हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


मना किया था, गांड में नहीं

Posted: 05 Jun 2013 12:44 AM PDT



एक दिन की बात है, मैं अपने दोस्त के घर गया हुआ था, वो घर पर नहीं था, यह बात मुझे नहीं पता थी। मैं गया तो उसके घर का दरवाजा खुला हुआ था, तो मैं ऐसे ही उसके घर में घुस गया, मेरा समय अपने घर कम और उसके घर में ज्यादा बीतता था तो उसके घर आना जाना रहता था।

तो हुआ यों कि मैं उसके घर में घुस गया और सीधे उसके कमरे में जाने लगा तो उसके बगल वाले कमरे से मुझे छन छन की आवाज़ आ रही थी जैसे कोई पायल या फिर कोई चूड़ी खनका रहा हो।मैं वापिस पीछे को आया और खिड़की के पास रुक गया और सुनने लगा, मुझे अंदर की आवाज़ ठीक से सुनाई तो नहीं दे रही थी पर इतना दिमाग था कि पहचान सकूँ कि यह किस किस्म की आवाज़ है।

थोड़ा ध्यान दिया आवाज़ की तरफ तो मेरा लंड एकदम से तन गया, अंदर से पेला-पेली की आवाज़ आ रही थी। मैंने बहुत कोशिश की अंदर झांकने की कि कौन है, क्योंकि इससे पहले भी मेरा दोस्त अपने घर में लड़की लाकर खा चुका था, अगर मेरा दोस्त होता तो मुझे भी मौका मिल जाता पर असल में है कौन, वो देखना था मुझे।

मैंने बहुत कोशिश की और अंत में कामयाबी मिली तो देखा कि मेरे दोस्त के मॉम-डैड थे, मुझे थोड़ा अजीब लगा पर यह सब चलता रहता है। मैंने देखा कि अंकल आंटी की टांगों को उठा कर अपने कंधे पर रख कर उनकी ठुकाई कर रहे थे।

मैं कुछ देर वहीं खड़ा रहा और देखता रहा, दस मिनट की चुदाई देख ली, मैंने उसके बाद जो हुआ तब मेरी फट गई।

हुआ ये कि हवा काएक तेज झोंका आया और खिड़की का अंदर का पर्दा उड़ गया और आंटी ने मुझे देख लिया कि मैं देख रहा हूँ, पर मुझे झटका तब लगा जब आंटी ने मुझे देख कर भी अनदेखा किया और अंकल से चुदवाती रही।

अब मुझे लगा कि मेरा वहाँ खड़े रहना खतरे से खाली नहीं है और मैं वहाँ से नौ दो गयारह हो लिया।

अगले दिन मैं फिर से उनके घर गया, पर मुझे बहुत शर्म सी आ रही थी। इस बार मैंने उनके घर की घंटी बजाई और फिर अंदर गया जब मेरे दोस्त ने दरवाजा खोला।

मैं अंदर गया तो उसने मुझसे पूछा- आज क्या हुआ तुझे, आज तूने घंटी बजाई? तू ठीक तो है ना? आज तुझे घंटी बजाने की क्या जरुरत पड़ गई। तब उसकी माँ वहीं बगल से निकल कर गई और मुझे तिरछी नजर से देखा।

मैं क्या बोलता उसे, मैंने बोला- अरे घंटी बजानी चहिये, इसे तमीज़ कहते हैं।

वो बोला- आज तुझे पक्का कुछ हुआ है, चल कोई बात नहीं आ चल कमरे में।

मैं उसके साथ बैठ गया और उसके कंप्यूटर में गेम खेलने लगा, कुछ देर के बाद वो बोला- तू खेल, मैं नहा कर आता हूँ !

