हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


प्यार की निशानी

Posted: 05 Mar 2013 01:59 AM PST

नमस्कार मित्रो,

मैं हूँ विकास, उम्र 20 साल, 5'11", मैं औरंगाबाद, महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ।

मैंने सारी कहानियाँ पढ़ी है और अब चाहता हूँ कि इस विशाल कथा संग्रह में मैं भी अपना योगदान दूँ !

यह कहानी एकदम सच्ची है और मेरी अपनी है जो मेरे साथ तब घटी जब मेरा लंड जवान हो रहा था। यह कहानी मेरे प्यार की कहानी है, उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आएगी... आप अपनी राय मुझे मेल करके जरूर बताईयेगा...

अन्य लड़कों की तरह मैं भी अपने लंड को लेके काफी आकर्षित था, लंड का बार बार बड़ा होना, फिर उसका चिपचिपा होना मुझे बहुत पसंद आने लगा था इसलिए मैं अपना लंड हाथ में लेकर मजे लेता था।

ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पर लेटा अपने लंड को सहला रहा था, तब मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। लेकिन देखता कौन? घर में तो कोई नहीं था, सब लोग बाहर गए थे...

मुझे थोड़ा डर लगने लगा...मैंने अपने कपड़े ठीक किये और देखने के लिए उठा तो वहाँ कोई नहीं था...

हमारा घर काफी बड़ा है इसलिए मुझे खोजने में वक्त लग रहा था। जब मैं पीछे गार्डन की ओर गया तो मुझे घर की घण्टी बजने की आवाज आई। मैं देखने गया तो वहाँ प्रिया खड़ी थी।

प्रिया मेरी रिश्तेदार, एक सुन्दर अप्सरा, उम्र 18 साल, गोरी, लंबी, कद 5'9" स्तन ३४" और सबसे ज्यादा प्यारी उसकी कमर 24" चूतड़ 34" के... कुल मिला कर एकदम सुन्दर लड़की, नैन नक्श भी कातिलाना हैं।

जब मैंने उसको देखा तो मैं थोड़ा डर गया कि कहीं प्रिया ने तो नहीं देखा था मुझे?

वो मुझे देखकर थोड़ा शरमाई और घर के अंदर चली गई। मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया। वो हॉल में सोफ़े पर बैठ गई। मैं थोड़ा डरा हुआ था।

तब उसने बात चालू की, उसने पूछा- सब लोग कहाँ हैं?

मैं- सब बाहर गए हैं...पड़ोस में शादी है।

"आप क्यों नहीं गए?"

मैं- यार, मुझे शादियों में जाना पसंद नहीं है, तुम्हें पता है ना...

"तो यहाँ पर क्या कर रहे थे?"

तब मुझे पता चल गया कि बेटा, तुझे इसने देख लिया है... मैंने सोचा कि अब तो तू गया...

मैं- मैं क्या?...कुछ भी तो नहीं...तुमने कुछ देखा क्या?

"हाँ...बहुत कुछ...!"

असल बात यह है कि प्रिया और मेरी शादी बचपन में ही तय हो गई थी और हम दोनों एक दूसरे को मन ही मन पसंद भी करते थे। लेकिन इस बारे में कभी बात कभी नहीं की थी।

मुझे डर लग रहा था कि वो क्या सोचेगी मेरे बारे में?

तब मैं बोला- प्लीज तुम बुरा मत मानो लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था, इसलिए...सॉरी...

वो बोली- अरे नहीं, मैं नाराज नहीं हूँ कि तुम ऐसा कर रहे थे...बस थोड़ा बुरा लग रहा है।

मैं बोला- बुरा क्यों लग रहा है?

तब उसने बोला- मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जा रही... मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ...कोई अपने प्यार को तड़पता देख सकता है क्या?

मेरा मुँह खुला का खुला रह गया...वो आकर मेरी गोद में बैठ गई और अपनी बाहों को एक हार की तरह मेरे गले में डाल दिया। मैंने भी उसको अपनी बाहों में लिया और हमारी प्रेम कहानी शुरू हो गई...

उसने अपने नर्म गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, हम दोनों हमारे पहले चुम्बन का लुत्फ़ उठा रहे थे, मैं तो जैसे जन्नत मैं था। वो भी बहुत उत्तेजित लग रही थी... वो पूरे मजे लेकर मुझे चूम रही थी... लेकिन यह मजा हम ज्यादा देर नहीं उठा पाए... घर के सभी लोग वापिस आ गये थे और हम प्यासे रह गए...

वो मेरी मम्मी की लाडली है, उसको देख कर मम्मी खुश हो गई...

रात होने वाली थी तो मम्मी ने उसको घर पर ही रोक लिया। हम दोनों तो जैसे खुशी से पागल हो गये... हमने साथ में खाना खाया और सोने के लिए मैं अपने कमरे में जा रहा था तभी मुझे मम्मी ने आवाज लगाई और कहा- आज प्रिया को तेरे कमरे में सोने दे और तू हॉल में सो जा...

तब मैंने अपना बिस्तर हॉल में लगाया और मैं सो गया या यह कहो कि सोने का नाटक कर रहा था...

अब मैं कुछ होने का इंतज़ार कर रहा था... लेकिन बहुत देर हो गई थी और प्रिया ने अपना यानि मेरे कमरे का दरवाजा भी नहीं खोला था... इंतज़ार करते करते मैं 11 बजे सो गया क्योंकि मुझे रोज जल्दी सोने की आदत थी...

