हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


चूत की सफाई और चुदाई

Posted: 25 Mar 2013 08:00 PM PDT

मेरा नाम मेहराना है। अभी मेरी उम्र 24 साल की है। अभी तक अविवाहित हूँ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मेरी चूत भी कुंवारी है। यह तो बहुत पहले ही चुद चुकी।

तब मैं पढ़ती थी। उस दिन घर में मेरी अम्मा भी नहीं थी। मैं और मेरा भाई जो मुझसे 5 साल छोटा था घर पर अकेले थे। उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए मैं घर के काम कर रही थी। मेरा छोटा भाई पड़ोस में खेलने चला गया था। मैं बाथरूम में नहाने चली गई। अपने सारे कपड़े मैंने हॉल में ही छोड़ दिए और नंगी ही बाथरूम में चली गई, क्योंकि घर में तो कोई था नहीं इसलिए किसी के देखने का कोई भय भी नहीं था।

बाथरूम में आराम से मैं अपनी चूत को सहलाने लगी, सहलाते सहलाते अपने चूत में उंगली डाल ली। पूरी उंगली अन्दर चली गई। बड़ा ही मज़ा आया। अन्दर चूत में उंगली का स्पर्श साफ़ महसूस हो रहा था। मैं अपनी उंगली को चूत में घुमाने लगी।

मुझे लगा कि शायद चूत में अभी भी बहुत जगह इसमें खाली है, मैंने बाथरूम में रखा हुआ पुराना टूथब्रुश लिया और उलटे सिरे से पकड़ कर अपनी बुर में डाल लिया। मैं नीचे जमीन पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगों को पूरी तरह फैला दिया। इससे मुझे अपने बुर में ब्रश डालने में काफी आसानी हुई। अब मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा। इतना मज़ा आ रहा था कि पेशाब निकलने लगा। करीब आधे घंटे तक मैंने अपने चूत में कभी शेम्पू तो कभी नारियल तेल डाल डाल कर मज़ा लेती रही। और ब्रश से चूत की सफाई भी करती रही। थोड़ी देर के बाद मैं नहा कर वापस अपने कमरे में आ गई।

कुछ देर के बाद मेरा छोटा भाई भी बाहर से आ गया।

उसी शाम में मेरी अम्मा के दूर के रिश्ते में भाई लगने वाले एक रिश्तेदार मेरे यहाँ आ धमका। उसकी उम्र रही होगी कोई 20-21 साल की। उनको मेरी अम्मा से कुछ काम था। लेकिन अम्मा तो अगले दिन शाम में आने वाली थी। मैंने अम्मा को फोन करके उसके बारे में बताया तो अम्मा बोली- आज रात को उसे अपने घर में ही रुकने के लिए बाहरी कमरा दे देना।

रात को खाना पीना खाकर सभी चुपचाप सो गए। रात 11 बजे मुझे पेशाब लग गया। मैं बाथरूम गई तो मुझे फिर से वही सुबह में चूत में ब्रश डालने वाली घटना याद आ गई। मुझे फिर से अपनी बुर में ब्रश डालने का मन करने लगा।

मैंने अपने सारे कपड़े खोल कर अपने बुर में ब्रश डाल कर मज़े लेने लगी।

मुझे अपने बाथरूम का दरवाजा बंद करने का भी याद नहीं रहा। मैं दीवार की तरफ मुँह करके अपनी चूत में ब्रुश डाल कर मज़े ले रही थी।

तभी पीछे से आवाज आई- यह क्या कर रही हो मेहराना?

यह सुन कर मैं चौंक गई। मैंने पलट कर देखा तो मेरा मामू मसूद ठीक मेरे पीछे खड़ा था। वो सिर्फ एक तौलिया पहने हुए था।

मैंने कहा- आप यहाँ क्या कर रहे हैं मामू जान?

वो बोला- मुझे पिशाब लगा था इसलिए मैं यहाँ आया था तो देखा कि तुम कुछ कर रही हो।

मैं अब क्या कहूँ, क्या नहीं, हड़बड़ी में मैंने कह दिया- देखते नहीं, ये साफ़ कर रही हूँ। इसकी सफाई भी तो जरूरी है न? वैसे तुम यहाँ पिशाब करने आये हो ना तो करो और जाओ।

उसने कहा- मैं तो यहाँ पिशाब करने आया था।

मैंने कहा- ठीक है, तुम तब तक पिशाब करो, मैं अपना काम कर रही हूँ।

दरअसल मैं उसकी लंड देखना चाहती थी। सोच रही थी कि जब इसने मेरा चूत देख ली है तो मैं भी इसके लंड को देख कर हिसाब बराबर कर लूँ।

मसूद- तुम यहीं रहोगी?

मैंने कहा- हाँ। तुम्हें इस से क्या? ये मेरा घर है, मैं कहीं भी रहूँ।

उसने कहा- ठीक है।

और उसने अपना तौलिया खोल दिया और पूरी तरह से नंगा हो गया। मुझे सिर्फ उसकी लंड देखना था। उसका लंड मेरे अनुमान से कहीं बड़ा और मोटा था। उसकी लंड किसी मोटे सांप की तरह झूल रहा था। वो मेरे सामने ही कमोड पर बैठ गया। उसने अपने लंड को पकड़ा और उससे पेशाब करने लगा। यह देख मैं बहुत आश्चर्यचकित थी कि इतने मोटे लंड से कितना पिशाब निकलता है? पिशाब करने के बाद उसने अपने लंड को झाड़ा और सहलाने लगा।

उसने कहा- तुम अपनी चूत की सफाई ब्रश से करती हो?

मैंने कहा- हाँ !

उसने कहा- क्या तुम अपनी चूत के बाल भी साफ़ करती हो?

मैंने कहा- चूत के बाल? मेरे चूत में बाल तो नहीं हैं।

उसने कहा- चूत के अन्दर नहीं चूत के ऊपर बाल होते हैं, जैसे मेरे लंड के ऊपर बाल है ना उसी तरह।

कह कर वो अपने लंड के बालों को खींचने लगा।

मैंने पूछा- तुम्हारे लंड पर ये बाल कैसे हो गए हैं?

वो बोला- जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम्हारे चूत पर भी बाल हो जायेंगे।

मैंने कहा- तुम्हारा लंड तो इतना बड़ा है कि लटक रहा है। क्या मेरा बुर भी बड़ा होने पर इतना ही बड़ा और लटकने लगेगा?

वो हंस के बोला- अरे नहीं पगली, भला बुर भी कहीं लटकता है? हाँ वो कुछ बड़ा हो जायेगा।

फिर बोला- तुम एक जादू देखोगी? अगर तुम मेरे इस लंड को छुओगी तो यह कैसे और भी बड़ा और खड़ा हो जाएगा।

मुझे बहुत ही आश्चर्य हुआ।

मैंने कहा- ठीक है, दिखाओ जादू !

वो कमोड पर से उठ गया और मेरे पास आ गया, उसने अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर कहा- अब इसको छुओ।

मैंने उसके लंड को पकड़ लिया। ऐसा लग रहा था कि कोई गरम सांप पकड़ लिया हो।

उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से दबाया और अपने लंड को घिसवाने लगा। थोड़ी ही देर में मैंने देखा कि उसकी लंड सांप से किसी लकड़ी के टुकड़े जैसा बड़ा हो गया, एकदम कड़ा और बड़ा। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। उसने अचानक मेरा हाथ छोड़ दिया। लेकिन मैं उसके लंड को घसती ही रही। थोड़ी देर में देखा उसके लंड से चिपचिपा सा पानी निकल रहा था जो शेम्पू की तरह था, वो कराहने लगा।

मैंने कहा- ये क्या है?

वो बोला- हाय मेहराना, ये लंड का पानी है। बड़ा ही मज़ा आता है। तू भी अपने चूत से ऐसा ही पानी निकालेगी तो तुझे भी बड़ा मज़ा आयेगा।

मैंने कहा- लेकिन कैसे?

वो बोला- आ इधर मैं तुझे बता देता हूँ।

मैंने कहा- ठीक है, बता दो।

उसने मुझे कमोड पर बैठा दिया और मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। वो मेरी बुर को अपने मुँह से चूसने लगा। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसने मेरी बुर में अपनी जीभ डाल दी। मेरे से रहा नहीं गया और मेरी बुर से पिशाब निकलने लगा। लेकिन वो हटा नहीं और पेशाब पीने लगा। मैं तो एकदम पागल सी हो गई। वो मेरी निप्पल को ऐसे मसल रहा था लगा मानो वो मेरी चूची मसल रहा है। पेशाब हो जाने के बाद भी वो मेरी बुर को चूसता रहा।

फिर अचानक बोला- आ नीचे लेट जा।

मैंने कहा- क्यों मामू?

वो बोला- अरे आ ना ! तुझे और मस्ती करना बताता हूँ।

मैं चुपचाप बाथरूम के फर्श पर लेट गई। उसने मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रख दिया और मेरी बुर में उंगली डाल कर घुमाने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था।

वो बोला- अरे, तेरी बुर तो बहुत बड़ी है। इसे ब्रश से थोड़े ही साफ़ किया जाता है, आ इसकी मैं सफाई अपने लंड से कर देता हूँ।

मैंने कहा- अच्छा मामू, लेकिन ठीक से करना।

मामू ने कहा- हाँ मेहराना, देखना कैसी सफाई करता हूँ।

उसने बगल से नारियल तेल लिया और मेरे चूत के अन्दर उड़ेल कर उंगली डाल कर मेरी चूत की मुठ मारने लगा।

मस्ती के मारे मेरी तो आँखें बंद थी। उसने पहले एक उंगली डाली, फिर दो और फिर तीन उंगली डाल कर मेरी चूत को चौड़ा कर दिया। थोड़ी ही देर में उसने मेरी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा।

मुझे हल्का सा दर्द हुआ तो मैं कराह उठी।

वो रुक गया और बोला- क्या हुआ मेहराना?