और फिर वो नहाने चला गया।

मैं खेलता रहा तब तक उसकी मॉम भी उसी कमरे में आ गई और मुझे पानी दिया पीने को।

मैंने पानी लिया और पीकर गिलास वहीं बाजू में रख दिया। आंटी अब भी वहीं खड़ी थी और जब गिलास उठाने के लिए झुकी तो अपनी चुन्नी गिरा दी और मुझे अपने चुच्चों के दर्शन करा दिए।

मेरी फिर से सूख गई कि यह हो क्या रहा है आजकल।

अब आंटी मुझे देखने लगी और पूछने लगी- क्या देख रहे हो?

मैं क्या जवाब देता, मैं बोला- कुछ नहीं ! गलती से दिख गया।

फिर आंटी बोली- आज गलती से दिख गया और कल जो देखा वो भी क्या गलती थी?

मैंने उन्हें सोरी बोला और फिर आँखें नीची करके चुप बैठा रहा।

वो बोली- कोई बात नहीं पर अगली बार से ऐसा मत करना, अच्छी बात नहीं होती यह सब।

कुछ देर के बाद आंटी फिर से कमरे में आई और मुझे बोली- कल जो देखा और आज जो देखा किसी को बताना मत।

मैंने कहा- जी मैं ये सब बातें नहीं करता किसी से !

फिर आंटी चली गयी। मैं फिर थोड़ी देर के बाद अपने घर चला गया आंटी को बोल कर। घर जाकर मुझे याद आया कि मैं उनके घर में अपना घड़ी भूल गया।

शाम को मैं फिर उनके घर गया और आंटी से दोस्त के लिए पूछा तो वो बोली- वो दोपहर से कहीं गया हुआ है।

मैंने कहा- ठीक है।

फिर मैंने आंटी को बोला कि मैं अपनी घड़ी उसके कमरे में भूल गया हूँ।

आंटी बोली- रुको, मैं लाकर देती हूँ।

आंटी फिर आई और बोली- तुम ही देख लो, मुझे नहीं मिल रही है।

मैं फिर उसके कमरे में गया, देखा कि मेरी घड़ी तो वहीं सामने रखी हुई है, मैंने घड़ी ली और आंटी के कमरे में यह बोलने के लिए गया कि मैंने घड़ी ले ली है, मैं जा रहा हूँ।

पर जब में उनके कमरे में गया तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। मैंने देखा कि आंटी ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी है और मेरी तरफ ही देख रही हैं जैसे उन्हें मेरा ही इंतज़ार था कि मैं आऊंगा और उन्हें इस हाल में देखूंगा।

मैंने उन्हें देख कर बोला- आंटी, यह क्या? अभी तो आप साड़ी में थी और यह अचानक?

आंटी बोली- तुम्हारे लिए उतार दी।

मैं बोला- आंटी, मैं आपका मतलब नहीं समझा।

वो बोली- इतने भोले मत बनो, आओ मेरे पास आओ, और कल तुमने क्या क्या सीखा मुझे बताओ।

मैं आंटी की तरफ बढ़ा और आंटी से चिपक गया। फिर आंटी ने भी मुझे कस कर गले लगा लिया और मुझे चूमने लगी।

मैंने भी मौके को गंवाया नहीं और उनके होठों को चूसने लग गया।

मैं पहली बार किसी आंटी को चूम रहा था और मुझे आंटी को चूमने में काफी मज़ा आ रहा था। उनके होंठ एकदम किसी जवान लड़की की तरह थे, एकदम वही मज़ा मिल रहा था मुझे।

अब आंटी ने मुझे बिस्तर पे बिठा दिया और मेरे सामने घुटने के बल बैठ गई और मेरी पैंट की ज़िप खोलने लगी। मैं खड़ा हुआ और जल्दी से ज़िप खोल कर उनके सामने मैंने अपना लंड लटका दिया।

आँटी बोली- काफी अच्छा है तुम्हारा लंड !

