The Role of Playful Sex Quotes in Enhancing Intimacy
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In the realm of intimate relationships, maintaining a healthy and vibrant
sex life is often a key component. To infuse a dose of excitement and
playfulne...
हिंदी सेक्सी कहानियां
हिंदी सेक्सी कहानियां |
- इंग्लिश सीट पर
- माल तैयार है, आ जाओ
- चूत को चोद कर फाड़ दो
- तौलिया छोटा नहीं, मेरा बड़ा है
- चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम
- भाभी ने चुदाया
| Posted: 07 Mar 2013 10:28 PM PST ![]() हाय दोस्तो ! सभी को मेरी तरफ से यानि कि नीना की तरफ से गीली चूत के साथ प्रणाम ! मैंने लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं आपके सामने अपनी एक मस्त चुदाई लेकर आई हूँ। नाम नीना है, उम्र उन्नीस साल, गोरा रंग, कसा हुआ बदन, गोल गोल वक्ष, पतली कमर ! वैसे तो मैं छोटी ही थी जब मैंने अपनी चूत का चीरहरण करवा डाला था। उसके बाद कई लड़कों ने मुझे चोदा- स्कूल में, स्कूल जाते रास्ते में पड़ने वाले बाग़ में, जहाँ मेरे आशिक मेरी इन्तज़ार करते और छुट्टी के बाद उन बागों में रासलीला रचाई। उसके बाद मुझे वो स्कूल छोड़ना पड़ा क्यूंकि वो दसवीं तक था। माँ ने मुझे शहर मामा जी के घर भेज दिया। एक तो मामी के बच्चा होने वाला था दूसरा स्कूल घर की बग़ल में था बस यही बात ठीक नहीं थी। ऊपर से रात को जब मामा मामी मजे लेते तो मैं छुप कर देखती। मामी मुँह में लेकर, मुठ मारकर मामा का पानी निकालती। यह देख मेरी चूत गीली हो जाती, सोचती कि मामा को ही पटा लूँ ! लोहा गर्म तो था ही, चोट मारनी रह गई थी। तभी मेरा स्कूल शुरू हो गया। कुछ ही दिनों में मेरा सोनू नाम के लड़के के साथ अफेयर चल पड़ा। आधी छुट्टी में खाली क्लास में उसकी मुठ मारती, कभी चूस भी लेती। वो तो मुझे अपने दोस्त के घर में ले जाना चाहता था। उसके दोस्त के मम्मी पापा ऑफिस में जॉब करते थे, बहन हॉस्टल में रहती, घर खाली होता। दोनों मेरी चूत मारने के लिए उतावले थे। मैं चाहते हुए भी नहीं जा पा रही थी। मेरे न जाने से वो मुझसे खफा रहने लगा। आखिर एक दिन मैंने मन बना ही लिया। सुबह स्कूल जाने के लिए निकली लेकिन आगे निकल गई। शहर था, मुँह पर चुन्नी डाल उसके साथ चिपक गई और हम सीधा उसके दोस्त के घर चले गए। जाते ही उसने मुझे दबोच लिया, पागलों की तरह मुझे चूमने लगे। दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर नंगी कर दिया। मैंने सोनू का तो कई बार चूसा था, विपन का लौड़ा उस से भी ज्यादा मस्त निकला। भूखे भेड़िये को मांस मिला हो उसी तरह एक ने मेरा एक मम्मा मुँह में डाला दूसरे ने दूसरा ! हाय ! मैंने दोनों के लौड़े पकड़ रखे थे। हाय क्या मजा था एक साथ सोनू और विपन के नीचे लेटकर ! इतने में डोर-बेल बजी। विपन की फटने लगी, उसने रसोई में से देखा- उसकी मामी, मासी, उसका लड़का खड़े थे। सारा स्वाद ख़राब हो गया। अब क्या करते वो कपड़े पहन कर बोला- तुम दोनों पीछे वाले हिस्से में चले जाओ, चाबी ले लो ! वहीं दरवाज़ा खोल कर चले जाना, उधर कोई नहीं आयेगा। हम दोनों ने कपड़े उठाये, पीछे चले गए। ऊपर से खुला हुआ था, कोई भी अपनी छत से देख सकता था। एक बाथरूम था, मैं उसमें घुस गई, सोनू भी वहीं आ गया। उसने विपन को मोबाइल पर कहा कि पीछे कोई न आये, वरना तुझे इसकी चूत कभी नहीं मारने दूंगा। हम बाथरूम में हैं। कह कर हम फिर चिपक गए। जगह काफी थी, मैंने उसको सीट पर बिठा खुद नीचे बैठ कर उसके लौड़े को चूसने लगी। वो आहें भरने लगा- हाय रानी और चूस चूसती जा ! साली रंडी ! मैं उठी, उसको वहीं बैठे रहने को कहा। उसका लौड़ा छत की तरफ तना हुआ खड़ा था। मैंने टांगे खोली और उसके ऊपर गई, चूत पे रखते हुए उसपर बैठती गई और उसका पूरा लौड़ा अन्दर डलवा लिया। पहली बार उसने अन्दर डाला था, उसको बहुत मजा आने लगा। मैं उठ उठ कर चुदने लगी- हाय ! चोरी का गुड़ कहते हैं कि ज्यादा मीठा लागे ! वोही बात थी ! वहां बहुत मजा आने लगा। फिर मैंने इंग्लिश सीट पर बैठ गई।