ़ा रही थी। मैं जानता था कि उसे काफी मज़ा आ रहा है क्योंकि इतने दर्द होने के बावजूद वो अपनी चूत से मेरा लंड निकालने का प्रयास नहीं कर रही थी।

इस बार मैंने मोनिका के चूत को घमासान तरीके से 20 मिनट तक चोदा। इस घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड से लावा फ़ूट पड़ा और सारा लावा उसके चूत में ही गिराया।

मोनिका की हालत देखने लायक थी। वो इतनी पस्त हो चुकी थी कि बिना कोई करवट लिए जैसे की तैसी लेटी लेटी ही सो गई।

मोनिका तो थक कर सो गई लेकिन अब अन्नू कहने लगी- मेरे मुंह में भी रस पिलाइये जैसे दीदी को पिलाया था। और मेरी भी चूत चूसिये जैसे आपने दीदी की चूसी थी।

मेरी भी तो अब हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन मैं यह लोभ छोड़ना भी नहीं चाहता था और अन्नू को दुखी भी नहीं करना चाहता था।

मैंने कहा- अन्नू, यह मेरा लंड आपके हवाले है। आप इसे चूस कर इससे रस निकाल लीजिये।

अन्नू बोली- ठीक है।

मैं बिस्तर पर लेट गया। अन्नू मेरे बदन पर इस तरह से लेट गई कि उसकी चूत मेरी मुँह के ऊपर और वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं उधर उसकी चूत को चूस रहा था। जवान लड़कियों में रस की कमी नहीं रहती। उसकी चूत से लगातार रस निकल रहा था। सचमुच अद्भुत स्वाद था।

उधर मेरा लंड फिर तनतना गया, उसके चूसने का अंदाजा भी निराला था। मैंने उसे फिर से सीधा लिटाया और उसकी दोनों टांगों को अपने कन्धों पर रखा। उसकी चूत को दोनों हाथ से सहलाने के बाद अपना लंड पकड़ कर उसके चूत में डाला लेकिन मैं अन्नू को बड़े ही प्यार से धीरे धीरे चोदता रहा। वो मेरे इसी अंदाज़ पर मज़े ले रही थी। इस बार काफी देर तक उसकी चूत की चुदाई करने के बाद मेरे लंड ने चौथी बार क्रीम निकालने का सिगनल दिया।

मैंने करहाते हुए अन्नू से पूछा- माल पीना है या डाल दूँ चूत में ही?

अन्नू ने भी दर्द भरे स्वर में कहा- मुझे पीना है।

मैंने जल्दी से लंड को उसकी चूत से निकाला और अन्नू के मुँह को खोल कर उसके मुँह के पास लंड ले जा कर हाथ से 3-4 बार मुठ मारा ही था कि मेरे लंड महाराज ने चौथी बार लावा निकाल दिया।

सारा लावा अन्नू ने अपने मुँह में गटक लिया और बड़े ही चटखारे ले ले कर पिया। आखिर उसकी चूत से भी रस निकल गया जो सचमुच किसी जूस से कम नहीं था।

उसके बाद मैं भी अन्नू के साथ ही उसी के बिस्तर पर ही सो गया। रात करीब दस बजे हम लोग उठे मोनिका और अन्नू दोनों ही चल नहीं पा रही थी। मैं खाने के लिए बाहर गया और उन दोनों के लिए भी भरपूर मात्रा में खाना पैक करवाया और दो बोतल बियर और एक पैकेट सिगरेट ले लिया।

वापस आने पर उन दोनों को 2-2 गिलास बियर पिला कए खाना खिलाया। पहले तो दोनों मना करती रही। लेकिन जब मैंने कहा कि इससे कोई हानि नहीं होगी बल्कि तुम दोनों का बदन और चूत दर्द ठीक हो जाएगा तब दोनों ने बियर को पीया। फिर दोनों को एक एक सिगरेट भी पीने को दिया। पहले तो वो दोनों सिगरेट में भी ना ना करती रही लेकिन जब मैं सिगरेट पी रहा था और एक कश लेने के लिए अन्नू को दिया तो वो छोटी छोटी कश लेकर समूची सिगरेट ही पी गई। उसकी देखा देखी मोनिका भी एक सिगरेट छोटी छोटी कशों में पूरी पी गई। इस से सचमुच उन दोनों का दर्द समाप्त हो गया। शेष एक बोतल बियर और 3 सिगरेट मैं अकेले ही पी गया। हम सभी इतने में फिर से मस्त हो चुके थे। इसके बाद हम तीनों में कोई पर्दा नहीं रह गया, हम तीनों नंगे होकर रात भर सेक्स गेम खेलते रहे।

उसी रात को मैंने दोनों की गांड का भी उद्धार कर दिया। हम तीनो सुबह के सात बजे सोये। मैंने अपने लिए अलग कमरा को भी रखे रखा। जहाँ मैं कभी कभी दोनों में से किसी एक को अपने कमरे में ले जाकर एकांत में भी चोदता था।कभी कभी एकांत में भी तो चुदाई होनी चाहिए ना !

शेष सातों दिन हम तीनों ने साथ मिल कर चुदाई का तरह तरह का खेल खेला।

घर वापस आने के बाद भी चुपके चुपके हम तीनों रंगरेलियाँ मना ही डालते हैं।

तो देवियों और सज्जनों आपको मेरी और मेरी सालियों की रासलीला कैसी लगी? मुझे मेल करके बताएँ।

mayankasm@gmail.com

चाचू को मस्ती से चोदा

Posted: 01 Mar 2013 08:37 AM PST


मैं छत पर बैठी हुई अपने ख्यालों में डूबी हुई थी। मुझे अपनी कक्षा में कोई भी लड़का अच्छा नहीं लगता था और ना ही कोई लड़का मेरी ओर देखता ही था।

हिंदी सेक्सी कहानियां की कहानियाँ भी मुझे वास्तविक नहीं लगती थी। कभी देवर अपनी भाभी को चोद रहा है तो कभी चाची की चुदाई हो रही है।

नौकरानियाँ भी अकसर चुदती रहती हैं। लड़के आपस में गाण्ड मारते-मराते हैं, समधन को समधी ने चोद डाला या फिर अपने दामाद से ही चुदवा लिया। पर यहाँ तो ना मुझे कोई देखता है और ना ही मुझे कोई ऐसा लगा कि मैं जिससे चुदा सकूँ।

शायद इसी भावना के रहते मैंने कभी चुदाई की तरफ़ ध्यान नहीं दिया। मैं बार बार अपनी उभरी हुई चूचियों को निहारती, उन्हें दबाती भी, पर मुझे कोई भी सिरहन सी नहीं होती है। चूत को सहलाने से भी ऐसी कोई चुदवाने की इच्छा भी बलवती नहीं होती है।

हुंह ! यह सब बकवास है ... मात्र समय बरबाद करने का एक तरीका है।

फिर भी लड़कियाँ चुदती तो हैं ना !

उंह ! भला क्या मजा आता होगा।

"क्या बात है ... कहाँ खोई हो...?" चाचा ने मेरी कुर्सी को पीछे शरारत से झुला दिया।

"ओह चाचा ... कुछ नहीं बस यूँ ही... ईईई ... मत करो ना, मैं गिर जाऊँगी !" मैं घबरा कर बोल उठी।

कुर्सी को सीधे रखते हुये वो मुझे नीचे से ऊपर तक निहार कर बोले,"आज तो बहुत सुन्दर लग रही हो?"

"चाचा ... आप भी ना ... मुझे क्या छेड़ रहे हैं ?"

"अरे नहीं, सच में ... !"

मैंने चाचा को घूर कर देखा और जाने क्या मन में आया और फिर एक तीर मारा,"चाचा, डेशिंग तो आप लग रहे हो ... देखो क्या सेक्सी हो?" उनके पजामे के ऊपर से ही उनके कूल्हों पर एक हाथ मारा।

मैंने सोचा आज चाचा को आजमा कर देखते हैं, ऐसा-वैसा कुछ होता है या नहीं।

"सच मंजू, यह उमर ही सेक्सी होती है ... अपने आप को देख ... ऐसा फ़िगर ... क्या मस्त है।"

उनके कहते ही मुझे एकदम जैसे सिरहन सी हुई।

मैंने चाचू की तरफ़ देखा ... तो उनके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी।

अरे बाबा ! यह तो लाईन मार रहा है।

"चाचू, लगता है आपकी अब शादी कर देनी चाहिये ... अब आपको सभी लड़कियाँ मस्त लगने लगी हैं !"

"शादी की क्या आवश्यकता है ... मस्ती तो बिना शादी के भी की जा सकती है !"