मैंने कहा- तेरा लंड बहुत बड़ा है। यह मेरी बुर में नहीं घुसेगा।

वो बोला- रुक जा मेहराना। तू घबरा मत। बस मेरे लंड को देखती रह।

हालांकि मेरी हिम्मत नहीं थी कि इतने मोटे लंड को अपनी बुर में घुसवा लूं लेकिन मैं भी मज़े लेना चाहती थी। इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।

अब उसने मेरी बुर के छेद पर अपना लंड रखा और धीरे धीरे रुक रुक कर अपने लंड को मेरी बुर में घुसाने लगा। मुझे थोड़ा दर्द तो हो रहा था लेकिन तेल की वजह से ज्यादा दर्द नहीं हुआ। उसने पूरा लंड मेरी बुर में डाल दिया। मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा था कि इतना मोटा और बड़ा लंड मेरी छोटी सी बुर में कैसे चला गया।

वो मेरी बुर में अपना लंड डाल कर थोड़ी देर रुका रहा, फिर बोला- दर्द तो नहीं कर रहा ना?

मैंने कहा- थोड़ा थोड़ा !

फिर उसने थोड़ा सा लंड बाहर निकाला और फिर धीरे से अन्दर कर दिया। मुझे मज़ा आने लगा। वो धीरे धीरे यही प्रक्रिया कई बार करता रहा। अब मुझे दर्द नहीं कर रहा था। थोड़ी देर के बाद वो अचानक मेरी बुर को जोर जोर से धक्के मारने लगा।

मैंने पूछा- ये क्या कर रहे हो?

वो बोले- तेरी बुर की सफाई कर रहा हूँ।

मुझे आश्चर्य हुआ- अच्छा ! तो इसको सफाई कहते हैं?

वो बोला- हाँ मेरी जान। यह चूत की सफाई भी है और चुदाई भी।

मैंने कहा- तो क्या तुम मुझे चोद रहे हो?

वो बोला- हाँ, कैसा लग रहा है?

मैंने कहा- अच्छा लग रहा है।

वो बोला- पहले किसी को चुदवाते हुए देखा है?

मैंने कहा- देखा तो नहीं है लेकिन अपनी सीनियर लड़कियों के बारे में सुना है कि वो अपने दोस्तों से चुदवाती हैं। तभी से मेरा मन भी कर रहा था कि मैं भी चुदवा लूं। लेकिन मुझे पता ही नहीं था कि कैसे चुदवाऊँ?

वो बोला- अब पता चल गया ना?

मैंने कहा- हाँ मामू।

थोड़ी देर में उसने मुझे कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद कर के कराहने लगा। मुझे अपने चूत में गरम गरम सा कुछ महसूस हो रहा था।

मैंने पूछा- क्या हुआ मामू? मेरे चूत में गरम सा क्या निकाला आपने?

वो बोला- कुछ नहीं मेरी जान । वो मेरे लंड से माल निकल गया है।

थोड़ी देर में उसने मेरे चूत से से अपना लंड निकाला और खड़ा हो गया। मैंने अपने चूत की तरफ देखा कि इससे खून निकल रहा था।मैं काफी डर गई और मामू को बोली- मामू, ये खून जैसा क्या निकल गया मेरे चूत से?

हालांकि वो जानता था कि मेरी चूत की झिल्ली फट गई है लेकिन उसने झूठ का कहा- अरे कुछ नहीं। ये तो मेरा माल है। जब पहली बार कोई लड़की चुदवाती है तो उसके चूत में माल जा कर लाल हो जाता है। आ इसे साफ़ कर देता हूँ।

मैं थोड़ा निश्चिंत हो गई।

फिर हम दोनों ने एक साथ स्नान किया। उसने मुझे अच्छी तरह से पूरा नहला-धुला कर सब साफ़ कर दिया और फिर हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर अपने अपने कमरे में चले गए।

सुबह जब मेरा छोटा भाई स्कूल चला गया तो मैं उसे चाय देने गई।

उसने मुझसे कहा- कैसी हो मेहराना?

मैंने कहा- ठीक ही हूँ।

उसने कहा- तेरी चूत में दर्द तो नही है ना?

मैंने कहा- दर्द तो है लेकिन हल्का हल्का। कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना मामू?

मामू ने कहा- अरे नहीं पगली। पहली बार तूने अपने चूत में लंड लिया था न इसलिए ऐसा लग रहा है। और देख, किसी को कल रात के बारे में मत बताना। नहीं तो तुझे सब गन्दी लड़की कहेंगे।

मैंने कहा- ठीक है, लेकिन एक शर्त है।

वो बोला- क्या?

मैंने कहा- एक बार फिर से मेरी बुर की सफाई करो लेकिन इस बार बाथरूम में नहीं बल्कि इसी कमरे में।

वो बोला- ठीक है आ जा।

और मैंने उसके कमरे का दरवाजा लगा कर फिर से अपनी चूत चुदवाई। वो भी दो बार ! वो भी बिल्कुल फ्री में।

दोपहर में अम्मा आ गई। अम्मा के आने के बाद भी वो मेरे यहाँ अगले पांच दिन जमा रहा। इस पांच दिन में मैंने आठ बार अपनी चूत उससे साफ़ करवाई।

इसके बाद न जाने कितने मर्दों के लंड को अपने चूत और गांड में डाल चुकी हूँ मुझे अब याद भी नहीं।

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चुदाई का स्वर्ग -3

Posted: 25 Mar 2013 07:00 AM PDT


चुदाई का स्वर्ग -2
अमर तॄप्त होकर उसे चूमता हुआ बोला. "हां मेरी जान, चोद चोद कर बेहोश कर दिया साली को, बहुत रो रही थी, दर्द का नाटक खूब किया पर मैने नहीं सुना. क्या मजा आया उस नन्ही चूत को चोदकर." रेखा वासना के जोश में घुटने के बल अमर के सामने बैठ गई और उसका रस भरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. लंड पर कमला की बुर का पानी और अमर के वीर्य का मिलाजुला मिश्रण लगा था. पूरा साफ़ करके ही वह उठी.

अमर कपड़े पहन कर ऑफ़िस जाने को तैयार हुआ. उसने अपनी कामुक बीवी से पुछा कि अब वह क्या करेगी? रेखा बोली "इस बच्ची की रसीली बुर पहले चूसूंगी जिसमें तुंहारा यह मस्त रस भरा हुआ है. फिर उससे अपनी चूत चुसवाऊंगी. हम लड़कियों के पास मजा करने के लिये बहुत से प्यारे प्यारे अंग है. आज ही सब सिखा दूंगी उसे"

अमर ने पूछा. "आज रात का क्या प्रोग्राम है रानी?" रेखा उसे कसकर चूमते हुए बोली. " जल्दी आना, आज एक ही प्रोग्राम है. तुंहारी बहन की रात भर गांड मारने का. खूब सता सता कर, रुला रुला कर गांड मारेम्गे साली की, जितना वह रोयेगी उतना मजा आयेगा. मै कब से इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रही हूं"

अमर मुस्कराके बोला "बड़ी दुष्ट हो. लड़की को तड़पा तड़पा कर भोगना चाहती हो." रेखा बोली. "तो क्या हुआ, शिकार करने का मजा अलग ही है. बाद में उतना ही प्यार करूम्गी अपनी लाड़ली ननद को. ऐसा यौन सुख दूम्गी कि वह मेरी दासी हो जायेगी. हफ़्ते भर में चुद चुद कर फ़ुकला हो जायेगी तुंहारी बहन, फ़िर दर्द भी नहीं होगा और खुद ही चुदैल हमसे चोदने की माम्ग करेगी. पर आज तो उसकी कुम्वारी गांड मारने का मजा ले लेम." अमर हम्स कर चला गया और रेखा ने बड़ी बेताबी से कमरे में घुस कर दरवाजा लगा लिया.

कमला होश में आ गई थी और पलंग पर लेट कर दर्द से सिसक रही थी. चुदासी की प्यास खत्म होने पर अब उसकी चुदी और भोगी हुई बुर में खूब दर्द हो रहा था. रेखा उसके पास बैठ कर उसके नंगे बदन को प्यार से सहलाने लगी. "क्या हुआ मेरी कमला रानी को? नंगी क्यों पड़ी है और यह तेरी टांगों के बीच से चिपचिपा क्या बह रहा है?" बेचारी कमला शर्म से रो दी. "भाभी, भैया ने आज मुझे चोद डाला."

रेखा आश्चर्य का नाटक करते हुए बोली. "चोद डाला, अपनी ही नन्हीं बहन को? कैसे?" कमला सिसकती हुई बोली. "मै गंदी किताब देखती हुई पकड़ी गई तो मुझे सजा देने के लिये भैया ने मेरे कपड़े जबर्दस्ती निकाल दिये, मेरी चूत चूसी और फ़िर खूब चोदा. मेरी बुर फाड़ कर रख दी. गांड भी मारना चाहते थे पर मैने जब खूब मिन्नत की तो छोड़ दिया" रेखा ने पलंग पर चढ कर उसे पहले प्यार से चूमा और बोली. "ऐसा? देखूं जरा" कमला ने अपनी नाजुक टांगें फैला दी. रेखा झुक कर चूत को पास से देखने लगी.