लगभग दो घंटे बाद मैंने अपने पास किसी को लेटा हुआ महसूस किया... रात का समय था और ऐ.सी भी चालू था तो मुझे काफी ठण्ड लग रही थी...

मैंने अपनी करवट बदली तो देखा कि प्रिया पास लेटी है, उसकी पीठ मेरी तरफ थी। मैंने A.C. बंद करने के लिए रिमोट उठाया।

तभी उसने अपनी करवट बदली और बोली -रहने दो ना प्लीज, मुझे ठण्ड में सोना बहुत पसंद है।

इतना कहकर उसने अपनी करवट बदली या यूँ कहो कि ठण्ड के मौसम ने करवट बदली और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। वो जानती तो थी कि मैं बहुत शर्मीला हूँ इसलिए पहल उसको ही करनी पड़ेगी...

फिर हम दोनो एक साथ एक बिस्तर में एक कम्बल में लेटकर एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे... वो मुझे चूम रही थी और मेरे होठों को काट भी रही थी...

मैं भी पीछे नहीं रहा, मैं उसका पूरा साथ दे रहा था... उसकी बाहों मे मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। हम दोनों अब अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे...

उसने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया...

फिर क्या था, मैं तो बस सातवें आसमान में उड़ने लगा, मेरी सारी शर्म खुल गई... मैं उसके स्तन धीरे धीरे दबाने लगा... वो सिसकारियाँ ले रही थी, उसको बहुत मजा आ रहा था। फिर मैंने उसका टॉप उसके बदन से अलग कर दिया, वो और ज्यादा रोमांटिक हो गई और उसने भी मेरा टी-शर्ट निकाल दिया और हम आलिंगनबद्ध हो गये...एक दूसरे को सहलाना फिर मेरा उसके स्तन को काटना,

दबाना और निप्पल्स को छेड़ना उसे बहुत रोमांचित कर रहा था।

फिर मैंने उसकी जीन्स भी निकाल दी, ऐसा लग रहा था कि वो पूरी तैयारी के साथ आई थी क्योंकि उसने ना तो ब्रा पहनी थी और ना ही... आप तो समझ ही गये होंगे...

मुझे काफी आसानी हुई उसकी योनि तक जाने में... उसकी योनि काफी गीली हो गई थी। मैंने उसकी योनि में अपनी एक उंगली से गुदगुदी की... वो थोड़ा मचल उठी, उसकी योनि बिल्कुल कुंवारी थी... जो उसने मुझे पेश कर दी उस रात खेलने के लिए।

वो बोली- विकास, मेरा सब कुछ सिर्फ आप का है... आप जो चाहे कर सकते हैं...

मैं बोला- ठीक है लेकिन एक शर्त पर...

वो बोली- कैसी शर्त..?

मैं बोला- तुम मुझे विकास नहीं, जानू बोलो और आप नहीं तुम कह कर बुलाओ...

वो बहुत खुश हो गई और बोली- ठीक है मेरे जानू...तुम बहुत अच्छे हो, आई लव यू।

फिर मैं बोला- अच्छी तो तुम हो...मेरा भी सब कुछ तुम्हारा है... आई लव यू टू !

फिर मैंने भी अपने बाकी के सारे कपड़े उतार दिए...मेरा लिंग उसकी योनि को स्पर्श रहा था...

उसने मेरा लिंग अपने कोमल हाथों में लिया और बोली- इसने आपको बहुत तड़पाया है ना.. अब नहीं तड़पायेगा कभी...

और वो उसको सहलाने लगी... वो मुझे बहुत अच्छे से समझती थी, उसने अब मेरे लिंग को थोड़ा दबाना और आगे पीछे करना चालू किया...

मुझे बहुत मजा आ रहा था...मैं भी उसके स्तन दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी योनि को गुदगुदा रहा था... वो बीच बीच में तब सिसकारियाँ लेती जब मैं उसकी योनि को छेद देता या जब उसके निप्पल काट देता...

अब थोड़ा और आगे बढ़ने का समय था... मैंने उसकी योनि को नीचे जाकर चूम लिया... उसकी योनि को अपने होठों से दबा रहा था...

और वो मचल रही थी... मेरे बालों में हाथ फेर रही थी...

फिर मैंने उसकी भगनासा पर अपने होंठ रख दिए... वो काफी उत्तेजित हो गई थी...उसकी योनि लगातार चिपचिपी होती जा रही थी... फिर मैं ऊपर आया.... हम दोनों फिर से आलिंगनबद्ध हुए...

फिर वो मुझे चूमते चूमते नीचे गई... आखिर में उसने मेरे लिंग को चूम लिया और उसको अपने मुख में ले लिया...

अपने सर को वो आगे-पीछे करने लगी, मुझे बहुत मजा आ रहा था... उसने मेरा पूरा लिंग अपने मुख-रस से गीला कर दिया...

अब वो एक होना चाहती थी... उसकी तड़प साफ़ झलक रही थी... उसने अपने नीचे एक स्कार्फ बिछा लिया जो वो पहनकर आई थी...

मैं समझ गया कि ऐसा क्यों किया उसने...

फिर वो लेट गई और मैं उसकी टांगों के बीच आ गया... मेरा लिंग और उसकी योनि दोनों ही बहुत गीले थे... मैंने अपना लिंग उसकी योनिद्वार पर रखा और थोड़ा जोर लगाया...

लिंग थोड़ा अंदर तो चला गया लेकिन प्रिया दर्द से तड़प उठी...