"वो कैसे भला ?" मुझे भी अब शरारत सूझने लगी थी। शायद मजाक ही मजाक में काम बन जाये।

तभी चाचू ने मेरे चूतड़ दबा दिए।

मुझ पर जैसे बिजली सी कड़क गई। अब मुझे लगा कि सच में यह खेल तो बड़ा ही आनन्द भरा है। मैं जैसे किसी अनजान तड़प से उछल पड़ी। यह इतना आनन्द कैसे आ गया राम !

"चाचू एक बार और दबा दो ना ..." मेरे मुख से अपने आप ही निकल पड़ा।

चाचू को तो जैसे हरी झण्डी मिल गई हो ... वो मेरे पीछे आ गये और मेरे दोनों चूतड़ों के मस्त उभार सहलाते हुये दबाने लगे। मेरी चूत में फ़ुरफ़ुरी सी होने लगी। आनन्द से मेरी आँखें बन्द होने लगी। आह तो ये आनन्द आता है !

इसका मतलब यह है कि मर्द के हाथों में जादू होता है।

"बस करो ... अब और नहीं... तुम्हारे हाथों में तो जादू है।"

पर सुनता कौन है, देर हो चुकी थी। तीर हाथ से निकल चुका था। उसने अब हाथ आगे बढ़ा कर मेरी चूचियों को दबा लिया था। मेरा शरीर मीठी सी गुदगुदी से कसमसा उठा। मुझे यह क्या क्या होने लगा था।

"बस अब छोड़ दो चाचू ... " मैं कसमसाई।

"कैसा लग रहा है मन्जू... " जैसे कहीं दूर से आवाज आई।

"हाय रे ... बस करते ही जाओ ... चाहे चोद डालो !" अन्तरवासना की भाषा मुख से निकल पड़ी।

"धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे ... एक दम से चुदाई नहीं ... जवानी का मजा तो लो !"

"सच राजा ... मुझे नहीं मालूम था ... कि ऐसे करने से दिल में तड़प सी होने लगती है ... मसल डालो मेरी चूचियों को !" मुझे अपनी सारी सोच किसी कूड़े दान में जाती नजर आने लगी।

"बड़ी मस्त भाषा बोलती हो ...तेरी भेन दी फ़ुद्दी ... जब लण्ड से चुदोगी तो चूत में स्वर्ग नजर आयेगा।"

"आह, तेरा लौड़ा है या आनन्द की खान ... ला मुझे हाथ में दे दे ... साले को मसल डालूं !" हिंदी सेक्सी कहानियां के मधुर डॉयलोग मेरी जबान से शहद बन कर टपक रहे थे।

उसने मुझे कस कर चिपका लिया और उसके अधर मेरे गालों तक पहुँच गये थे। रात का धुंधलका बढ़ रहा था। मुझे भी वासना भरी मस्ती चढ चुकी थी। चाचू के रूप में मुझे मस्त, हट्टा-कट्टा जवान मिल गया था, उसका लण्ड जैसे ही हाथ में आया, मुझे लगा कि सारा जमाना मेरी मुट्ठी में है। उसे चाहे जैसे मरोड़ दूँ, चाहे जैसे घुमा दूँ।

"चाचू, चल नीचे जमीन पर लेटा कर मुझे रगड़ दे ... चाहे तो मेरी फ़ुद्दी मार दे !"

"नहीं, तेरे गद्दे पर लेट कर मजा लेंगे ... उछल उछल कर चुदाई करेंगे।"

"हाय रब्बा, कैसा बोलता है रे तू ... अभी तो रगड़ दे ... देख कैसी तड़प उठ रही है।"

हम दोनों एक दीवार के कोने में चिपके हुये लेट गये। वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे दबा डाला। मुझे उसका भार भी फ़ूल जैसा हल्का लगा। मेरी चूचियाँ उसने दबा डाली और मेरे मुख पर उसने चुम्बनों की बरसात कर दी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी चूत को रगड़ने लगा। मुझे पहली बार छातियाँ दबवाने में इतना कामुक मजा आया था। उसके खुशबूदार चुम्बन मुझे उसके गाल जीभ से चाट चाट कर उसे गीला कर देना चाहते थे।

हाय रे ! शहद से भी मीठा, मेरा चाचू !

"चाचा, बस चोद दे अब, नहीं रहा जाता है ... घुसा दे लौड़ा ... आह !!"

मैंने अपनी जींस नीचे सरका दी। चाचू ने भी अपनी जींस उतार दी। जल्दी से हमने अपनी अपनी चड्डियाँ उतार दी और चुदाई के लिये तैयार हो गये।

"जल्दी घुसा डाल, राजा ... जल्दी वार कर ना !"

मैंने अपने दोनों पांव ऊपर उठा लिये। उसने लण्ड मेरी चूत के द्वार पर रख कर दबाव डाला तो सीधा अन्दर उतर गया। मुझे तेज मीठी सी गुदगुदी हुई और लण्ड पूरा चूत में समा गया। जैसे ही अन्दर-बाहर लण्ड ने चाल पकड़ी, मुझे मालूम हो गया कि अन्तरवासना में लिखी एक एक बात सही है। पर मेरी झिल्ली का क्या हुआ ... वो तो फ़टी ही नहीं ... कुछ पता ही नहीं चला ! कोई दर्द ही नहीं हुआ। बस आनन्द ही आनन्द ... मस्ती ही मस्ती ... मैंने चाचू को जकड़ लिया और मस्ती से चुदाई में लग गई। दोनों ओर से कमर तेजी से चल रही थी।

तभी मैंने पलटी मार कर चाचू को नीचे दबा लिया। जाने मुझमें कहाँ से इतनी ताकत आ गई कि मैंने उसका खड़ा लौड़ा देख कर अपनी गाण्ड का छेद उस पर दबा दिया। हिंदी सेक्सी कहानियां में गाण्ड चुदवाने के बारे में भी तो लिखा है। मन में आया कि सब कुछ करके देख लूँ।

तो चल रे मादरचोद लौड़े, अब गाण्ड में घुस जा।

मुझे कोई अधिक महनत नहीं करनी पड़ी। जो दबा कर गाण्ड पर जोर लगाया तो एक बार चाचू ही चीख पड़ा।

"अरे चुप ना, साले मरवायेगा, गाण्ड नहीं मारनी आती है क्या?"

"अरे लगती है यार, तुझे नहीं लगती है?"

उसकी बातें मुझे आश्चर्य में डाल रही थी। मुझे क्यूँ लगेगी भला। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में सरलता से सरकता चला गया। पर चाचू था कि दर्द से मरा जा रहा था। मैंने ऊपर से दो तीन मस्त धक्के लगाये तो मुझे अब कुछ दर्द हुआ।

उह ! मुझे तो गाण्ड में मजा नहीं आता है। मैंने कुछ ही देर में बाहर निकाल दिया और उसे अपनी चूत में घुसेड़ लिया। आह ! दिल में एक ठण्डक सी हुई। लण्ड अब सरलता से मेरी चूत में घुसा हुआ अलौकिक आनन्द दे रहा था।

चाचू को तो जैसे सांस में सांस आई। उस दिन मैंने चाचू को खूब मस्ती से चोदा और दिल की सारी हसरतें निकाल ली। फिर उसका गर्म-गर्म वीर्य मेरी चूत की गहराइयों में उगलने लगा। मुझे एक मस्ती का सा अहसास हुआ उसके झड़ने से। फिर मेरी चूत में से निकलता हुआ उसका गर्म-गर्म वीर्य, उसके पेडू को गीला करने लगा था।

मेरे मात्र एक दो तेज झटकों ने मेरा काम भी पूरा दिया। मैं भी झड़ने लगी।

शायद मुझे जिन्दगी में पहली बार झड़ने से ऐसा लगा कि मैंने मूत दिया हो।

काफ़ी सा पानी निकला मेरी चूत में से।

मैं झट से सीधे खड़ी हो गई। मेरी चूत में से गीलापन नीचे टपकता रहा। नीचे से चाचू निकल कर जल्दी से खड़ा हो गया और अपना लण्ड देखने लगा। शायद उसे कोई चोट लगी थी। पर नही ! सब ठीक था। हाँ, उसकी पीठ पर जमीन की रगड़ से खरोंचे जरूर पड़ गई थी। उसकी पीठ जमीन की धूल से भर गई थी। उसने अपना पजामा लेकर मेरे पीठ की धूल भी साफ़ कर दी थी।

"चाचू, मजा आ गया ना?"

"हुंह, साली ने मुझे रगड़ दिया, ऐसे भी कोई करता है क्या !"

"अरे चाचू, यार इसमें मजा तो बहुत आता है, अब तो रोज ही रगड़म-पट्टी करेंगे।"

चाचू मुझे देखे जा रहा था। शायद वो मेरी बात समझ नहीं पा रहा था। पर मुझे वो अनोखा अनुभव मिल चुका था जिसके लिये लड़के और लड़कियाँ दीवाने रहते हैं और जिनकी कृपा से हिंदी सेक्सी कहानियां की मदद से अपने दिल में आग लगा लेते हैं।

यह दुनिया में बस एक ही सत्य वचन है ... यह अनोखा आनन्द !

