हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-1

Posted: 03 Jun 2013 06:35 PM PDT



यह कहानी है मेरी और मेरी चचेरी बहन की जिसका नाम रीना है। हम लोग बचपन से ही साथ साथ रहे। वो मुझसे सात साल छोटी है पर हम लोगों की खूब बनती थी। बाद में मैं अपनी पढ़ाई और फिर जॉब के कारण वो शहर छोड़ के दूसरी जगह आ गया पर जब भी अपने घर जाता मैं और रीना बहुत बातें करते।

बात तब की है जब रीना जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी। जैसा कि आप लोगों को पता है कि मैं कितना बड़ा चोदू हूँ तो मेरी नज़र से रीना के शरीर में होने वाले बदलाव मेरी नज़र से कैसे बचते। मुझको पता चल रहा था कि कब उसके चपटे सीने में से तीखे उभार निकलने लगे थे, उसके चूतड़ उभर रहे थे। और वैसे भी चूंकि मैं बाहर रहता था तो उसके जिस्म में होने वाले बदलाव मुझको और आसानी से पता चल रहे थे। उसके जिस्म से एक अलग से खुशबू आने लगी थी जो उसकी जवानी को और मादक बना रही थी। जब भी वो मेरे पास आती थी तो उसके जिस्म की खुशबू मुझको पागल कर देती थी।हमेशा की तरह हम लोग पास बैठ कर बहुत बातें करते थे। वो मेरे बहुत करीब चिपक कर बैठती थी, वो अपनी बातो में मस्त रहती थी और मैं उसके जिस्म की खुशबू के मज़े लेता रहता था। बातें करते वक़्त वो कई बार मेरे गले लग जाती थी और उस वक़्त उसके मम्मे मेरे बदन से चिपक जाते थे जो मुझको मस्त कर देते थे।

अब बस इंतजार था तो बस उसके मेरे बिस्तर पर आने का। जब से मैंने उसको जवानी की दहलीज में देखा था बस एक ही बात मेरे दिमाग में रहती थी कि वो कब मेरे बिस्तर में नंगी होकर लेटेगी, कब मेरे लंड को उसकी चूत की गुफा में घुसने का मौका मिलेगा। सपनों में कई बार मैं उसके मम्मो को मसल कर उसकी चूत मर चुका था अब इंतजार सिर्फ उसके हकीकत में बिस्तर पर लेटने का था।

एक दिन मेरे चाचा-चाची और रीना हमारे घर आये। सब लोग बातों में मस्त थे और मैं और रीना हर बार की तरह अपनी बातों में मस्त थे। वो मेरे साथ बच्चों की तरह मस्ती कर रही थी। वो मेरे गुदगुदी करने लगी जवाब में मैंने भी जब गुदगुदी की तो वो भागने लगी। मैंने उसको पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया, वो तैयार नहीं थी और झटके से मेरी गोद में आ गिरी। मैं पलंग पर पजामा पहने बैठा था और इतनी देर की मस्ती में मेरा लंड खड़ा हुआ था और वो आचानक लगे इस झटके से मेरी गोद में मेरे लंड पर आकर गिर गई।

मेरा लंड उसके चूतड़ों की दरार में अटक सा गया।

थोड़ी देर वो ऐसे ही रही और जब उसको ध्यान आया तो वो उठने लगी पर मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसके पेट पे थे सो वो उठ नहीं पाई। उसके उठने और मेरे पकड़े रहने की इन कोशिशों में मेरा लंड उसकी गांड में घिस रहा था और इस कारण मेरा लंड और खड़ा हो के मोटा हो गया था जो उसकी गांड की दरार में लगा हुआ था।

मैंने उसके पेट पर थोडा और जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी दरार में बिलकुल फिट हो गया। मैंने नीचे बैठा अपने चूतड़ हिला कर लंड आगे पीछे करने लगा।

वो थोड़ी थोड़ी कोशिश कर रही थी उठने की पर मैंने उसको उठने नहीं दिया। थोड़ी देर में उसने अपनी कोशिश छोड़ दी।

मैंने अपनी कमर हिलाना शुरु कर दिया। मैं समझ गया कि रीना भी मेरे लंड पर अपनी गांड घिस रही है। वहाँ सब लोग थे तो मैं वो नहीं कर पा रहा था जो चाहता था, मैंने रीना के कान में ऊपर बने कमरे में आने को कहा और यह कह कर मैं उसको छोड़ के ऊपर चला गया।थोड़ी देर में रीना भी वहाँ आ गई। मेरा ऊपर वाले कमरे में किसी के आने या देखने का डर नहीं था। रीना थोड़ी शर्माते हुए कमरे में घुसी। उसने पजामा और टॉप पहना हुआ था। मैंने जल्दी से उसको पकड़ लिया और अपने साथ पलंग पर ले गया। मैं पलंग पर बैठ गया और अपना लंड पजामे के अंदर सीधा करके रख लिया और रीना को अपने लंड पे बैठा दिया। मेरा लंड दुबारा से उसकी गांड की दरार में घुस गया।

मैं अपने चूतड़ हिला कर लण्ड आगे पीछे करने लगा और उसकी कमर को पकड़ कर भी हिलाने लगा। वो अभी भी शरमा रही थी।

मैंने उसके कंधों पर किस किया तभी अचानक वो बोली- भईया, यह गलत है ना !

मैंने उसके कंधों पर हाथ रखा और कहा- गलत तो तब होगा ना जब किसी को पता चलेगा और ना तो मैं ना ही तू किसी को यह सब बतायेंगे और हम लोग सिर्फ मज़े ही तो कर रहे हैं। तू चिंता मत कर कुछ नहीं होगा, सिर्फ इससे मिलने वाले मज़े पे ध्यान दे !

अब मैं अपना लंड उसकी दरार में जोर जोर से रगड़ रहा था और वो भी कमर हिला हिला के मेरा साथ दे रही थी। मेरे लंड उत्तेजना से फूल कर मोटा हो गया था।

थोड़ी देर में मैंने उसको पूछा- और मज़ा लेना है?

तो वो कुछ बोली नहीं।

मैंने कहा- बहना, अपने भाई से क्या शरमाना, बता कुछ और मज़ा लें?

तो वो बोली- कोई आ जायेगा।

मैंने कहा- तू चिंता मत कर, ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे कोई कुछ पकड़ सके।

उसने हाँ में सर हिला दिया तो मैंने उसको उठाया और अपना पजामा घुटनों तक उतार दिया फिर उसका पजामा भी घुटनों तक उतार दिया। उसने शर्म से अपनी आँखें बंद कर ली। उसने काले रंग की पेंटी पहनी हुई थी जो इतनी देर मेरे लंड घिसने के कारण उसकी गांड में घुस गई थी। उसके गोल गोरे चूतड़ मेरी आँखों के सामने थे।

मैंने अपने हाथों से उसके चूतड़ों को सहलाया, वो एकदम से कांप गयी। शायद पहली बार उसने किसी आदमी का हाथ अपने उस जगह महसूस किया था। मैंने चूतड़ों को सहला कर एक बार दबा दिया और उसकी कमर से खींच के फिर से अपने लंड पर बैठा दिया।

अबकी बार वो भी अपनी कमर हिला रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी नंगी जांघों पर रख दिए और उसकी जाँघें सहलाने लगा।

एकदम चिकनी जाँघें थी उसकी मक्खन जैसी।

मेरे हाथ उसकी जाँघों पर चल रहे थे और धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी पेंटी के किनारों से होते हुए उसकी दोनों जांघों के अंदर वाले भाग जहाँ पेंटी के किनारे होते हैं, वहाँ चलने लगे पर मैंने अभी तक उसकी चूत को नहीं छुआ था क्योंकि मैं जल्दी कुछ नहीं करना चाहता था।

वो आँखें बंद किये हुए अपनी कमर हिलाने में मस्त थी। थोड़ी देर बाद मैंने बस एक बार उसकी चूत के ऊपर हाथ फेरा जिससे वो आंखें खोल कर एकदम से खड़ी हो गई। उसकी आंखों में अपने गुप्तांग को छूने की शर्म दिख रही थी।

मैंने अब और आगे बढ़ने की सोची और अपनी चड्डी उतार दी।

वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। मैंने एकदम से उसकी पेंटी को पकड़ा और घुटनों तक खींच दी । उसकी नंगी गांड मेरी आँखों के सामने थी।

वो एकदम हुई इस हरकत के लिए तैयार नहीं थी। उसने अपने हाथो से अपनी गांड छुपाने की कोशिश की तो मैंने उसके हाथ हटा दिए और उसको फिर से अपनी और खींच लिया। मैंने एक हाथ से अपने लंड को सेट किया और दूसरे से उसको फिर से अपनी गोद में पटक लिया। पहली बार मेरे लंड का स्पर्श उसकी नंगी गाण्ड से हुआ था। एक अजीब सा अहसास था वो। मैंने अपने हाथों से उसके चूतड़ों को चोड़ा किया और लंड को सेट किया। मैंने उसकी चूत की तरफ हाथ बढ़ाये और उसकी नंगी चूत पर हाथ फेरा।

वो सी सी कर रही थी।

मैंने उसकी चूत के दोनों होंठों को सहलाया। अब मेरे हाथ उसकी जाँघों और चूत को पूरी तेज़ी से सहला रहे थे। गांड में मेरा लंड घिस रहा था।

थोड़ी देर में मैंने अपने हाथ उसके मम्मो की ओर बढ़ा दिए। मैंने टॉप के ऊपर से उसके मम्मे पकड़ लिए और मसल दिए। अब मैं उसके मम्मों को दबा रहा था और मेरे होंठ उसके कंधों पे, पीठ पे किस कर रहे थे।

अब मैंने उसका मुँह अपनी और किया और उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए। मैं उसके होंठों को चूसने लगा, कभी उपर वाले होंठ को चूसता तो कभी नीचे वाले को।

वो मेरा साथ देने की कोशिश कर रही थी पर अभी उसको इतना अच्छे से आता नहीं था। वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा।

वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और उसके चूतड़ों पर चूम लिया और पजामा ऊपर कर दिया और अपने कपड़े भी सही कर लिए।

मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?