परन्तु वो बोली- रुकना मत जानू ! आपको मेरी कसम है... मैं दर्द सह लूंगी...

तो मैंने दो मिनट रुक कर और थोड़ा जोर लगाया इस वक्त मुझे अपने लिंग के पास काफी गर्माहट महसूस हुई....इसका मतलब था कि उसका कौमार्य-पट टूट गया था... उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए... मैं थोड़ा रुक गया उसके सामान्य होने की इंतजार करने लगा...

फिर वो बोली- जानू, मुझे अब दर्द नहीं ही रहा आप थोड़ा और डाल दो अंदर...

मैंने भी जोश में आकर एक और धक्का लगा दिया... अब मेरा पूरा का पूरा लिंग उसके अंदर था और उसके आँसू निकल रहे थे...

मैंने अपने होंठ उसकी आँखों पर रखे और उसके आँसू पी गया...फिर हमने एक लंबा चुम्बन किया..और उसकी कमर चलने लगी...

हम इस ठण्ड के मौसम में गर्मी का एहसास कर रहे थे।

मैं अपने लिंग को उसकी योनि में अंदर-बाहर कर रहा था... अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था... मेरी स्पीड धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी... साथ ही साथ मैं उसको चूम भी लेता और उसके स्तन तो मैंने १ मिनट के लिए भी नहीं छोड़े थे...

फिर वो मेरे ऊपर आ गई और मुझे मजा देने लगी... वो पूरी तरह से मिलन में खो चुकी थी... वो अपने बालों को पकड़ काफी सेक्सी मुद्राएँ बना रही थी जिससे मैं बहुत उत्तेजित हो रहा था... आखिर में वो मेरे ऊपर लेट गई और एक लय बद्ध तरीके से अपने कूल्हे चलाने लगी, थोड़ी देर में ही उसने स्पीड बढ़ा दी तो मैं समझ गया था कि वो झड़ चुकी है...

तब मैंने उसको अपने नीचे लिया और प्यार से सम्भोग करता रहा क्योंकि वो थक गई थी इसलिए मैंने धक्के थोड़े धीमे कर दिए...

जब मुझे लगा कि मैं छुटने वाला हूँ तब मैंने धक्के बढ़ा दिए...

वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी और आखिर में वो पल आ ही गया... मैंने अपना वीर्य उसकी योनि में ही निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेट गया...

हम दोनों सुस्त हो गये थे क्योंकि यह हम दोनों का पहला सेक्स था...

वो मुझे बहुत प्यार कर रही थी... अपने सीने से लगा कर बालों में हाथ फेर रही थी... मैं भी उसको सहला रहा था... फिर हम दोनों उठे और समय देखा तो साढ़े चार बज रहे थे। हमने करीब दो घंटे प्रणय-मिलन किया था...

हम दोनों फिर बाथरूम चले गए जो मेरे कमरे से जुड़ा था.. वहाँ उसने मुझे वो स्कार्फ और मेरा लिंग दिखाया जो उसके योनि रक्त से पूरा लाल हो चुका था...

मैंने बोला- यह स्कार्फ धो डालो !

लेकिन उसने मना कर दिया, कहा- नहीं, यह हमारे प्यार की निशानी है, मैं इसे मरते दम तक संभाल कर रखूंगी...

यह सुन कर मैं भी बहुत भावुक हो गया... हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को आलिंगन किया और खुद को साफ़ करके मैंने उसे अपने कमरे में सुला दिया..

मैं उसके चेहरे पर एक संतुष्टिभाव दिख रहा था... जैसे उसको सब कुछ मिल गया हो...

फिर वो मेरी बाहों में समा गई... कुछ देर बाद मैं उठ कर अपनी जगह पर चला गया।

वो सुबह मुझसे मिली, वो आज भी बहुत खुश थी.. जाते जाते उसने मुझे कहा- जानू, आपने मुझे बहुत बड़ी खुशी दी है...एक वादा करो.. कि आप हमेशा मेरे साथ रहोगे... मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ...

मैंने भी वादा किया और उसे खुशी से विदा किया... उसका भाई उसको लेने आया था... मेरा साला पता नहीं साला क्यों आ गया...

मैं जाना चाहता था उसको घर छोड़ने....

खैर जो भी हुआ अच्छा हुआ... मैं भी बहुत खुश था के मुझे भी कोई मिल गया समझने वाला...

उस दिन के बाद हम लोग हमेशा मिलते रहे घर पर बाहर, कभी उसके घर...

हमारी कहानी ऐसे ही आगे बढ़ रही थी कभी अचानक एक हादसा सा हुआ मेरी जिंदगी में...

मेरी पूरी जिंदगी बदल गई... प्रिया तो हमेशा साथ रहेगी... वो मुझे बहुत चाहती है... लेकिन जो हुआ वो भी काफी रोमांचक था...

अगर आप सभी पाठकों को मेरी यह कहानी पसंद आई तो उस किस्से के बारे में मैं अपनी अगली कहानी मैं लिखूंगा...

मुझे आप आपकी राय जरूर बताइएगा...

0.vikas.7@gmail.com

वो सात दिन-2

Posted: 04 Mar 2013 08:03 AM PST


आपने मेरी कहानी वो सात दिन का पहला भाग तो पढ़ा ही होगा...