और फिर उसे पकड़ कर दबाने लग गई। उनके दबाने से तो मेरे अंग अंग में करंट सा दौड़ पड़ा, अब कुछ देर के बाद उन्होंने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और उसे कस कस कर चूसने लगी।

वो एकदम उनकी तरह चूस रही थी जैसे ब्लू फिल्म में चूसते हैं, एकदम सर को आगे पीछे कर कर के चूस रही थी।

मैं बिस्तर पर लेट गया और वो मेरा लंड चूसती रही, कुछ देर के चूसने के बाद उन्होंने मेरी पैंट और फिर शर्ट दोनों उतार दी और मेरे पूरे जिस्म को चूमने लगी, फिर एक हाथ से मेरे लंड को दबाए जा रही थी।

कुछ देर के बाद मैंने उन्हें लेटा दिया और उनके चुचों को ब्लाउज़ के ऊपर से ही काटने लगा। थोड़ी देर काटने के बाद उन्होंने खुद अपनी ब्लाउज़ उतार दी और फिर मुझे चूसने को कहा।

मैं उनके एक चुच्चे को चूसता तो दूसरे को मसलता रहता। दस मिनट तक मैं उनकी चूचियों को गर्म करता रहा और वो दस मिनट तक सिसकारियाँ भरती रही।

मैं अब उठा और उनके पेटीकोट के अंदर सर डाल दिया और उनकी पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को हल्के हल्के काटने लग गया। उनकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी और उसमें से महक आ रही थी जैसे चूत में से आती है।

मैं उनकी पेटीकोट के अंदर ही पगला गया और उनकी पेंटी की बगल में से उनकी चूत में उंगली करने लगा।

पाँच मिनट के बाद मैंने अपना सर बाहर निकाला और उनकी पेटीकोट के साथ साथ उनकी पेंटी भी उतार दी। अब आंटी मेरे सामने पूरी नंगी थी, उनकी चूत पर काफी बाल थे, पर मुझे उससे कुछ फर्क नहीं पड़ा।

मैं दोबारा उनके चुचों पर टूट पड़ा और उन्हें कस कस कर चूसने लगा। वो अब सिसकारियों पे सिसकारियाँ भरने लगी- ओह ह्मम्म क्या मज़ा आ रहा है और जोर से चूसो इसे, खा जा इसे ऊह ओऊ हम्म्म येह्ह्ह्ह किये जा रही थी।

मैं उन्हें चूमते चूमते उनकी चूत की तरफ आ गया, और फिर उनके चूत के बालों को एक तरफ किया और उनकी चूत में जीभ रगड़ने लग गया। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रखा और मुझे अपनी चूत पर कस के दबा लिया, मैं उनकी चूत को और कस के रगड़ने लगा, मैं बीच बीच में उनकी चूत की पंखुड़ियों को अपने होठों से काटने लगा और उनकी चूत की छेद को में अपने जीभ से धकेल भी देता बीच बीच में।

जितने बार उनकी छेद में जीभ से धक्का देता उतनी बार वो सिकुड़ जाती और उफ्फ्फ्फ्फ़ आह करने लग जाती।

अब वो बोली- और कब तक से चूसेगा, जल्दी से अपना प्यारा लंड डाल दे, मैं और नहीं रुक सकती, जल्दी कर।

मैं उठा और उनकी चूत पर लंड सटा दिया और धक्का दिया, पहले जब लंड घुसा तब वो हल्का सा चीखी और फिर शांत हो गई। मैंने धक्का देना शुरु कर दिया और कुछ 8-10 धक्कों के बाद वो भी अपना गांड उठा उठा कर मुझे अपनी चूत देने लगी। उन्होंने मुझे कस के पकड़ लिया, उनकी उंगलियों के नाख़ून मुझे चुभने लगे। मैं फिर भी उन्हें कस कस के धक्का देता गया और वो अपना गांड उठा उठा कर अपनी चूत देने लगी और मेरा लंड जल्दी जल्दी लेने लगी। वो अब तक दो बार झड़ चुकी थी।