तो वो मुस्कुराने लगी।

मैंने एक बार और उसको किस किया और हम नीचे आ गये।

अब मुझको इंतजार था अगले सही मौके का जब मैं अपनी परी को अपने बिस्तर के रानी बना सकूँ।

कहानी जारी रहेगी।

sexpujariindelhi@yahoo.in

मौसी के साथ मस्ती की

Posted: 03 Jun 2013 06:58 AM PDT



मैं सर्मिला हीरो पटना बिहार से एक सेक्सी स्टोरी लेकर फिर आया हूं। सबसे पहले सभी आंटियों, भाभियों और लड़कियों को मेरा नमस्कार।
अपनी आपबीती कहानी पर आता हुं मेरी उमर २८ साल है और मेरी एक मौसी ३३ साल की थीं। मैं अपनी मामी के घर उनके बच्चे के बर्थडे में गया था। रात में सभी पार्टी इंजोय कर एक कमरे में बैठ कर बाते कर रहे थे मुझे कुछ कुछ नींद आ रहे थी। लॅडीज़ बहुत ही गरम गरम बातें करते हुए बहुत ज़ोर ज़ोर से हंस रहीं थीं। थोड़ी देर तक तो मैने सहन किया उसके बाद मैने कहा कि आप लोग दूसरे कमरे मैं चले जायें तो उन्होंने कहा कि तुम ऊपर वाले कमरे में जाकर सो जाओ और साथ मैं मौसी से भी कहा कि तुम भी जाकर सो जाओ। हम दोनो ऊपर वाले कमरे में गये तो देखा कि वहां पर कई बच्चे और कज़िन सो रहे थे। हम दोनो एक किनारे लेट गये और सोने की कोशिश करने लगे पर मुझे अब नींद नही आ रही थी मौसी के बड़े बड़े बूब्स को ही देख रहा था थोड़ी देर बाद उन्होंने उठकर लाइट ऑफ कर दी।

लगभग आधे घंटे तक कुछ नहीं हुआ फिर मैने कुछ हिम्मत जुटाकर मौसी के कमर पर हाथ रख दिया उन्होंने कुछ नहीं कहा थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ उनकी बूब्स के ऊपर रख दिया इस पर वो थोड़ा हिली पर उन्होंने हाथ हटाने की कोशिश नहीं की मैने हाथ को वहीं थोड़ी देर रख कर रिअक्शन जानना चाहा जब वो कुछ नहीं बोली तो मैने बूब्स को थोड़ा प्रेस किया तो वो बोली ये तुमने कहाँ से सीखा? मैने कोई जवाब नहीं दिया। मैं धीरे रे उनके कुर्ते को उठाने लगा उन्होने कोई विरोध नहीं किया मैं उनके ब्रा के उपर से ही उनके बड़े बड़े चूचियों को दबाने लगा फिर मैने उनकी ब्रा को आगे ककी तरफ़ से उनकी चूचियों के ऊपर कर दिया उनके काले काले और बड़े निप्पल मुझे आउट ओफ़ कन्ट्रोल कर रहे थे मेरा लंड एकदम स्टील रोड हो चुका था । मौसी ने मेरी पैंट में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया। कमरे में दिनभर के सब थके हुए सो रहे थे इस लिये कोई प्रोब्लम नहीं थी

धीरे धीरे मौसी ने मेरा लंड सहलाना शुरु कर दिया और मैंने उनके बुर में उंगलियां डाल कर अंदर बाहर करने लगा वो आआआआआआआआ आआआ आआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्ह ह्हह्हह्हह्हह्हह्हहाआआआआआआअ ओह येस्सस्सस्स ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हहोफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़्फ़फ़् फ़फ़ वोव्वव्वव्वव्वव्वव कर रहीं थीं मैं भी जोश में था वो थोड़ी देर मै झड़ गईं और मै भी शान्त हो कर हम दोनो चिपक कर सो गये । अगले दिन हम दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिये । दिन में मामी किसी काम से मार्केट चले गये तो मैने बिना समय गंवाये उनके बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा और उनके कपड़े उतारने लगा अब वो बिलकुल मेरे सामने नंगी खड़ी थीं मैने उन्हें किस किया और उठा कर बेडरूम में ले गया और अपना लंड जो स्टील के रोड की तरह हो गया था उनकी बुर जो कि बिलकुल ही गीली हो गयी थी बुर के मुँह पर रख कर एक झटका दिया

वाव क्या टाइट चूत थी मेरे लंड में थोड़ा दर्द होने लगा था मैने उसके बुर को उंगली से फ़ैलाया और एक और झटका दिया मेरा आधा लंड उनके बुर में घुस गया था बुर टाइट होने के वजह से बुर की झिल्ली फट गई और वो बहुत जोर से चीखी ओह माआआआआआआआ ऊऊऊऊऊऊऊह्ह ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह गोड प्लीज़ डू इट स्लोवली ओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह दिस इस हर्टिंग मी ।

दर्द कर रहा है प्लीज़ निकाल लो अपना लंड पर मैने उनके एक भी नहीं सुनी और एक जोर का झटका और दिया मेरा पुरा लंड उनके बुर में घुस गया था । अब मै थोड़ी देर रुका और उनके बूब्स को मुँह में ले कर चूसने लगा इससे उनका दर्द कुछ कम हुआ और वो अपनी गांड को उठा कर लंड को और अंदर लेने की कोशिश करने लगी मै उनके इशारे को समझ एक जोरदार धक्का मारा

अब वो आआआआआआआआअ ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हवोव्व व्वव्वव्व व्वव्वव ्वव्वव ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह ह्हह् हह्हह् हह्हह्हह्हह कर रहीं थीं

कुछ देर के बाद वो बोली मै झड़ रही हूँ ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ह्हह्हह्हह्हह्ह ह्हह्हह्हह्हह्हह्हा आआआआआ आआआआ आआआआआआसोमीईईईईईईईईईइन ग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग ्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग ्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग्गग ओह येस्सस्सस्सस्स स्सस्सस्सस्सस ्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस

और उन्होंने अपना पुरा पानी बाहर उड़ेल दिया मैने भी अपने धक्के तेज कर दिये और कुछ ही मिनटो में मेरा पुरा वीर्य उनके बुर में गिर गया वोव कितना मजा आया था । मामी के आने का टाइम हो गया था हम दोनो ने उठ कर जल्दी से कपड़े पहने और रूम के बाहर आ गये।

रात में हमने मौका निकाल कर फिर चुदाई की। उसके बाद जब कभी भी हमें मौका मिलता हम चुदाई कर लेते । कुछ दिनों बाद सबलोग अपने अपने घर चले गये, पर अभी जब वो घर आती हैं तो मौका देखकर मै उनके बूब्स को दबा देता हूं और अगर चान्स मिला तो चुदाई भी कर लेते
sexygirl4uonly16@gmail.com

बड़ा आया चोदने वाला

Posted: 03 Jun 2013 06:43 AM PDT



मेरा नाम विशाल है, सूरत का रहने वाला हूँ और मैं इन्जीनियरिंग का छात्र हूँ, मैं दीखने मैं तो काफी अच्छा दिखता हूँ। मेरी उम्र 18 साल है और कद 5'7" और मेरे लन्ड का साईज सामान्य है, दूसरे लेखकों की तरह नहीं कहूँगा कि मेरा लन्ड 8" का है या 10" का है।

मैंने हिंदी सेक्सी कहानियां में लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं।

मैं हाजिर हूँ आपके मनोरंजन के लिए अपनी पहली सेक्स कहानी लेकर, मुझे उम्मीद है कि अपको पसन्द आएगी, पहली बार कहानी लिख रहा हूँ।

यह कहानी तब की है जब मेरी दिवाली की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं अपने चाचा के वहाँ चला गया जो मुंबई में रहते हैं। उनका तीन लोगों का परिवार है, चाचा-चाची और उनका 7 साल का बेटा। यह कहानी मेरी चाची के बारे में है।

मेरी चाची का फ़ीगर क्या बताऊँ दोस्तो, वो कद में मुझसे छोटी है पर दिखने में किसी कयामत से कम नहीं ! मेरी और चाची की बहुत जमती थी और चाचा एक बिजनेसमैन हैं, चाचा मुझे बड़े बेटे की तरह कम और दोस्त ज्यादा रखते थे।

एक दिन चाचा को किसी काम से दूसरे शहर जाना पड़ा। उस रात मैं और चाची बैठे थे।

मेरी और चाची की अच्छी बनती थी पर मैंने कभी चाची को उस नजर से नहीं देखा था पर उसके इरादे आज मुझे साफ नहीं लग रहे थे। फ़िर भी हम बैठे थे।

वो मुझे बोल रही थी- विशाल अब तुम बड़े हो गए हो, अब तो तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी !

मै- क्या कहा आपने?

चाची- शादी बुद्धू शादी।

मै- चाची, अभी तो मेरी पढ़ाई चल रही है?

चाची- तो क्या शादी के बाद नहीं पढ़ सकते क्या?

दोस्तो, मैं बता दूँ कि हमारी बिरादरी में शादी बहुत जल्द हो जाती है।

मै- हाँ, पढ़ तो सकते है लेकिन !

चाची- लेकिन क्या विशाल?

मेरे जवाब देने से पहले चाची ने फ़िर पूछा- देख विशाल, तेरी पसन्द में कोई और हो तो बता दो वरना !

मै- नहीं, मुझे कोई पसन्द नहीं है।

फ़िर मैंने पूछा- वरना क्या?

चाची- मैंने तुम्हारे पापा से बात की है कि मेरी छोटी बहन काजल को अपने घर की बहु बनाएँ।

मैं- पर वो तो तुम्हारी बहन है।

पर दोस्तो, मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि काजल दिखने में इतनी खूबसूरत है कि पूछो ही मत ! स्वर्ग की अप्सरा जैसी।

चाची- तो क्या हुआ? अगर मेरी बहन तुम्हारी बीवी बने?

मै- पर अभी तो मैंने कमाना भी चालू नहीं किया और बड़ी प्रोब्लम तो यह है कि शादी के बाद क्या करते हैं, मुझे पता नहीं?

चाची- ओेई हरिचन्द्र, तेरे पापा का अच्छा बिजनेस चल रहा है तेरे चाचा का भी अच्छी तरह से चल रहा है तो क्या मेरी बहन भूखी रहेगी तेरे घर में?

मैं- यह बात भी ठीक है !

इतने में चाची बोली- तेरे दूसरे प्रोब्लम में मैं तेरी मदद कर सकती हूँ !

मै- वो कैसे?

चाची- मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी।

और मैं तैयार हो गया मैं तो सांसारिक जीवन कैसे जीते हैं यह सीखना चाहता था पर चाची सेक्स सिखाना चाहती थी।

बातों ही बातों में रात के 12 बज गये तो मैंने कहा- चलो सो जाते हैं।

तो चाची ने कहा- सीखना नहीं है?

"मैं कुछ समझा नहीं?"

तो अब चाची ने अपनी शरम छोड़ते हुए कहा- इसकी क्लास तो रात में ही लगती है !

मै- यह आप क्या कह रही हैं?

मुझे तो सब समझ आ गया था कि आज चाची मुझसे चुदने वाली हैं, और मैं भी खुश था।

और उसी ख्याल में मेरा लन्ड कब खड़ा हो गया पता ही नहीं चला। अब मैं भी गर्म हो गया था और चाची तो जैसे ज्वाला की तरह गर्म थी।

तो चाची ने मुझे अपने बेडरूम की तरफ़ इशारा किया, मैं समझ गया कि लाईन साफ़ है। मैं जब अन्दर गया तो चाची ने मुझे अपनी ओर जोर से खींच लिया और मुझे पूरे बदन पर चुम्बन करने लगी।

मैं तो स्वर्ग की सैर कर रहा था क्योंकि पहले कभी किसी लड़की ने मुझे छुआ तक नहीं था।

अब वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था। अब तक मैं ऐसे ही खड़ा था।

अगले ही मिनट चाची बोली- विशाल, मैं तुम्हें पसन्द नहीं हूँ क्या?

मै- नहीं चाची, आप तो सुन्दर हैं।

चाची- तू झूठ बोल रहा है ! अगर मैं तुम्हें पसन्द होती तो अब तक तूने मुझे चोद दिया होता !

चाची तीर पर तीर छोड़ रही थी और मेरे सब्र का बान्ध टूट रहा था। पर वो मेरी चाची थी तो मैं उसे चोदना नहीं चाहता था लेकिन मैं भी जवान था, जल गया चाची की ज्वाला में ! और मैं उसके ऊपर चढ़ गया लेकिन वो मेरे इस वार के लिए तैयार नहीं थी।

फ़िर मैं उस पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा और मैं उसको पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी।

आग दोनों तरफ से लगी हुई थी। अब चाची ने मेरे शर्ट के बटन खोलने चालू किए और मुझे एक नशा सा छाने लगा। अब मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा था पर चाची तो पूरे मूड में थी।

चाची ने मेरी पैन्ट को नीचे कर दिया अब मैं सिर्फ अन्डरवीयर मैं चाची के सामने खड़ा था पर अब मेरी बारी थी चाची के कपड़े उतारने की !