यशोदा पाठक
sexygirl4uonly16@gmail.com

चूत पूजा

Posted: 01 Mar 2013 07:23 AM PST



न जाने कब से यह मेरे ख्याल में बस गया था मुझे याद तक नहीं, लेकिन अब 35 साल की उम्र में उस ख्वाहिश को पूरा करने की मैंने ठान ली थी। जीवन तो बस एक बार मिला है तो उसमें ही अपनी चाहतों और आरजू को पूरा करना है। क्या इच्छा थी यह तो बताना मैं भूल ही गया। तो सुनिए। मेरी इच्छा थी कि दुनिया की हर तरह की चूत और चूची का मज़ा लूँ ! गोरी बुर, सांवली बुर, काली बुर, जापानी बुर, चाइनीज़ बुर !

यूँ समझ लीजिये कि हर तरह की बुर का स्वाद चखना चाहता था। हर तरह की चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था।

लेकिन मेरी शुरुआत तो देशी चूत से हुई थी, उस समय मैं सिर्फ बाईस साल का था। मेरे पड़ोस में एक महिला रहती थी, उनका नाम था अनीता और उन्हें मैं अनीता आंटी कहता था। अनीता आंटी की उम्र 45-50 के बीच रही होगी, सांवले रंग की और लम्बे लम्बे रेशमी बाल के अलावा उनके चूतड़ काफी बड़े थे, चूचियों का आकार भी तरबूज के बराबर लगता था। मैं अक्सर अनीता आंटी का नाम लेकर हस्तमैथुन करता था।

एक शाम को मैं अपना कमरा बंद करके के मूठ मार रहा था। मैं जोर जोर से अपने आप बोले जा रहा था-

यह रही अनीता आंटी की चूत और मेरा लंड ...

आहा ओहो ! आंटी चूत में ले ले मेरा लंड ...

यह गया तेरी बुर में मेरा लौड़ा पूरा सात इंच ...

चाची का चूची .. हाय हाय .. चोद लिया ...

अनीता .. पेलने दे न ... क्या चूत है ... !

अनीता चाची का क्या गांड है ...!

और इसी के साथ मेरा लंड झड़ गया।

फिर बेल बजी ...मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने अनीता आंटी खड़ी थी, लाल रंग की साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज में, गुस्से से लाल !

उन्होंने अंदर आकर दरवाज़ा बंद कर लिया और फिर बोली- क्यों बे हरामी ! क्या बोल रहा था? गन्दी गन्दी बात करता है मेरे बारे में? मेरा चूत लेगा ? देखी है मेरी चूत तूने...? है दम तेरी गांड में इतनी ?

और फिर आंटी ने अपनी साड़ी उठा दी। नीचे कोई पैंटी-वैन्टी नहीं थी, दो सुडौल जांघों के बीच एक शानदार चूत थी : बिलकुल तराशी हुई :बिल्कुल गोरी-चिट्टी, साफ़, एक भी बाल या झांट का नामो-निशान नहीं, बुर की दरार बिल्कुल चिपकी हुई !

ऐसा मालूम होता था जैसे गुलाब की दो पंखुड़ियाँ आपस में लिपटी हुई हों..

हे भगवान ! इतनी सुंदर चूत, इतनी रसीली बुर, इतनी चिकनी योनि !

भग्नासा करीब १ इंच लम्बी होगी।

वैसे तो मैंने छुप छुप कर स्कूल के बाथरूम में सौ से अधिक चूत के दर्शन किए होंगे, मैडम अनामिका की गोरी और रेशमी झांट वाली बुर से लेकर मैडम उर्मिला की हाथी के जैसी फैली हुई चूत ! मेरी क्लास की पूजा की कुंवारी चूत और मीता के काली किन्तु रसदार चूत।

लेकिन ऐसा सुंदर चूत तो पहली बार देखी थी।

आंटी, आपकी चूत तो अति सुंदर है, मैं इसकी पूजा करना चाहता हूँ .. यानि चूत पूजा ! मैं एकदम से बोल पड़ा।

"ठीक है ! यह कह कर आंटी सामने वाले सोफ़े पर टांगें फैला कर बैठ गई।

अब उनकी बुर के अंदर का गुलाबी और गीला हिस्सा भी दिख रहा था।

मैं पूजा की थाली लेकर आया, सबसे पहले सिन्दूर से आंटी की बुर का तिलक किया, फिर फूल चढ़ाए उनकी चूत पर, उसके बाद मैंने एक लोटा जल चढ़ाया।

अंत में दो अगरबत्ती जला कर बुर में खोंस दी और फिर हाथ जोड़ कर

बुर देवी की जय ! चूत देवी की जय !

कहने लगा ..

आंटी बोली- रुको मुझे मूतना है !

"तो मूतिये आंटी जी ! यह तो मेरे लिए प्रसाद है, चूतामृत यानि बुर का अमृत !"

आंटी खड़ी हो कर मूतने लगी, मैं झुक कर उनका मूत पीने लगा। मूत से मेरा चेहरा भीग गया था। उसके बाद आंटी की आज्ञा से मैंने उनकी योनि का स्वाद चखा। उनकी चिकनी चूत को पहले चाटने लगा और फिर जीभ से अंदर का नमकीन पानी पीने लगा .. चिप चिपा और नमकीन ..

आंटी सिसकारियाँ लेती रही और मैं उनकी बूर को चूसता रहा जैसे कोई लॉलीपोप हो.. मैं आनंद-विभोर होकर कहते जा रहा था- वाह रसगुल्ले सरीखी बुर !

फिर मैंने सम्भोग की इज़ाज़त मांगी !

आंटी ने कहा- चोद ले .. बुर ..गांड दोनों ..लेकिन ध्यान से !

मैं अपने लंड को हाथ में थाम कर बुर पर रगड़ने लगा .. और वोह सिसकारने लगी- डाल दे बेटा अपनी आंटी की चूत में अपना लंड !

अभी लो आंटी ! यह कह कर मैंने अपना लंड घुसा दिया और घुच घुच करके चोदने लगा।

"और जोर से चोद.. "

"लो आंटी ! मेरा लंड लो.. अब गांड की बारी !"

कभी गांड और कभी बुर करते हुए मैं आंटी को चोदता रहा करीब तीन घंटे तक ...

आंटी साथ में गाना गा रही थी :

तेरा लंड मेरी बुर ...

अंदर उसके डालो ज़रूर ...

चोदो चोदो, जोर से चोदो ...

अपने लंड से बुर को खोदो ...

गांड में भी इसे घुसा दो ...

फिर अपना धात गिरा दो ...

इस गाने के साथ आंटी घोड़ी बन चुकी थी और और मैं खड़ा होकर पीछे चोद रहा था। मेरा लंड चोद चोद कर लाल हो चुका था.. नौ इंच लम्बे और मोटे लंड की हर नस दिख रही थी। मेरा लंड आंटी की चूत के रस में गीला हो कर चमक रहा था।

जोर लगा के हईसा ...

चोदो मुझ को अईसा ...

बुर मेरी फट जाये ...

गांड मेरी थर्राए ...

आंटी ने नया गाना शुरू कर दिया।

मैं भी नये जोश के साथ आंटी की तरबूज जैसे चूचियों को दबाते हुए और तेज़ी से बुर को चोदने लगा .. बीच बीच में गांड में भी लंड डाल देता ... और आंटी चिहुंक जाती ..

चुदाई करते हुए रात के ग्यारह बज चुके थे और सन्नाटे में घपच-घपच और घुच-घुच की आवाज़ आ रही थी ..

यह चुदने की आवाज़ थी ... यह आवाज़ योनि और लिंग के संगम की थी ...

यह आवाज़ एक संगीत तरह मेरे कानों में गूँज रही थी और मैंने अपने लंड की गति बढ़ा दी।

आंटी ख़ुशी के मारे जोर जोर से चिल्लाने लगी- चोदो ... चोदो ... राजा ! चूत मेरी चोदो ...

यह कहानी कैसी लगी आप को ज़रूर बताइए। आपकी इमेल पर निर्भर करता है कि आगे कहानी लिखूं या नहीं !

aslam19000@gmail.com

मेरी पत्नी की बहनें-2

Posted: 01 Mar 2013 07:14 AM PST


मैंने दोनों को बिस्तर पर सटा कर लिटा दिया। और बारी बारी से दोनों की चूचियाँ चूसने लगा। दोनों को अपनी चूचियाँ चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने कहा- दोनों की 19-20 ही हैं। अच्छा यह बताओ कि तुम दोनों में से किसके चूत पर बाल अधिक हैं?

मोनिका ने कहा- जीजू, खुद ही हमारी पेंटी खोल के देख लो ना !