सोनू मेरी टांगें उठा मेरे ऊपर आते हुए बीच में आ गया और मैंने पकड़ कर निशाने पर लगा दिया। उसने अन्दर डाल दिया- बहन की लौड़ी ! साली ! पक्की रंडी है ! सब जाने तू ! उसने तेज़ धक्के देने शुरू किये। हाय मैं झड़ने वाली हूँ ! उह अह उह ! वो और तेजी से ठोकने लगा। हाय हाय ! जोर दे कर ! हाय फाड़ दे कमीने ! इतने दिन से नाराज़ बैठा था ! लगा दम ! हाय साईँ ! मार, मेरी मार ! करते हुए दोनों लगभग एक साथ ढीले पड़ गए उसने मेरा मम्मा मुँह में लेकर निपल काट दिया। और जैसे उसने अपना लौड़ा मेरी फ़ुद्दी से बाहर निकाला, मैंने झट से मुँह में डाल सारा रस चाट लिया। तभी विपन ने दरवाज़ा खटकाया- मैं हूँ ! अबे साले रुक ! दरवाज़ा खोला, मैं सलवार पहन चुकी थी, ब्रा बंद करने वाली थी कि उसने रोक दिया- छोड़ो ! मुझसे वो बोला- सब गए ! अब आओ, आराम से अन्दर बैठते हैं ! कोल्ड ड्रिंक पियो ! अभी छुट्टी में काफी वक्त था, मैंने सोचा दोहरा मजा ले ही लिया जाये ! मौका तो था ही ! ठीक है विपन ! छुट्टी के टाइम तक मैं यहीं हूँ ! उसके बाद क्या क्या हुआ ? मैंने खूब मजे लूटे ! यह मैं आप सब के सामने जल्दी ही लाने वाली हूँ ! इतंजार का फल मीठा होवे, समझे ना ! आपके जवाबों का इंतज़ार रहेगा neena4uboys@rediffmail.com |
| Posted: 07 Mar 2013 09:13 PM PST मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र १८ साल है।मैं रामपुर का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी एक अध्यापक हैं जो कि दूसरे शहर में रहते हैं। मेरी माँ का नाम मधु है और उसकी उम्र ३८ साल है परन्तु उसकी जवानी २२ साल की लड़की से कम नहीं है। चूँकि मेरे पिताजी महीने में एक बार आते हैं इसलिए मैं और मेरी माँ ही घर में रहते हैं।एक रात जब मैं खाना खाकर सो रहा था परन्तु मुझे नींद नहीं आ रही थे, मैंने रात के एक बजे दरवाजे में हल्की सी दस्तक सुनी। मैंने माँ के कमरे की ओर देखा तो मेरी माँ चुपके से धीरे-२ दरवाजे पर गई और दरवाजा धीरे से खोला। रात के उन्धेरे में केवल जीरो पॉवर का बल्ब जल रहा था हाल में और गुलाबी रंग की मैक्सी में मधु का आधा शरीर चमक रहा था। दरवाजा खुलते ही नारायण ने अन्दर प्रवेश किया। नारायण की उम्र ३३ साल की होगी और वो हमारे मुहल्ले में बदमाश के नाम से जाना जाता था। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मैं चुपचाप सब देखता रहा। अंदर आते ही मधु ने दरवाजा बंद कर दिया था और इस बीच नारायण ने मेरे माँ की मस्त गाण्ड पर हाथ फेर दिया। नारायण ने, जो कि नशे में था, अपनी जेब से दारू के एक बोतल निकाली और मेरी माँ ने हाल में ही रखे दो गिलास ले आई। दोनों दारू का रसपान करने लगे। बीच बीच में नारायण मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों को दबा देता था और मेरी माँ को किस कर रहा था। नशे में तो वो बड़े प्यासी लग रही थी। मैं चुपचाप सब देख रहा था। पीने के बाद नारायण मेरी माँ को माँ के बेड-रूम में लेकर गया और मेरी माँ को बिस्तर में बैठा दिया और अपना पैंट की चेन खोलने लगा। इतने में नारायण का मोबाइल बजा और वो मेरे कमरे के पास आकर बात करने लगा। मेरी माँ बिस्तर पर नंगी बैठी अपनी बुर को सहला रही थी जैसे उसे लण्ड चाहिए। नारायण फ़ोन पर कह रहा था- माल तैयार है, बस आ जाओ ! मेरी माँ ने नारायण से पूछा- किसका फ़ोन है? उसने कहा- ऐसे ही दोस्त का ! और मेरे माँ के दूधों को दबाने लगा। कुछ देर बाद दरवाजे में फिर दस्तक हुई। इस पर मेरी माँ ने नारायण की तरफ देखा, नारायण ने उससे बोला- मेरा दोस्त है शायद ! और दरवाजे की तरफ लपका। दरवाजा खुलते ही कल्लू भाई अन्दर आ गया, कालू भाई वहाँ का डॉन था, उसकी ऊंचाई ६'४" होगी और उसे अंदर आते हुए देख मेरी माँ ने कपड़े पहनना शुरू कर दिए। नारायण ने मेरी माँ को बोला- ये कालू भाई हैं ! ये सिर्फ़ आज ही के लिए आए हैं, तुम वही सब करो जो मेरे साथ करती हो। मेरे माँ की तो जैसे दिल के मुराद