आज मैं अपनी कहानी का दूसरा भाग आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ।

घर पहुँचा तो देखा मम्मी स्वाति आंटी से ही फोन पर बातें कर रही थी- हाँ...हाँ... क्यूँ नहीं... और ठीक ही है... अकेले के लिये खाना बनाने का मन भी तो नहीं करता... जब तक शरद भाई और मीत नहीं आते, मैं प्रीत को रोज शाम को तुम्हारे घर भेज दूँगी... वो डिनर भी तुम्हारे यहाँ ही करेगा... और तुम्हारे घर ही सो जाया करेगा... हाँ...हाँ... तुम उसके साथ बहुत सारी बातें करना... प्रीत पर मेरा जितना अधिकार है उतना ही तुम्हारा भी तो है... डोन्ट वरी... ठीक है... जय श्री कृष्ण... !

मन ही मन आंटी के दिमाग़ की दाद देते हुए दिखावे के लिये एक बार फिर नहाया, चाय-नाश्ता किया और अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया पर दिल तो स्वाति आंटी में ही लगा था। खेल कर घर आया, खाना खाया और फिर सो गया। लगभग तीन घंटे सोने के बाद मोबाईल की रिंग से नींद खुली तो देखा, स्वाति आंटी का काल था इसलिये तुरन्त उठ कर रिसीव किया- सो रहे थे क्या... कितनी देर से रिंग बज रही थी...!

''हाँ आंटी... आपने रात को बहुत थका दिया... और फिर रात को जगना भी तो है...!'' मैंने शरारत भरा जवाब दिया।

''मैंने इसलिये काल किया कि शाम को थोड़ा जल्दी आ जाना... डिनर साथ में करेंगे... और तुम्हारे लिये एक सरप्राईज़ भी है... यू विल रियली एन्जोय इट... ओके बाय... शाम को मिलते हैं... !'' ऐसा कह कर स्वाति आंटी ने फोन काट दिया पर अब मेरा दिन काटना और भी मुश्किल हो गया, जैसे तैसे टीवी देख कर दो घंटे बिताये और ठीक 7 बजे मम्मी को कह कर लिफ्ट में सवार हो 19वें फ्लोर की ओर बढ़ गया।

स्वाति आंटी ने आज वेस्टर्न बड़े गले का टाप और थ्री फोर्थ जीन्स पहनी थी जिसमें वो कयामत लग रही थी। अन्दर पहुँचा तो देखा कि वहाँ पहले से ही आंटी की दो सहेलियाँ मौजूद थी।

मुझे लगा कि मैं शायद ज्यादा जल्दी आ गया हूँ इसलिये शरमा कर धीरे से आंटी से पूछा- मैं थोड़ी देर से आऊँ...?

आंटी ने कहा- नहीं... नहीं... आ जाओ अन्दर... यहीं हमारे साथ बैठो... !

कहते हुए आंटी ने मुझे अपने साथ सोफे पर बैठने का इशारा किया, वो दोनों मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रहीं थीं।

मैंने फिर भी कहा- नहीं आंटी... मैं मीत के रूम में बैठ जाता हूँ... !

पर स्वाति आंटी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने साथ सोफे तक ले गई और अपने पास बिठाते हुए कहा- बैठो ना... बी ईज़ी... !

फिर सामने बैठी अपनी सहेली की ओर इशारा करते हुए कहा- इनको तुम जानते हो...? ये हमारी बिल्डिंग के ट्वेल्थ फ्लोर पर ही रहती हैं... !

"हाँ... ये पार्थ की ममा हैं... हैं ना...? आंटी... पार्थ इज़ वेरी स्वीट चाईल्ड... ग्राउन्ड में खेलने आता है... और मैंने आपको यहाँ भी कई बार देखा है !'' मैंने जवाब देते हुए उनको हैलो किया तो उन्होंने मादक अंदाज़ में कहा- मेरा नाम अनुभूति है... और तुम मुझे अनु कह सकते हो... नो आंटी... ओके...!

सच में... मॉडर्न छोटे हेयर कट, गोरे गालों, कसे हुए उरोज़ों, पतली कमर और मस्त जाघों वाली अनु टाईट जीन्स, टी शर्ट में किसी भी ऐन्गल से आंटी नहीं लगती थी... उनको देख कर कोई नहीं कह सकता कि वो दस साल के पार्थ की मम्मी थी। मैं उनको निहार रहा था तभी स्वाति आंटी बोली- और यह परिणीति है... हमारे सामने वाले डुप्लैक्स में रहने वाले मिस्टर शाह इसके डैडी हैं... !

''हाँ... इनको तो मैंने कई बार आपके यहाँ ही देखा हैं... !'' मैंने तुरन्त जवाब दिया।

मासूम चेहरा, नीली आँखें, मध्यम आकार के नुकीले उभार, कमसिन बदन और मिनी शोर्ट्स में झांकती लम्बी गोरी टांगों को एक के ऊपर एक चढ़ाये परिणीति कमाल की सैक्सी लग रही थी।

मैं इन दोनों के उतार-चढ़ाव में खोया था तभी स्वाति आंटी बोलीं- और ये है प्रीत... माई स्वीट लिटिल बोय... जिसके बारे में मैंने तुमको आज बताया था... ! कह कर उन्होंने मेरे गाल पर किस कर दिया।

मैं डर गया कि आंटी यह क्या कर रहीं हैं पर वो उन दोनों की ओर इशारा करते हुए तुरन्त बोलीं- प्रीत... ये ही तो आज का सरप्राईज़ है... हम तीनों बेस्ट फ्रेंड्स है और आपस में अपनी हर बात शेयर करतीं हैं... आज सुबह परिणीति ने तुमको यहाँ से जाते हुए देखा और उसी वक्त वो मेरे पास आई तुम्हारे बारे में पूछा तो मैंने कल की सब बात बता दी तब तीनों ने मिलकर डिसाइड किया कि ये एन्जोय भी हम शेयर करेंगे... अगर तुम हाँ करो तो... !''