मैंने दोनों की पैंटियों में हाथ डाला और खींच कर उतार डाली। दोनों अब मेरे सामने नंगी थी। दोनों के चूत पर घने बाल थे।

मैं दोनों की चूत सहलाने लगा। दोनों की आँखें बंद थी, दोनों की चूत गीली हो रही थी।

मैंने कहा- दोनों की चूत पर घने बाल हैं। शेव नहीं करती हो क्या?

मोनिका ने कहा- नहीं !

मैंने पूछा- तुम दोनों में से मुठ अधिक कौन मारती हो?

अन्नू ने कहा- दीदी अधिक मारती है। दिन में दो बार, वो भी बैंगन से !

मैंने कहा- तू मुठ नहीं मारती?

अन्नू ने कहा- कभी कभी ! वो भी दीदी को मुठ मारते देख कर !

मोनिका- हाँ, लेकिन यह इतनी डरपोक है कि पतले मोमबत्ती को चूत में डाल कर मुठ मारती है। मैंने कितनी बार इसे बैंगन से मुठ मारने को कहा है लेकिन मानती ही नहीं..

मैंने कहा- कभी तुम दोनों ने अपनी चूत चटवाई है?

अन्नू ने कहा- हाँ !

मैंने पूछा- किससे?

मोनिका ने कहा- हम दोनों अक्सर ही एक दूसरी की चूत चूसती-चाटती हैं।

मैंने कहा- अरे वाह, दोनों तो एकदम एक्सपर्ट हो। कहाँ से सीखा यह सब करना?

अन्नू ने कहा- बड़ी दीदी ने सिखाया। दरअसल हम तीनों बहनें एक दूसरी की चूत चूसती हैं।

मैंने कहा- वाह ! यह बात तो मुझे आज तक पता ही नहीं थी।

अन्नू ने कहा- जीजा जी, सिर्फ हमारी ही देखोगे क्या? अपना भी दिखाओ ना !

मैंने बिना कुछ कहे अपने अंडरवियर को को भी खोल दिया। मेरा लंड जो एक चूत और दो चूची को देख कर जितना बड़ा होता है आज दो दो चूत और चार चूची को देख कर दुगना बड़ा हो रहा था।

अनु ने मेरे लंड को देखते ही पकड़ लिया और कहा- हाय राम, जीजू आपका जूजू कितना बड़ा है। इतना बड़ा जूजू तुम दीदी के चूत में पूरा डाल देते हो? दीदी की चूत तो दर्द से बिलबिला जाती होगी?

यह सुन कर मोनिका हँसी और कहा- धत पगली, ये जूजू थोड़े ही है, ये तो लंड है। चूत में इसे डालने से दर्द थोड़े ही होता है? बल्कि मज़ा आता है। इसको चूसेगी? सुना है बहुत मज़ा आता है?

अनु ने कहा- किसने कहा?

मोनिका- दीदी ने !

मैंने कहा- तुम्हारी दीदी तुम्हें ये सब बातें बताती है?

मोनिका ने मेरे लंड को मुँह में लिया और थोड़ा चूसते हुए कहा- और नहीं तो क्या? वो मुझे अपनी चुदाई की सब बातें बताती है।

मैंने कहा- सिर्फ थ्योरी से ही काम नहीं चलेगा, कुछ प्रेक्टिकल भी करना होगा।

दोनों ने कहा- हाँ जीजू, कुछ प्रेक्टिकल कीजिये ना।

मैंने कहा- पहले किसके साथ करूँ?

मोनिका ने कहा- मेरे साथ, क्योंकि मैं बड़ी हूँ।

अन्नू ने कहा- हाँ, यह ठीक है, तब तक मैं देखती हूँ और जानूंगी कि कैसे क्या होता है।

मैंने कहा- ठीक है।

और मैं मोनिका के बदन पर लेट गया और अन्नू बगल में ही लेट कर चुपचाप देख रही थी। मैं मोनिका के नंगे मखमली बदन पर लेट कर उसके हर अंग को चाटने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने उसकी बुर को चाटना चालू किया तो वो सिसकारी भरने लगी। लेकिन मैं उसकी बुर के रस को छोड़ भी नहीं पा रहा था। इतनी नर्म और रसीला बुर थी मानो लग रहा था कि लीची को उसका छिलका उतार कर सिर्फ उसे चाट रहा हूँ।

उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया। मैं उसकी बुर को छोड़ फिर उसकी चूची को अपने सीने से दबाया और पूछा- अपनी चूत चुदवाओगी?

मोनिका ने कहा- हाँ।

मैंने कहाँ- ठीक है। तो तैयार हो जा प्रैक्टिकल के लिए।

मैंने उसकी दोनों टांगों को अलग किया और चूत के छेद का मुआयना किया। उसमे उंगली डाल कर उसे फैलाया फिर अपना लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और और धीरे धीरे लंड को उसके चूत में घुसाना चालू कर दिया।

ज्यों ही मैंने लंड डाला, वो चीख पड़ी- आ....यी....आह...

मैंने कहा- क्यों री? चूत में बैगन डाल के मुठ मारती हो और लंड लेने में तुझे परेशानी हो रही है?

मोनिका ने कहा- हाय राम, आपका लंड किसी बैगन से कम मोटा नहीं है और यह काफी सख्त भी तो है। बैगन तो नर्म होता है।

मैंने कहा- हाँ वो तो है। लेकिन सख्त लंड से ही तुझे मज़ा आएगा। तेरी झिल्ली फटी है या नहीं अभी तक?

मोनिका ने कहा- नहीं..

मैंने कहा- फाड़ दूँ तेरी झिल्ली?

मोनिका ने कहा- अब देर ना करो जीजू। जो भी करना है जल्दी करो। मेरे चूत में अपना इतना मोटा लंड डाल कर इतने सवाल कर करके मुझे यूँ ना सताओ।

उसकी चूत एकदम कोरी थी, मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसकी चूत में धक्के मारना शुरू किया। मेरा लंड उसके चूत के गहराई में गया तो उसकी झिल्ली फट गई, वो पूरी तरह चीख पड़ी- आ....ह...जी....जू हाय राम...

मैंने कहा- क्या हुआ मोनिका?

मोनिका ने दर्द भरे स्वर में कहा- कुछ नहीं जीजा जी ! तुम्हारे लंड ने मेरी झिल्ली फाड़ डाली। आह...कितना मज़ा है इस दर्द में।

मैंने मोनिका को उसके दर्द की परवाह किये बगैर जोर जोर से चोदना चालू किया। थोड़ी देर में ही उसे आनन्द आने लगा। अब वो आराम से बिना किसी शर्म के जोर जोर से बोलने लगी- आह जीजा जी। हाय जीजाजी। जरा धीरे धीरे चोदिये ना। आय हाय कितना मज़ा आ रहा है। आआअ ....ह्ह्ह्ह...। वो साली ही क्या जिसने अपने जीजा से मज़े ना लूटे हों !

सुन कर मुझे उसके हिम्मत पर ख़ुशी हुई और आराम से उसके अंग अंग को देखते हुए चोदने लगा। वो भी जोर जोर से चिल्लाने लगी- हाय...आआअह्ह्ह्ह.... ओह्ह माँ ! ओह जीजू, हाय रे आःह्ह्ह....

मैं उसकी नंगे बदन पर लेट कर उसकी चुदाई कर रहा था। मैंने चुदाई करते समय अन्नू की तरफ देखा तो वो भी काफी खुश लग रही थी।

मैं उसे चोदता रहा। थोड़ी देर में मोनिका के चूत से पानी निकलने लगा। मेरे लंड ने भी पानी छोड़ देने का सिगनल दे दिया,

मैंने मोनिका से कहा- बोल कहाँ गिरा दूँ माल?