कच्ची कमसिन की तरह चुदी हुई लाल लाल कुन्वारी बुर देख कर उसके मुह में पानी भर आया और उसकी खुद की चूत मचल कर गीली होने लगी. वह बोली "कमला, डर मत, चूत फ़टी नहीं है, बस थोड़ी खुल गई है. दर्द हो रहा होगा, अगन भी हो रही होगी. फ़ूंक मार कर अभी ठण्डी कर देती हूं तेरी चूत." बिल्कुल पास में मुंह ले जा कर वह फ़ूंकने लगी. कमला को थोड़ी राहत मिली तो उसका रोना बन्द हो गया.

फ़ूंकते फ़ूंकते रेखा ने झुक कर उस प्यारी चूत को चूम लिया. फ़िर जीभ से उसे दो तीन बार चाटा, खासकर लाल लाल अनार जैसे दाने पर जीभ फ़ेरी. कमला चहक उठी. "भाभी, क्या कर रही हो?"
"रहा नहीं गया रानी, इतनी प्यारी जवान बुर देखकर, ऐसे माल को कौन नहीं चूमना और चूसना चाहेगा? क्यों, तुझे अच्छा नहीं लगा?" रेखा ने उस की चिकनी छरहरी रानों को सहलाते हुए कहा.
"बहुत अच्छा लगा भाभी, और करो ना." कमला ने मचल कर कहा. रेखा चूत चूसने के लिये झुकती हुई बोली. "असल में तुंम्हारे भैया का कोई कुसूर नहीं है. तुम हो ही इतनी प्यारी कि औरत होकर मुझे भी तुम पर चढ़ जाने का मन होता है तो तेरे भैया तो आखिर मस्त जवान है." अब तक कमला काफ़ी गरम हो चुकी थी और अपने चूतड़ उचका उचका कर अपनी बुर रेखा के मुंह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी.

कमला की अधीरता देखकर रेखा बिना किसी हिचकिचाहट से उस कोमल बुर पर टूट पड़ी और उसे बेतहाशा चाटने लगी. चाटते चाटते वह उस मादक स्वाद से इतनी उत्तेजित हो गई कि अपने दोनो हाथों से कमला की चुदी चूत के सूजे पपोटे फ़ैला कर उस गुलाबी छेद में जीभ अन्दर डालकर आगे पीछे करने लगी. अपनी भाभी की लम्बी गीली मुलायम जीभ से चुदना कमला को इतना भाया कि वह तुरन्त एक किलकारी मारकर झड़ गई.

बात यह थी कि कमला को भी अपनी सुंदर भाभी बहुत अच्छी लगती थी. अपनी एक दो सहेलियों से उसने स्त्री और स्त्री सम्बन्धो के बारे में सुन रखा था. उसकी एक सहेली तो अपनी मौसी के साथ काफ़ी करम करती थी. कमला भी ये किसी सुन सुन कर अपने भाभी के प्रति आकर्षित होकर कब से यह चाहती थी कि भाभी उसे बाहों में लेकर प्यार करे.

अब जब कल्पनानुसार उसकी प्यारी भाभी अपने मोहक लाल ओठों से सीधे उसकी चूत चूस रही थी तो कमला जैसे स्वर्ग में पहुंच गई. उसकी चूत का रस रेखा की जीभ पर लिपटने लगा और रेखा मस्ती से उसे निगलने लगी. बुर के रस और अमर के वीर्य का मिलाजुला स्वाद रेखा को अमृत जैसा लगा और वह उसे स्वाद ले लेकर पीने लगी.

अब रेखा भी बहुत कामातुर हो चुकी थी और अपनी जांघे रगड़ रगड़ कर स्खलित होने की कोशिश कर रही थी. कमला ने हाथो में रेखा भाभी के सिर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबा लिया और उसके घने लम्बे केशों में प्यार से अपनी उंगलियां चलाते हुए कहा. "भाभी, तुम भी नंगी हो जाओ ना, मुझे भी तुंम्हारी चूचियां और चूत देखनी है." रेखा उठ कर खड़ी हो गई और अपने कपड़े उतारने लगी. उसकी किशोरी ननद अपनी ही बुर को रगड़ते हुए बड़ी बड़ी आंखो से अपनी भाभी की ओर देखने लगी. उसकी खूबसूरत भाभी उसके सामने नंगी होने जा रही थी.

रेखा ने साड़ी उतार फ़ेकी और नाड़ा खोल कर पेटीकोट भी उतार दिया. ब्लाउज के बटन खोल कर हाथ ऊपर कर के जब उसने ब्लाउज उतारा तो उसकी स्ट्रैप्लेस ब्रा में कसे हुए उभरे स्तन देखकर कमला की चूत में एक बिजली सी दौड़ गई. भाभी कई बार उसके सामने कपड़े बदलती थी पर इतने पास से उसके मचलते हुए मम्मों की गोलाई उसने पहली बार देखी थी. और यह मादक ब्रेसियर भी उसने पहले कभी नहीं देखी थी.

अब रेखा के गदराये बदन पर सिर्फ़ सफ़ेद जांघिया और वह टाइट सफ़ेद ब्रा बची थी. "भाभी यह कन्चुकी जैसी ब्रा तू कहां से लाई? तू तो साक्षात अप्सरा दिखती है इसमे." रेखा ने मुस्करा कर कहा "एक फ़ैशन मेगेज़ीन में देखकर बनवाई है, तेरे भैया यह देखकर इतने मस्त हो जाते है कि रात भर मुझे चोद लेते है."
"भाभी रुको, इन्हें मै निकालूंगी." कहकर कमला रेखा के पीछे आकर खड़ी हो गई और उसकी मान्सल पीठ को प्यार से चूमने लगी. फिर उसने ब्रा के हुक खोल दिये और ब्रा उछल कर उन मोटे मोटे स्तनों से अलग होकर गिर पड़ी. उन मस्त पपीते जैसे उरोजों को देख्कर कमला अधीर होकर उन्हें चूमने लगी. "भाभी, कितनी मस्त चूचियां है तुंम्हारी. तभी भैया तुंहारी तरफ़ ऐसे भूखों की तरह देखते है." रेखा के चूचुक भी मस्त होकर मोटे मोटे काले कड़क जामुन जैसे खड़े हो गये थे. उसने कमला के मुंह मे एक निपल दे दिया और उस उत्तेजित किशोरी को भींच कर सीने से लगा लिया. कमला आखे बन्द कर के बच्चे की तरह चूची चूसने लगी.

रेखा के मुंह से वासना की सिसकारियां निकलने लगीं और वह अपनी ननद को बाहों में भर कर पलंग पर लेट गई. "हाय मेरी प्यारी बच्ची, चूस ले मेरे निपल, पी जा मेरी चूची, तुझे तो मै अब अपनी चूत का पानी भी पिलाऊंगी."
कमला ने मन भर कर भाभी की चूचियां चूसीं और बीच में ही मुंह से निकाल कर बोली. "भाभी अब जल्दी से मां बन जाओ, जब इनमें दूध आएगा तो मै ही पिया करूंगी, अपने बच्चे के लिये और कोई इन्तजाम कर लेना." और फ़िर मन लगा कर उन मुलायम स्तनों का पान करने लगी. "जरूर पिलाऊंगी मेरी रानी, तेरे भैया भी यही कहते है. एक चूची से तू पीना और एक से तेरे भैया." रेखा कमला के मुंह को अपने स्तन पर दबाते हुए बोली.

अपने निपल में उठती मीठी चुभन से रेखा निहाल हो गई थी. अपनी पैंटी उसने उतार फ़ेकी और फ़िर दोनों जांघो में कमला के शरीर को जकड़कर उसे हचकते हुए रेखा अपनी बुर उस की कोमल जांघो पर रगड़ने लगी. रेखा के कड़े मदनमणि को अपनी जांघ पर रगड़ता महसूस करके कमला अधीर हो उठी. "भाभी, मुझे अपनी चूत चूसने दो ना प्लीज़"
"तो चल आजा मेरी प्यारी बहन, जी भर के चूस अपनी भाभी की बुर, पी जा उसका नमकीन पानी" कहकर रेखा अपनी मांसल जांघे फैला कर पलंग पर लेट गई. एक तकिया उसने अपने नितम्बों के नीचे रख लिया जिससे उसकी बुर ऊपर उठ कर साफ़ दिखने लगी.

वासना से तड़पती वह कमसिन लड़की अपनी भाभी की टांगों के बीच लेट गई. रेखा की रसीली बुर ठीक उसकी आंखो के सामने थी. घनी काली झांटो के बीच की गहरी लकीर में से लाल लाल बुर का छेद दिख रहा था. "हाय भाभी, कितनी घनी और रेशम जैसी झांटे हैं तुम्हारी, काटती नहीं कभी?" उसने बालों में उंगलियां डालते हुए पूछा.