तो मैंने चाची के ऊपरी वस्त्र उतारने लगा तो मैं थोड़ा डर रहा था, मैंने धीरे से उसके स्तन पर हाथ रख दिया तो उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया, मैंने उसका ऊपरी वस्त्र निकाल फेंका। अब उसके दोनों सन्तरे मेरे हाथों में थे तो मैं उनसे खेलने लगा। चाची बोली- इनसे खेलते रहोगे या कुछ और करने का भी इरादा है?

तो मैंने चाची से कहा- वैसे तो मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ मेरी जान !

इस बार चाची थोड़ा शरमा गई तो मैंने कहा- शरमा क्यूँ रही हो?

चाची मजाक करते हुए- तुम तो मेरे बेटे जैसे हो।

मैं- हाँ, तो आज बेटे से ही चुदवा लो !

चाची- बड़ा आया चोदने वाला ! मैंने देखा है तुम्हारा लौड़ा ! छीः ! मुझे तो तुम्हारे लौड़े को लौड़ा कहने में भी शरम आ रही है।

मैं- क्यूँ, आपने कब देखा?

चाची- तो क्या हुआ अगर मैंने तेरा लण्ड नहीं देखा तो आज तो जी भर कर देखूँगी और...!!

इतना कह कर वो मेरे लण्ड पर टूट पड़ी। मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया मेरे मुँह से आह ह्ह..अओह की आवाज आ रही थी क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तो दोस्तो, मैं 2 मिनट में झड़ गया और मैंने अपना सारा वीर्य चाची के मुँह में छोड़ दिया और दोस्तो, क्या बताऊँ, दिल को कितना सुकून मिला !

पर दोस्तो, मैंने हार नहीं मानी। थोड़ी ही देर बाद चाची को कस कर पकड़ कर अपना लण्ड चाची की चूत के मुँह पर रख दिया और एक झटका लगाया तो मेर लण्ड चाची चूत में पूरा समा गया।

दोस्तो, इस अनुभव का मैं विस्तार नहीं कर सकता !

थोड़े शब्दो में कहूँ तो ''स्वर्ग भी कुछ नहीं है इस चूत के आगे !"

पर मुझे लगा कि चाची को कुछ परेशानी थी, उसकी आँखों से पानी निकल रहा था तो मैं रूक गया और चाची को किस करने लगा और चाची से पूछा- चाची आपको बहुत दर्द हो रहा है?

चाची- हाँ, बहुत हो रहा है, इस तरह से कोई चोदता है अपनी चाची को?

मै- आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

चाची- हाँ, मादरचोद चोद दे मुझे मसल दे मेरी जवानी को...

अब मैं चाची को जोर-जोर से चोदने लगा, चाची दर्द के मारे मुझसे कस कर लिपट गई और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए।

चाची बुरी तरह चिल्ला रही थी पर मैंने उस पर और उसकी चूत पर बिल्कुल रहम नहीं किया और जोर-जोर से अपना लण्ड पेलता रहा चाची की चूत ममें।

चाची चिल्ला रही थी और बोल रही थी- विशाल ! और जोर से चोदो... बहुत मजा आ रहा है, अओह... विशाल चोद दो मुझे ! आज मत छोड़ना ! आह...आ आह ! की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। कितनी सेक्सी आवाज थी दोस्तो ! मैं तो पूरी ताकत से चोद रहा था।

इतने में सब खत्म हो गया।

मैंने 20 मिनट चुदाई करके चाची की चूत में ही झड़ गया क्योंकि मुझे पता था की चाची की नसबंदी का ओपरेशन हो चुका है। इसलिए कोई प्रोब्लम नहीं थी।

हम दोनों पर एक मदहोशी सी छाने लगी। इस दौरान चाची तीन बार झड़ गई थी तो उसकी हालत तो मुझसे भी खराब थी, उसकी आँखें नशीली हो गई थी, उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था, अब वो मुझे किस कर रही थी और मेरी छाती को भी चूम रही थी।

इतना सब होने के बाद रात के 3 बज गए, मैं और चाची पूरी रात साथ बिना कपड़ों के ही सो गए।

सुबह जब मैं उठा तो चाची ने मुझे चाय के लिए बुलाया तो मैं चला तो गया चाची के पास पर दोस्तो, रात के कारनामे से मैं चाची के साथ आँख नहीं मिला पा रहा था।

मैं चाय लेकर कम्रे में आ गया पर मैं अपने आप को रोक नहीं सका, मैं चाय पी करके रसोई में चला गया क्योंकि चाची वहीं थी।

मैं रसोई में जाते ही चाची की गर्दन पर किस करने लगा, तो चाची पीछे मुड़ कर मेरे होंठों पर किस करने लगी और बोली- विशाल, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ... क्या तुम भी मुझे प्यार करते हो????

मैं- आई लव यू !

दोस्तो, मैंने चाची से यह नहीं कहा कि आप शादीशुदा हैं या ऐसा कुछ !

वैसे तो आप सभी काफी समझदार हैं, चाची मुझसे क्यूँ चुदना चाहेगी उसका कारण तो आप जानते हो।

यह मेरी सच्ची कहानी है इसलिए मैंने कहानी में चाची का नाम नहीं लिखा इससे उनकी जिंदगी बरबाद हो सकती है।

कैसी लगी मेरी कहानी? ढेर सारे ई-मेल कीजिए।

vadhaiyavishalr@gmail.com

अनाड़ी बहनचोद

Posted: 03 Jun 2013 06:27 AM PDT



मैं एक २५ साल की खुबसूरत एंड सेक्सी औरत हूँ. मेरा हसबंड मुझ से पॉँच साल बड़ा है और वो एक उद्योगपति है वो एक कम पागल आदमी है और हम एक दूसरे के साथ बहुत कम मिल पाते हैं. हमारा अभी तक कोई भी बच्चा नहीं हुआ है. शुरू के दो तीन साल में हम लोगों की सेक्स लाइफ बहुत ही अच्छी थी. उसके बाद वो काम के चक्कर में बहुत फँस गया और हम ने किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी जों कर ली. इन किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी में सिर्फ़ शराब, ब्लू फ़िल्म चलती और औरतों में चूत चूमना और चूत चाटना होती थी. मैं इसमे बहुत खुश थी.

एक बार होली पर मेरा पति अपने काम से बाहर गया हुआ था. मैं लेडीज ' किट्टी पार्टी में चली गई. उस दिन किट्टी पार्टी में बहुत शराब पी गई और हम लोग ताश भी खेले. फिर हम औरतों ने एक हिन्दी पोर्नो फ़िल्म भी देखी, जो की बहुत ही गरम थी. उस के बाद हम औरतों ने चुम्मा और चूत चाटी भी की, और यह सब रात के तीन बजे तक चलता रहा. हम ने बहुत शराब पी ली थी और हमें घर तक हमारी एक सहेली अपनी कार में छोड़ गयी.

घर पर मेरा भाई, रमेश ने सहारा दे कर मुझे मेरे बेडरूम तक पहुचाया. मैंने इतनी शराब पी रखी थी कि मैं ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी. आज मैं किट्टी पार्टी में गरम सिनेमा देख कर बहुत ही गरम हो गई थी. मेरी चुन्ची बहुत फड़क रही थी और मेरी चूत से पानी निकल रहा था जिस से कि मेरी पैंटी तक भीग गयी थी. जैसे ही मेरे भाई ने मुझ को सहारा देकर मेरे बेडरूम तक ले आया मेरा मन उसी से चूत चुदवाने का हो उठा. मेरी चूत फड़क उठी.

मेरा भाई, रमेश एक २० साल का हट्टा कट्टा नौजवान है. मैं अपने बेडरूम में आ कर एक कुर्सी पर बैठ गयी और जान बूझ कर अपना पल्लू गिरा दिया, जिसे कि रमेश मेरी चूचियां को देख सके. मैंने उस दिन एक बहुत ही छोटा ब्लाउज पहन रखा था और उसका गला बहुत ही लो कट था.

रमेश का लंड मेरी चुन्ची देख कर धीरे धीरे खड़ा होने लगा और उसको देख कर मैं और पागल हो गयी. मुझे लगा कि मेरा प्लान काम कर रहा है. उसका पैंट तम्बू के तरह तनने लगा मैं धीरे से मुस्कुराई. मैं ने हाथ से अपने बाल पीछे किए. मैं जान बूझ कर उसको अपनी चुन्ची की झलक दिखाना चाहती थी. मैंने अपने कन्धों को और पीछे ले गई जिस से से की मेरी चुन्ची और बाहर की तरफ़ निकल गई. उसकी पैंट और उठने लगी और मै मन ही मन मुस्करा रही थी और सोच रही थी कि मेरा काम बन जाएगा. उसके लंड की उठान को देख कर लग रहा था कि थोडी ही देर में मैं उसकी बाँहों में घुस जाउंगी और उसका लंड मेरी चूत अच्छी तरह से कस कर चोदेगा.

मैंने अपने भाई से बोला कि जाओ "दो ग्लास और सकोच की बोतल हमारे कमरे से ले आओ". मैंने रमेश से बोला इसको ले लो और पी जाओ. उसने हमारी तरफ़ पहले देखा और एक ही झटके में सारी शराब पी गया. मै ने भी अपना ग्लास खाली कर दिया. मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए धीरे से अपने ब्लाउज को उतार दिया. मैंने उसकी आँखों में वासना के डोरे देखे और रमेश मुझे घूर रहा था.

मै उसकी पैंट की तरफ़ देख रही थी, जो अब तक बहुत ही फूल चुकी थी. मै समझ गयी की उसका लंड अब बिल्कुल ही खड़ा हो गया है और चोदने के लिए अब तैयार है. वो मेरे आधे नंगे जिस्म को बहुत अच्छी तरह से देख रहा था. मै उस से पूछा, "क्यों रमेश, "क्या सोच रहे हो .तुम्हारे साथ क्या होने वाला है ?" वो कुछ ना बोल सका और बहुत ही घबरा गया. मैंने धीरे से उस से पूछा, "तुम्हारा लंड खड़ा हो गया है, है न ?" "मुझे पता है तुम भी मेरी चूत में अपना लंड घुसना चाहते हो ".

मेरे जबान से इतनी गन्दी बात निकलते ही मेरी चूत और गरमा गयी और ढेर सारा पानी निकला. मेरी चूत उसके लंड खाने के लिए फड़फड़ाने लगी. मेरे दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी, की कब रमेश का लंड मेरी चूत में घुसेगा और मुझे जोर जोर से चोदेगा. मै अपने कपडों को धीरे धीरे से खोलने लगी और यह देख कर रमेश की आँखें बाहर निकलने लगी. मैंने धीरे से अपनी साडी को उतारी. मैंने अपना पेटीकोट भी धीरे से उतार फेंका और फिर पैंटी भी उतार फेंकी. अब मै अपने भाई, रमेश के सामने बिल्कुल नंगी हो कर खड़ी हो गयी. रमेश मुझको फ़टी आँखों से देख रहा था. मेरी बाल सफा, भीगी चूत उसकी आँखों के सामने थी और वो उसके लंड को लीलने के लिए बेताब हो रही थी.

मैंने रमेश से धीरे से पूछा, "ओह रमेश ? कब तक देखते रहोगे ? आओ मेरे पास आओ, और मुझे चोदो. देख नही रहे हो मै कब से अपनी चूत खोले चुदासी खड़ी हूँ. आओ पास आओ और अपने मोटे लंड से मेरी चूत को खूब अच्छी तरह से रगड़ कर चोदो ." मेरी इस बात को सुन कर वो हरकत में आ गया. वो मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगा. उसने पहले अपना शर्ट उतरा. फिर उसने अपनी चड्डी भी धीरे से उतार फेंकी. चड्डी उतारते ही उसका लंड मेरी आंखों के सामने आ गया. उसका लंड इस समय बिल्कुल खड़ा था और चोदने को बेताब हो कर झूम रहा था. मैं उसके लंड को बड़ी बड़ी आँखों से घूर रही थी. उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था. मैं उसका लंड देख कर घबरा गयी, लेकिन मेरी चूत उसके लंड को खाने के लिए फड़फड़ाने लगी. मैं अपनी कुर्सी से उठ कर उसके पास जाने लगी, लेकिन मेरे पैर लड़खड़ा गए. मैं गिरने लगी और रमेश ने आकर मुझको चिपटा कर संभाल लिया .