वो बोली- मेरे मुँह में।

मैंने अपने लंड को उसके चूत से निकाला और अभी उसके मुँह में भी नहीं डाला था कि मेरे लंड ने माल छोड़ना चालू कर दिया। इस वजह से मेरे लंड का आधा माल उसके मुँह में और आधा माल उसके गाल और चूची पर गिर गया। फिर भी वो प्यासी कुतिया की तरह मेरा लंड चूसती रही।

उसने अन्नू को अपनी चूची दिखाई और कहा- अन्नू, ले माल को चाट ! मज़ा आएगा।

अन्नू ने बिना देर किये मोनिका की चूची को चाटना शुरू कर दिया और उस पर गिरे मेरे माल को चाट चाट कर खत्म कर दिया।

कहानी जारी रहेगी।

mayankasm@gmail.com

मस्त मौसम में मस्त चुदाई

Posted: 01 Mar 2013 07:02 AM PST


दोस्तो,

आज मैं अपने जीवन की एक और मीठी याद आप के साथ बाँट रही हूँ। मैं अपने कॉलेज के जमाने से ही बहुत स्पष्ट और बेबाक लड़की थी, अपनी पढ़ाई पूरी करते-करते तीन लड़कों से सम्बन्ध बना चुकी थी। लड़के-लड़कियों की चुदाई की व्यस्क कहानियाँ पढ़ना, ब्ल्यू फ़िल्में देखना मेरे लिये मामूली बात थी और मैं इस तरह की चीज़ों में बहुत रस लेती थी। इन्टर्नेट ने तो मेरी जैसी अच्छी घरों की लड़कियों को चुदक्कड़ बनाने का काम और दिल बहलाने का काम और भी आसान कर दिया था।

बात अभी कोई डेढ़ साल पहले ही की है। मेरा एक चचेरा भाई साहिल हमारे घर आया हुआ था। मेरे भाभी-भैया गणपति उत्सव के लिये अपने कोकण जा रहे थे। साहिल भी सभी के साथ घुलमिल कर हंसी-मजाक करता था। पर वो सबकी नजर बचाकर जिस तरह मुझे देख रहा था, उसकी नीयत समझने में मुझे देर नहीं लगी। एक बार वो हॉल में वो अकेले अखबार पढ़ रहा था कि मैं भी हॉल में पहुँच कर उसके सामने उसकी तरफ़ पीठ करके झुक कर सोफ़े के नीचे से गिरे पेन को निकाल रही थी तो मैंने झटके से अपना सर घुमा कर उसे पीछे देखा। वो अखबार की जगह मेरे पीछे के चूतड़ों को एकटक घूर रहा था। उठते हुए मैंने उसके पजामे में से उभरते हुए उसके लण्ड के उभार को भी स्पष्ट देखा। उसके उभरते हुए लण्ड को देख कर मैं मुस्करा दी। मुझे यह सब बुरा नहीं लगा बल्कि अच्छा ही लगा। आखिर वो भी एक मर्द ही था।

मेरी भारी-भरकम गाण्ड को देख कर उसके लण्ड का खड़ा होना मेरे लिये तो गर्व की बात थी। वो समझ गया था कि मैंने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया है। मेरी कंटीली मुस्कान से उसकी हिम्मत और भी बढ़नी ही थी। मैं भी पजामे के ऊपर से ही उसके लण्ड का एक्स-रे कर ही चुकी थी। इतने में मम्मी आ गई। साहिल ने अखबार से अपने लण्ड के ऊपर परदा कर लिया।

अब हम एक घर में रहते हुए एक दूसरे को बड़ी हसरत से देखते थे। हमारे बीच पक रही खिचड़ी से सभी अनजान थे। साहिल के सामने नजर आते ही मेरी चाल और मतवाली और मस्तानी हो गई थी। "हिप्स नेवर लाई !" औरत के चूतड़ कभी झूठ नहीं बोलते। खासकर जब सामने वाले की दावत कबूल हो तब तो पंख लग जाते हैं।

खैर मम्मी तो ऑफ़िस के काम से पुणे चली गई थी और भाई और भाभी अपने बेटे के साथ और साहिल भी जाने को निकल पड़ा था। साहिल भाई और भाभी को रेलगाड़ी में बैठा कर स्वयं भी नासिक के लिये रवाना होने वाला था। अभी मैं घर में अपने कुछ निजी कामों के रहते अकेली रह गई थी। मैं मायूस थी क्योंकि साहिल ने मेरे दिल में आग लगा दी थी और यूं ही निकल गया था। मुझे यकीन भी नहीं हो रहा था कि साहिल इतनी लाईन मारने के बाद मुझे चोदे बिना कैसे जा सकता था, जबकि अच्छे अच्छे हीरो लड़के मेरे पीछे लण्ड अपने हाथ में लिये हिलाते हुए घूमते थे।

यही सब सोचते हुए शाम हो गई थी। बाहर तेज बरसात होने लगी थी। भैया गाड़ी में से मुझे फोन कर के बताते जा रहे थे कि वो कहां तक पहुंचे है, और कितनी देर और लगेगी घर पहुंचने मे। तभी मेरे दरवाजे की घण्टी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो सामने साहिल खड़ा था। अपना एयरबैग उसने मुझे थमाया और मेरी ओर बढ़ते हुए मुस्कराया।

"तुम… तुम गए नहीं…?" मेरे मुख से निकला और बैग लेकर मैं अन्दर मुड़ी।

"मेरी गाड़ी छूट गई !" वो मुस्करा कर बोला।

हम अन्दर आ चुके थे। दरवाजा बन्द करते हुए मैंने कहा,"सच में गाड़ी छूट गई या जानबूझ कर छोड़ दी?"

"तुम्हें क्या लगता है?" वो तौलिए से सर पोंछता हुआ बोला।

मैं जवाब में आँखे मटकाते हुए मुस्काई। मेरी टांगों के बीच बैठी हुई डायन एक नये दमदार लण्ड को निगलने के लिये मचल रही थी। उसके पजामे का उभार मैं देख चुकी थी। लण्ड के आकार का अन्दाजा मुझे हो चुका था। बस अब मुझे उसकी अगली हरकत का इन्तज़ार था।

एक तो घर में बस हम दोनों, उस पर हसीन रात में जोरदार बारिश, दो युवा जिस्म, चुदाई के लिये मस्त मौसम था। मैं अब ज्यादा शरीफ़ों वाले नखरे दिखा कर वक्त बरबाद करने के मूड में नहीं थी। साहिल जानकर ही मेरे सामने अपने गीले वस्त्र उतारने लग गया था। केवल एक छोटा से अन्डरवियर पहने था फिर अन्दर जाकर अपने गीले कपड़े बाथरूम में लटका दिये। मैं भी उसका आत्मविश्वास देख कर मस्त थी क्योंकि वो वैसे बड़े आराम से अपने बैग में से लुंगी निकाल रहा था।

उसने मेरी तरफ़ देखा तो मैंने कटाक्ष किया,"बड़े बेशरम हो ! एक लड़की के सामने नंगे खड़े हो?" मैंने उसके नीचे लण्ड के उभार को निहारते हुए कहा।

तब वो मुस्कराया और बोला,"क्यों अन्डरवियर तो है, क्या यह काफ़ी नहीं है?" उसने धीरे से अपनी एक आँख दबा दी और शरारत से मुस्कराया।

"अगर काफ़ी है तो ठीक है, फिर यह लुंगी क्यों पहन रहे हो?" मेरी नजर अभी भी उसके अन्डरवीयर में से जोर लगाते हुए लण्ड पर टिकी थी।

"तुम कहो तो नहीं पहनता !" कहते हुए उसने मेरी आँखों में झांका।

"हर काम मेरे कहने से करोगे क्या?" मैंने उसके नजदीक आते हुए अपनी आँखे उसकी आँखों से उलझा दी।

कहकर जैसे ही मैं पीछे मुड़ी, अचानक मेरा सर लुंगी से ढक गया। मैंने लुंगी हाथ से खींच कर अपने चेहरे से हटा दी। सामने फिर से वही मात्र अन्डरवियर में साहिल मुझे देख कर मुस्करा रहा था। पर इस बार उसका लण्ड फ़ूल चुका था। उसका उभार अब जैसे उसकी अन्डरवियर को हटा कर बाहर आ जाना चाहता था। मैं कभी उसकी आँखें देखती तो कभी उसके उभरे हुए लण्ड को देखती। वो मुझे देख कर मुस्कराया, जवाब में मैं भी मुस्कराई और शरमा गई।

अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने फ़ूले हुए उभार पर यानि लण्ड पर रख दिया। मेरा दिल मचल गया। मैं खुद को उसके लण्ड को दबाने के लालच से रोक नहीं पाई। आखिर मुझे भी तो ऐसे ही प्यारे लण्ड की तलाश थी। उसने मेरी आँखों में झांका और हाथ बढा कर मेरी काम वासना से बेबस चूचियों पर रख दिया। मेरी सांसें जैसे रुक सी गई फिर मेरे हृदय में चूचियां दबाने से एक मीठी सी हूक उठ गई। मैंने भी उसकी छोटी सी अन्डरवियर में हाथ घुसा कर उसके लण्ड को पूरा ही मुठ्ठी में कस लिया। उसकी आँखों का इशारा समझ कर मैं झुकने लगी और लण्ड को बाहर से ही उसे चूम लिया। फिर जाने कैसे अपने आप ही मेरे हाथ उसकी अन्डरवियर को नीचे खींचने लगे और नीचे तक खींच कर उसे नग्न कर दिया।

अब उसका शानदार लण्ड मेरे मुख के सामने था- आह ! गोरा सा, तना हुआ सुपारा जोश से लाल सुर्ख हो रहा था। हाय क्या चीज़ बनाई है ऊपर वाले ने ! और दूसरे ही पल उसका लाल सुपारा मेरे नाजुक होंठों के बीच दब गया।

"हाय चूस … ओह्ह्ह्… आह्ह्ह्…… मेरी जान… ले … मेरा … लण्ड ले ले … मस्त चूसती है रे तू !"