"नहीं री, तेरे भैया मना करते हैं, उन्हें घनी झांटे बहुत अच्छी लगती हैं." रेखा मुस्कराती हुई बोली. "हां भाभी, बहुत प्यारी हैं, मत काटा करो, मेरी भी बढ़ जाएं तो मैं भी नहीं काटूंगी." कमला बोली. उससे अब और न रहा गया. अपने सामने लेटी जवान भरी पूरी औरत की गीली रिसती बुर में उसने मुंह छुपा लिया और चाटने लगी. रेखा वासना से कराह उठी और कमला का मुंह अपनी झांटो पर दबा कर रगड़ने लगी. वह इतनी गरम हो गई थी कि तुरन्त झड़ गई.

"हाय मर गई रे कमला बिटिया, तेरे प्यारे मुंह को चोदूं, साली क्या चूसती है तू, इतनी सी बच्ची है फ़िर भी पुरानी रंडी जैसी चूसती है. पैदाइशी चुदैल है तू" दो मिनट तक वह सिर्फ़ हांफ़ते हुए झड़ने का मजा लेती रही. फ़िर मुस्कराकर उसने कमला को बुर चूसने का सही अन्दाज सिखाना शुरू किया. उसे सिखाया कि पपोटे कैसे अलग किये जाते हैं, जीभ का प्रयोग कैसे एक चम्मच की तरह रस पीने को किया जाता है और बुर को मस्त करके उसमे से और अमृत निकलने के लिये कैसे क्लाईटोरिस को जीभ से रगड़ा जाता है.

थोड़ी ही देर में कमला को चूत का सही ढंग से पान करना आ गया और वह इतनी मस्त चूत चूसने लगी जैसे बरसों का ज्ञान हो. रेखा पड़ी रही और सिसक सिसक कर बुर चुसवाने का पूरा मजा लेती रही. "चूस मेरी प्यारी बहना, और चूस अपनी भाभी की बुर, जीभ से चोद मुझे, आ ऽ ह ऽ , ऐसे ही रानी बिटिया ऽ , शा ऽ बा ऽ श."

काफ़ी झड़ने के बाद उसने कमला को अपनी बाहों में समेट लिया और उसे चूम चूम कर प्यार करने लगी. कमला ने भी भाभी के गले में बाहें डाल दीं और चुम्बन देने लगी. एक दूसरे के होंठ दोनों चुदैलें अपने अपने मुंह में दबा कर चूसने लगीं. रेखा ने अपनी जीभ कमला के मुंह में डाल दी और कमला उसे बेतहाशा चूसने लगी. भाभी के मुख का रसपान उसे बहुत अच्छा लग रहा था.
रेखा अपनी जीभ से कमला के मुंह के अन्दर के हर हिस्से को चाट रही थी, उस बच्ची के गाल, मसूड़े, तालू, गला कुछ भी नहीं छोड़ा रेखा ने. शैतानी से उसने कमला के हलक में अपनी लंबी जीभ उतार दी और गले को अन्दर से चाटने और गुदगुदाने लगी. उस बच्ची को यह गुदगुदी सहन नहीं हुई और वह खांस पड़ी. रेखा ने उसके खांसते हुए मुंह को अपने होंठों में कस कर दबाये रखा और कमला की अपने मुंह में उड़ती रसीली लार का मजा लेती रही.

आखिर जब रेखा ने उसे छोड़ा तो कमला का चेहरा लाल हो गया थी. "क्या भाभी, तुम बड़ी हरामी हो, जान बूझ कर ऐसा करती हो." रेखा उसका मुंह चूमते हुए हंस कर बोली. "तो क्या हुआ रानी? तेरा मुखरस चूसने का यह सबसे आसान उपाय है. मैने एक ब्लू फ़िल्म में देखा था."

फ़िर उस जवान नारी ने उस किशोरी के पूरे कमसिन बदन को सहलाया और खास कर उसके कोमल छोटे छोटे उरोजों को प्यार से हौले हौले मसला. फिर उसने कमला को सिखाया कि कैसे निपलों को मुंह में लेकर चूसा जाता है. बीच में ही वह हौले से उन कोमल निपलों को दांत से काट लेती थी तो कमला दर्द और सुख से हुमक उठती थी. "निपल काटो मत ना भाभी, दुखता है, नहीं , रुको मत, हा ऽ य, और काटो, अच्छा लगता है."

अन्त में उसने कमला को हाथ से हस्तमैथुन करना सिखाया."देख कमला बहन, हम औरतों को अपनी वासना पूरी करने के लिये लंड की कोई जरूरत नहीं है. लंड हो तो बड़ा मजा आता है पर अगर अकेले हो, तो कोई बात नहीं."

कमला भाभी की ओर अपनी बड़ी बड़ी आंखो से देखती हुई बोली "भाभी उस किताब में एक औरत ने एक मोटी ककड़ी अपनी चूत में घुसेड़ रखी थी." रेखा हंस कर बोली "हां मेरी रानी बिटिया, ककड़ी, केले, गाजर, मूली, लम्बे वाले बैंगन, इन सब से मुट्ठ मारी जा सकती है. मोटी मोमबत्ती से भी बहुत मजा आता है. धीरे धीरे सब सिखा दूंगी पर आज नहीं. आज तुझे उंगली करना सिखाती हूं. मेरी तरफ़ देख."
रेखा रण्डियों जैसी टांगें फ़ैलाकर बैठ गई और अपनी अंगूठे से अपने क्लाईटोरिस को सहलाना शुरू कर दिया. कमला ने भी ऐसा ही किया और आनन्द की एक लहर उसकी बुर में दौड़ गई. रेखा ने फ़िर बीच की एक उंगली अपनी खुली लाल चूत में डाल ली और अन्दर बाहर करने लगी.

भाभी की देखा देखी कमला भी उंगली से हस्तमैथुन करने लगी. पर उसका अंगूठा अपने क्लिट पर से हट गया. रेखा ने उसे समझाया. "रानी, उंगली से मुट्ठ मारो तो अंगूठा चलता ही रहना चाहिये अपने मणि पर." धीरे धीरे रेखा ने दो उंगली घुसेड़ लीं और अन्त में वह तीन उंगली से मुट्ठ मारने लगी. फ़चाफ़च फ़चाफ़च ऐसी आवाज उसकी गीली चूत में से निकल रही थी.
कमला को लगा कि वह तीन उंगली नहीं घुसेड़ पायेगी पर आराम से उसकी तीनों उंगलियां जब खुद की कोमल बुर में चली गईं तो उसके मुंह से आश्चर्य भरी एक किलकारी निकल पड़ी. रेखा हंसने लगी. "अभी अभी भैया के मोटे लंड से चुदी है इसलिये अब तेरी चारों उंगलियां चली जायेंगी अन्दर. वैसे मजा दो उंगली से सबसे ज्यादा आता है."

दोनों अब एक दूसरे को देख कर अपनी अपनी मुट्ठ मारने लगीं. रेखा अपने दूसरे हाथ से अपने उरोज दबाने लगी और निपलों को अंगूठे और एक उंगली में लेकर मसलने लगी. कमला ने भी ऐसा ही किया और मस्ती में झूंम उठी. अपनी चूचियां खुद ही दबाते हुए दोनों अब लगातार सड़का लगा रही थी.

रेखा बीच बीच में अपनी उंगली अपने मुंह में डालकर अपना ही चिपचिपा रस चाट कर देखती और फिर मुट्ठ मारने लगती. कमला ने भी ऐसा ही किया तो उसे अपनी खुद की चूत का स्वाद बहुत प्यारा लगा. रेखा ने शैतानी से मुस्कराते हुए उसे पास खिसकने और मुंह खोलने को कहा. जैसे ही कमला ने अपना मुंह खोला, रेखा ने अपने चूत रस से भरी चिपचिपी उंगलियां उसके मुंह में दे दी.
रेखा ने भी कमला का हाथ खींच कर उसकी उंगलियां मुंह में दबा लीं और चाटने लगी. "यही तो अमृत है जिसके लिये यह सारे मर्द दीवाने रहते हैं. बुर का रस चूसने के लिये साले हरामी मादरचोद मरे जाते हैं. बुर के रस का लालच दे कर तुम इनसे कुछ भी करवा सकती हो. तेरे भैया तो रात रात भर मेरी बुर चूसकर भी नहीं थकते."

कई बार मुट्ठ मारने के बाद रेखा बोली. "चल छोटी अब नहीं रहा जाता. अब तुझे सिक्सटी - नाईन का आसन सिखाती हूं. दो औरतों को आपस में सम्भोग करने के लिये यह सबसे मस्त आसन है. इसमें चूत और मुंह दोनों को बड़ा सुख मिलता है." रेखा अपनी बांई करवट पर लेट गई और अपनी मांसल दाहिनी जांघ उठा कर बोली. "आ मेरी प्यारी बच्ची, भाभी की टांगों में आ जा." कमला उल्टी तरफ़ से रेखा की निचली जांघ पर सिर रख कर लेट गई. पास से रेखा की बुर से बहता सफ़ेद चिपचिपा स्त्राव उसे बिल्कुल साफ़ दिख रहा था और उसमें से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी.

रेखा ने उसका सिर पकड़ कर उसे अपनी चूत में खींच लिया और अपनी बुर के पपोटे कमला के मुंह पर रख दिये. "चुम्बन ले मेरे निचले होंठों को जैसे कि मेरे मुंह का रस ले रही थी." जब कमला ने रेखा की चूत चूमना शुरू कर दिया तो रेखा बोली. "अब जीभ अन्दर डाल रानी बिटिया" कमला अपनी जीभ से भाभी को चोदने लगी और उसके रिसते रस का पान करने लगी. रेखा ने अब अपनी उठी जांघ को नीचे करके कमला का सिर अपनी जांघों मे जकड़ लिया और टांगें साइकिल की तरह चला के उसके कोमल मुंह को सीट बनाकर उसपर मुट्ठ मारने लगी.