एक झटके में रमेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था. वो मेरी एक चुन्ची को अपने मुंह के अन्दर लेकर चूसने लगा. मैं बहुत शराब पीने के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी. मैं फर्श पर गिर पड़ी. रमेश ने मुझको फट से पकड़ लिया और हम दोनों कारपेट पर गिर गए. रमेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था और रमेश वैसे ही पड़ा रहा. अब मुझ से बर्दास्त नहीं हो रहा था मैने धीरे से रमेश से कहा, "रमेश मेरी चुन्ची तो दबाओ, खूब जोर से दबाओ, इनको अपने मुंह में लेके चूसो, इनसे खूब खेलो".

इतना सुनते ही रमेश मेरे ऊपर टूट पड़ा और मेरे चूंची से खिलवाड़ करने लगा. मैंने अपना दाहिना तरफ़ का दूध उसके मुंह पर लगा दिया और कहा लो इसे अपने मुंह में लेके खूब जोर से चूसो. रमेश मेरे दूध को लेकर चूसने लगा. मै अपनी कामवासना में पागल हो रही थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था. रमेश मेरी दोनों चूंची को बारी बारी से मसल रहा था और चूस रहा था. मैं उसकी दूध चुसाई से पागल सी हो गयी और उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर ले गयी.

मेरी चूत को छूते ही रमेश ने पहले मेरी झांटों पर हाथ फिराया और अपनी बीच वाली उंगली को मेरी चूत में घुसा दिया. रमेश अब मुझ को अपनी उंगली से चोद रहा था. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, और मै अपने दोनों हाथों से रमेश का लंड पकड़ लिया और उसको मसलने लगी. रमेश के मुंह से सी ! सी ई ! की आवाज निकल रही थी. मैंने रमेश का लंड पकड़ कर उसका सुपारा निकाल लिया और उस पर एक चुम्मा जड़ दिया. रमेश अब जोर जोर से मुझे अपनी उंगली से चोद रहा था.

मैं रमेश का लंड अपने मुंह में ले के चूसने लगी और रमेश अपने लंड को मेरे मुंह में जोर जोर से ठेलने लगा. थोडी देर के बाद मुझको लगा कि रमेश अब झड़ जायगा और मैं बोली रमेश "चोद ! चोद ! अपनी दीदी के मुंह को खूब जोर जोर से चोद और अपना माल अपनी दीदी के मुंह में गिरा दे. थोडी देर के बाद रमेश बोला हई दीदी मैं झड़ रहा हूँ और उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में डाल दिया. मैंने रमेश के लंड का माल पूरा का पूरा पी लिया.

मैंने धीरे से रमेश से पूछा "अपनी दीदी को चोदेगा ? तेरे जीजा की बहुत याद आ रही है. मेरी चूत बहुत प्यासी हो रखी है. रमेश ने मेरे दोनों चूंचीयों को पकड़ कर बोला "दीदी अपनी चूत पिलाओ न. पहले दीदी की चूत चूसूंगा फिर जी भर के चोदूंगा. मैं रमेश का लंड अपने हाथों में पकड़ कर खेल रही थी और मैं कही "तेरा लंड तो बहुत विशाल है रे ". रमेश ने पूछा "आपको पसंद आया दीदी ? उसका लंड पकड़ कर मैं बोली "यह तो बहुत प्यारा है. किसी भी लड़की को चोद कर मस्त कर देगा ". मैं चित्त होकर चूतड के बल लेटी थी और अपनी टांगे फैला कर बोली "ले अपनी दीदी की चूत को प्यार कर. जी भर के पियो. पूरी रात पियो. रमेश मेरी चूत को जीभ से चाटने लगा. वो मेरी चूत को पूरी अंदर तक चाट रहा था, कभी कभी उसकी जीभ मेरी चूत के मटर -दाने को भी चाट लेता था या फिर अपने दांतों में लेकर धीरे धीरे से काट लेता था.

अपनी चूत चटाई से मैं बिल्कुल पागल हो गयी और बड़बड़ाने लगी "आ आ आह हह हह मेरे राजा भैया, बहुत मजा आ रहा है. चूसो, खूब जोर से चूसो ओ ऊ ओ ओऊ ओऊ ओह हह उ ऊह. मैं उसका सर पकड़ कर उसके मुंह में अपनी चूत को चूतड उछाल उछाल कर रगड़ रही थी. उसकी चूत चटाई से बिल्कुल पागल हो गयी और रमेश के मुंह पर ही झड़ गयी.

रमेश हमारी चूत से निकला पूरा का पूरा पानी पी गया. मैं अभी भी बडबडा रही थी, "ओह रमेश अब अपनी दीदी को चोद दे. अब नहीं रुका जा रहा. अपने लंड को मेरे चूत में घुसा दे. पेल दे अपने लंड को मेरी चूत में. प्लीज़ राजा, अब चोदो ना. रमेश मेरी टांगों के बीच आ गया और अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के मुंह पे रख कर धक्का लगाने लगा, लेकिन उसका लंड फिसल रहा था.

मैं हंस पड़ी और बोली "साले अनाड़ी बहनचोद, चोदना आता नहीं, चला है दीदी को छोड़ने बहिनचोद कहीं का"

मैने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया और बोली चल अब देर ना कर और अपनी दीदी को चोद चोद कर उसकी चूत की आग को ठंडा कर. चल मेरे भैया अब लगा धक्का, और उसके चूतड को अपने हाथ से खूब जोर से दबा दिया और अपने चूतड को उछाल कर रमेश का लंड अपनी चूत में ले लिया. रमेश का लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुस गया. मै मस्ती में आकर चिल्ला पड़ी आ आ आह ह हह ओ ओ ऊ ह हह हहा आ आ. हाय रमेश, बहुत अच्छे. पेलो मेरी चूत को, जोर से पेलो. फाड़ दो मेरी चूत रानी को, आज सालों बाद इतनी हसींन चुदाई हो रही है इस छिनाल चूत रानी की. साली को लंड लेने का बहुत शौक था. चोद दो, फाड़ दो आ अ आ आह ह हह. उ ऊ उई ईई में ई ईएर ररर ई मम म माँ आया आ यी यी ममा अर्रो ऊऊ धक् कक्क के ईई ज्जोर र से ई ई मम ममेरे ल न न ड ड वाल्ले ".

रमेश का लंड बहुत मोटा था और वो मेरी चूत को दो फांको में फाड़ रहा था. रमेश के लंड से चुदवा के मै बिल्कुल सातवें असमान पर थी. मै अपनी टांगों को उठा कर रमेश के चूतड पर लाक कर दिया और उसके कंधों को पकड़ कर उसके लण्ड के धक्कों को अपनी चूत में खाने लगी। रमेश अपने धक्कों के साथ साथ मेरी चूची को भी पी रहा था। मेरा पूरा बदन रमेश की चुदाई से जल रहा था औए मैं अपने चूतड़ उछाल उछाल कर उसका लण्ड अपनी चूत से खा रही थी।

मैं लण्ड खा कर पूरी तरह से मस्ता गई और बोली- रमेश ! आज पूरी रात तू इसी तरह मुझे चोदता जा। तू बहुत अच्छी तरह से चोद रहा है। तेरी चुदाई से मैं और मेरी चूत बहुत खुश हैं। मुझे नहीं मालूम था कि तू इतना अच्छा और मस्ती से चोदता है।

रमेश बोल रहा था कि हाय दीदी ! मैं आज पूरी रात तुमको इसी तरह चोदूंगा। तुम्हारी चूत बहुत अच्छी है, इसमें बहुत मस्ती भरी हुई है। अब यह चूत मेरी है और इसको खूब चोदूंगा। मैं मस्ती से पागल हो रही थी और मेरी चूत पानी छोड़ने वाली थी। रमेश अब जोर जोर से मेरी चूत चोद रहा था। वो अब अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल कर पूरा का पूरा मेरी चूत में जोरों से पेल रहा था। मेरी चूत अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी। मैं उसके हर धक्के का आनन्द उठा रही थी। हम दोनो अब तक पसीने से नहा गए थे।

रमेश अब अपनी पूरी ताकत के साथ मुझ्र चोद रहा था और मैं सोच रही थी कि काश आज की रात कभी खत्म ना हो। थोड़ी देर बाद रमेश चिल्लाया कि हय दीदी अब मेरा लण्ड पानी छोड़ने वाला है, अब तुम अपनी चूत से मेरे लण्ड को कस के पकड़ो। इतना कहने के बाद रमेश ने करीब दस बारह धक्के और लगाये और वो मेरी चूत के अन्दर झड़ गया और मेरी चूचियों पर मुंह रख कर सो गया।

उसके लण्ड ने बहुत सा पानी छोड़ा था और अब वो मेरी चूत से बाहर आ रहा था। मैंने रमेश को कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसका मुंह चूमने लगी और मेरी चूत ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद हम दोनो उठकर बाथरूम गए और अपनी चूत और लौड़े को साफ़ किया। रमेश का लण्ड अभी तक सख्त था। मैं उसका लण्ड हाथ में ले कर सहलाने लगी और फ़िर उसके सुपारे पर चुम्मा दे दिया। फ़िर हम दोनो नंगे ही बिस्तर पर जाकर सो गए औए एक दूसरे के लण्ड और चूत से खेलते रहे। थोड़ी देर बाद रमेश का लण्ड फ़िर से खड़ा होने लगा। उसे देख कर मैं फ़िर से मस्ती में आ गई। मैंने उसके लण्ड का सुपारा खोल दिया। उस समय उसका सुपारा बहुत फ़ूला हुआ था और चमक रहा था। मैंने झुक कर उसको अपने मुंह में ले लिया और मस्ती से चूसना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद रमेश बोला- दीदी! अब मेरा लण्ड छोड़ दो, नहीं तो मेरा पानी निकल जायेगा। मैं उससे एक बार और चुदाना चाहती थी इसलिए मैंने उसका लण्ड अपने मुंह से निकाल दिया और बोली- भाई ! अब तेरा लण्ड अच्छी तरह से खड़ा हो
गया है और मेरी चूत में घुसने को तैयार है। चल जल्दी से मेरे ऊपर आ और मेरी प्यासी चूत को अच्छी तरह से चोद दे। यह सुनते ही रमेश मेरे ऊपर आ गया और अपना पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में एक झटके में ही पेल दिया। फ़िर उसने मेरी चूत को खूब अच्छी तरह से चोदा और मैं उसकी चुदाई से निहाल हो गई। उस रात हम दोनो नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। उस दिन के बाद से मैं और रमेश जब भी घर में अकेले होते हैं तो हम कपड़े नहीं पहनते रहे और खूब जम कर चुदाई करते हैं।

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चाची की चूत

Posted: 03 Jun 2013 05:47 AM PDT



मेरे प्यारे दोस्तो, आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ, जो कि मेरी और मेरी प्यारी कान्ता चाची की है।
मेरा नाम आर्यन सिंह है, उम्र 22 साल, कद 5'10" और मैं चण्डीगढ़ का रहने वाला हूँ। मैं एक मकैनिकल इंजिनियर हूँ, मैं दिखने काफी स्मार्ट और लम्बा चौड़ा हूँ, मेरे शरीर को देख कर बहुत सी लड़कियाँ मेरे पर मरती हैं।