वो मेरी लण्ड चुसाई से मस्त हो रहा था। अपना मस्त लण्ड चुसा कर फिर उसने मुझे खड़ा कर के मुझे एक झटके में नंगी कर गोदी में उठा लिया। दस सेकण्ड बाद ही मैं बिस्तर पर थी। उसने मेरी टांगें चौड़ी कर दी और मेरी चूत को मस्ती से चाटने लगा।

अब मैं भी अन्ट सन्ट बकने लगी थी,"ओह माई डियर … लूट ले मुझे… आह चूस ले साले… डाल दे अपना लौड़ा मेरी चूत में !"

अब वो मेरे ऊपर छा गया। उसने अपना सात इन्ची लण्ड मेरी चूत से टकरा दिया। चूत को पूरी गीली हो कर लसलसी सी चिकनी हो गई थी। मेरा शरीर सनसना उठा । फ़चाक से पूरा ही लण्ड मेरी चूत में उतर गया।

"आह्ह्ह्ह्ह … स्स्स्सीऽऽऽऽऽऽऽ कैसे मर्द हो … तुम मेरे भैया ?" मैं मस्ती में चहकी।

"चुप साली, मैं तेरा भाई नहीं हूँ।" साहिल ने कहा।

"सगा ना सही, पर दूर के तो हो ना, कहीं का नहीं छोड़ा मुझे, आह्ह्ह, चोद के ही छोड़ा ना मुझे !" मैंने उसे उकसाया।

"हाय, तुम तो जैसी सती सावित्री हो … ले खाले मेरा लौड़ा, वैसे ही तुम्हारा नखरा भी मस्त है।" उसने ताना दिया। उसकी बातों से मैं तो शरमा भी नहीं सकी। शर्माती भी कैसे … मजा जो जम कर आ रहा था। साहिल मेरी चूचियाँ दोनों हाथों से मसलते हुए अपने लण्ड के हर धक्के से मेरी चूत की गहराई नापने के साथ मेरे अन्दर की छिनाल औरत को अपनी औकात पर आने के लिये उकसा रहा था। मैं चुदक्कड़ सी बनती जा रही थी, अपनी चूत को उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी।

हाय मेरी जान, क्या खूब चुदाती हो डार्लिंग … तुझे तो छिनाल, पूरी रात चोदूं … साली !" वो बड़बड़ाया।

मैं भी कम कहाँ थी … मस्ती में मैं भी उसे सुना रही थी,"चोद डालो जानू, फ़ाड़ दो इस चूत को…जानू … आज की रात लूट लो मुझे, मेरे राजा … जोर से चोद डालो !"

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ दबा दिये और उसे कचकचा कर चूसा और काट लिया।

चूत में मोटा लौड़ा लेकर अपने होंठ चुसवाने का मजा कुछ ओर ही होता है, यह तो वो ही जानती है जो इस तरह से कभी चुदी हो, खास करके जब मौका देख कर चौक्का मारा गया हो तो क्या कहने। वो चुदाई ही क्या जिसमे नीति नियमों की मां ना चुदी हो। आह्ह्ह मेरी चूत भी तभी फ़चफ़चा कर झड़ गई। शायद इसी मजे के लिये पैसे वालों की लड़कियाँ भी रांड बन जाती हैं।

थोड़ी देर के बाद उसने अपना लण्ड निकाल लिया, मैंने उसे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा। उसने अपना लम्बा लण्ड मेरी दोनों चूचियों के बीच में रख दिया …

फिर दोनों बोबे को को हाथों से दबा कर लण्ड को मध्य में भींच कर आगे पीछे रगड़ने लगा। अचानक ही उसके लण्ड से एक तेज पिचकारी छूटी, जो सीधे मेरे चेहरे को भिगोने लगी। फिर उसने हाथ से अपने लम्बे मोटे लण्ड को पकड़ कर मेरे लबों से अपना लाल सुपारा छुआ दिया। उफ़्फ़्फ़, मेरा मुख तो खुला हुआ था उसने अब अपना लण्ड निचोड़ा और बची हुई कुछ वीर्य की बूंदे मेरे खुले मुख में टपका दी। मैंने उसे तिरछी नजरों से मुस्करा कर देखा और उसे ऐसा बताया कि जैसे मुझे बहुत स्वाद आया हो। वो मुस्कराता हुआ सुपाड़े को मेरे होंठो से रगड़ रहा था। मैंने उसका वीर्य गले से नीचे उतार लिया और फिर अपनी साफ़ सुथरी जीभ बाहर निकाल कर उसे दिखाई।

अब वो मेरे चेहरे से वीर्य को लण्ड से उठा उठा कर मेरी जीभ पर लगाने लगा और मैं मुस्कराती हुई उसे चाट चाट कर उसका उत्साह बढ़ाने लगी। अन्त में मैंने उसका लण्ड मुख में लेकर उसे पूरा चूस कर साफ़ कर वीर्य को गले से नीचे उतार लिया। यह देख कर उसने मुझे चूम लिया।

"मान गया मेरी जान, मेरा अन्दाजा सही निकला !"

"कैसा अन्दाजा?" मैंने पूछा।

वो मुस्कराया,"तुम्हे पहली नजर देख कर मुझे लगा था तुम में एक हाई फ़ाई रण्डी छुपी हुई है, बिल्कुल मेरे लायक !"

मैंने दोनों हाथों से उसे गले से पकड़ कर उसे अपनी तरफ़ खींचा और उसके होंठों को चूम लिया।

मेरी हरकत पर वो बोला,"वाह मेरी रण्डी मजा आ गया।"

मैं इठलाते हुए बोली,"अगर तुम मुझे बाहर कहीं रण्डी कह कर बुलाते तो जवाब में मैं तुम्हारा मुंह तोड़ देती, मगर चूत में लण्ड डाल के रण्डी कहा तो मुँह चूम के इनाम ही दूंगी ना?"

"मुंह क्यों, लण्ड चूम ना छिनाल !" कह कर फिर उसने अपना मस्त लण्ड मेरे मुंह में डाल दिया। लण्ड कैसे चूसना है ये मैं बखूबी जानती थी। वैसे मैं चुसाई में महारथी हूँ, बस पी एच डी की डिग्री नहीं ली है। जैसे जैसे उसका लण्ड चूसती गई उसका लण्ड मेरे मुंह में ही फ़ूलने लगा। हम दोनों बिस्तर से उठ गए और बाथरूम चले। पेशाब करके अगला राऊण्ड भी तो खेलना था। वापस आकर मैं बिस्तर पर लेटी ही थी कि उसने मेरे बोबे सहलाते हुए मेरी कमर को पकड़ कर पलटने का इशारा किया।

मैं पेट के बल आ गई। खूब समझ रही थी मैं उसकी मंशा।

अब वो मेरे चूतड़ों को कस कस कर मसलने लगा। मेरी गाँड को चीर कर उसने उसे अपनी अंगुली से खूब रगड़ा।

"कैसा लग रहा है जानू?"

"ओह्ह, इरादा क्या है?" मैंने पूछा।

जवाब में उसने चूतड़ पर जोर से चपत लगाई।

मैं सेक्स से कराह उठी।

"आह, बड़े जालिम हो, ऐसे मारते है क्या ? समझते क्या हो खुद को?"

"मैं, आह्ह्… राण्डों का दीवाना समझता हूँ" उसने मुस्कराते हुए कहा और एक फ़्लाईंग किस दिया।

"यानि तुम्हारी नजर में मैं …" मैंने बात अधूरी छोड़ कर स्माइल दिया।

"मेरी नजर छोड़ो, अपना नजरिया बताओ, तुम क्या हो, मेरी जान?"