मुझे तो जैसे खज़ाना मिल गया था, फिर भी भाव खाते हुए स्वाति आंटी की ओर देख कर बोला बोला- आपका जैसा कहें आंटी... !'' स्वाति आंटी खिलखिलाती हुई बोली- डेट्स लाइक ए गुड बोय... वैसे... आज अनु हमारे साथ नहीं है... वो कल हमें जोइन करेगी... आज परी हमारे पास रुकने वाली है... और प्रीत... तुम जानते हो... परी अभी तक वर्जिन है...!''

मैं बड़े आश्चर्य से बोला- रियली... आप अभी तक... आप तो इतनी मॉडर्न हैं... और इतनी गुड लुकिंग भी... फिर भी...?''

परिणीति ने जवाब दिया- पहले स्टडी के कारण ये सब करने का टाईम ही नहीं मिला... अब बहुत मन करता है पर डरती हूँ कि पापा-मम्मा को मेरे कारण नीचा ना देखना पड़े... पर कभी-कभी हम तीनों एक दूसरे को सेटिस्फाई कर लेते हैं।''

''मैं चलती हूँ... पार्थ को आज थोड़ा फीवर है... कल मैं जरूर आऊँगी।'' कहती हुई अनुभूति उठ कर जाने लगी तो स्वाति आंटी ने कहा- ओके डियर... टेक केयर ओफ पार्थ... आज परी को एन्जोय कर लेने दो... ।''

दोनों हंसने लगी तभी अनु मेरे पास आई और मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला कर एक प्यारा सा गुडबाय किस किया और चली गई... स्वाति आंटी भी मेन डोर बंद कर के रसोई में चली गई।

परी मेरे पास आकर निमंत्रण की मुद्रा में बैठ गई मैंने भी तुरन्त उसका आमंत्रण स्वीकार कर लिया। मेरा एक हाथ परी की चिकनी जांघों पर और दूसरा हाथ परी के टी-शर्ट पर उसके उरोज़ों को दबाने लगा था, परी भी दोनों हाथों से मेरे चेहरे को पकड़ कर मेरे होठों को चूमने, चूसने लगी।

उसके तन की सुगंध से मैं पागल हुआ जा रहा था। मैंने उसके टी-शर्ट को पकड़ कर ऊपर किया तो उसने भी बाहें ऊपर उठा कर टी-शर्ट को उतार फेंका और खुद ही अपनी ब्रा खोल बाहें फैलाकर मुझे निमन्त्रण देने लगी।

इतने खूबसूरत, कसे उरोज़ मैंने कभी किसी मूवी में भी नहीं देखे थे, मैं तुरन्त परी के छोटे-छोटे गुलाबी निप्पलों को चूसने लगा।

वो भी मदहोश हो कर मेरे बालों में हाथ फिराने लगी, तभी आंटी की आवाज से हम दोनों चौंक गये- अभी नहीं... पहले डिनर कर लो... मुझे पहले ही पता था... इसलिये मैंने डिनर पहले ही रेडी कर माईक्रोवेव में रख दिया था... जल्दी से उठ कर खा लो... हमारे पास सारी रात पड़ी है ये सब करने को... प्रीत बेटा... प्लीज़... !

छोड़ने का दिल तो नहीं था पर फिर भी उठा और डाईनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया, परी भी फिर से टी-शर्ट पहन कर मेरे पास आकर बैठ गई।

आंटी खाना बनाने में भी परफेक्ट थी... हम सबने डिनर किया... आंटी उठ कर रसोई समेटने चली गई और हम दोनों सोफे पर बैठ फिर अपनी रासलीला में लग गये। मैंने फिर से परिणीति का टी-शर्ट उतारा और उसे सोफे पर गिरा कर उसके शोर्ट्स को खोल कर उसकी गुलाबी लिन्गरी को पुचकारने लगा और कुछ ही सेकंडों के बाद उसे भी धीरे से उतार फेंका। मैंने आज तक इतनी कसी हुई, बिना बालों वाली गुलाबी योनि कभी किसी मूवी में भी नहीं देखी थी इसलिये अन्दर ही अन्दर रोमांच से भर गया और तुरन्त अपने होठों को परी की योनि से लगा कर अपनी जीभ से उसे चूसने, चाटने लगा।

वो भी मदहोशी से आँखें बन्द किये मेरे सिर पर हाथ फिरा रही थी- आह... प्रीत... अन्दर तक घुसाओ... सूपर्ब... बहुत अच्छे... प्रीत... प्लीज़ और ज़ोर से... !

फिर स्वाति आंटी की आवाज़ से रासलीला में खलल पड़ा- चलो उठो दोनों... बैडरूम में चलो... मैं भी फ्री हो गई हूँ... वहीं एन्जोय करेंगे... !