पूरी हो गई हो- दो मर्द मिल गये थे उसे। कालू भाई तो कहाँ रुकने वाले थे, वो झट से मेरे माँ को पकड़ कर उसका दूध दबाने लगा। नारायण भी सब देख रहा था। अब कल्लू भाई ने अपना लण्ड निकाल लिया और मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। लण्ड देख कर मेरी माँ मधु मुस्कुरा रही थी। उसका लण्ड ९ इंच का होगा काला और बहुत मोटा। अब वो उसके लण्ड को चूसे जा रही थी और कालू भाई उसकी चूची मसल रहा था। मधु बड़ी प्यासी लग रही थी, मैं चुपचाप सब देख रहा था। पास में ही नारायण सिगरेट पी रहा था, मेरी माँ के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी- हूह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ. हाह ! मैं सब देख रह था। अब वो बिलकुल गरम हो गई थी और बोल रही थी- अब बस नारायण इस चूत की आग बुझा दे आज तू ! और नारायण ने इशारा जान कर अपना ८ इंच का लण्ड मेरी माँ की चूत पर रख दिया। वो अपने हाथों से मेरे माँ का दूध दबा रहा था और मेरे माँ को किस कर रहा था। दोनों माहिर खिलाड़ी लग रहे थे। अब नारायण ने अपना लण्ड मेरे माँ की बुर में डाल दिया और वो सित्कारियाँ ले रही थी। अब नारायण ने अपनी स्पीड तेज कर दी और लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। मेरी माँ उसका पूरा साथ दे रही थी। मेरी माँ भी अपना गाण्ड को उछाल रही थे, कुछ देर के बाद नारायण ने अपना पानी मेरे माँ की बुर में छोड़ दिया और उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया। वो मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों के दबा रहा था उसका पानी मेरे माँ की बुर से टपक रहा था। कुछ देर के बाद नारायण अलग हो गया। मेरी माँ ने कालू का लण्ड मुँह में डाल लिया वो उसे चूसे रही थी। अब कालू भाई का लण्ड खड़ा हो गया था, उसने मेरी माँ को लेटाया और उसकी बुर पे अपना लण्ड रख दिया, मधु के मुँह से आवाज़ आ रही थी- ओह्ह.. कालू चोद दो आज.... ! कालू ने अपना लण्ड पूरा का पूरा उसकी बुर में डाल दिया और धाप मारने लगा। अब नारायण ने भी अपना लण्ड मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। अब वो दो दो लण्ड खा रही थी। कुछ देर बाद नारायण का लण्ड फिर से तैयार हो गया। अब नारायण ने मेरी माँ को ऊपर आने को बोला। अब मेरी माँ कालू के ऊपर आ गई। उसने कालू का लण्ड अपनी बुर में रखा और ऊपर हिलने लगी, कालू उसके दूध को दाबने लगा। नारायण अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड में रगड़ने लगा। मेरी माँ की गाण्ड बड़ी टाईट थी इसलिए नारायण का लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। मेरी माँ ने नारायण को वहीं रखा बोरोप्लस लाने को कहा। नारायण बोरोप्लस मेरे माँ की गाण्ड पर लगाने लगा। वो अपनी मस्त गाण्ड को हिला हिला कर उसका साथ दे रही थी। अब नारायण ने थोड़ा बोरोप्लस अपने लण्ड पर भी लगाया और फिर से डालने की कोशिश की। अब उसका आधा लण्ड मेरी माँ की गाण्ड के अंदर चला गया था। मेरी माँ सिसकियाँ ले लेकर बोल रही थी- ह्म्म्म्म्म्म. हाआह्ह्ह्ह्छ ! अब नारायण अपने लण्ड से उसकी गाण्ड मार रहा था, उसे भी मज़ा आ रहा था, मस्त गाण्ड जो मिली थी उसे ! अब दोनों जवानी का आनन्द ले रहे थे। कुछ देर बाद नारायण का पानी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड निकाल कर मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। वो उसके पानी को ऐसे पी रही थी जैसे शरबत। कुछ ही देर में कालू ने अपना लण्ड बाहर निकाला और अपना पानी मेरे माँ के मुँह में डाल दिया। थोड़ी देर के बाद कालू ने फिर अपना कार्यक्रम चालू किया। कालू ने अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड पर रख दिया और उसकी चिकनी गाण्ड मारने लगा। और वो हांऽऽहंऽऽ की आवाज निकाल रहे थे। अब कालू ने अपना पानी उसकी गाण्ड में छोड़ दिया था। कुछ देर बाद कालू और नारायण ने कल फ़िर आने का वादा करके मेरी माँ की गाण्ड को सहलाया और उनके जाते ही मेरी माँ ने दरवाज़ा बंद करके अपनी बुर सहलाई। वो बड़ी खुश लग रही थी और हो भी क्यों नहीं- उसे दो लण्ड जो मिले थे आज ! abhi7752@gmail.com |