भाभी की मांसल जांघों में सिमट कर कमला को मानो स्वर्ग मिल गया. कमला मन लगा कर भाभी की चूत चूसने लगी. रेखा ने बच्ची की गोरी कमसिन टांगें फैला कर अपना मुंह उस नन्ही चूत पर जमा दिया और जीभ घुसेड़ घुसेड़ कर रसपान करने लगी. कमला ने भी अपनी टांगों के बीच भाभी का सिर जकड़ लिया और टांगें कैंची की तरह चलाती हुई भाभी के मुंह पर हस्तमैथुन करने लगी.
दस मिनट तक कमरे में सिर्फ़ चूसने, चूमने और कराहने की अवाजें उठ रही थी. रेखा ने बीच में कमला की बुर में से मुंह निकालकर कहा. "रानी मेरा क्लाईटोरिस दिखता है ना?" कमला ने हामी भरी. "हां भाभी, बेर जितना बड़ा हो गया है, लाल लाल है." "तो उसे मुंह में ले और चाकलेट जैसा चूस, उसपर जीभ रगड़, मुझे बहुत अच्छा लगता है मेरी बहना, तेरे भैया तो माहिर हैं इसमे."

रेखा ने जोर जोर से साइकिल चला कर आखिर अपनी चूत झड़ा ली और आनन्द की सीत्कारियां भरती हुई कमला के रेशमी बालों में अपनी उंगलियां चलाने लगी. कमला को भाभी की चूत मे से रिसते पानी को चाटने में दस मिनट लग गये. तब तक वह खुद भी रेखा की जीभ से चुदती रही. रेखा ने उसका जरा सा मटर के दाने जैसा क्लाईटोरिस मुंह में लेके ऐसा चूसा कि वह किशोरी भी तड़प कर झड़ गई. कमला का दिल अपनी भाभी के प्रति प्यार और कामना से भर उठा क्योंकि उसकी प्यारी भाभी अपनी जीभ से उसे दो बार झड़ा चुकी थी. एक दूसरे की बुर को चाट चाट कर साफ़ करने के बाद ही दोनों चुदैल भाभी ननद कुछ शांत हुई.

थोड़ा सुस्ताने के लिये दोनों रुकीं तब रेखा ने पूछा. "कमला बेटी, मजा आया?" कमला हुमक कर बोली "हाय भाभी कितना अच्छा लगता है बुर चूसने और चुसवाने मे." रेखा बोली "अपनी प्यारी प्रेमिका के साथ सिक्सटी - नाइन करने से बढ़कर कोई सुख नहीं है हम जैसी चुदैलों के लिये, कितना मजा आता है एक दूसरे की बुर चूस कर. आह ! क्रीड़ा हम अब घन्टों तक कर सकते हैं."

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चाची को चोदा

Posted: 25 Mar 2013 05:38 AM PDT


मेरे सारे प्यारे दोस्तों को मेरा सेक्सी सलाम !

आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ, मैं इसे पहली बार नेट पे डाल रहा हूँ।

मेरा नाम दीप है और मैं गुजरात में सूरत का रहने वाला हूँ। मैं एक ३२ साल का युवक हूँ और दिखने काफी स्मार्ट और लम्बा चौड़ा हूँ।

मेरी कहानी आज से चार साल पहले की है। मेरी एक चाची है, उसका नाम दिव्या है जो एक विधवा औरत है। काफी सालों पहले मेरे चाचा का देहांत हो गया था। अभी चाची की उम्र करीब चालीस साल है लेकिन दिखने में 28-30 की लगती हैं। हालांकि उनकी दो लड़कियाँ हैं दोनों सुन्दर और सेक्सी हैं।

पहले मैं चाची के बारे में सोच-सोच कर मुठ मारता था। चाची के घर मैं कभी-कभी जाता था और उनको देख-देख के लम्बी-लम्बी साँसें भरता था।

एक दिन दोपहर को चाची का फ़ोन आया कि घर पर नया एसी लिया है जो इंस्टाल करवाना है। मैं तुंरत ही पहुँच गया, देखा के डीलर के यहाँ से दो लोग आये थे और आंटी के कमरे में एसी लगाने के बारे में बातचीत कर रहे थे।

इतने में मैं पहुंचा तो चाची ने मुझसे पूछा- दीप इसको कहाँ डलवायेंगे?

मैंने कहा- जहाँ आपकी मर्जी हो, डलवा लो !

यह सुनकर वो तिरछी नजरों से मुझे देखने लगी। लेकिन उस वक्त कुछ नहीं हुआ। कुछ दिन बाद मुझे फिर से उनका फोन आया कि एसी में कुछ गड़बड़ है, तो मैं चला गया।

मैंने देखा कि चाची कमरे में अकेली है और किसी से फोन पर बातें कर रही हैं। उतने में उनके हाथ से कॉर्डलेस फोन गिर गया और वो उसे उठाने के लिए नीचे झुकी ....

माय गॉड ! क्या नजारा था... उनके सफ़ेद स्तन जो कि पारदर्शक साड़ी से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे, उन्हें मैंने देख लिया और तुंरत ही मेरा लंड खड़ा हो गया।

चाची की अनुभवी नजरों ने यह देख लिया और मेरी तरफ एक हल्की सी मुस्कान दी। मैंने भी सामने मुस्करा दिया। उस वक्त दोपहर के करीब ढाई बजे थे और घर में कोई नहीं था। हम दोनों के अलावा। चाची ने मुझे बैठने को कहा और सीधा ही पूछ लिया- क्या देख रहा था?

मैंने बिना घबराए जवाब दिया- आपको और आपके शरीर को देख रहा था, जो कि बहुत ही सुन्दर है।

चाची का फिगर बहुत बढ़िया है, उनके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए और 42 साइज़ के हैं। गांड का आकार भी करीब उतना ही होगा और उसका रंग एक दम दूधिया है जिसे देखकर कोई भी चूतिया मुठ मार लेगा तुरंत उसी स्थान पर !

चाची ने फिर मुझे कहा- तूने कभी मेरे बारे में सोचा है कि मैं कैसे रहती हूँ? (चाची की दोनों लड़कियाँ हॉस्टल में पढ़ती हैं। उनकी कहानी बाद में)

मैंने जवाब दिया- बहुत मुश्किल होता है अकेले रहना और जीना !

मेरे इतना कहने पर चाची मुझसे लिपटकर रोने लगी और कहने लगी- मेरा जीवन दुशवार हो गया है, तुम्हें क्या मालूम कि औरत के क्या-क्या ख्वाब होते हैं !

मैंने कहा- मुझे पता है !

और वो सुनने के बाद खुश हो गई। मैंने सारी शर्म छोड़ कर कहा- मैं आपको नंगा देखना चाहता हूँ !

वो जल्दी ही मान गई।

उसने कहा- रुको और वो अपने कमरे में चली गई, वहाँ से लौटी तो उसने पारदर्शी कपड़े पहने थे। उसे देख कर मैं उनसे लिपट गया और चूमने लगा।

उसने कहा- रुक जाओ मेरे राजा ! धीरे धीरे करो !

थोड़ी ही देर में उनका पेटीकोट बिल्कुल ऊपर तक आ चुका था। शायद वो चड्डी नही पहनती थीं, जिस कारण उनकी चूत मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी जिस पर हल्के से बाल थे।

उनकी चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी जांघ पर धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू कर दिया और उनके जिस्म के भी रोंगटे खड़े हो गए थे, थोड़ी ही देर में उन्होंने करवट ले ली और अब उनकी चूत के दर्शन मुझको साफ़ तरीके से होने लगे थे। तो मैंने भी देर ना करते हुए उनके गड्ढे में अपनी एक ऊँगली डालना शुरू कर दी पर उनकी चूत बहुत ही टाईट थी जिस वजह से मैं और पागल हो चुका था और थोड़ी देर में मैंने एक ऊँगली से दो उँगलियाँ उनकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दी।

मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए। मैंने उनकी चूत में लण्ड डालना चाहा, वो बोली- रुक जा यार ! और मेरा लण्ड पकड़ के मुंह में ले लिया खूब जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। थोड़ी देर में बोली- मेरे से रहा नहीं जाता, प्लीज़, मुझे पलंग में पटक कर चोद ! प्लीज़ चोद ! प्लीज़ चोद ! यार चूत में बहुत खुजली हो रही है !

मैंने कहा- चाची, मैं अभी सीधा लण्ड आपकी चूत में नहीं डालूँगा !

तो बोली- क्या करेगा ?

मैंने कहा- आप पलंग के कोने पे पैर फैला के रखो, मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है !

वो खुश हो गई- यार ! पहली बार कोई मेरी चूत चाटेगा ! चाट ले ...जल्दी से चाट . ...चाट !