हम दोनों तो वहीं करने को तैयार थे पर आंटी भी साथ थी इसलिये मैंने उठकर परी को अपनी गोद में उठा लिया और आंटी के पीछे-पीछे बैडरूम की ओर चल पड़ा।

बैडरूम में पहुँच कर परी को बैड पर लिटाया और अपने कपड़े उतार कर फिर से परी को चूमना शुरू किया तो उसने मुझे नीचे लेटने को कहा और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लिंग को मुँह में ले कर चूसने लगी। आंटी भी म्युज़िक ओन कर के अपने कपड़े खोल कर बैड पर आई और अपनी योनि मेरे मुंह पर रख घुटनों के बल बैठ गई और मैं उनकी योनि चूसने लगा। कुछ देर में वो हटी और परी को हटा उसको सिखाने की मुद्रा में मेरे लिंग को चूसने, चाटने लगी। थोड़ी देर बाद ही उन्होंने मुझे उठा कर परी को नीचे सुलाया और उसकी योनि चूसने लगी।

कुछ देर चूसने के बाद स्वाति आंटी बोलीं- आओ प्रीत... फक हर नाऊ... !'' कह कर आंटी ने परी के नितंबों के नीचे तकिया लगाया और मुझे कन्टीन्यू करने को कहा।

मैंने तुरन्त अपनी उंगलियों से उसकी योनि के छेद को थोड़ा फैलाया और लिंग को परी की योनि पर रख हल्का दबाव दिया जिससे परी कराह उठी फिर थोड़ा और जोर से धक्का दिया जिससे लिंग आधा अन्दर तक घुस गया। परी हल्की आवाजों में सिसकारियाँ भर रही थी फिर मैंने अपना लिंग थोड़ा जोर से अन्दर घुसा दिया।

परी जोर से चिल्लाई- प्रीत... नहीं... प्लीज़... बाहर निकालो... बहुत दर्द हो रहा है... जोर से नहीं... !

पर आंटी ने कहा- नहीं प्रीत... रुकना नहीं... कन्टीन्यू रखो... अभी उसको ठीक लगने लगेगा... !

मैंने अपने कूल्हों से धक्के तेज कर दिये जिससे अब लिंग पूरा अन्दर घुस रहा था और कराहें अब सिसकारियों में बदल गई थी- आह्ह... प्रीत... कम ओन... अब अच्छा लग रहा है... रियली फ़ीलिंग लाईक हैवन नाऊ... करते रहो... वाओ... बहुत मस्त है... यू आर रियली ग्रेट प्रीत... और जोर से... !

''ये मज़ा मुझे पहले क्यूं नहीं मिला... प्रीत... यू आर अमेज़िंग... मैं फ़िनिश होने वाली हूँ... प्रीत... मुझे मसल दो... क्रश मी... वाओ... उफ़्फ़... !'' मादक सिसकारियाँ करते हुए परी दस ही मिनट में स्खलित हो कर निढाल हो गई।

मैं भी थक गया था पर अभी तक स्खलित नहीं हुआ था, इसलिये तुरन्त स्वाति आंटी को पकड़ कर लिटाया और अपना लिंग उनकी योनि में घुसा दिया। स्वाति आंटी भी तैयार थी... उन्होंने अपने पैर उठा कर मेरे कूल्हों पर रख दिये और धक्कों मे मेरी हैल्प करने लगीं जिससे मुझे थकान महसूस नहीं हो।

अब कमरा आंटी की उत्तेजक आवाज़ों से गूंजने लगा था- प्रीत... यू आर सो स्वीट... फक मी... और जोर से... तुम्हारा स्टेमिना गज़ब का है... माई स्वीट बोय... आह्ह... बहुत अच्छा है... रुकना नहीं... उफ्फ... आई लव यू प्रीत... !

काफी देर ठोकने के बाद मैं भी स्खलित हो गया पर फिर भी आंटी के फिनिश होने तक धक्के मारता रहा... कुछ देर में आंटी भी उत्तेजक चीत्कारों के साथ चरम पर आकर फिनिश हो गई। मैं अलग हो कर बैड पर गिर गया... सारा बदन पसीने से तर-बतर और थक कर चूर हो चुका था।

परिणीति को थोड़ी ब्लीडिंग हुई थी इसलिये वो टोयलेट में जाकर अपनी योनि धोकर आई और मुझे अपनी योनि पर बोरोलीन लगाने को कहा। मैंने अपनी उंगली पर बोरोलीन लगा कर उसकी योनि में धीरे से घुसा दी और हिलाने लगा जो उसे अच्छा तो लग रहा था पर दर्द भी हो रहा था इसलिये मुझे रोक कर अपने पास लेट जाने को कहा।

हम दोनों एक रजाई में ही बिना कपड़ों के लेट गये तभी आंटी दूध लेकर आई, हम सबने दूध पिया और फिर काफी देर तक सैक्स की बातें करते रहे। मैं काफी थक गया था इसलिये कब नींद आई पता ही नहीं चला, वो दोनों अब भी बातें कर रहे थे।

''प्रीत उठो... कपड़े पहन लो... थोड़ी देर में बाई भी आ जायेगी... !'' आंटी की आवाज़ से नींद खुली तो देखा कि आठ बज गये हैं, परिणीति भी अपने घर जा चुकी थी और स्वाति आंटी चाय लिये मेरे पास बैठी मेरे सिर पर हाथ फिरा रही थी।

मैंने जल्दी से उठकर कपड़े पहने और आंटी के पास बैठ चाय पीने लगा... चाय पीते हुए आंटी ने उदास होते हुए कहा- मैं आज तुमको जोइन नहीं कर पाऊंगी... पेट दुख रहा है शायद थोड़ी देर में पीरियड शुरु हो जाये... वैसे तो पीरियड में सैक्स करने में कोइ दिक्कत नहीं पर मुझे पीरियड में बहुत पेन होता है... खैर... अब तुम तो मेरे पास ही हो... पीरियड के बाद कर लेंगे... और आज तो अनु भी आ जायेगी... तुम तीनों एन्जोय करना... !