| Posted: 07 Mar 2013 08:37 PM PST ![]() हेलो दोस्तों मेरा नाम राजेश है और मैं रीवा का रहने वाला हूं। मैं आप सभी को एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसे सुनते ही नौजवान लडकों को मुठ मारना पड़ सकता है और यदि शादीशुदा हैं तो अपनी पत्नी की चूत भी फाड़ सकते हैं, कुंआरी लडकियों को अपनी चूत में बैंगन या लौकी डालकर अपनी चूत ठण्डी करनी पड़ेगी और जो शादीशुदा हैं उन्हें अपने पति से चुदना पड़ेगा। अब मेरी कहानी इस प्रकार से है : किसी शहर में एक करोड़पति सेठ रहता था। चूंकि वो काफी रईस था तो उसने शादियाँ भी चार की थी। उस सेठ की उम्र करीब ५५-६० रही होगी। अब आप सोच सकते हैं कि इस उम्र के आदमियों का लण्ड क्या खड़ा होता होगा। उसके घर में हर काम के लिये अलग-अलग नौकर लगे हुए थे। उसकी तीन पत्नियां का तो ठीक-ठाक था क्योंकि उन्होंने सेठ से भरपूर मजा लिया था पर चौथी पत्नी की हालत खराब थी क्योंकि उसकी उम्र २५-२७ रही होगी और इस उम्र में उसे किसी भी प्रकार का मजा नहीं मिल पा रहा था। आखिर उसने तंग आकर ऐसा फैसला किया कि आप सबके होश उड़ जाएंगे। उसका नाम मल्लिका था, उसकी एक नौकरानी थी जिसका नाम संजू था। अपनी जवानी से तंग आकर एक दिन मल्लिका ने संजू से कहा- अब नहीं रहा जाता ! मैं तो अब नौकरों से अपनी चूत चुदवाकर अपनी जवानी की प्यास को ठण्डी करूँगी ! संजू चौंक गई यह सुनकर ! वो बोली- आप किससे चुदवाएंगी ? मल्लिका ने कहा- तू मेरा साथ दे तो हम दोनों को भरपूर मजा मिल सकता है ! संजू भी एक नंबर की चुदक्कड़ थी और सेठ से तो कई बार चुदवा चुकी थी। वो तुरंत तैयार हो गई। फिर मल्लिका ने राका और शेरा नाम के नौकरों को चुना और संजू से उन दोनों को बुलवाया। संजू उन दोनों नौकरों को बुलाकर मल्लिका के पास ले आई। वे दोनों नौकर काफी गरीब थे और सेठ के यहां दो वक्त की रोटी के लिये जी-तोड़ मेहनत करते थे। वे दोनों मल्लिका के सामने किसी मुजरिम की तरह खड़े हो गये। मल्लिका ने उन दोनों को ऊपर से नीचे तक गौर से देखा और संजू से कहा- वाह क्या हट्टे कट्टे हैं ये दोनों ! फिर उसने नौकरों से कहा- तुम दोनों को मेरा एक काम करना होगा ! नौकरों ने डरते-डरते पूछा- क्या काम है मालकिन ? मल्लिका ने कहा- तुम्हें हमारी चूत को चोद कर फाड़ना पड़ेगा। उन दोनों नौकरों के तो होश ही उड़ गए। दोनों की जबान से आवाज नहीं निकल रही थी। फिर उन दोनों ने हिम्मत करके पूछा- आप हमारी परीक्षा क्यों ले रहीं हैं मालकिन ? तो मल्लिका ने गुस्सा होकर कहा- मादरचोदो ! अगर नौकरी करनी है तो हमारा यह काम करना पड़ेगा, नहीं तो जाओ तुम्हारी आज से छुट्टी। अब उन दोनों के आगे कोई दूसरा चारा नहीं था। तो उन दोनों ने मल्लिका से पूछा- हमें करना क्या है? तब मल्लिका ने संजू से कहा- दरवाजा बंद कर दे ! संजू ने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया। फ़िर मल्लिका ने कहा- अब तुम दोनों अपने अपने कपड़े उतार कर मेरे पास आओ। उन्होंने ऐसा ही किया और एकदम नंगे होकर मल्लिका के सामने खड़े हो गए। मल्लिका ने उन दोनों का लंड देखा तो उसकी बांछें खिल गई। उसने जल्दी से राका का लंड अपने हाथ में लिया और मुठ मारने लगी। शेरा के लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कुछ देर लंड चूसने के बाद वो बिस्तर पर चित्त लेट गई और उन दोनों को भी बिस्तर पर आने का न्यौता दिया। दोनों बिस्तर पर लेट गए। संजू भी नंगी होकर अपनी चूत में उंगली डालकर मजे ले रही थी। फिर मल्लिका ने दोनों से कहा- मेरी एक-एक चूची दोनों बांट लो और उसे मसल डालो, चाट डालो, चूस डालो। दोनों ने ऐसा ही किया। करीब १० मिनट चूची की चुसाई के बाद मल्लिका ने कहा- राका ! मेरी सलवार उतारो ! राका ने सलवार का नाड़ा खोलकर उसे नीचे खिसकाया। आधा खिसकते ही मल्लिका ने उसे रोक दिया और कहा- अभी इतना ही ! बाकी कुछ देर के बाद ! फिर से राका ने मल्लिका की चूची चूसना शुरू कर दिया। मल्लिका ने संजू से कहा- क्या अपनी चूत को उंगली से चोद रही है ! इधर आ और मेरी चूत को चाट ! संजू दौड़कर आई और मल्लिका की चूत को चाटने लगी। कुछ देर के बाद मल्लिका ने उसे रोक दिया और कहा- पूरा माल तू ही चाट लेगी तो ये दोनो बेचारे क्या मुठ मार कर रहेंगे? तू हट और इन दोनों को चाटने दे। फिर राका को इशारे से मल्लिका ने चूत चाटने को कहा। राका जल्दी से चूत चाटने के लिये नीचे खिसक गया। उसकी तो आज जिंदगी बन गई। मल्लिका जैसी औरत की चूत जो रसगुल्ले की तरह थी उसे वो चाटने लगा। मल्लिका मदहोश होने लगी। फिर उसने शेरा को भी मौका दिया। वो भी जल्दी से नीचे गया और चूत चाटने लगा। मल्लिका की चूत से नमकीन पानी गिरने लगा जो शेरा गटगटा कर पी गया। इधर संजू मल्लिका की चूची को चूसती जा रही थी। कुछ देर के बाद मल्लिका ने कहा- बस, अब मेरी सलवार पूरी उतारो। दोनों ने ऐसा ही किया- उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया। फिर मल्लिका ने कहा- शेरा अब तुम मेरी चूत को चोद कर उसका भरता बना दो ! शेरा ने आव देखा न ताव, अपना लंड मल्लिका की चूत के दीवाल पर लगाकर ऐसा धक्का मारा कि पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मल्लिका की चूत को ककड़ी की तरह चीरता हुआ समा गया। मल्लिका का बदन ऐंठने लगा। फिर तुरंत राका मल्लिका की एक चूची और संजू भी एक चूची चूसने लगी, जिससे उसे कुछ राहत मिली। मल्लिका थोड़ी देर के बाद जोश में आ गई और नीचे से चूतड़ उछालने लगी। शेरा ने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और मल्लिका की चूत में ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा। कुछ देर के बाद मल्लिका ने शेरा को नीचे आने के लिये कहा और शेरा नीचे चित्त लेट गया। फिर मल्लिका शेरा के ऊपर चढ़ गई और उसके लंड को अपनी चूत में डाल लिया और खुद धक्के मारने लगी। फिर थोड़ी देर में उसने राका को कहा- तुम पीछे से मेरी गांड में अपना लंड डालो। राका के लंड में संजू ने खूब तेल लगा दिया और फिर राका ने मल्लिका की गांड की छेद में लंड को रखकर एक करारा धक्का मारा। मल्लिका के मुंह से चीख निकल गई लेकिन थोड़ी ही देर में सब शांत हो गया और उन दोनों ने धक्कों की रफ़्तार बढा दी। करीब २० मिनट के बाद मल्लिका ऐंठने लगी और चिल्लाने लगी- चोदो मुझे ! फाड़ दो मेरी गांड और चूत ! मैं तुम दोनों को मालामाल कर दूंगी ! चोदो मादरचोदो ! चोदो मुझे ! आ .. .. ... .... ..... हा ............. और ............ तेज चोदो। फिर कुछ ही देर में वो झड़ गई लेकिन राका और शेरा उसे चोदते रहे और वो चुदवाती रही। कुछ देर के बाद उन दोनों ने भी अपना अपना माल उसकी चूत और गांड में उड़ेल दिया। फिर उस रात बारी बारी से कई बार उन दोनों ने मल्लिका और संजू को चोदा। आप लोगों को मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करें ! rmrajeshm20@gmail.com |
| Posted: 07 Mar 2013 07:48 PM PST ![]() ![]() मेरा नाम रिंकू है ! मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ ! मैं आपको तीन साल पुरानी अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ ! कृपा कर इसे पढें ! मेरा दावा है कि इस कहानी को पढ़ते समय भाइयों के लंड और भाभियों की चूत गीली हो जायेगी और यदि भाइयों के पास चूत का जुगाड़ है तो वो चूत मारने पर विवश हो जायेंगे यदि नहीं है तो मुठ मारेंगे ! लड़कियों और औरतों के पास लंड का जुगाड़ है तो वो चुदवाने पर विवश हो जाएँगी यदि नहीं है तो वो ऊँगली-मैथुन या अपनी चूत में बेंगन जैसी लम्बी चीज़ से मुठ मारेंगी ! मैं आपका ज्यादा समय बर्बाद न करके सीधा पॉइंट पर आता हूँ ! बात उन दिनों की है जब मैं ग्रैजुऐशन कर रहा था ! मेरे दूसरे साल के पेपर चल रहे थे ! हमारे घर में एक किरायेदार आया, जिसकी बीवी का नाम ममता था ! ममता दिखने में कुछ ज्यादा सुंदर नहीं थी पर उसके स्तन बहुत बड़े थे जो हमेशा ब्लाउज से बाहर आने की कोशिश करते थे ! ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज से बाहर आ जायेंगे ! जिनको देख कर मेरा मन मचल उठा और उसकी गांड के तो क्या कहने ...............! जब वो चलती थी तो उसका एक कूल्हा आगे और एक कूल्हा पीछे होता था, जिसे देख कर मेरा लंड खंभे का रूप धारण कर लेता था ! उसे देख कर मेरा मन भटकने लगता और मेरा मन पढ़ाई में न लगता ! जब मैं उसे देखता, उसके बड़े स्तन और उठी हुई गांड का दृश्य मेरे सामने आने लगता और मैं उसके बारे में सोच कर मुठ मारता ! मुठ मारने के बाद मैं शांत हो जाता और पढ़ाई में मन लगाता लेकिन मन फिर भी नहीं लग पाता ! असली दिक्कत तो रात को होती थी जब ममता का पति आता था और रात को उसको चोदता था ! उसके चीखने की आवाज़ मेरे कमरे तक आती थी, क्योंकि मेरा कमरा उसके कमरे से चिपका था ! जब उसका पति उसे चोदता था तो वो सिसकियाँ लेती थी ! उसकी आवाजें मेरे कानों में गूंजती थी और मैं आँखों में उसकी तस्वीर ले आता और उसका नाम लेकर मुठ मारता था ! एक दिन ममता आंटी ने मुझसे कहा कि मैं उनके केबल कनेक्शन लगवा दूँ ! तो मैंने उनसे कहा,"आंटी ! नए डिश कनेक्शन के लिए आपको २०० रुपये एडवांस केबल वाले को देने पड़ेंगे और १५० रुपये महीना देना होगा !" आंटी बोली,"यह तो बहुत मंहगा है ?" मैने कहा," आंटी ! मैं अपने केबल कनेक्शन में से आपका केबल लगा देता हूँ !!" वो बोली," आप कितने पैसे लोगे ?" मैंने कहा,"जो आपकी इच्छा हो, दे देना .................!" उसने कहा," लगा दो !" आंटी के टीवी में कनेक्शन करने के लिए मार्केट से केबल की तार खरीद कर लाया और मैं अपनी टीवी से कनेक्शन ले कर तार उनके टीवी तक ले जाने लगा, लेकिन तार छोटी पड़ गई !! मैंने कहा," आंटी ! तार छोटी पड़ गई !" तो आंटी ने कहा," कुछ जुगाड़ कर के लगा दो?" मैंने कहा,"आंटी, आपका कमरा और मेरा कमरा चिपका हुआ है, अगर मैं दीवार में छेद कर दूँ तो बहुत कम तार लगेगी !! " वो बोली," कर लो न .........! " मैं ड्रिल मशीन लाया और ऐसी जगह छेद किया जहाँ से ममता आंटी की चुदाई के दर्शन साफ़ तरीके से हो सके और मैंने दीवार का छेद काफी बड़ा किया जिससे मुझे आंटी की चुदाई की रासलीला का भरपूर आनंद प्राप्त हो सके और आंटी की केबल लगा दी और मैं रात का इंतज़ार करने लगा.........! रात हुई ! मैं खाना खा ही रहा था कि अंकल ने अचानक अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया ! मैं समझ गया कि चुदाई कार्यक्रम शुरू होने वाला है ! मैंने जल्दी से खाना खाया और अपने कमरे में चला आया और केबल के तार के लिए किये गए छेद पर आंखें लगाईं ! और अचानक आंटी के कमरे में देख कर मेरे कान खड़े हो गए.........! मैंने देखा अंकल ने टीवी पर ब्लू फिल्म लगा रखी थी ! अंकल आंटी के गुदगुदी कर रहे थे और आंटी हंस रही थी ! उस समय आंटी पेटीकोट- ब्लाउज में थी ! अचानक अंकल ने आंटी के पैरों से चूमना शुरू किया ! पेटीकोट उठाते हुए ऊपर चूत की ओर चूमते हुए आने लगे और धीरे-धीरे पेटीकोट चूत से उपर हो गया ! अंकल आंटी की जांघों को चूमते हुए आंटी की चूत में जीभ देकर कुत्ते की तरह आंटी की चूत चाटने लगे ! आंटी सिसकियाँ ले रही थी ! पहली बार मैंने ममता आंटी की चूत देखी जिसे देख कर मेरा लंड काबू में न रहा और नाग की तरह फुंकार मारने लगा ! अचानक अंकल पूरे नंगे हो गए और आंटी को भी नंगा कर दिया और आंटी की चूत में अपना लंड डाल दिया ! मैंने देखा कि अंकल का लंड ५ से ६ इंच का है ! अंकल आंटी पर चढ़ कर जोरदार धक्के मारने लगे !