मेरा असली घर चण्डीगढ़ के पास ही है पर मेरा सारा परिवार अमेरिका में रहता है, इसलिये मैं चण्डीगढ़ में रहता हूँ, मैंने अपनी सारी शिक्षा चण्डीगढ़ से की और नौकरी भी यहीं करता हूँ। गाँव पास होने के कारण मैं घर हफ़्ते में 2-3 बार जाता रहता हूँ। गाँव के घर में नौकर के सिवाए कोई नहीं रहता है।

मेरी कहानी आज से सात महीने पहले की है। मेरे गांव में मेरे घर के पास एक महिला रहती है, उसका नाम कान्ता है, उसे मैं चाची कहता हूँ। चाची की उम्र करीब 32 साल है और फिगर 34-24-35 है। उनके दो लड़के हैं, दोनों चौथी-पांचवी में पढ़ते हैं। चाचा अमीर तो बहुत है पर शराबी है और चाची को काफी मारता पीटता है।

जब मैं घर जाता तो चाची के घर भी कभी-कभी जाता था और उनको देख-देख के लम्बी-लम्बी साँसें भरता था।

मेरी चाची से बहुत बनती थी, मैं उससे सारी बातें शेयर करता था और वो भी मुझे अपने घर की बातें शेयर करती, मेरे चण्डीगढ़ रहने के कारण वो मुझसे काफी सामान मंगवाती रहती थी और कभी उसे बाहर जाना हो तो मुझे कह कर मेरे साथ मेरी गाड़ी या बाईक में जाने को कहती थी। मुझे भी उसके साथ बहुत अच्छा लगता था पर मुझे ऐसा लगता था कि वो अकेलापन महसूस करती है और उसे किसी के साथ की जरुरत है।

एक दिन दोपहर को चाची का फ़ोन आया कि शाम को चण्डीगढ़ से आते हुए एक दवाई ले आना जो कि यहाँ नहीं मिल रही और दवाई लाने के लिये घर पर कोई नहीं है, वो 2-3 दिनों के लिये अकेली है, उनके घर के सारे लोग शादी में गये हैं और उन्हें दवाई की सख्त जरुरत है।

मैं दवाई लेकर शाम को घर पहुँचा तो चाची ने फोन करके पूछा- दवाई ले आये?

मैंने कहा- हाँ।

तो चाची बोली- मैं थोड़ी देर के बाद खुद ले लूंगी, किसी के हाथ मत भेजना।

मुझे पता था कि दवाई किस लिये है पर यह बात मैं कान्ता चाची के मुँह से पूछना चाहता था। यह सब सोच कर चाची को चोदने का ख्याल लेने लगा।

चाची का फोन आने पर मैं दवाई देने उनके घर पहुँचा। क्या लग रही थी कान्ता चाची !

मैंने पूछा- चाची, यह दवाई किसके लिये है, क्या आप बीमार हो?

तो चाची ने कहा- बस ऐसे ही है।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, मत बताओ, मैं अगली बार आपका सामान नहीं लाऊँगा !

तो चाची बोली- अरे, यह सिर्फ पेन किलर है।

तो मैंने कहा- आप झूठ बोल रही हो !

तो चाची मुझे टालने लगी। मैं नाराज होने का नाटक करने लगा तो चाची बोली- अरे, मैंने तुमसे कभी झूठ बोला है, यह दवाई सिर्फ औरतों के लिये होती है और यह दर्द उन्हें महीने में 4-5 दिनों के लिये होता है, यह किसी-किसी महिला को होता है।

मेरे जोर देने पर चाची ने सब बता दिया।

मैंने चाची से पूछा- यह दर्द आपको भी होता है?

तो चाची बोली- हाँ, 3-4 दिनों में होने वाला है, मेरे घर पर तो कोई भी नहीं है और दवाई के बिना मैं तो मर ही जाऊंगी।

यह सुन कर मैं चाची से लिपट गया और अपना मुँह उनके कन्धे पर रख दिया, मेरी सांसें चाची के कान से टकराने लगीं और ऐसा लगा कि मानो चाची को भी अच्छा लगा हो।

मैंने उसका सैक्स प्वाईंट जान लिया था, मैंने उसकी छाती पर हाथ रख दिया पर चाची ने मुझे एकदम दूर कर दिया।

मैं डर सा गया और सहम सा गया।

मुझे देख कर चाची मुसकुराने लगी और बोलने लगी- आर्यन सिंह ! मुझे पाना इतना आसान नहीं है।

यह सुन कर मैं एकदम चाची से लिपट गया और उसके कान को अपने होंठों से सहलाने लगा। इतने में ही चाची गर्म हो गई और मुझ से लिपट गई।

माय गॉड ! क्या नजारा था... उनके सफ़ेद स्तन जो कि पारदर्शक सूट से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे, उन्हें मैंने देख लिया और तुंरत ही मेरा लंड खड़ा हो गया।

चाची ने फिर मुझे कहा- तूने कभी मेरे बारे में सोचा है कि मैं कैसे रहती हूँ?

मैंने जवाब दिया- बहुत मुश्किल होता है ना चाचा के साथ रहना ! वह शराब पीते हैं और फिर आपसे लड़ाई करते हैं।

चाची बोली- अगर तेरे चाचा को पता चल गया तो वो मुझे मार ही देंगे।

मैंने कहा- चाची, दवाई का किसी को पता नहीं चला, वैसे ही इस बारे में किसी को पता नहीं चलेगा।

मेरे इतना कहने पर चाची मुझसे लिपटकर रोने लगी और कहने लगी- मेरा जीवन दुशवार हो गया है, तुम्हें क्या मालूम कि औरत के क्या-क्या ख्वाब होते हैं।

मैंने कहा- मुझे पता है !

और वो सुनने के बाद खुश हो गई। मैंने सारी शर्म छोड़ कर चाची के होंठों पर अपने होंठ रख दिये और जोर-जोर से चूमने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी और मैं उसके अकड़े हुए स्तनों को दबाने लगा। हम दोनों चाची के बैड पर लेट गये और बुरी तरह एक दूसरे को चूमने लगे।

इतने में चाची ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये और मैं भी चाची के कपड़े उतारने लगा।

पहले मैंने चाची की कमीज उतारी, क्या लग रही थी वो सफेद ब्रा में !

फिर मैंने उसकी पटियाला सलवार उतार दी। अब वो सिर्फ़ ब्रा और काले रंग की पैन्टी में थी।

मैंने कहा- कान्ता मेरी जान तूने तो खुद को बहुत संभाल कर रखा है।

तो चाची बोली- तेरे चाचा ने सिर्फ़ शराब और पैसों पर ध्यान दिया, मेरी कोई भी चिन्ता नहीं की।

मैंने कहा- कान्ता, मेरी जान ! आज से तू मेरी !

चाची भी बोली- आज से मैं, आर्यन, पूरी तरह तुम्हारी ! मेरे साथ जो मर्जी करो।

थोड़ी देर में मैंने उसे नंगा कर दिया !

क्या बदन था ! दूध जैसा गोरा ! उसके शरीर पर एक भी बाल नहीं था ! उसने पूरे बदन पर जैसे वैक्सिंग कर रखी थी।

उनकी चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी जांघ पर धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू कर दिया और उनके जिस्म के भी रोंगटे खड़े हो गए थे, तो मैंने भी देर ना करते हुए उसकी फुद्दी में अपनी एक उंगली डालना शुरू कर दी पर उनकी चूत बहुत ही टाईट थी जिस वजह से मैं और वो पागल हो चुके थे।

मैंने कहा- कान्ता मेरी जान !

तो वो बोली- हाँ, मेरे आर्यन जान !

मैंने कहा- मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है !

वो खुश हो गई- यार ! पहली बार कोई मेरी चूत चाटेगा ! चाट ले... जल्दी से चाट... चाट !

मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर चुचूकों को मसलते हुए उसके होटों को चूमा और बोला- अरे कान्ता जान ! इतनी भी क्या जल्दी है? पहले मैं ज़रा तुम्हें चूम तो लूँ !

उसके बाद काफ़ी देर तक मैंने उसकी चूत चाटी, फ़िर मैंने उसे बैड पर लिटा कर अपना लन्ड उनकी पहले से ही भीगी चूत के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर लन्ड को ही अन्दर किया।

कान्ता चाची ने मेरे फ़ूले हुए लन्ड को अपनी चूत में घुसते ही चीख मारी- ऊई मां ! मैं तो मर गई !

और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया !

चाची दर्द के मारे चिल्ला उठी और आह-आह-ह करने लगी।

अब चाची रोने सी लगी थी पर कहने लगी- आज आर्यन इसे फ़ाड़ दे ! फ़ाड़ आर्यन फ़ाड इसे !

उससे दर्द सहा नहीं जा रहा था, थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा।

तब चाची बोली- आह ! क्या शान्ति मिली तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर ! मेरी इच्छा थी किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई।

अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उन्होंने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद चाचा का लण्ड छोटा होगा, उन्हें कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उनकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी। मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा। चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- ऐसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गई, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चहिये एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा।

कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार स्खलित हो चुकी थी।

उस दिन मैंने तीन बार अलग अलग तरीकों से कान्ता चाची को बुरी तरह से चोदा। चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया।

इस तरह मैंने चाची की चूत की प्यास बुझाई और चाची को पूरी तरह पा लिया।

मैं कान्ता चाची को आज भी चोदता हूँ और वो भी खुशी से चुदवाती है और उसकी फुद्दी को चोद-चोद कर खुला कर दिया है।

दोस्तों कैसी लगी मेरी कहानी?

singhsexyman@gmail.com

सील तोड़ चुदाई

Posted: 31 May 2013 09:58 PM PDT


"हिंदी सेक्सी कहानियां" पर सभी को मेरा नमस्कार। यह मेरी पहली कहानी है, इसे लिखने में बहुत दिक्कतें आई, पर यह ठाना हुआ था कि कुछ भी हो "हिंदी सेक्सी कहानियां" के पाठकों के सामने अपनी यह बात रखूँगा ही। आखिर मेरी यह मेरी जिंदगी की सबसे अहम और प्यारी चुदाई की बात है। सच कहूं तो मैंने इससे पहले कुछ लड़कियों को चोदा है, पर इस चुदाई की बात ही कुछ और है।

यह करीब 5 साल पहले की बात है। मेरी भाभी के भाई की शादी थी, जिसमें पूरे परिवार को शामिल होना था। तब मेरे माँ व पिताजी तो नहीं गए,पर मेरे भाई से कहे कि जाते समय इसे भी साथ ले जाना।

इस प्रकार भाई, भाभी उनके बच्चे व मैं ट्रेन से गांव के लिए निकले। भाई की ससुराल में हमारी काफी आवभगत हुई। भाई की शादी के बाद से यह मेरा पहला प्रवास था, इसलिए मेरी काफी पूछ हुई। भाई की एक साली भी थी जो भाभी से करीब 5 साल छोटी थी। उसका नाम स्नेहा था। यह भाभी से भी ज्यादा सुंदर और चंचल थी। उसका रंग एकदम साफ था, हल्की लालिमा लिए हुए और बढ़िया हाईट, सलवार सूट में उसके औसत से बड़े स्तन और पीछे फूली हुई गाँड उसे बहुत शानदार और दर्शनीय बनाते। यही कारण था कि भाई की शादी के समय भी कई बराती उसकी झलक पाने बेताब रहे थे।भाभी बताती हैं कि स्नेहा के कारण ही उनके पिता व भाई का गाँव के आधे से भी ज्यादा लड़कों के साथ झगड़ा हो चुका है। न सिर्फ जवान बल्कि अधेड़ भी स्नेहा की झलक देखने आतुर रहते। ऐसा पता चला था कि अब परिवार में उसकी शादी के लिए भी प्रयास किए जा रहे थे।

चलिए यह तो हुई स्नेहा की बात, अब कहानी को आगे बढ़ाता हूँ।

भाई की ससुराल में मैं व भाई जब खाना खाने बैठे तब स्नेहा व भाभी ही हमें भोजन परोसने में लगे, भाभी की माँ रोटी सेंक रही थी। भाई ने स्नेहा को छेड़ा- क्या बात है स्नेहा खूब पिटाई करवा रही हो लड़कों की? अभी बीते सप्ताह ही तुम्हारे भाई मोन्टू ने बेचारे गिरीश को पीट दिया। इसके बाद कितना बवाल हुआ था गाँव में।

स्नेहा बोली- उसने हरकत ही पिटाई खाने वाली की थी, कालेज जाते समय मेरे पीछे गाड़ी टकरा दी थी। मुझे चोट लग जाती तो।

भाई ने कहा- अरे, ये सब तो चलता ही रहेगा, जब तक तेरे हाथ पीले नहीं होंगे, इन मनचलों को तू ही नजर आती रहेगी।

उन्होंने भाभी से कहा- इसकी शादी फाइनल करो जल्दी।

भाभी बोली- अपनी स्नेहा हीरा हैं, मैंने तो सोच रखा है कि इसे अपने जस्सू के लिए ही ले जाऊँगी।

मेरी ओर देख भाभी ने फिकरा कसा- क्यों जस्सू ले चलें न?