मैंने उन्हें अब घोड़ी बनने के लिए बोला तो वो बोली- गांड नहीं दूंगी चूत मार ले।

मैंने कहा- गांड नहीं मारनी, चूत ही मारूंगा मगर पीछे से।

वो बोली- ठीक है।

और फिर घोड़ी बन गई, मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड घुसा दिया, मैं अब लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर कर रहा था।

मैं फिर एकदम से रुक गया और एक ही झटके में मैंने लंड चूत से हटा के गांड में दे दिया और उनकी गांड फट गई।

वो एकदम से बुरी तरह चीख उठी और मुझे गालियाँ देने लगी, बोली- कुत्ते, तुझे मना किया था न गांड में नहीं तो फिर क्यों दिया?

मैंने उनकी बात नहीं सुनी और गांड मारता रहा, करीब दस मिनट बाद वो खुद अब अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलने लगी, मैं आगे की तरफ शोट मारता और वो पीछे की तरफ !

हम दोनों पूरा मज़ा ले रहे थे, इसमे भी वो एक बार झड़ गई और फिर कुछ देर के बाद मैं भी उनकी गांड में झड़ गया।

जब मैंने लंड निकाला तो कुछ पलों के बाद उनकी गांड से मेरा मुठ निकलने लग गया, उन्होंने अपनी गांड में उंगली फेरी और मेरे मुठ को उंगलियो से लेकर चाट गई।

मैंने फिर उनके मुँह में अपना लंड दे दिया और साफ़ करने को बोला।

उन्होंने मेरे लंड को एकदम साफ़ कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के ऊपर नंगे लेट कर चूमते रहे।

फिर मैंने उन्हें कहा- अब मैं चलता हूँ फिर कभी और करेंगे।

मैं उठा और कपड़े पहन लिए और वो भी अपनी साड़ी पहनने लगी, और फिर हम पाँच मिनट में ठीक ठाक हो गए।

मैंने आंटी से पूछा- अंकल, तो कल मस्त मजा दे रहे थे फिर मेरी जरुरत क्यों पड़ी?

आंटी बोली- उनका तरीका मस्त है पर जल्दी झड़ जाते हैं, और सिर्फ हफ़्ते में एक बार ही पेलते हैं। मुझसे नहीं रहा जाता, एक तो जल्दी भी झड़ जाते हैं और एक हफ्ता बैठ कर मुठ जमा करते हैं।

मैं उनको कुछ पल तक देखता रहा और फिर एक चुम्मी देके चला गया। इसके बाद तो मैंने आंटी को काफी बार पेल चुका हूँ।

mobik.mobile@gmail.com

यह है दुनिया

Posted: 04 Jun 2013 11:07 PM PDT



नमस्कार यह मेरी पहली कहानी है, "हिंदी सेक्सी कहानियां" पढ़ने से पहले मैं लोगों के मुँह से अवैध संबंधों के किस्से सुनता रहता था, कुछ सच्चे, कुछ झूठे, लेकिन हिंदी सेक्सी कहानियां" पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि ज्यादातर किस्से सच्चे होते हैं, हो या न हो लेकिन एक बात तो सच्ची है कि मनुष्य के मन में कहीं न कहीं ऐसी बातें तो चलती रहती हैं, तभी तो यह कहानियाँ हैं और एक सीमा एक मर्यादा के बाद सिर्फ एक ही रिश्ता बचता है 'औरत और मर्द का रिश्ता' !

आदर्श पर चलना अच्छी बात है लेकिन अज्ञानी होना मूर्खता है।

इस दुनिया में क्या हो सकता है और क्या नहीं, इसकी जानकारी हमें होनी ही चाहिए, तभी हम हमारे सम्बन्धों का निर्वहन ठीक तरह से कर पायेंगे।