करीब आधे घंटे तक मैंने उसकी चूत और उसने मेरा लण्ड चाटा।

फ़िर बोली- तुम सामने सोफे पे बैठ जाओ। मैं सोफे पे बैठ गया और वो मेरे ऊपर इंग्लिश स्टाइल में बैठ गई और मेरा लण्ड अपनी चूत में डालकर पागलों की तरह गोद में कूद रही थी।

तब मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर चुचूकों को मसलते हुए उनके होटों को चूमा और बोला- अरे मेरी रानी ! इतनी भी क्या जल्दी है? पहले मैं ज़रा तुम्हारे सुन्दर नंगे बदन का आनन्द तो उठा लूं ! फ़िर तुम्हें जी भर के चोदूंगा।

मैंने उन्हें पलंग पर लिटा कर अपना सुपारा उनकी पहले से ही भीगी चूत के दरवाजे के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर सिर्फ़ सुपारे को ही अन्दर किया।

दिव्या चाची ने मेरे फ़ूले हुए सुपारे को अपनी चूत में घुसते ही अपनी कमर को झटका दिया और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उनकी चूत में घुस गया।

तब चाची ने एक आह सी भरी और बोली- आह ! क्या शान्ति मिली तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर। यह अच्छा हुआ, मुझे बहुत दिन से इच्छा थी कि किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई। नहीं तो मेरी इच्छा पूरी नहीं होती।

अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उन्होंने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद चाचा का लण्ड छोटा होगा, उन्हें कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उनकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा।

वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी। कुछ देर बाद चाची मेरे उपर आ गई और मै नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा। चाची की चूत पानी छोड़ गई। अब मैं और नहीं रह सकता था, मै उठा और चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी। मै जोर जोर से धक्के लगाने लगा। चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- ऐसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गई, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चहिये एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा। कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार स्खलित हो चुकी थी।

उस दिन मैंने तीन बार अलग अलग तरीकों से चाची को चोदा। चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया।

इस तरह मैंने चाची की चूत की प्यास बुझाई। उसके बाद मैंने चाची की दोनों लड़कियों को बारी बारी चोदा, लेकिन वो कहानी बाद में !

पहले इस कहानी के बारे में अपनी राय लिखें !

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लंड चूत और चुदाई

Posted: 25 Mar 2013 05:01 AM PDT


मेरा नाम दीपक राय कुशवाहा है। अपने माँ बाप और इकलौती पत्नी ज्योति के साथ झाँसी में रहता हूँ। झांसी के एक साधारण परिवार का रहने वाला हूँ इसलिए जो भी ही बोलूँगा सच बोलूँगा और लंड चूत और चुदाई के सिवा कुछ नहीं बोलूँगा। उम्र 25 साल है। मेरा क़द 5' 6" है, गठीला बदन और लंड 6" के आस पास है। मैं दूसरे लोगों की तरह 8-10 इंच के लंड की डींग नहीं मारूंगा। मेरी शादी दो साल पहले ज्योति के साथ हुई है। सालियों के मामले में मैं बड़ा भाग्यशाली हूँ। 3 तो असली हैं बाकी 6-7 आस पड़ोस की भी हैं। मेरी पत्नी से छोटी शुकू शू (18) है उस से छोटी पुष्पा (16) और फिर रचना (14) वाह…। क्या सही अनुपात और उचित दूरी पर इतनी खूबसूरत फूलों की क्यारियाँ लगाई हैं। लोग परमात्मा का धन्यवाद करते हैं मैं अपनी सास और ससुर का करता हूँ जिन्होंने इतनी मेहनत करके इतने खूबसूरत फूल बूटे लगाए हैं जिनकी खुशबू से सारा घर और आस पड़ोस महकता है।

खैर अब मुद्दे की बात पर आता हूँ। मैं अपनी 3 सालियों की चर्चा कर रहा था। शुकू शू मेरी पत्नी से 2 साल छोटी है। उसके चूतड़ बहुत मस्त और कटाव भरे हैं। उसकी मांसल जांघें और गोल गोल मुलायम भरे हुए चूतड़ देख कर तो मेरे लिए अपने आप पर संयम रखना बड़ा कठिन हो जाता था। चोली और लहंगे में लिपटा उसका गुदाज़ बदन देख कर तो मेरे तन बदन में आग सी लग जाती थी और मेरा मन करता कि उसे अभी दबोच लूं और उसकी कहर ढाती जवानी के रस की एक एक बूँद पी जाऊं। बोबे तो बस दूध के भरे थन हैं जैसे।

किसी ने सच कहा है बीवी और मोबाइल में एक समानता है कि "थोड़े दिन बाद लगता है कि अगर थोड़ा रुक जाते तो अच्छा मॉडल मिल जाता" खैर मैं इस मामले में थोड़ा भाग्यशाली रहा हूँ। पर शुकू शू की कसी हुई जवानी ने मेरा जीना हराम कर दिया था। मैं किसी तरह उसे चोदना चाहता था। पर मेरी पत्नी इस मामले में बड़ी शक्की है।

आप शुकू शू नाम सुन कर चोंक गए होंगे। उसका नाम तो शकुंतला शाहू है पर मैं उसे प्यार से शुकू शू बुलाता हूँ। मेरी शादी के समय तो वो बिलकुल सूखी मरियल सी लगती थी इसीलिए मैंने उसका नाम शुकू शू रख दिया था। पर इन दो सालों में तो जैसे झांसी की सारी जवानी ही इस पर चढ़ आई है। उसके अंग-अंग में से जवानी छलक रही है। सच ही है जब डाली फ़लों से लद जाती है तो स्वयमेव ही झुकने लग जाती है। मेरा मन करता था कि इन फ़लों का रस चूस लूं। उसके चूतड़ों की गोलाईयां और दरार इतनी मस्त और लचकदार हैं मानो मेरे लण्ड को अन्दर समाने के लिये आमन्त्रित ही करती रहती थी। जब वो अपने कसे हुए वक्ष को तान कर चलती है तो ऐसे लगता है बेतुआ नदी अपने पूरे उफान पर है।

ओह… चलो मैं पूरी बात बताता हूँ :

मेरी पत्नी के पहला बच्चा होने वाला था। वो मुझे अपनी चूत नहीं मारने देती थी। मैं हाथों में लंड लिए मुठ मारने को विवश था। पर मुझे तो जैसे भगवान ने छप्पर फाड़ कर सालियाँ दे दी हैं। बेचारी शुकू शु कहाँ बचती। जी हाँ ! मैं शकुंतला की ही बात कर रहा हूँ। जिसे मैं प्यार से शुकू शु कहा करता हूँ। वो भी मुझे कई बार मज़ाक में दीपक कुशवाहा की जगह कुशू कुशू या दीपक राय की जगह डिब्बे राम या दीपक राग कह कर बुलाती है पर सबके सामने नहीं। अकेले में तो वो इतनी चुलबुली हो जाती है कि जी करता है उसे पकड़ कर उल्टा करूं और अपना लंड एक ही झटके में उसकी मटकती गांड में ठोक दूं।

वो अपनी दीदी की देखभाल के लिए हमारे यहाँ आई हुई थी। वैसे तो दो कमरों का मकान है पर हम तीनों ही एक कमरे में सोते थे। शकुंतला साथ में छोटी चारपाई डाल लेती थी। दिन में तो वह लहंगा चुनरी या कभी कभी साड़ी पहनती थी पर रात को सोते समय झीना सा गाउन पहनकर सोती थी। सोते समय कभी कभी उसका गाउन ऊपर हो जाता तो उसकी मखमली जांघें दिखाई दे जाती थी और फिर मेरा लंड तो आहें भरने लग जाता था। उसने अपनी थोड़ी पर छोटा सा गोदना गुदवा लिया था उसे देख कर पुरानी फिल्म मधुमती वाली वैजयन्ती माला की बरबस याद आ जाती है। उसके सुगठित, उन्नत, गोल-गोल लुभावने उरोजों के बीच की घाटी, मटकते गुदाज़ नितम्ब, रसीले और तराशे हुये होंठ, उसकी कमनीय आँखों में दहकता लावा देख कर कई बार तो मुझे इतनी उतेजना होती कि मुझे बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ लगानी पड़ती। जी में तो आता कि सोई हुई इस सलोनी कबूतरी को रगड़ दूं पर ऐसा कहाँ संभव था। साथ में ज्योति और माँ बापू भी रहते थे।

सुबह जब ज्योति उठ कर हवा पानी (टॉयलेट) करने चली जाती तो शुकू शू हमारे बिस्तर पर आ जाती और मेरी और अपने चूतड़ करके सो जाया करती। उसके मोटे मोटे नितम्ब देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता और मैं नींद का बहाना करके अपना लंड गाउन के ऊपर से ही उसके चूतड़ों की दरार से लगा देता। वो थोड़ा कसमसाती और फिर मेरी ओर सरक आती। कई बार वो पेट के बल लेट जाती थी तो उसके उभरे हुए गोल गोल चूतड़ों को देखकर मेरा लंड तो आसमान ही छूने लगता था। जी में आता था अभी इसकी मटकती गांड मार लूं। मैं ज्योति की भी गांड मारना चाहता था पर वो पट्ठी तो मुझे उस छेद में अपना लंड क्या अंगुली भी नहीं डालने देती। पता नहीं ये बुंदेलखंड की औरतें भी गांड मरवाने में इतनी कंजूसी क्यों करती हैं।

कई बार तो शुकू अपनी एक टांग मेरी कमर के ऊपर या टांगों के बीच भी डाल दिया करती थी। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया पर अब मुझे लगने लगा था कि वो ऐसा जानबूझ कर करती है। आज सुबह जब वो सोई थी तो मैंने धीरे से अपना खड़ा लंड उसकी गांड पर लगा दिया तो वो थोड़ा सा मेरी ओर सरक आई। मैंने पहले तो उसकी कमर पर हाथ रखा और फिर धीरे से अपना हाथ उसके मोटे मोटे स्तनों पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। अब मैंने धीरे से उसके गाउन के ऊपर से ही उसके स्तन दबाना और सहलाना शुरू कर दिया। इतने में ही ज्योति अन्दर आ गई तो शुकू आगे सरक गई और गहरी नींद में सोने का बेहतरीन नाटक करने लगी जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो।

अब तो जैसे मेरे हाथों में कारूँ का खज़ाना ही लग गया था। बस मौके की तलाश और इंतज़ार था। और फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। माँ और बापू दोनों गाँव चले गए क्योंकि वहां दादाजी की टांग टूट गई थी। मैंने आज ऑफिस से छुट्टी कर ली थी। ज्योति के लिए कुछ दवाइयां लेनी थी सो मैं जब बाज़ार जाने लगा तो शुकू को साथ ले लिया।

मैंने रास्ते में उसे पूछा "शुकू अब तो घर वाले तुम्हारी भी शादी करने वाले होंगे ?"