कह कर आंटी हंसने लगी और बोली- अब तुम जाओ प्रीत... क्योंकि मैं नहीं चाहती कि बाई तुमको यहाँ देखकर बातें बनाये... मैं बैडशीट भी चेंज कर देती हूँ जिस पर परी को ब्लीडिंग हुई थी... !'' मैं आंटी की समझदारी पर खुश होते हुए उठा और आंटी से चिपक कर किस किया और अपने घर की ओर बढ़ गया...

आगे की कहानी फिर कभी...

आपके कमेंट्स का इन्तज़ार करूँगा...

aarya.preet@gmail.com

मेरी चाहत अधूरी रह गई

Posted: 04 Mar 2013 08:01 AM PST


हिंदी सेक्सी कहानियां के सभी पाठकों को मेरी तरफ से नमस्कार !

मैं 23 वर्षीय मध्यम रंग का 5'10" कद का सामन्य दिखने वाला लड़का हूँ। मैंने "हिंदी सेक्सी कहानियां" की लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं और यह मेरी पसंदीदा वेबसाइट बन गई है, कई कहानियाँ तो सच्ची लगती हैं तो कई झूठी भी लगती हैं। मेरी भी कहानी कुछ ऐसी ही जिस पर हर कोई विश्वास नहीं कर सकेगा।

बात 2008 की है जब मैं इंटरमीडिएट के आखिरी वर्ष में परीक्षा की तैयारी कर रहा था। मेरी एक लड़की से दोस्ती हुई जिसके पीछे मैं कई साल से लगा था और दसवीं में जाकर उससे दोस्ती हुई थी। मैंने इंटर की परीक्षा के बाद उससे अपने प्यार का इजहार कर दिया था और उसने भी मान लिया था।

उसके बाद से हम अक्सर मिलने और साथ में घूमने लगे थे। आपस में प्यार भरी बातें, शादी की और बच्चों की भी बातें करने लगे थे। यहाँ मैं उसका नाम नहीं लिख रहा हूँ।

एक दिन की बात है, कॉलेज ख़त्म होने पर उसने मुझे कॉल किया और कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती है।

मैंने कहा- मैं आता हूँ।

थोड़ी देर में मैं उसके पास पहुँच गया। उसके बाद हम पार्क जाकर कुछ बातें कर रहे थे कि वो अचानक से बोली- मैं अब बाहर नहीं मिलना चाहती हूँ, तुम कॉलेज के ही पास रूम किराए पर लेकर रहो, मैं वहीं पर आया करुँगी।

मैंने बहुत पूछा पर उसने इसका कोई कारण नहीं बताया।

मैंने अपने एक दोस्त से जो कॉलेज से थोड़ी ही दूर था, से बात की और वो राजी हो गया। वो दिन भर कमरे पर नहीं रहता था। इसलिए हम आराम से वहाँ पर मिल सकते थे।

मैंने जब अपनी गर्लफ्रेंड को बताया तो वो बहुत खुश हुई और मुझे फ़ोन पर ही चुम्मा देने लगी तो मैंने कहा- मेरी आज तक हिम्मत ही नहीं हुई कि मैं तुमसे चुम्मा लूँ पर आज तो बिना मांगे ही मिल रहा है। कमरे पर जब अकेले रहेंगे तब मुझे चुम्मा चाहिए।

उसने कहा- मैं दूँगी।

अगले दिन हम मिले और मैं उसे लेकर अपने दोस्त के कमरे पर गया। थोड़ी देर बात करने के बाद लगा कि जैसे वो नशे में झूमती हुई बातें कर रही हो।

अचानक से उसने कहा- मैंने कल कॉलेज में कुछ देखा, जो बताने में शर्मा आ रही है।

मैंने कहा- मुझसे किस बात की शर्म है।

उसने कहा- मैंने कल एक लड़के और एक लड़की को कॉलेज के कोने में वो करते देखा जो इंग्लिश फिल्मो में होता है।

मैंने पूछा- खुल कर बताओ कि क्या देखा?

उसने मुझे पास आने को कहा। मैंने जैसे ही अपना कान उसके पास किया, उसने मेरे गाल पर एक चुम्मी ली और शरमा कर दूसरी तरफ घूम गई।

मैं समझ गया कि उसका भी मन है कुछ करने को, मैंने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमने-चूसने लगा।

धीरे धीरे मैं उसके गाल, कान, और गर्दन तक पहुँच गया।

अचानक वो जो बोली उससे मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ, उसने कहा- सिर्फ होंठों को ही चूमोगे?

मैंने पूछा- तो बताओ कहाँ कहाँ चूमूँ?