खैर जो भी हो, मेरे जीवन में एक घटना घटी, सच्ची है, इसका यकीन आप खुद करेंगे।

मैं नॉएडा में सॉफ्टवेयर इन्जिनीयर हूँ, अपने मम्मी पापा एवं छोटी बहन शीतल के साथ रहता हूँ। मम्मी-पापा ज्यादातर नॉएडा से गाँव आते जाते रहते हैं, क्यूंकि हमारे काफी रिश्तेदार अब भी हमारे पुश्तैनी गाँव में रहते हैं, उन्हें वहीं ज्यादा आनंद आता है।

हमारे ताऊ जी की साली का बेटा महिंदर गुड़गाँव में ही एम आर है, उसका हमारे घर काफी आना जाना है, हम दोनों बहन-भाइयों के साथ काफी जुड़ाव है। चूँकि पुरानी रिश्तेदारियाँ काफी घनिष्ट होती थी, या होती हैं, दूर दूर के लोगों की 8-10 दिन मेहमाननवाजी करना आम होता था, लेकिन अब वो बात नहीं रही, सब व्यस्त हो गए हैं।

महिंदर की मुझसे भी अच्छी पटती थी और शीतल से भी, वो अक्सर कंपनी की गिफ्टें लाता रहता, कभी कभी खाने पीने की चीज़ें, फिर धीरे धीरे मुझे दाल में कुछ काला नज़र आने लगा, उसका कारण मेरी गैरहाजिरी में उसका आना था, मैंने सोचा ऐसा सोचना ठीक नहीं क्यूंकि हम तीनों बचपन से साथ खेलें हैं, मतलब बड़े हुए हैं।

लेकिन फिर भी शक तो शक ही होता है, उसे जितनी जल्दी दूर कर लिया जाए उतना ठीक !

एक दिन मैंने महिंदर की कार को हमारे सोसाइटी की पार्किंग में देखा, यह वक्त शीतल के घर पर अकेले होने का था और मेरे आफिस में होने का ! और अब जैसा समझ आ रहा था कि महिंदर शीतल के पास होगा ही।

कुछ देर मैंने सोसाइटी के क्लब में स्नूकर खेला और महिंदर की गाड़ी पर नज़र रखी। पूरे एक घंटे बाद महिंदर प्रसन्न मुद्रा में मोबाइल की स्क्रीन देखता हुआ नीचे आया, गाड़ी स्टार्ट की और चला गया।

मुझे घर पहुँचने में अभी पूरे 35 मिनट बाकी थे, मैं अपने टाइम पर घर पहुँचा तो शीतल ने 5 मिनट घंटी बजाने पर दरवाज़ा खोला, बोली- आप भी न भैया, मैं नहा रही थी।

मैंने चाय पीते हुए शीतल से पूछा- महिंदर बहुत दिनों से नहीं आया?

तो वह बोली- महिंदर भाई आज ही आये थे, दस मिनट बैठ कर चले गए, कहने लगे, तू पढ़ाई कर, मैं यहाँ से निकल रहा था, सोचा मिलता चलूँ !

शाम को मम्मी-पापा गाँव से आ गए, मैंने बात को ढील दी, मैं दूसरे काम में व्यस्त हो गया, अब एक झूठ तो पकड़ा गया था क्यूंकि महिंदर पूरे एक घंटे तो मेरे सामने ही रुका था, और यह बात भी तय थी कि यह रास लीला बहुत सफाई से काफी लम्बे अरसे से चल रही थी, फिर भी मुझे पूरी सफाई चाहिए थी, फिर मैंने ठान लिया कि मम्मी पापा के गाँव जाते ही अब हकीकत का पता लगा कर ही रहूँगा।

हमारे फ्लैट की दो चाभियाँ हैं, और फ्लैट अन्दर बाहर दोनों तरफ से लाक हो सकता है। एक दिन मैंने योजना बनाई, शीतल से कहा- मैं कंपनी के काम से क्लायंट से मिलने मेरठ जा रहा हूँ, रात नौ बजे तक आऊँगा, तू कॉलेज से आकर घर में ही रुकना, कोई परेशानी हो तो मुझे फ़ोन कर देना या महिंदर को बुला लेना।