स्नेहा की ओर देखकर मैं मुस्कुराया और सिर नीचे कर लिया। पर मैंने गौर किया कि अब स्नेहा मुझे कुछ ज्यादा ही लाईन दे रही है। मैं सही कहूँ तो मन ही मन मैं स्नेहा को कई बार चोद चुका था, यहाँ तक कि मुझे हस्तमैथुन का वास्तविक आनन्द भी उसके ख्यालों में ही आता था। अब भाभी ने उससे मेरी शादी की बात छेड़कर तो जैसे मुझे जन्नत ही दिला दी।

दूसरे दिन सुबह ही इत्तेफ़ाक से स्नेहा को अपनी मौसी के यहाँ हमारे आने का समाचार देने जाना पड़ा, तब वह बोली- उतनी दूर मैं पैदल नहीं जाऊँगी मुझे मोपेड चाहिए।

उनके घर एक बाईक और एक मोपेड भी थी, स्नेहा मोपेड चला लेती थी पर उसके पिता व भाई उसे मोपेड नहीं चलाने देते थे। इस तरह भाभी के माँ-पिता की काफी देर तक दी गई समझाइश के बाद यह तय हुआ कि मोपेड मैं चलाऊँगा और स्नेहा मेरे पीछे बैठकर मौसी के घर जाएगी।

भाभी ने जैसे ही मुझसे कहा कि जस्सू तुम्हें स्नेहा को लेकर मौसीजी के यहाँ जाना है, तो यह सुनकर मेरा दिल खुशी से उछ्ल पड़ा, पर खुद को सामान्य रखने की एक्टिंग करते हुए मैंने ऐसे हामी भरी मानो मैं बहु्त आज्ञाकारी हूँ। इस तरह मुझे स्नेहा के साथ अकेले घूमने का मौका मिला।

मोपेड स्नेहा ने ही बाहर निकाली, तब मैं भी बाहर आ गया था और उसकी सहायता करने पास गया। उस समय बाहर हम दोनों ही थे। तब स्नेहा ने मुझसे धीरे से कहा- मैं गाड़ी चला लेती हूँ, पर ये लोग मुझे इसे चलाने ही नहीं देते।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, मेरे साथ चलना, मैं पीछे बैठूँगा, गाड़ी तुम ही चलाना।यह सुनकर वह खुश हो गई और भागकर अंदर तैयार होने गई। उसके बाहर आते ही हम मौसी के घर जाने को निकले। मैंने मोपेड स्टार्ट किया वैसे ही स्नेहा उछ्लकर पीछे बैठ गई। मेरे कंधे पर हाथ रखकर उसे हल्के से दबाते हुए फुसफुसाई- चलो न जल्दी।

मैंने मोपेड आगे बढ़ा दी।

बस अगले मोड़ पर ही वह मेरा कंधा दबाते हुए बोली- अब मुझे चलाने दो न।

स्नेहा का साथ पाकर मैं तो खुशी से झूम रहा था और अब मेरे दिल में वर्षों से बंद पड़ी कामनाओं ने फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया। मैंने किनारे में गाड़ी रोकी और स्नेहा से कहा- मुझे सबने तुम्हें गाड़ी चलाने देने को मना किया है, पर फिर भी मैं तुम्हें गाड़ी चलाने देता हूँ तो बदले में मुझे क्या मिलेगा?

स्नेहा सामने आ गई और मोपेड का हैंडल पकड़ते हुए बोली- आप मुझसे जो माँगेगे वह आपको दूंगी।

अब मैं मोपेड से उतरा और कहा- अच्छे से सोच लो, कहीं बाद में मुकर मत जाना।

उसने कही कि जो बोल दी हूँ वही सच है, जब चाहो आजमा लेना, और जो चाहो माँग लेना।

उसकी बात में मुझे खुला आमंत्रण मिला। वो मोपेड स्टार्ट करके मुझसे बोली- जल्दी बैठिए न।

मैं उसके पीछे बैठा अब मेरी पैन्ट की फिटिंग बिगड़ने लगी। मैं अपनी सीट से आगे बढ़ा और उससे एकदम चिपककर बैठ गया। मुझे उसकी गाँड पर अपना लंड टिकाने का अद्भुत आनन्द प्राप्त हो रहा था। खुशी के इस झोंके में मैंने अपने हाथ उसकी जांघों पर रखा और हाथ को सलवार के ही ऊपर से आगे पीछे करने लगा। मैं अब तक स्नेहा को देखकर या ख्यालों में चोदकर ही खुश होता था, पर आज उसकी जांघ में हाथ फेरकर तो मानो कोई गड़ा हुआ खजाना मुझे मिल गया। ऐसा लग रहा था मानो मेरे हाथ किसी बेहद नरम संगमरमर पर घूम रहे हों।

और मेरी इस हरकत पर उसके मौन ने मेरा उत्साह दूना कर दिया। अब मैंने आते-जाते लोगों की बुरी नजर से बचने के लिए अपने हाथों को उसकी कुरती के निचले हिस्से से अंदर कर लिया और हाथ को सरकाकर उसकी चूत के ऊपर रख दिया। अब अपने हाथ को और ऊपर करने का ख्याल भी मेरे मन में नहीं आया। अब मेरी उंगलियाँ उसकी चूत की दोनों फांकों को सहला रही थीं। इसके साथ ही मैं उसके कंधे पर अपना चेहरा लाकर उसकी कुरती में झांककर उसके स्तन को देखने का प्रयास करने लगा।

कुरती के अंदर से दूधिया रंग के स्तन को उसने सफेद रंग की ब्रा में कैद करके रखा है, इसकी हल्की सी झलक मुझे देखने मिली। नीचे मेरे हाथ काम कर रहे थे और ऊपर आँखें नयनाभिराम दृश्य को देखने में लीन थी।

तभी स्नेहा बोली- मौसीजी का घर आ गया है, आप सीधे बैठ जाईए।

मैं तुरंत अपनी सीट के आखिर में खिसका और उससे पूछा- कहाँ हैं उनका घर?

"वो इस लाईन का आखिर वाला घर मौसी का है।"

मैं बोला- गाड़ी रोको स्नेहा !

उसने मोपेड रोकी और पूछा- क्यूँ?

मैं गाड़ी से उतरा व बोला- मेरी पैन्ट की फिटिंग बिगड़ी हुई है, यदि इस हालत में मौसी के यहाँ गया तो वे लोग घर में बता देंगे कि तुम गाड़ी चलाते आई और मैं पीछे बैठकर आया हूँ।

तभी मेरी निगाह स्नेहा पर पड़ी। वह मेरे पैन्ट में छिपे लंड को देख रही थी, जो एकदम तना हुआ था और पैन्ट की जिप यानि करीब-करीब मेरी नाभि तक उठा हुआ था।

वो बोली- अरे कुछ नहीं होगा, आप वो सामने खाली जगह में चले जाइए और अपनी फिटिंग ठीक करके आ जाइए ना।

मैं बोला- नहीं, ये इतनी जल्दी ठीक नहीं होगा, ऐसे में मेरा उनके घर जाना तुम्हारे लिए भी ठीक नहीं रहेगा।

मैंने उससे कहा- तुम वहाँ जाकर यह बोल देना कि मेरा कोई दोस्त यहाँ मिल गया है, जिससे बात करने के लिए मैं रूक गया और तुम्हें भेज दिया। बस कुछ ही देर में वो पहुंचते होंगे। और मैं इसे ठीक करके जल्दी से आता हूँ।

स्नेहा बोली- ठीक है, पर जल्दी आना।

मैं उसे हाँ बोलकर खाली मैदान की ओर बढ़ा और वहाँ एक एकांत जगह में जाकर अपना लंड निकाला और मुठ मारकर माल निकाला, फिर कपड़े ठीक कर स्नेहा की मौसी के घर की ओर बढ़ चला।

हम लोग यहाँ करीब आधा घंटा रूके। यहाँ से जाते समय मौसी-मौसा हमें बाहर तक छोड़ने आए।

मोपेड की ड्राइविंग सीट मैंने संभाला, स्नेहा पीछे बैठी। मौसी के घर से आगे जैसे ही गाड़ी मुड़ी, स्नेहा बोली- अब मुझे दीजिए ना ! मैं चलाऊंगी।

मैंने मोपेड रोका और बोला- स्नेहा, एक बात बोलूँ, मानोगी?

उसने सामने आकर कहा- गाड़ी चलाने से रोकने की बात होगी तो नहीं मानूंगी, बाकी बात मानूंगी।

मैं बोला- तुम मेरी बात मान जाओगी इस आशा से बोल रहा हूँ, पर बात पसंद ना आए तो मुझे बोलना, घर में किसी से भी नहीं बोलना।

उसने हामी भरी और मैं बोला- आते समय जब मैं तुम्हारे पीछे बैठा था, तब तुमने देखा था कि मेरा नूनू कैसा तन गया था।

वो नादान बनते हुए बोली- यह क्या होता है?

मैं बोला- अरे वही जिसने मेरी फिटिंग बिगाड़ दिया था।

वो बोली- वो क्यूं तन गया था?

मैं बोला- वो तुम्हारी पुसी मांग रहा है।

वो बोली- तो?

मैं बोला- मैं समझता हूँ कि शादी से पहले लड़की अपनी पुसी नहीं देती, सो मैं तुमसे पुसी मांगूंगा नहीं, पर रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे एक बार अपनी पुसी को प्यार करने दो।

मैंने उसके चेहरे पर उत्तेजना की चमक देखी तो खुश हुआ और बोला- मेरा यह काम यदि तुमने आज कर दिया तो मैं तुम्हारा यह एहसान कभी भू्लूंगा नहीं।

स्नेहा ने मेरी इस बात के बाद मुझसे कई सवाल किए, पर आखरी में यह तय हुआ कि हम लोग रात में सबके सोने के बाद ऊपर छत पर मिलेंगे। मैं गाड़ी का हैंडल स्नेहा को देने के बाद उसके पीछे बैठ गया। अब मेरा हाथ उसकी चूत के ऊपर घूमने लगा।

स्नेहा बोली- अभी ऐसा मत करिए, नहीं तो घर पहुंचते तक फिर आपकी फिटिंग बिगड़ जाएगी और सब शक करेंगे।

मैंने कहा- खाली इसलिए ही हाथ हटाऊं या और कोई बात हैं?