वो ही जो तुम्हारी नजर में है … राण्ड !" मैंने आँखें मटकाते हुए कहा।

"हाय मेरी राण्ड, कहाँ है तेरी गाण्ड? आज तो मार के रहूँगा।" कहते हुए उसने मेरे भारी चूतड़ मसलना शुरू कर दिया।

अब उसने मेरी गाण्ड को थोड़ा सा उठा कर घोड़ी बना दिया। मैंने भी मस्ती में भर कर अपनी टांगों को फ़ैला कर तान कर अपनी गाण्ड को तबियत से उभारा। उसने मेज पर रखा तेल थोड़ा सा हथेली पर लेकर अपनी अंगुली डुबा डुबा कर मेरी गाण्ड के कसे छेद को नरम और चिकना बनाने लगा। अब उसने अपने सख्त लौड़े पर तेल को रगड़ा और उसे मेरी गाण्ड पर रख दिया और धीरे से अन्दर सरकाया।

"उईईईई … ईईईईई …" मैंने सिसकी भरी,"धीरे से आह्ह्ह रे … ओह्ह्ह्ह, धीरे जानू…" मैंने बेड के आईने में अपना मुख देख कर और भी मुँह बना लिया।

मेरे चेहरे को देखकर मजा लेते हुए उसने मेरी कमर पकड़ कर जोर से शॉट मार कर अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में फ़ंसा दिया। मैं आगे को झुकी, पर वो भी मेरी कमर को पकड़े हुए मेरे साथ ही झुका। मैंने अपनी गाण्ड मछली जैसे फ़ड़फ़ड़ाई, पर क्या मजाल थी कि गाण्ड से उसका मोटा लण्ड निकल पाता ! साले ने मजबूत सेटिन्ग की हुई थी। उसने घुड़सवारी के अन्दाज में कस कस कर कई मस्त धक्के लगा कर उसने मेरी गाण्ड को चोदा।

मैं घोड़ी की तरह हिनहिनाई,"आह … मार डाला रे, हाय राम, साले ने मेरी गाण्ड चोद दी।"

लेकिन वो तो अपना काम किसी रोबोट की तरह करता रहा … जैसे मेरी भाषा उसे समझ में नहीं आ रही हो।

चोदते चोदते जब दर्द कुछ हल्का हुआ … मैंने खुद को ढीला छोड़ दिया और उसका साथ देने लगी।

"अब कैसा लग रहा है… मेरी राण्ड? ले और खा मेरा लण्ड, ले साली ले मेरा लण्ड मस्ती से खा ले !"

वो तो मेरी गाण्ड इस तरह से बजा रहा था जैसे कि मैं सचमुच की राण्ड हूँ और कोई दलाल ढेर सारे पैसे दे कर उसके हवाले कर गया हो और वो मेरी फ़ाड़ कर अपना दिया हुआ माल वसूल कर रहा हो।

खैर जी, अब तो मैं भी मस्ती से मजा ले रही थी।

कुछ ही देर में वो बदहवास सा धक्के पर धक्के मारने लगा, मैं समझ गई कि वो झड़ने के करीब है। अचानक उसने अपना लण्ड बाहर खींचा, मैं भी शराफ़त छोड़ कर एक राण्ड की तरह पलटी और अपना मुँह लण्ड के ठीक नीचे बल्कि लण्ड के बहुत पास ले आई। उसने एक लम्बी आह भरी और अपनी सांस छोड़ते हुए पच पच करके अपना वीर्य छोड़ने लगा, मेरे मुंह में वो वीर्य गिराने लगा। मैं तो जैसे नशे में सराबोर हो गई।

"लूट किया ना मैंने तुम्हें, तेरी इज्जत को साली, फ़ाड़ दिया ना तेरी गाण्ड, बोल मेरी जान।" साहिल बोला।

"हुंह … तुमने मुझे लूट के मेरी इज़्ज़त और भी बढ़ा दी है… सही सलूक किया है मेरे साथ !" मैं बड़ी अदा से मुस्कराई।

"अब क्या इरादा है? और फ़ड़वाओगी मेरी रण्डी बहना? मिस छिनाल इण्डिया !"

"अब तुम मेरे मेहमान हो, रात भी पूरी पड़ी है … चाहो तो फ़ाड़ते रहो इस राण्ड की गाण्ड को और चूत को !" मैंने भी इतरा कर गाण्ड मटका कर जवाब दिया।

साहिल एक बार फिर मुझ पर टूट पड़ा। मेरे दोनों टांगें फिर से चौड़ी हो गई और लण्ड की धार एक बार फिर मेरे शरीर को चीरती हुई मेरी चूत में घुस पड़ी। इस बार मैंने अपनी मस्ती नहीं रोकी और जोर से मस्ती से चीख चीख कर चुदाने लगी।

मोनिषा बसु
sexygirl4uonly16@gmail.com

मेरी पत्नी की बहनें-1

Posted: 01 Mar 2013 06:08 AM PST


बात उस समय की है जब मेरी शादी को दो साल हो गए थे और मेरी बीवी को पहला बच्चा हुआ था। वो उस समय अपने मायके कानपुर में ही थी। मैं इलाहाबाद में पोस्टेड था। जब काफी दिन हो गए तो मैं अपने आफिस से छुट्टी ले कर अपने ससुराल गया ताकि बीवी और बच्चे से मिल आऊँ। अभी मेरी बीवी का इलाहाबाद आने का कोई प्रोग्राम नहीं था क्योंकि दिसम्बर का महीना चल रहा था और जाड़ा काफी अधिक पड़ रहा था।

कानपुर जब मैं अपने ससुराल गया तो मेरी खूब खातिरदारी हुई। मेरे ससुराल में मेरे ससुर, सास, एक साला और दो सालियाँ हैं। मेरे साले की हाल ही में नौकरी लगी थी और वो दिल्ली में पोस्टेड था। ससुरजी भी अच्छे सरकारी नौकरी में थे। दो साल में रिटायर होने वाले थे। लेकिन अधिकतर बीमार ही रहा करते थे। मेरी सालियाँ बड़ी मस्त थीं। दोनों ही मेरी पत्नी से छोटी थीं। मेरी पत्नी से ठीक छोटी वाली का नाम मोनिका है। वो 23 साल की, उससे छोटी अन्नू की उम्र 21 साल की है। दोनों ही स्नातक कर चुकी थी। यूँ तो दोनों दिन भर मेरे से चुहलबाजी करती रहती थी लेकिन कभी बात आगे नहीं बढ़ी थी। मैंने भी मोनिका की एक-दो बार चूची दबा दी थी लेकिन वो हंस कर भाग जाती थी। खैर मेरी बीवी नेहा खुद भी काफी सुन्दर थी। इसलिए कभी कोई ऐसी वैसी बात होने की नौबत नहीं आई।

इस बार मैं ज्यों ही अपने ससुराल पहुँचा तो वहां एक अजब समस्या आन पड़ी थी। दोनों ही सालियों ने बी.एड करने का फॉर्म भरा था और दोनों की ही परीक्षा लखनऊ में होनी थी। परीक्षा पूरे एक सप्ताह की थी। समस्या यह थी कि इन दोनों के साथ जाने वाला कोई था ही नहीं क्योंकि मेरे साले की अभी अभी नौकरी लगी थी और वो दिल्ली में था। मेरे ससुर जी को जोड़ों के दर्द ने इस तरह से जकड़ रखा था कि वो ज्यादा चल फिर नहीं पा रहे थे। सास का तो उनको छोड़ कर कहीं जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता था।

मेरी दोनों सालियाँ तो अकेले ही जाने के लिए तैयार थी लेकिन जमाने को देखते हुए मेरे ससुरजी इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे। इस कारण मेरी दोनों सालियाँ काफी उदास हो गई थी।

मुझे लगा कि यूँ तो मैं 15 दिनों की छुट्टी ले कर आया हूँ और यहाँ 3 दिन में ही बोर हो गया हूँ, क्यूँ ना मैं ही चला जाऊँ लेकिन ससुरजी क्या सोचेंगे, यह सोच कर मैं खामोश था।

अचानक मेरी सास ने ही मेरे ससुर को कहा कि क्यों नहीं दामाद जी को ही इन दोनों लड़कियों के साथ भेज दिया जाये।

ससुरजी को भी इसमें कोई आपत्ति नजर नहीं आई, उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने थोड़ी टालमटोल करने के बाद लखनऊ जाने के लिए हाँ कर दी और उसी दिन शाम को ही ट्रेन पकड़ कर लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

अगले दिन सुबह लखनऊ पहुँच कर एक होटल में हम लोग रुके, होटल में मैंने दो रूम बुक किये। एक डबलरूम दोनों सालियों के लिए तथा एक सिंगल रूम अपने लिए।

हम लोगों ने नाश्ता-पानी किया और मैंने उन दोनों को उनके परीक्षा केन्द्र पर पहुँचा दिया। हर तीसरे दिन एक परीक्षा होनी थी 12 बजे से 2 बजे तक, उसके बाद दो दिन आराम।

दोनों ने परीक्षा देकर वापस होटल आने के बाद ही भोजन किया। मैंने दोनों से परीक्षा के बारे में पूछा तो दोनों ने बताया कि परीक्षा काफी अच्छी हुई है।

खाना खाने के बाद वो दोनों अपने कमरे में गई तथा मैं अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

करीब 5 बजे मैंने सोचा कि उनसे पूछ लूँ अगर कहीं घूमने जाना है?

यह सोच कर मैं उनके कमरे में गया। दरवाज़ा मोनिका ने खोला, कमरे में अन्नू नजर नहीं आई।

मैंने मोनिका से पूछा- अन्नू कहाँ है?