"अरे ना बाबा ना… मुझे अभी शादी नहीं करनी ?"

"क्यों ?"

"शादी के नाम से ही मुझे डर लगता है ?"

"कैसा डर ?"

"डरना तो पड़ता ही है। पता नहीं पहली रात…?" कहते कहते वो शरमा गई।

अनजाने में वो बोल तो गई पर बाद में उसे ध्यान आया कि वो क्या बोल गई है। वो तो किसी नाज़ुक कलि की तरह शर्म से लाल ही हो गई और उसने दुपट्टे को मुँह पर लगा लिया।

"हाय … मेरी शुकू शु… प्लीज बताओ ना पहली रात में किस चीज का डर लगता है ?"

"नहीं मुझे शर्म आती है ?"

"चलो पहले से सब सीख लो फिर ना तो शर्म आएगी और ना ही डर लगेगा ?"

"क्या मतलब ?"

"अरे बाबा मैं सिखा दूंगा तुम चिंता क्यों करती हो ? और फिर सिखाने की फीस भी नहीं लूँगा ? यह तो मुफ्त का सौदा है !"

"दीदी आपकी जान ले लेगी ?"

"अरे मेरी भोली शुकू शू तुम्हारी दीदी मेरी जान तो पहले ही ले चुकी है बस तुम अगर हाँ कर दो फिर देखो तुम्हारा डर कैसे दूर भगाता हूँ ?"

"धत… मुझे ऐसी बातों से शर्म आती है… अब घर चलो !"

"आईईलाआआ …"

दोस्तों ! अब तो बस रास्ता साफ़ ही था। हमने रास्ते में प्रोग्राम बनाया कि रात में ज्योति को दूध के साथ नींद की गोली दे देंगे और हम दोनों साथ वाले कमरे में सारी रात धमा चौकड़ी मचाएंगे। किसी को कानों-कान खबर नहीं होगी।

रात को लगभग 10:30 बजे शुकू डार्लिंग ज्योति के लिए दूध लेकर आ गई। जब ज्योति के खर्राटे बजने लगे तो हमने आँखों ही आँखों में इशारा किया और चुपके से दबे पाँव साथ वाले कमरे में आ गए। मैंने कस कर उसे बाहों में भर लिया और जोर जोर से चूमने लगा। मैंने उसके नर्म नाज़ुक होंठों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। उसने भी मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया। उसकी साँसें तेज़ होने लगी। अब मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। वो उसे चूसने लगी। कभी मैं उसके होंठों को चूसता चूमता और कभी उसके गालों को। वो पूरा साथ देने लगी। फिर मैंने उसके स्तन भी दबाने चालू कर दिए। शुकू अब सीत्कार करने लगी और घूम कर अपने चूतड़ मेरी ओर कर दिए। मैंने कस कर उसे भींच लिया और अपने लंड को उसकी गांड से सटा दिया। मैंने पायजामा पहन रखा था सो उस दोनों गुम्बदों के बीच आराम से सेट हो गया। अपना लंड सेट करने के बाद एक हाथ नीचे उसकी चूत की ओर बढ़ाया। जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाया तो उसने अपनी जांघें भींच ली और जोर की किलकारी मारी।

मैंने पतले और झीने गाउन के ऊपर से ही अपनी ऊँगली से उसकी चूत की फांकों को टटोला और थोड़ी सी अंगुली अन्दर कर दी। उसके गीलेपन का अहसास होते ही मेरे लंड ने एक जोर का ठुमका लगाया। शुकू तो सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। पता नहीं उसे क्या सूझा वो झट से मेरी पकड़ से छुट कर नीचे बैठ गई और एक झटके में मेरे पायजामे को नीचे सरका दिया। मेरा फनफनाता हुआ लंड अब ठीक उसके मुँह के सामने आ गया। उसने झट से उसे मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मेरे लिए तो यह स्वर्ग जैसे आनंद के समान था।

ज्योति ने कभी मेरा लंड इतने अच्छी तरह से नहीं चूसा था। वो तो बस ऊपर ऊपर से ही कभी कभी चुम्मा ले लिया करती है या फिर उसके टोपे को जीभ से सहला देती है। आह… इस अनोखे आनन्द का तो कहना ही क्या था। शुकू जब अपनी जीभ को गोल गोल घुमाती और चुस्की लगाती तो मैं उसका सर अपने हाथों में पकड़ कर एक हल्का सा धक्का लगा देता तो मेरा लंड उसके कंठ तक चला जाता। वो तो किसी कुल्फी की तरह उसे चूसे ही जा रही थी। कभी पूरा मुँह में ले लेती और कभी उसे बाहर निकाल कर चाटती। कभी मेरे अण्डों को पकड़ कर मसलती और उनकी गोलियां भी मुँह में भर कर चूस लेती। पता नहीं कहाँ से ट्रेनिंग ली थी उसने।

मैं कामुक सीत्कारें किये जा रहा था। मुझे लगने लगा मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा। वह तो उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब मैंने भी सोच लिया कि अपने अमृत को पहली बार उसके मुँह में ही निकालूँगा। मैंने उसका सर जोर से पकड़ लिया। और धीरे धीरे लयबद्ध तरीके से धक्के लगाने लगा जैसे वो उसका मुँह न होकर चूत ही हो।

"याआ… हाय… ईईईई … मेरी शुकू शू और जोर से चूसो मेरी ज़ान मज़ा आ रहा है… हाई…।"

मेरी मीठी सीत्कारें सुनकर उसका जोश दुगना हो गया और वो पूरा लंड मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। अब मैं कितनी देर ठहरता। मेरी पिचकारी फूट पड़ी और सारा वीर्य उसके मुँह में ही निकल गया। वो तो उसे गटागट पीती ही चली गई। अंतिम बूँद को चूस और चाट कर वो अपने होंठों पर जीभ फिराती हुई उठ खड़ी हुई। मैंने उसे एक बार फिर अपनी बाहों में भर कर चूम लिए।

"वाह… मेरी शुकू शू आज तो तुमने मुझे उपकृत ही कर दिया मेरी जान !" मैंने उसके होंठों को चूमते हुए कहा।

"मुझे भी बड़ा मज़ा आया … बहुत स्वादिष्ट था। मैंने कई बार अम्मा को बापू का चूसते देखा है। वो भी बड़े मज़े से सारा रस पी जाती है।"

"अरे मेरी रानी मेरी शुकू शू तुम ज्योति को भी तो यह सब सिखाओ ना ?" मैंने कहा।

"अरे बाप रे ! अगर दीदी जग गई तो… हाय राम…" वो बाहर भागने लगी तो मैंने उसे फिर से दबोच लिया। वो कसमसा कर रह गई।

"ओहो मेरी डिब्बे राम जी थोड़ा सब्र करो। पहले दीदी को तो देख आने दो वो कहीं जग तो नहीं गई ?"

"जरा जल्दी करो !"

"अच्छा जी !"