मेरा इतना कहने पर शीतल ने भोली सूरत से हाँ कर दी, जबकि उसकी आँखों में खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर वो मेरे रहते कॉलेज चली गई, मैं तैयार होकर बाहर सिगरेट पीकर आया, शीतल को कॉलेज के लिए निकलता देख मैं वापस आया, ताला खोला और स्टोर रूम में जाकर बैठ गया। मेरा मोबाइल ज्यादातर साइलेंट मोड पर ही रहता है।

करीब एक घंटे बाद महिंदर का फ़ोन आया- कहाँ हो यार? चलो आज तुम्हें शालोम (दिल्ली का एक अच्छा रेस्तराँ) में भोजन करवाते हैं। मैंने कहा- मैं तो मेरठ जा रहा हूँ, रास्ते में हूँ, मोदीनगर क्रास कर गया, फिर कभी चलेंगे, और हाँ शीतल आज अकेली है, उधर से निकलो तो थोड़ा ध्यान रखना, घर हो आना।

मेरे फ़ोन काटते ही शीतल घर आ गई, अब में होशियार हो गया, उसके ठीक 30 मिनट बाद दरवाजे की घण्टी बजी, बिल्कुल यह महिंदर ही था। कुछ देर तक कुछ आवाजें ही नहीं आई, फिर मैंने ताक-झाँक शुरू की, बेडरूम की तरफ से गया, परदे के पीछे से देखा कि महिंदर शीतल को पीछे से पकड़े हुए है और उसकी गर्दन चूम रहा है, शीतल का बदन अकड़ता जा रहा है, कह रही थी- बस बस ! अब नहीं आःह्ह्ह !

मेरा दिमाग घूम गया, एकदम चक्कर आ गए, मैं उन्हें रोकने ही जा रहा था कि मेरे मन में ख्याल आया कि अपनी बहन को इस हालत में रंगे हाथों पकड़ूं या नहीं।

तभी महिंदर बोला- आज तो डरने की कोई बात नहीं है, हमेशा की तरह जल्दी नहीं मचाएंगे, दिल से प्रेम रस पियेंगे !

अब रोकने से कोई फ़ायदा नहीं था क्यूंकि शीतल आज कोई पहली बार सम्भोग नहीं कर रही थी।

धीरे धीरे मैं कामुक हो चला, अपने लिंग को वहीं खड़ा खड़ा मसलने लगा, शीतल का टाप उतर चुका था, महिंदर अब उसकी स्पोर्टी ब्रा के स्ट्रिप उतार रहा था, नीली जींस और दूधिया चिकने नंगे बदन पर सोने की चेन में शीतल कोई अप्सरा लग रही थी, यकीन मानो मैंने आज तक किसी जवान लड़की को नग्न अपने सामने नहीं देखा था, ब्ल्यू फ़िल्म दूसरी बात है।

उसके स्तन हल्के पीले थे, उन पर भूरे रंग के निप्पल कुछ लाली लिए हुए थे, महिंदर उन पर अपने उंगलियों के पौर गोल गोल घुमा रहा था, फिर उसने निप्पल को चुसना शुरू किया, शीतल लम्बी लम्बी सिसकियाँ ले लेकर" आह मम्मी अआः " कर रही थी।

फिर नीचे आकर महिंदर ने उसकी जींस का बटन खोला, शीतल आँख बन्द कर गुस्से वाला चेहरा बना कर खड़ी थी, महिंदर ने उसे पलंग पर बिठा कर जींस नीचे सरकाई और उसकी योनि को मुट्ठी में भींचने लगा, फिर पेंटी उतार कर, शीतल की टाँगें चौड़ी की, शीतल स्पंदन के झटके ले रही थी, फिर योनि की फांकें चौड़ी कर वह मेरी बहन की चूत के अन्दर हल्की हल्की फूंक मारने लगा, हल्की हल्की ठंडी हवा शीतल को मदमस्त कर रही थी, उसकी गरम योनि को राहत मिल रही थी, वो हवा में अपने बालों को झटक रही थी, आँखें बन्द थी, शीतल कोहनियों के बल पलंग पर पैर फैलाये हुई थी, अब शायद महिंदर उसनी योनि को चूसने लगा था।