वो बोली- बाथरूम गई है।

मैंने कहा- ओह।

मैंने देखा कि मोनिका सिर्फ एक झीनी सी नाइटी पहने हुए है। उसकी चूचियाँ साफ़ झलक रही हैं। उसके चूची के निप्पल तक का पता चल रहा था।

मैंने सीधे बिना किसी शर्म के ही धीरे से कहा- क्या बात है, ब्रा नहीं पहनी?

उसने कहा- यहाँ कौन है जिससे अपनी चूचियाँ छिपानी हैं?

सुन कर मैं दंग रह गया, कहा- क्यों, मैं नहीं हूँ?

वो बोली- आपसे क्या शर्माना? आप तो अपने आदमी हैं।

मैंने कहा- कभी ठीक से छूने भी नहीं देती हो और कहती हो कि आप अपने आदमी हैं।

उसने कहा - इसमें कुछ ख़ास थोड़े ही है जो आपको छूने नहीं दूंगी। आप छू कर देखिये। मैं मना नहीं करूंगी।

मैंने धीरे से उसे पीछे से पकड़ा और अपने हाथ मोनिका की चूची पर रख दिए। उसने सचमुच कुछ नहीं कहा और ना ही किसी प्रकार का प्रतिरोध किया। मैं उसकी चूची को जोर जोर से दबाने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा। जब मैंने देखा कि उसको भी मज़ा आ रहा है तो मेरी वानसा और बढ़ गई, मैंने अपना हाथ उसके नाइटी के अन्दर डाला और उसकी चूची को पकड़ लिया।

उफ़ ! क्या मखमली चूची थी मोनिका की।

मैंने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी साली इतनी सेक्सी हो सकती है। मैं कस कर के उसकी चूचियाँ दबा रहा था। वो आँख बंद कर के अपने वक्षमर्दन का आनन्द ले रही थी। मेरा लंड तनतना गया।

मैंने धीरे से कहा- ए ! जरा नाईटी खोल कर दिखा ना।

मोनिका ने कहा- खुद ही खोल कर देख लीजिये ना।

मैंने उसकी नाईटी को अचानक नीचे सरका दिया और उसकी चूचियों से नीचे ले आया। ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त चूची थी। मैंने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया। वो आँखें बंद करके मज़े ले रही थी।

उसने धीरे से कहा- जीजाजी, इसे चूसिये ना।

मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी चूची को चूसने लगा। ऐसा लग रहा था मानो शहद चूस रहा हूँ। मेरा लंड एकदम उफान पर था। मेरा लंड पैंट के अन्दर ही अन्दर गीला हो गया था। मैंने एक झटके में उसके बदन से पूरी नाइटी उतार दी और अपना शर्ट एवं पैंट भी। अब वो सिर्फ पेंटी में थी और मैं अंडरवियर में !

मैंने उसके बदन को चूमना चालू किया। चूमते- चूमते अपना दाहिना हाथ उसके पेंटी के अन्दर डाल दिया। घने घने बाल साफ़ आभास दे रहे थे। थोड़ा और नीचे गया तो कोमल सी चूत का साफ़ आभास होने लगा, वो पूरी गीली हो गई थी। उसने भी मेरे लंड पर हाथ लगा दिया और कहा- इसे भी खोलो ना जीजू।

मैंने बिना देर किये अपना अंडरवियर भी खोल दिया। वो मेरा लंड को अपने हाथ में ले कर सहलाने लगी। मैंने उसके होठों को कस कर दबाया हुआ था। मैं उसके चूत में अपनी उंगली डालने की कोशिश करने लगा तो वो बुरी तरह से छटपटाने लगी। मैंने किसी तरह से अपनी उंगली उसके चूत में डाल ही दी।

तभी बाथरूम के अन्दर से फ्लश की आवाज़ आई। मैं हड़बड़ा गया क्योंकि अन्नू निकलने वाली थी और मोनिका नंगी पड़ी हुई थी।

मैं झट उठ कर बैठ गया और अंडरवियर पहन लिया, मोनिका ने तुरंत ही अपनी पतली सी चुनरी अपने वक्ष पर ओढ़ ली। इससे उसका नंगी चूचियाँ तो छिप गई लेकिन नीचे वो सिर्फ पेंटी ही पहनी हुई थी यानि कोई भी देख कर समझ जाएगा कि कुछ तो गड़बड़ है।

मैं सोच रहा था कि यहाँ से चला जाऊँ लेकिन तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और अन्नू बाहर आ गई।

यह क्या ! उसने भी तो सिर्फ पेंटी ही पहन रखी थी। ऊपर वो पूरी तरह से नंगी थी। वो मुझे अंडरवियर में देख कर चौंक गई। मेरा लंड अभी भी 8 इंच के तनाव पर था।

फिर वो मुझे देख कर अपने हाथों से अपनी गोरी गोरी चूची को छिपाने का असफल प्रयास करते हुए हुए मुस्कुराई और बोली- आप कब आये?

मैंने कहा- अभी थोड़ी देर पहले !

मुझे पता नहीं था कि दुबली पतली सी दिखने वाली इस लड़की के चूचे इतने बड़े होंगे, मैं सोचने लगा- यार इसके भी तो चूचे अब हाथ लगाने लायक हो ही गए हैं।

अभी मैं इसी विषय पर सोच ही रहा था कि अन्नू ने कहा- क्यों जीजू, क्या देख रहे हो?

मैंने कहा- देख रहा हूँ कि छोटी बच्ची अब जवान हो गई है।

अन्नू ने कहा- आपको अभी तक पता ही नहीं चला था क्या?

मैंने अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से कस के दबाते हुए कहा- मुझे तो अंदाजा ही नहीं था कि आपके नीम्बू अब खरबूजे बन गए होंगे। तेरी चूचियाँ तो तो तेरी बहन मोनिका से भी बड़ी हैं, तू तो उसकी बड़ी बहन लगती है।

यह सुन कर अन्नू बोली- धत, मेरी तो अभी मोनिका दीदी से छोटी ही हैं।

मैंने कहा- नहीं, तेरी बड़ी हैं।

वो बोली- नहीं, मेरी छोटी हैं दीदी से !

मैंने कहा- लगी शर्त? तेरा बड़ी हैं। अगर तेरी छोटी हुआ तो 500 रुपये तेरे। अगर बड़ी हुई तो तू मुझे 500 रूपये देगी। बोल मंजूर है?

वो बोली- हाँ, मंजूर है। दीदी जरा खोल कर दिखा तो अपनी चूची?

मोनिका तो नंगी थी ही। उसने अपनी चुनरी हटाई, अन्नू ने देखा तो कहा- अरे, तू तो पहले से ही नंगी है?

मोनिका ने कहा- जीजू मेरे चूची का साइज़ नाप रहे थे। अच्छा, अब तू भी खोल कर दिखा।

अन्नू बिना समय गंवाए अपने हाथ नीचे कर के अपनी चूचियाँ मेरे सामने लाकर खड़ी हो गई। यूँ तो वास्ताव में अन्नू की चूचियाँ मोनिका से छोटी थी। लेकिन मैं तो सिर्फ उसकी चूची को देखने के लिए इतना ड्रामा कर रहा था। उसकी चूची भी मस्त थी।

मैंने कहा- ऐसे तो पता नहीं चल रहा है, हाथ से नाप कर ही पता चलेगा।

अन्नू मेरे पास आई और बोली- तो ठीक है। हाथ से नाप कर ही देख लीजिये और बताइए किसकी चूची बड़ी है और किसकी छोटी?

मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसकी चूची को मसलने लगा। मेरे लंड का हाल बुरा हो रहा था। थोड़ी देर उसकी चूची मसलता रहा। अन्नू की आँख बंद हो गई थी, उसे भी काफी आनंद आ रहा था।

उसने धीरे से कहा- जीजू अब बताइए न किसकी चूची बड़ी हैं और किसकी छोटी?

मैं भी कम धूर्त ना था, मैंने कहा- अंदाज़ ही नहीं मिल रहा है, दोनों बहनों की चुचियों को एक साथ छूना होगा। मोनिका इधर आ, तू भी मेरे गोद में बैठ जा।

मोनिका भी सिर्फ पेंटी पहन कर मेरी गोद में बैठ गई। अब मैं दोनों की चूचियाँ मसल रहा था। दोनों ही हल्की-हल्की सिसकारी भर रही थी।

फिर मैंने कहा- ऐसे पता नहीं चलेगा। मुँह में चूस कर पता चलेगा।

मैंने दोनों को बिस्तर पर सटा कर लिटा दिया। और बारी बारी से दोनों की चूचियाँ चूसने लगा। दोनों को अपनी चूचियाँ चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने कहा- दोनों की 19-20 ही हैं। अच्छा यह बताओ कि तुम दोनों में से किसके चूत पर बाल अधिक हैं?

मोनिका ने कहा - जीजू, खुद ही हमारी पेंटी खोल के देख लो ना !

कहानी जारी रहेगी।

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