स्नेहा बोली- आपके ऐसा करने से मेरी पुसी भी गीली हो गई है। अब मत करिए ना, रात में तो अपन मिल ही रहें हैं, तब कर लीजिएगा।

अब मुझे लग रहा था कि आग स्नेहा में भी लगी है और उसे भी आज रात का ही इंतजार है, मैं बोला- ठीक है।

घर के पास से मैंने मोपेड ले लिया और स्नेहा पीछे बैठ गई।

घर पहुँचने के बाद स्नेहा की मां ने पूछा- इसने गाड़ी चलाने के लिए आपको परेशान तो नहीं किया ना?

मैं बोला- नहीं !

और अंदर आ गया। सामने ही भाभी मिल गई, उन्होंने पूछा- जस्सूजी, स्नेहा ने गांव की सभी अच्छी जगह भी दिखा दी ना?

मैंने कहा- नहीं, अच्छी चीज बाद में दिखाऊँगी, ऐसा बोली है।

भाभी ने हंसते हुए स्नेहा से कहा- अरे जब अभी साथ निकली थीं, तो अभी ही दिखा देना था ना अब बाद में फिर कब साथ में घूमना हो।

इसी तरह की बातें चलती रही। मुझे रात का ही इंतजार था, मैंने तय कर लिया था कि चाहे जो हो मैं इसे आज रात को चोदूँगा ही।

खैर रोज के सभी काम निपटने के बाद मैं अपने कमरे में बिस्तर पर यूं ही लेटा हुआ था, रात को करीब 11:30 पर अचानक मेरे कमरे की खिड़की पर थपकी पड़ी और सीढ़ी से किसी के छत पर जाने की आवाज सुनाई दी।

मैं भी जल्दी-जल्दी ऊपर बढ़ा। ऊपर स्नेहा ही आई थी। उसने गाउन पहना हुआ था। हम दोनों कमरे में पहुँचे, वह बोली- लीजिए, मैं आ गई हूँ, जो करना हैं जल्दी कीजिए।

मैं बोला- हाँ जल्दी ही करते हैं।

कहते हुए मैंने उसके स्तन दबाना शु्रू कर दिया। फिर उसके होठों से चिपक कर लंबा चुम्बन लिया। अपने हाथ उसके गाउन के अंदर कर यह पता लगा लिया था कि उसने ब्रा व पैन्टी पहनी हुई हैं, सो गाउन को खोल दिया। गाउन उतारते समय उसने एतराज किया, पर बाद में मान गई।

अब उसने कहा- आपका नूनू तो अब शांत हैं ना।

मैं बोला- यह पुसी की किस्सी लिए बिना नहीं मानेगा।

उसने कहा- अच्छा? दिखाओ तो इसे?

मैंने कहा- लो देख लो।

वह मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लौड़े को पकड़ने का प्रयास करने लगी, तभी मैंने अपनी टी-शर्ट, पजामे और अंडरवियर को उतार दिया, अब उससे चिपककर मैंने ब्रा का हुक खोला और एक निप्पल को मुँह व दूसरे को उंगलियों से सहलाता रहा। उसके मुँह से अब बेहद मदहोश आवाजें भी निकल रही थी।

मैंने अब उसकी पैन्टी को खींचकर नीचे सरका दिया। हम दोनों अब एकदम नंगे थे।

स्नेहा की चूत पर छोटे-छोटे बाल थे, मैंने कहा- शेव नहीं की क्या?

उसने कहा- नहीं, इस हफ्ते नहीं कर पाई।

मैं उसे पलंग पर लाया और लिटा दिया। अब मैंने उसकी नाभि में जीभ डालकर हिलाया फिर नाभि से होकर जीभ को उसकी चूत में ले गया। अब उसकी कमर उछलने लगी और मैं भी उसकी चूत के छेद में जीभ डालकर आगे-पीछे करने लगा। उसकी सनसनाती आवाज मुझमें और शक्ति भर रही थी।उसकी चूत को चाटते हुए ही मैं उल्टा घूम गया, और अपने लौड़े को उसके मुँह के पास कर दिया। थोड़ी देर बाद उसने मेरे लंड को पहले छुआ, फिर जीभ लगाई पर बाद में लंड को उसने अपने मुँह के अंदर ले लिया और चूसने लगी। यानि अब हम लोग 69 की स्टाईल में पहुंच गए थे।

थोड़ी देर बाद मैं सीधा हुआ और पूछा- ठीक लगा?

उसने हाँ में मुंडी हिलाई और मेरे लंड को फिर मुंह में ले लिया।

मैंने कहा- अब असली मजा लो।

और उसकी दोनों टांगों को फैला दिया। अब उसकी चूत पर अपना लंड रखकर जैसे ही अंदर की ओर धक्का दिया, वह जोर से चीखी, मुझे लगा कि अब इसकी सील टूटी है।उसकी चीख को दबाने के लिए मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह लगा दिया, पर लंड की स्पीड को कम नहीं किया। थोड़ी देर बाद ही उसकी चीख और लंड के चूत में घुसने की वजह से आती कराह की जगह अब उसके मुँह से चुदाई के आनन्द की सिसकारियाँ निकल रही थी। कुछ देर बाद ही उसकी गति में और भी ज्यादा तेजी आई व बड़बड़ाने लगी- साले, फाड़ दे चूत को। बहुत परेशान करके रखा है इसने मुझे, फाड़ दे साली को और ए ए ए मैं गई।

यह बोलकर वो झड़ गई।

इसके थोड़ी देर बाद ही मैं भी खल्लास हो गया।

दोस्तो, आज आपको सही बताऊँगा कि स्नेहा कि सील तोड़ चुदाई में मेरा 3 बार गिरा पर उसे चोदने की खुशी और उसे सैक्स का पूरा आनन्द देने की चाह में मैंने उसके झड़ते तक चुदाई को उसी क्रम में जारी रखा, ताकि स्नेहा को मेरे ढीले पड़ने का अहसास न हो।

हमारी मौज मस्ती की खबर घर में किसी को नहीं लगी।

अगले ही साल स्नेहा से मेरी शादी हो गई। हम आज भी कई बार चुदाई करते समय उस पहले मजे को ही याद करते हैं।

स्नेहा अब भी कहती है- उस दिन जैसा ही करो ना।

खैर ये तो हुई शादी से पहले की चुदाई की बात। शादी के बाद सुहागरात हमने कैसे मनाई, इसे अगली बार पर जल्द ही बताऊंगा। तब तक के लिए विदा।

मेरी यह आत्मस्वीकरोक्ति आपको कहानी के रूप में कैसी लगी, कृपया मुझे बताएँ।

jawaherjain@yahoo.com

सिर्फ़ देखोगे या कुछ करोगे भी?

Posted: 31 May 2013 10:06 AM PDT



मैं राज मोतिहारी शहर में रहता हूँ, उम्र 18 साल और मैं एक काल-बाय बनना चाहता हूँ।

जब मेरे दोस्त ने "हिंदी सेक्सी कहानियां" के बारे में बताया तो मैंने यह साईट खोली यह मुझे बहुत अच्छी लगी, मैंने सोचा कि क्या सचमुच में ऐसा होता है।

तो अब सब कुछ छोड़ कर कहानी पर आते हैं।

तब मैं ईंटर सेकेंड ईयर में था, मेरे पड़ोस में एक परिवार रहने आया था, उस परिवार में एक आदमी जो मेरे भैया जैसे थे और उनकी पत्नी अर्थात मेरी भाभी और भाभी का भाई और उनके दो छोटे छोटे बच्चे।

एक दिन मैंने देखा कि भाभी मुझे घूर रही थी। मैंने उनको देखा और अपने कमरे में आ गया। हम दोनों के घर आमने सामने ही थे, मैं उन्हें रोज इसी तरह देखता रहा, कई बार उनके नाम की मुठ मारी, तब मैं "हिंदी सेक्सी कहानियां" की कहानी पढ़कर बहुत कुछ जान गया था तो मैंने सोचा इस तरह रहने से कुछ नहीं होगा पहले उसके भाई को पटाया जाए, उसके बाद उसको देखा जाएगा।

तो मैंने उसके भाई से बात की। उसका नाम था राकेश, मुझसे दो साल छोटा था, मैं उसके साथ किक्रेट, बैडमिंटन खेलता था।

एक दिन की बात है, मैं उसके घर खेलने गया। मैंने काल बेल बजाई तो भाभी ने दरवाजा खोला।

मैंने पूछा- राकेश कहाँ है?

तो उन्होंने कहा- वह घर गया है, तीन दिन बाद आयेगा।

इतना सुनने के बाद मैं पीछे मुर कर चलने को हुआ।

तो उन्होंने कहा- चाय तो पीते जाओ।

तो मैंने कहा- नहीं, ठीक है।

उनके बार बार आग्रह से मैं रूक गया। उन्होंने पीले रंग की साड़ी पहन रखी थी और वो बहुत सेक्सी लग रही थी। इतने में वो चाय लेकर आ गई तो मैंने पूछा- भैया कहाँ हैं?

तो उन्होंने कहा- वो दिल्ली में किसी फैक्ट्री में काम करते हैं।

मैंने उनका नाम पूछा तो उन्होंने कामिनी बताया, फिर उन्होंने मेरा पूछा, मैंने राज बताया।

फिर कुछ देर तक शाँति रही। उन्होंने मेरे कालेज के बारे में पूछा और मैं क्या करता हूँ, बहुत सारे सवाल पूछे, मैं सब बताता गया।

तब मैं चलने को हुआ तो उन्होंने कहा- कल फिर आ जाना, मैं अकेली बोर हो जाती हूँ।

तो मैं अगले दिन उनके घर गया। वो उस समय नहाने जा रही थी। उन्होंने मुझे बिठाकर कहा- तुम यहीं बैठो, मैं नहाकर आती हूँ।

वो नहाने चली गई। मैं उनके बाथरूम के गेट के छेद से उनका नहाना देखने लगा। मेरा लँड चार इँच से छः इँच का हो गया।

क्या मस्त चूचियाँ थी दोस्तो ! मैं साईज वाईज के बारे में नहीं जानता इसलिए नहीं बता पाऊँगा कि उनका साईज क्या था।

तभी उन्हें शक हो गया कि मैं उन्हें देख रहा हूँ। मैं चुपचाप आकर बैठ गया।

जब वो नहाकर निकली तो क्या मस्त लग रही थी वो, गुलाबी साड़ी में गजब ढा रही थी।

मेरा मन हुआ कि अभी पेल दूँ लेकिन मजबूर था।

वो आकर मेरे पास बैठ गई। तभी उनका बच्चा रोने लगा वो उसे उठा कर ले आई और दूध पिलाने लगी। उनकी चूची को देखकर मेरा लँड उफान मारने लगा।

तभी उन्होंने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो? कभी देखा नहीं क्या?

उन्होंने गुस्से में कहा था तो मैं थोड़ा डर गया था। तभी मैंने देखा कि बच्चा सोने लगा है। वो उठकर बेडरुम में चली गई इधर मैं भी भागने के फेर में था। मैं गेट तक पहुँचा ही था कि पीछे से आवाज आई- कहाँ चल दिए?

तो मैंने कहा- मैं घर जा रहा हूँ।

तो उन्होंने कहा- थोड़ी देर और रुक जाओ।

मेरा तो डर के मारे बहुत बुरा हाल था, मैं चुपचाप जाकर बैठ गया।

तो उन्होंने कहा- क्या देख रहे थे राज?

तो मैंने कहा- वो तो मैं आपके बेटे को देख रहा था, बिल्कुल आपकी तरह है।

उन्होंने कहा- बेटे को देख रहे थे या कुछ और ही?

मैं खामोश रहा।

तभी उन्होंने दूसरा तीर छोड़ा- और जब मैं नहा रही थी तब तुम छेद से क्या देख रहे थे?