शीतल पहले तो जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी, पूरे घर में आवाज गूँज रहीं थी, फिर अपनी कमर को चलाने लगी। तब महिंदर ने योनि में उंगली डाल दी, शीतल ने उसे धक्का दिया, महिंदर ने अपने लिंग निकाल कर शीतल को उलटा किया, घोड़ी बनाया और फिर अपने हाथ की बड़ी अंगुली से उसकी योनि पर थूक लगाया, फिर अपने लिंग पर धीरे धीरे डालते हुए महिंदर पूछ रहा था- जा रहा है? बोल गया?

शीतल हुंह हुंह कर रही थी, अधिक चिकनाई की वजह से लिंग बार बार फिसल रहा था। मैं ऊपर होने के वजह से सब कुछ साफ़ साफ़ देख पा रहा था। बस अब शीतल का चेहरा नहीं दिख रहा था, उसकी योनि थोड़ी थोड़ी दिख रही थी। महिंदर का लिंग पूरा साफ़ दिख रहा था।

शीतल बोली- रुको, मैं ऊपर आती हूँ उस दिन जैसे !

महिंदर चित लेट गया, शीतल ने खुद अपने हाथ से टटोल कर लिंग को योनि में फंसाया और बैठती चली गई। शीतल महिंदर की तरफ झुकी थी, महिंदर कूल्हे उचका रहा था।

दस मिनट बाद दोनों स्खलित हो गए, शायद शीतल तो हो ही गई थी क्यूंकि वो अब अकड़ी हुई सिर्फ महिंदर को रोकने की कोशिश में थी।

फिर दोनों उठे, शीतल की गोरी जांघों पर वीर्य था जो योनि में से रिस रिस कर आ रहा था। आधा घंटा दोनों फिर ऐसे ही पड़े रहे, फिर जाकर नहाये, महिंदर जरूरी काम की वजह बता कर कॉफी पीकर चला गया, शीतल बेडरूम में जाकर सो गई।

जब उसके खर्राटों की आवाज़ आने लगी तो मैं बाहर निकल गया।

दो दिन बाद शनिवार को मम्मी पापा गाँव से वापस आ गए, मैंने इशारों में मम्मी को शीतल और महिंदर के ऊपर शक होने की बात बताई। अगली सुबह पापा का मुँह चढ़ा हुआ था, महीने भर बाद शीतल की शादी का इश्तेहार अखबार में था और उसके चार महीने बाद यानि आज से एक महीने पहले शीतल की शादी बड़ी धूमधाम से हो गई।

सब खुश थे, महिंदर भी खुश दिखा, शीतल भी ! हालांकि शीतल समझ चुकी है कि मैं सब जानता हूँ, वो अब मुझसे झेंपती है, महिंदर से हमारे सम्बन्ध अब तनाव पूर्ण हैं, अभी चार दिन पहले ही शीतल और हमारे जमाई साहब उसी बेडरूम में जब सो रहे थे तो मुझे सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि बताइए 'यह है दुनिया !'

जब एक सभ्य समाज में आप बर्बर प्रजातियों की तरह अपनी बहन-बेटियों पर हिंसा नहीं करना चाहते तो कम से कम उन्हें संभाल कर रखिये क्यूंकि एक सीमा एक मर्यादा के बाद सिर्फ एक ही रिश्ता बचता है 'औरत और मर्द का रिश्ता !'

romeomercutio3@gmail.com




 

सेक्सी कहानी , सेक्सी ख़बर, सेक्स की सलाह, Hot sexy Hindi Story, Sexy tips in Hindi, Hindi Sexy News, Hot Insect Sexy Story In Hindi.