शुकू दबे पाँव अन्दर वाले कमरे में ज्योति को देखने चली गई और मैं बाथरूम में चला गया।

मैंने अपना कुरता और पजामा निकाल फेंका और अपने लंड को ठीक से धोया। कोई 10 मिनट बाद जब मैं नंग धडंग होकर बाहर वाले कमरे में आया तो शुकू मेरा इंतजार ही कर रही थी। मैंने दौड़ कर उसे बाहों में भरना चाहा। इस आपाधापी में वो लुढ़क कर बेड पर गिर पड़ी और मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने उसके गालों और होंठों को चूमना चालू कर दिया। मैंने उसका गाउन उतार दिया। उसने ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी। उसके गोल गोल संतरे ठीक मेरी आँखों के सामने थे। मैं तो उन पर टूट ही पड़ा। मैंने एक बोबे के चूचक को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। दूसरे हाथ से उसके दूसरे बोबे को मसलना और दबाना चालू कर दिया।

शुकू ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी। 2-3 मिनट मसलने और सहलाने से वो दुबारा खड़ा होकर उसे सलामी देने लगा। अब मैंने उसके पेट को चूमा और फिर नीचे सहस्त्र धारा की ओर प्रस्थान किया। छोटे छोटे काले घुंघराले झांटों से लकदक चूत तो कमाल की थी। मोटे मोटे सांवले होंठ और अन्दर थोड़ी बादामी रंग की कलिकाएँ। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसकी चूत के अन्दर वाले होंठ थोड़े सांवले क्यों हैं। कुंवारी लड़कियों की चूत के अन्दर के होंठ तो गुलाबी होते है। शुकू ने मुझे बाद में बताया था कि वो रोज़ अपनी चूत में अंगुली करती है और अपनी फांकों और कलिकाओं को भी मसलती और रगड़ती है इसलिए वो थोड़े सांवले हो गए हैं।

चलो कोई बात नहीं मुझे रंग से क्या लेना था। स्वाद और मज़ा दोनों तो आ ही जायेगे। मैंने अपनी लपलपाती जीभ उसकी चूत के होंठो पर लगा दी। शुकू ने मेरा सर अपने हाथों में पकड़ लिया और अपनी चूत की ओर दबा सा दिया। मैंने अपनी जीभ से उसकी कलिकाओं को टटोला तो उसकी हर्ष मिश्रित चीत्कार सी निकल गई।

अब मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को चौड़ा किया। अन्दर से गुलाबी रंगत लिए चूत पूरी गीली थी। मैंने झट से उस पर अपनी जीभ फिराई और फिर दाने को टटोला। वो तो उत्तेजना के मारे अपने पैर ही पटकने लगी। मैंने तो उसकी रसभरी फांकों को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। उसका दाना तो लाल अनारदाने जैसा हो गया था अब। मैंने जीभ की नोक बना कर उसे चुभलाया तो वो कामुक सीत्कार करती हुई बोली "आह … कुशू अब और ना तड़फाओ अब अन्दर डाल दो … उईईई… जिज्जूऊऊऊ…… ?"

"हाई मेरी शुकू शू डालता हूँ।"

"उईई… मोरी … अम्माआआ… ईईईईईईइ"

"शुकू तुम्हारी चूत का रस तो बहुत मजेदार है !"

"ऊईईई… माआआ………"

उसका शरीर जोर से अकड़ा और चूत से काम रस फिर से टपकने लगा। शायद वो झड़ गई थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थी और आँखें बंद। अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत की फांकों पर लगा दिया। उसने अपनी जांघें चौड़ी कर ली। मैंने उसके सर के नीचे एक हाथ लगाया और और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसकी चूत के छेद पर सेट करके एक धक्का लगा दिया। मेरा लंड गच्च से 3 इंच तक अन्दर समां गया। उसके मुँह से मीठी सीत्कार निकल गई।

"उईईई… माआआ………"

वह कसमसाने लगी। मुझे लगा इस तरह तो मेरा बाहर निकल जाएगा। मैंने उसे बाहों में भर कर कस लिया और एक धक्का फिर लगा दिया। लंड महाराज पूरे के पूरे अन्दर प्रविष्ट हो गए। मैंने एक काम और किया उसके मुँह पर हाथ रख दिया नहीं तो उसकी चीख ज्योति को सुनाई देती या नहीं देती पड़ोसियों को जरुर सुन जाती। उसकी घुटी घुटी सी चीख निकल ही गई।

"गूं………उंउंउंउंउंउंउं……………………"

वो कसमसाती रही पर मैं नहीं रुका। मैंने उसे बाहों में जकड़े रखा। वो हाथ पैर पटकने लगी और मेरी पकड़ से छूटने का कोशिश करती रही। मैंने उसे समझाया "बस मेरी शुकू अब अन्दर चला गया है। अब चिंता मत करो… अब तुम्हें भी मज़ा आएगा।"

"उईइ मा… मैं तो दर्द के मारे मर जाउंगी ओह… जिज्जू बाहर निकाल लो… मुझे दर्द हो रहा है…।"

"बस मेरी जान ये दर्द तो दो पलों का है फिर देखना तुम खुद कहोगी और जोर से करो !"

उसने आँखें खोल कर मेरी ओर देखा। मैं मुस्कुरा रहा था। शायद उसका दर्द अब कम हो गया था। उसकी चूत ने अब पानी छोड़ दिया था और गीली होने के कारण लंड को अन्दर बाहर होने में कोई समस्या नहीं थी। उसकी चूत ने जब संकोचन करना चालू कर दिया तो मेरे लंड ने भी अन्दर ठुमके लगाने चालू कर दिए। अब तो उसकी चूत से मीठा फिच्च फिच्च का मधुर संगीत बजने लगा था और वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा साथ देने लगी।

"क्यों मेरी शुकू अब मज़ा आ रहा है या नहीं ?"

"ओह… मेरे कुशू कुशू जिज्जू मैं तो इस समय स्वर्ग में हूँ बस ऐसे ही चोदते रहो… आःह्ह… और जोर से करो… रुको मत… उईईइ…"

"शुकू मैंने कहा था ना बहुत मज़ा आएगा ?"

"ओह… हाँ… अबे डिब्बे राम ! जरा जल्दी जल्दी धक्के लगाओ ना ? अईई…?"

उसकी चूत ने मेरे लंड को जैसे अन्दर भींच ही लिया। उसकी मखमली गीली दीवारों में फसा लंड तो ठुमके लगा लगा कर ऐसे नाच रहा था जैसे सावन में कोई मोर नाच रहा हो। हमें कोई 10-15 मिनट तो हो ही गए थे। मैं उसे अब घोड़ी बना कर एक बार चोदना चाहता था। पिछले 3-4 महीने से ज्योति ने मुझे बहुत तरसाया था। बस किसी तरह पानी निकालने वाली बात होती थी। वह तो बस टाँगें चौड़ी करके पसर जाती थी और मैं 5-10 मिनट धक्के लगा कर पानी निकाल देता था। और अब पिछले 2-3 महीनों से तो उसने चूत चोदने की तो छोड़ो चूत पर हाथ भी नहीं धरने दिया था।

मैंने उसे चौपाया हो जाने को कहा तो झट से डॉगी स्टाइल में हो गई और अपने चूतड़ ऊपर उठा दिए। गोल गोल दो छोटे छोटे तरबूजों जैसे चूतड़ों के बीच की खाई तो कमाल की थी। गांड के छेद का रंग गहरे बादामी सा था। चूत के फांकें सूज कर मोटी मोटी हो गई थी और उस से रस चू रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को चौड़ा किया और अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया। लंड गीला होने के कारण एक ही झटके में अन्दर समां गया। मैंने उसकी कमर पकड़ कर अब धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसने अपना सर नीचा करके सिरहाने से लगा लिया और सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। अब मेरा ध्यान उसकी गांड के छेद पर गया। वो भी थोड़ा गीला सा हो चला था। कभी खुलता कभी बंद होता। वाह… क्या मस्त गांड है साली की। एक बार तो मन में आया कि अपना लंड गांड में डाल दूं पर बाद में मैं रुक गया।

मैं जानता हूँ कोई भी लड़की हो या फिर औरत पहली बार गांड मरवाने में बड़े नखरे करती हैं और कभी भी आसानी से गांड मरवाने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होती। और फिर बुंदेलखंड की औरतें तो गांड मरवाने के लिए बड़ी मुश्किल से राज़ी होती हैं। खैर….. मैंने अपनी अंगुली पर थूक लगाया और शुकू की गांड के छेद पर लगा दिया। वह तो उछल ही पड़ी।

"ओह… क्या करते हो जिज्जू ?'

"क्यों क्या हुआ?"

"नहीं… नहीं… इसे अभी मत छेड़ो… ?"

मुझे कुछ आस बंधी कि शायद बाद में मान जायेगी। अब मैंने फिर से उसकी कमर पकड़ ली और दनादन धक्के लगाने चालू कर दिए। हम दोनों को ही इतनी कसरत के बाद पसीने आने लगे थे। कोई 20-25 मिनट तो हो ही गए थे। मैंने उसे जब बताया कि मैं झड़ने वाला हूँ तो वो बोली कोई बात नहीं अन्दर ही निकाल दो मैं "मेरी सहेली" (गर्भ निरोधक गोली) खा लूंगी।

मैं तो धन्य ही हो गया। मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और फिर जैसे ही 3-4 आखरी धक्के लगाये मेरा लावा फूट पड़ा। शुकू शू भी उस वीर्य के गर्म फव्वारे से नहा ही उठी। उसकी चूत आज धन्य और तृप्त हो गई। मेरा लौड़ा तो धन्य होना ही था। जब मेरी अंतिम बूँद निकल गई तो मैं उस से अलग हो गया। फिर हम दोनों बाथरूम में चले गए और साफ़ सफाई करने के बाद बाहर आये तो वो बोली "चलो अब गर्म गर्म दूध पी लो एक राउंड और खेलेंगे ?" इतना कहकर उसने मेरी ओर आँख मार दी।

मैंने उसे एक बार फिर अपनी बाहों में जकड़ लिया और जोर से भींच दिया। उसकी तो चीख ही निकल गई। फिर उस रात मैंने उसे दो बार और चोदा। सुबह 4 बजे हम अन्दर वाले कमरे में जाकर अपनी अपनी जगह सो गए। बस दोस्त ! इतनी ही कहानी है उस रात की।

दोस्तों ! दीपक और शुकू शू की चुदाई की यह कथा आपको कैसी लगी मुझे जरुर लिखें। अगर आप दीपक कुशवाहा को भी मेल करेंगे तो उसे भी बहुत ख़ुशी होगी। उसका मेल आई डी है : deepak_7493@rediffmail.com


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