जवाब में उसने मेरा सर अपने सीने पर दबाने लगी। मैंने उसका कमीज उसके सीने से खींच कर थोड़ा नीचे कर दिया और ढीले गले के कारण मुझे उस चीज का दर्शन हुआ जो अक्सर मैं सिर्फ सपनों में ही देखा करता था।

मुझसे से रहा न गया और झट से मैंने उसकी एक चुच्ची को मुँह में भर लिया। उसके मुँह से मद भरी सीत्कार निकल गई- आ आह ! अब मैं उसके एक निप्पल को चूस रहा था और दूसरे स्तन को दबा रहा था। बारी बारी से मैंने दोनों चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया। मेरा लंड इस कदर कड़ा हो गया था जैसे पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जायेगा।

तभी अचानक से फ़ोन की घंटी बज उठी। मेरे दोस्त का कॉल था। वो कमरे पर आ रहा था।

मेरी प्यास अधूरी ही रह गई थी, मैंने उससे कहा कि अगले दिन फिर से करेंगे। वो झट से मान गई।

दोस्त के आने पर हम चले गए और अगले दिन फिर से कमरे में पहुँच गए।

उस दिन भी वही सब चल रहा था। मैंने उससे कहा- मैं तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ।

उसने कहा- नहीं, सिर्फ शादी के बाद।

पर मैंने कहा- नहीं मुझे अभी देखना है।

वो नहीं मान रही थी। मैं मुँह फुला कर बैठ गया तो उसने कहा- ठीक है मैं सिर्फ कमीज ही उतारूँगी। बाकी सिर्फ शादी के बाद ही कुछ करेंगे।

मैंने कहा- ठीक है।

उसने मुझसे कहा- मुझे खुद से कपड़े उतारने में शर्म आ रही है। तुम ही उतार दो।

मैंने जोश में आकर उसे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे किस करने लगा और वो भी जोश में आकर मेरा साथ देने लगी।थोड़ी देर बाद मैंने उसका कमीज उतारना शुरू किया और उतार कर अलग कर दिया। उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहन रखी थी, वो शर्म के मारे अपनी चूचियों को हाथों से छुपाने लगी। तब मुझे साइज़ के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। पर अब कह सकता हूँ कि उसकी चूचियों का साइज़ ज्यादा नहीं 28-29 और कमर 30 रहे होंगे।

मैंने उसके ब्रा को भी उतार दिया। मेरी तो आँखें ही चुंधिया गई।पहली बार मैंने किसी लड़की को उस हालत में अपने सामने में देखा था। मेरा लंड काफी सख्त हो गया था और पैन्ट में होने के कारण दर्द करने लगा था। मैंने आव देखा न ताव, और उस पर टूट पड़ा। उसके पूरे बदन पर मैंने किस करना शुरू कर दिया।

वो भी मस्ती में आकर मेरा साथ जोश के साथ देने लगी। उसके मुँह से बहुत ही मादक आवाजें निकालनी शुरू हो गई- ऊहह्ह आआह्ह ! करो, जोर से करो, आआ आअह !

मैं भी उन आवाजों को सुन कर काफी ज्यादा ही जोश में आ गया और उसके चूचों और निप्पल पर दाँतों से काटने लगा।

वो दर्द से कराहने लगी और कहने लगी धीरे धीरे करने को। फिर मैं अपने हाथों को धीरे धीरे सरकाते हुए उसके सलवार में ले जाने लगा। मैंने जैसे ही उसकी पैंटी के ऊपर हाथ रखने की कोशिश की, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- नहीं इससे आगे नहीं। मैंने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया है पर इससे आगे हम शादी के बाद ही करेंगे।

मेरा मन उदास हो गया। मैंने बुझे मन से उसकी बात मान ली। मैं उससे कहता रह गया कि मैं सिर्फ बूर को देखना चाहता हूँ पर वो नहीं मानी तो नहीं ही मानी।

मैंने भी ज्यादा जिद नहीं की।

दोस्त के आने का समय हो गया था। हमने अपने अपने कपड़े ठीक किये और बेड को भी ठीक कर दिया।

उसके बाद से हमने कई बार ऐसा ही किया पर उसने मुझे इससे आगे कभी बढ़ने नहीं दिया। मैंने भी ठान लिया की जब तक यह खुद नहीं कहेगी, मैं जिद नहीं करूँगा।

एक बार मुझे घर के काम से आउट ऑफ़ स्टेशन जाना पड़ा। मैंने उससे कहा कि मैं जल्दी ही आ जाऊँगा। बस एक महीने के लिए ही जा रहा हूँ, जल्दी ही लौट आऊँगा।

वो मेरे जाने के समय रोने लगी थी, मैंने कहा- हमारी बात तो होती ही रहेगी न।

फिर मैं अपने काम से चला गया। एक महीने बाद जब मैं वापस घर आया तो मेरे दोस्तों से पता चला कि उसने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। उसका मेरे अलावा और भी 2 लड़कों के साथ अफेयर था जिसके बारे में मुझे कुछ भी मालूम नहीं था।

और मेरे लौटने से एक दिन पहले ही वो एक लड़के के साथ घर छोड़ के भाग गई है। मैंने उसके फ़ोन पर बहुत कोशिश की कॉल करने पर कॉल कनेक्ट ही नहीं हो रहा था।

मैं बहुत ही उदास हो गया और गुमसुम सा रहने लगा कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?

मैंने बहुत कोशिश की उसके बारे में पता लगाने की, पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। और वो आज मेरी जिन्दगी में नहीं है।

धीरे धीरे मैं उसे भूलकर अपने पढ़ाई में ध्यान देने लगा। बाद में मेरी 2-3 गर्लफ्रेंड बनी। उनके साथ भी बहुत कुछ हुआ। ये सब मैं आगे की कहानियों में बताऊँगा। आप सबको मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना कैसी लगी जरुर बताइयेगा दोस्तो, मुझे आपके मेल का इन्तजार है।

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