तब मैंने कहा- भाभी, मुझे माफ कर दो, मैं ऐसा कभी नहीं करुँगा।

तो उन्होंने कहा- सिर्फ़ देखोगे या कुछ करोगे भी?

वो एकदम से आकर मेरे पास बैठ गई और मेरे लँड को अपने कब्जे में कर लिया।

मैं उनका खुला निमंत्रण पाकर फूला न समाया। आज पहली बार मुझे बुर मिलने वाली थी।

मैं उनके उभारों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा और धीरे धीरे उसे खोल भी दिया और ब्रा भी हटा दी और उनकी चूची चूसने लगा।

इतनी देर में उन्होंने मेरी पैंट भी खोल दी और मेरा लण्ड सहलाने लगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

उसके बाद मैं उन्हें बेडरूम में ले गया और दोनों ही नँगे हो गये। मैंने उनके सोये हुए बेटे को एक तरफ सरका कर उनकी खूब पेलाई की, उस टाईम तीन बार अलग-अलग तरीके से उनकी बुर मारी। उसके बाद हमे जब भी मौका मिलता, हम एक दूसरे पर हावी हो जाते।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी, मुझे अपने विचार जरूर भेजें !

मेरा ईमेल आईडी है- abhigyanraj064@gmail.com

खुला खेल फरक्काबादी

Posted: 31 May 2013 08:06 AM PDT



बात करीब तीन से चार महीने पहले की है। मेरे घर के बगल वाले घर में एक महिला कल्याण का कार्यालय खुला है। उसमें 3 परिवार रहते हैं, 2 परिवार नीचे और एक ऊपर। बात यूँ हुई कि उस दिन दोपहर को मेरी गर्लफ्रेंड का फ़ोन आया और मैं छत पर टहल कर बात करने लगा।

बातों-बातों में उसने मुझसे पूछा- क्या कर रहे हो?

तो मैंने कहा- नहाने जा रहा हूँ।

वासना की खुमारी में वो मुझसे सेक्सी बातें करने लगी, तब उसका फ़ोन कट गया और मैं जोश में यह सोच कर नीचे आया कि मूठ मारूँगा और फिर नहाऊँगा। मगर जब मैंने कपड़े उतारे तो देखा कि मेरी झांटें काफी बड़ी हो गई हैं तो मैंने सोचा कि पहले इसे बना लूं फिर मूठ मारूँगा।

मैं जैसे ही रेज़र उठाने के लिए नीचे झुका तो मेरी निगाह बाहर की तरफ गई। क्योंकि घर में कोई था नहीं, तो मैंने बाथरूम का दरवाज़ा नहीं बंद किया था। मैंने देखा कि ऊपर वाले माले पहने वाली एक औरत मुझे झाँक रही थी। देखने में थोड़ी साँवली थी, मगर फिगर मस्त थी, बड़ी गांड, मस्त चूची फिगर 30-34-32 तो मेरे बदन में अजब सी गुदगुदी दौड़ गई।

फिर मैं पूरा नंगा हुआ और धीरे धीरे अपनी झांटें बनाने लगा और बीच बीच में झांक भी लेता था।

वो औरत मुझे चुपके चुपके देख रही थी। फिर मैंने देखा कि वो अपनी चूची एक हाथ से दबाने लगी, कुछ देर बाद वो अपनी चूत सहलाने लगी और फिर चली गई।

मैंने भी अपना काम ख़त्म किया और नहा कर बाहर आ गया।

फिर अगले दिन मैं अपने एक दोस्त से बात करते हुए छत पर गया तो देखा वो बैठी थी और फिर जब भी वो देखती तो अजीब कातिल अदा से मुस्कुराती।

फिर दो दिन बाद मैं फिर से छत पर गया तो वो किसी रिश्तेदार से बातें कर रही थी और फिर फ़ोन पर बोली कि लोग बिना कपड़ों के ज्यादा अच्छे लगते हैं।

और जब मैंने उसे देखा तो हँसने लगी।

करीब 3-4 दिन बाद मेरे घर में फिर कोई नहीं था तो मैं ऐसे ही छत पर गया, देखा कि वो बैठी है तो नीचे आ कर नहाने के लिए जाने लगा।

इतने में बाथरूम की खिड़की से देखता हूँ कि वो मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई है।

मैंने आराम से कपड़े उतारे, काफी देर तक मूठ मारी, इतनी देर में उसकी पलक एक बार भी नहीं झपकी। थोड़ी देर बाद जब मैं मोबाइल पर बात करता हुआ छत पर गया तो वो मुस्कुराती हुई बोली- ऐसे करते रहेंगे तो हाथ में दर्द हो जाएगा, कभी हमारे होंठों को भी आइसक्रीम खिलाइए !

और मुस्कुराते हुए अन्दर चली गई।

फिर अगले दिन मैं जब ऊपर गया तो मैंने उससे पूछा- आप कल क्या कह रही थीं?

तो उसने कहा- रात में घर पर आइये, सब समझा दूँगी।

मेरे तो मन में लड्डू फूटने लगे, लेकिन मैंने ऊपर से कहा- रात में आपके पति नहीं रहेंगे क्या?

उसने कहा- नहीं, वो गाँव गए हैं, दो दिन बाद आयेंगे।

फिर मैं करीब सात बजे छत पर गया। हमारी छत मिली हुई है बस बीच में एक दीवार है, मैं उसे कूद गया। सामने जन्नत की हूर सी खड़ी थी वो !

उसने मुझे वो जगह दिखाई जहाँ से उसे मेरा सब कुछ दिखता था जैसे कि मुझे पता ही नहीं था, लेकिन कुछ राजों को राज ही रहने देते हैं।

अगला सवाल जैसे ही उसने पूछा, मुझे लग गया कि आज तो आग दोनों तरफ लगी है प्यारे।

उसने सीधे पूछा- कितने दिनों पर साफ़ होता है आपका जंगल? दूर से तो बस यही लगता है कि झाड़ियों के बीच कोई छोटी सी टहनी है, जरा हमें नजदीक से तो दिखाइए आपके पास क्या है, नारियल का पेड़, या केले का तना, या दोनों।

मैंने कहा- देख लो लेकिन हमें भी तो अपने अंगूरों के दर्शन कराओ।

उसने ऊपर वाले मन से कहा- कोई आ जायेगा !

तो मैंने कहा- खुले दरवाजे से आएगा न, दरवाजा बंद करके आ जाओ।

जब दरवाजा बंद कर के लौटी तो बोली- यहाँ तो सोनू (उसका लड़का) सो रहा है कहीं हमारी कुश्ती से उठ न जाये।

मैंने कहा- ठीक है आओ छत पर चलते हैं, वहाँ बैटिंग करने में कोई असुविधा नहीं होगी।

हम ऊपर गए और फिर कुछ देर खड़े रहे, दोनों यही सोच रहे थे कि पहल कौन करेगा, लेकिन, भला नारी के सामने कौन पुरुष जीता है? उसने सीधा पूछा- अगर खड़े होने के लिए आये हैं तो आइये नीचे चलते हैं, हाँ अगर चादर बिछाने का काम शुरू करना है तो अब तक खड़े क्यों हैं?

मैं तो दंग रह गया, लेकिन अब तो खुला खेल फरक्काबादी।

मैंने उसके मोम्मों को धीरे धीरे मसलते हुए, उसके मक्खन जैसे होठों का रस पीना शुरू किया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी और उसके मोम्मे धीरे धीरे सख्त होकर जैसे मेरी छाती में छेद करने लगे। नीचे मेरा पप्पू भी ऊपर उड़ने को तैयार हो रहा था, उसे जैसे ही लगा कि ये लोहा अब तैयार होना चाहिए, लोअर के ऊपर से उसने मेरे लंड से खेलना चालू किया।

मैं धीरे धीरे उसके होठों को किस करने लगा और फिर उसकी गर्दन पर भी चुम्मों की बौछार कर दी, साथ के साथ उसकी पीठ सहलाने लगा।

फिर मैंने उसकी नाईटी उतारने को कहा तो उसने उतार दी और सिर्फ पैंटी में आ गई। मैंने फिर उसकी पैंटी के ऊपर से ही सहलाना शुरू किया और वो पागल हुई जा रही थी और मेरा लंड सहलाये जा रही थी।

उसकी पैंटी गीली होने लगी तो मैं जहाँ पैंटी की एलास्टिक होती है उसे नीचे करके सहलाने लगा उसे मज़ा भी आ रहा था और गुदगुदी भी हो रही थी। फिर मैं उसे सहलाता रहा और अपना हाथ धीरे धीरे पैंटी में ले जाने लगा।

उसने झांटे एकदम साफ़ कर रखी थीं।

मैं उसकी चूत सहलाने लगा, तो वो सिहर गई, मैंने उससे कहा- सब मैं ही करूँगा या तुम भी कुछ?

तो उसने मुझे किस किया, मेरे होंठ चूसने लगी और फिर उसने अपना हाथ मेरे लोअर में डाल दिया और बोली- हे भगवान् ! इतना मोटा?!? मेरा क्या होगा?

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा, बस मज़ा आएगा !

फिर उसने मेरा लोअर उतार दिया और आगे पीछे करके खेलने लगी मेरे लंड से, मुझसे बोली- क्या मैं इसे किस कर सकती हूँ?

मैंने कहा- तुम्हारा है, जो करना है करो !

पहले उसने किस किया, 2-3 बार फिर मेरा टोपा अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

मैं अपने पैर के अंगूठे से उसकी चूत सहला रहा था और हाथ से चूची।

फिर वो तेज़ तेज़ से मेरा लंड चूसने लगी। फिर मैंने उसकी नाइटी बिछाई और उसे लिटा दिया, फिर उसकी पैंटी उतार कर उसकी पूरी काया पर चुम्बन करने और चाटने लगा।

वो उत्तेजना से पागल हुई जा रही थी। फिर मैंने उसकी चूत पर चूमा तो वो सिहर उठी।

फिर मैं उसकी चूत चाटने लगा और एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था। हम 69 की पोज़ीशन में आ गए। करीब पाँच मिनट बाद वो झड़ने लगी और थोड़ी देर में मैं भी उसके मुँह में झर गया।

वो मेरे लंड के साथ फिर से खेलने लगी और करीब दस मिनट बाद मेरा सोया साँप फिर से खड़ा हुआ। इस बार मैं लंड को उसकी टाँगों पर रगड़ने लगा। वो एक हाथ से मेरे लंड को सहला रही थी और और मैं उसकी चूची को और हम एक दूसरे को लिप किस कर रहे थे। वो बार बार मेरा लंड अपनी चूत में घुसाने के लिए खींच रही थी।

फिर बोली- अब और कितना इंतज़ार करवाओगे?

मैं उठा और उससे पैर फैलाने को कहा।

फिर मैंने उसकी चूत पर लंड रख कर एक झटका मारा तो उसकी चीख निकल गई। मैंने जल्दी से लंड बाहर निकला तो वो बोली- नहीं ! डालो, मगर आराम से !

मैं धीरे धीरे डालने लगा और पूरा लंड आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत में उतार दिया। वो सी सी करने लगी फिर मैं धक्के लगाने लगा। कभी मैं उसकी चूची सहलाता तो कभी उसका पेट। वो भी पूरे जोश में मेरा साथ दे रही थी और एक हाथ से मेरे गोटे से खेल रही थी।

फिर करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई और मैं भी जल्दी झड़ गया। वो मेरे साथ करीब आधे घंटे तक ऐसे ही लेटी रही और मेरे लंड से खेलती रही।

तब से जब भी वो अकेली होती है तो हमारा प्रोग्राम शुरू हो जाता है।

पढ़ते रहिए हिंदी सेक्सी कहानियां।

बताइएगा ज़रूर कि आपको यह कहानी कैसी लगी।

arshad6inches@yahoo.com




 

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