मैंने देखा की आंटी को छोटे लंड के कारण चुदने में कम मज़ा आ रहा था ! इस चुदाई के सीन को देख कर मैं आंटी का ध्यान लाकर मुठ मारने लगा ! अचानक अंकल झड़ गए लेकिन अभी तक आंटी नहीं झड़ पाई थी ! अंकल निढाल होकर आंटी के उपर से हट गए और सोने लगे ! आंटी अंकल को अपनी ओर खींच रही थी ! अभी आंटी प्यासी थी लेकिन अंकल आंटी से हाथ छुड़ा कर सो गए ! अंकल के सोने के बाद ममता आंटी रोने लगी और अपनी चूत को मसलने और उसमें ऊँगली करने लगी ! यह देख कर मैं खुश हो गया कि अब मेरी दाल गल सकती है और मैंने अपना लंड झाड़ दिया ! आंटी भी ऊँगली मैथुन से झड़ गई और सो गई ! सुबह मैं नहा रहा था ! आंटी मेरे सामने बैठ कर अपने घर के बर्तन धोने लगी ! मैंने सोचा यह अच्छा मौका है आंटी को अपने ९ इंच के लंड के दर्शन कराने का ! आंटी सामने बर्तन धो रही थी ! मैं साबुन लगा रहा था ! मैंने अपने कच्छे में हाथ डालकर अपने लंड पर साबुन लगाना शुरू किया और लंड खडा हो गया! ये सब आंटी देख रही थी ! आंटी कच्छे में से मेरे लंड की लम्बाई भांप चुकी थी ! आंटी के चेहरे पर ख़ुशी थी ! मैं समझ गया कि आंटी लंड देखना और अपनी भोसड़ी में लेना चाहती है ! मैंने नहाने के बाद तौलिया पहन अपना कच्छा नीचे उतारा ! लंड खड़ा था इसलिए तौलिया भी उठा हुआ था और मैं बैठ कर अपना कच्छा धोने लगा ! आंटी बिलकुल मेरे सामने थी इसलिए उनकी नज़र मेरी टांगों पर थी ! मुझे महसूस हुआ कि उनकी नज़र मेरे लंड को देखने के लिए बेताब है ! तभी मैंने अपनी दोनों टांगे चौड़ी कर ली ! मेरा लंड तौलिये से बाहर निकलने लगा ! यह देख कर आंटी ने अपनी आँखें नीचे कर ली और बोली,"रिंकू, तुम्हारा तौलिया छोटा है !!" मैंने कहा,"आंटी, ऐसा क्यों कहा ?" उसने कहा,"तुम्हारा बाहर निकल रहा है................!" मैंने जानबूझ के पूछा,"क्या ...??" उसने लंड की ओर इशारा किया ! मैंने देखा लंड तौलिये से बिलकुल बाहर था ! मैंने कहा,"आंटी जी ! तौलिया छोटा नहीं !!! मेरा बड़ा है ........!" आंटी बोली," वही मैं सोच रही हूँ ................... तुम्हारा कितना बड़ा है .......................!" मैंने कहा,"आंटी ! आपने पूरा देख लिया .............? " उसने कहा," नहीं, थोड़ा सा....................!" मैंने आंटी के सामने अपना तौलिया खोल दिया ! मेरे ९ इंच के खड़े लंड देख आंटी की आंखें चौंधिया गई ! मैंने कहा,"लो आंटी ! पूरा देख लो !" वो हैरान थी ! मैंने आंटी का हाथ पकड़ा और अपना लंड उनके हाथ में दे दिया ! वो मेरा लंड हिलाने लगी ! मैंने कहा ," आंटी ! मेरी ही सारी बड़ी चीज़ देखोगी ?? अपनी भी कुछ बड़ी चीज़ दिखाओगी???" यह कह कर मैंने उसे गोद में उठा लिया और उसके कमरे में बेड पर लिटा कर उसके स्तन दबाने लगा ! वो सिसकियाँ लेने लगी और देखते ही देखते मैंने उसे नंगा कर दिया ! उसकी चूत बिलकुल चिकनी थी ........! मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया जिससे वो तड़फ उठी और बोली," रिंकू, अब सब्र नहीं हो रहा है..........! प्लीज़ मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोद दो............!" मैंने उसकी दोनों टांगे चौड़ी की और उसकी चूत पर अपना लंड रख कर तेज धक्का दिया ! मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और वो चीख उठी क्योंकि उसने इतना लंड पहली बार अपनी चूत में लिया था ! मैंने दूसरा धक्का मारा और लंड उसकी चूत में समा गया ! उसकी चूत से खून आने लगा और लंड भी काफी टाइट घुस रहा था ! मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू कर दिया और उसे मज़ा आने लगा ! उसने मुझे अपनी बाँहों में कसना शुरू कर दिया ! मैं समझ गया कि उसे अत्यंत आनंद आ रहा है, उसकी पकड़ और भी टाइट होती जा रही थी और मेरे धक्के भी ! अचानक वो बोलने लगी," रिंकू ,चोद डालो मुझे ! मेरी भोसड़ी को भोसड़ा बना दो और गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी!" उसकी सिसकियों से पता चल रहा था कि वो अब झड़ने वाली है, इसलिए मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी ! वो झड़ गई और उसके साथ मैं भी झड़ गया ! उसके बाद मैं ममता आंटी को अपनी लुगाई की तरह जब चाहता चोद लेता ! वो हमेशा कहती," रिंकू, तुमने मेरी भोसड़ी को भोसड़ा बना दिया.......................!" यह सिलसिला ६ महीने तक चला ! उसके बाद वो हमारा कमरा खाली करके चले गए ! दोस्तों ! मुझे बर्दाश्त करने के लिए धन्यवाद !!! rinku0707@gmail.com |
| चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम Posted: 07 Mar 2013 07:27 PM PST ![]() ![]() दोस्तो, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने मेरी कहानियाँ 'माला की चुदाई', 'मजा ओर मलाई', 'जब गांड मारी जम के' व 'मेरी पड़ोसन रिया की चुदाई' पढ़ी और आपने जो मेरा साथ दिया व लड़कियों व लड़कों के बहुत से मेल भी आये जिन्होने मेरा होंसला बुलन्द किया उसके लिये एक बार और धन्यवाद! एक मेल ऐसा भी आया जिसमें मुझे बताया गया कि आप अपनी कहानियों में अश्लील भाषा का प्रयोग नहीं करते, जैसे - रंडी, बहन की लौड़ी, वेश्या वगैरह वगैरह। मैं बताना चाहूंगा कि मेरे अब तक के अनुभव के आधार पर आज तक मैंने कई कॉलगर्ल, रिश्तेदारी में, पत्नी, गर्लफ्रेण्ड आदि के साथ चुदाई कार्यक्रम किये, मगर चुदाई कार्यक्रम के दौरान ना तो उनके मुंह से कोई अश्लील भाषा निकली और ना ही मेरे मुंह से ! तो कैसे मान लूं कि चोदते वक्त अगर अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाये तो औरत और मर्द दोनो में उत्तेजना बढ़ती है। अश्लील भाषा का प्रयोग चोदते समय तो कतई नहीं करना चाहिये, उत्तेजना बढ़ने के बजाय हो सकता है कि शिथिलता आ जाये। खैर ....... दोस्तो, आज नई कहानी लेकर आया हूँ ! मेरी पत्नी घर के काम काज के मामले में बहुत ही आलसी है, कभी कभी मुझे उस पर बहुत ही गुस्सा आता है, मगर फिर भी मैं जानबूझ कर उसे कुछ नहीं कहता। मेरे ससुराल में शादी थी तो मुझे भी वहां जाना था। वहां पर बहुत से रिश्तेदार आये थे, वहां मेरी पत्नी ने अपनी एक रिश्तेदार से मिलाते हुए कहा- इसका नाम चांदनी हैं और हम इसको परीक्षा के बाद अपने पास ही रखेंगे। जब मैंने उस लड़की को देखा तो सच में देखता रह गया। उसके बोबे क्या माशा अल्लाह, और काया गजब अति सुन्दर काया थी उसकी, कि जो भी उसको देखे, देखता ही रह जाये। अचानक मेरी पत्नी की आवाज ने मुझे झकझोर दिया कि कहां खो गये। मैंने कहा- कहीं नहीं। मेरी पत्नी ने मुझे धीरे से कहा- अगर तुम नहीं चाहते उसको अपने यहां पढ़ाना ! तो मैं मना कर देती हूँ। मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट रहे थे, मैं कब मना करने वाला था, मैंने कहा -नहीं-नहीं मुझे कोई एतराज नहीं। जब तक मैं ससुराल में रहा तब तक मैं मजाक ही मजाक में उसके स्तन दबा देता, या नाजुक अंगों से छेड़छाड़ कर देता तो वह हंसकर भाग जाती। जब मैं वापस अपने शहर आया तो मुझे उसकी याद आने लगी, मगर मैं अपने मुंह से कुछ नहीं कहना चाहता था क्योंकि पत्नी को शक होने का डर था। पर ऊपर वाला शायद एक बार फिर मुझ पर मेहरबान था। मेरी पत्नी ने ही आगे होकर उसके शहर जाकर उसे लाने के लिये कहा। मेरा मन तो गार्डन-गार्डन हो गया। मैं व मेरी पत्नी उसके शहर गये और उसे ले आये। अब तो बस मौके की तलाश थी। वाह री किस्मत मेरी पत्नी को फिर अपने ससुराल २-४ दिन के लिये जाना था। पहले तो मेरी पत्नी ने कहा- मैं चांदनी को भी साथ ले जाती हूँ। फिर उसने खुद ही विचार बदल दिया कि वह बेकार परेशान होगी, २-४ दिन की ही तो बात है। मैं और चांदनी मेरी पत्नी को छोड़ने सुबह ६ बजे ही रेलवे स्टेशन गये और उसे छोड़ कर वापस आये। चांदनी ने आते ही कहा- जीजू चाय पीकर जाना ! मैंने उसका हाथ पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया और मस्ती करने लगा। यह सब ऊपर की मस्ती मजाक तो मेरी पत्नी के सामने भी करता था, मगर आज तो बस उसे चोदने का मन बना हुआ था। मैंने कहा- चांदनी, चाय-वाय बाद में बनाना, आओ थोड़ी देर बैठो तो। उसने कहा- जीजू, क्या बात है, विचार तो नेक हैं, आपके? मैंने कहा- विचार तो आपके जीजू के हरदम ही नेक होते हैं, बस आप ही नहीं समझती। और मैं अपने हाथों को उसके शरीर के नाजुक अंगों पर फिराने की कोशिश करने लगा। मैंने उसके वक्ष को पीछे से हल्के से दबाया तो वह कुनमुना गई और छुटने की नाकामयाब कोशिश करने लगी। आज मुझे लग रहा था कि चांदनी भी मुझसे चुदवाने को बेताब है। मैंने जब उसकी तरफ से मौन इशारा समझा तो अपने हाथों को धीरे-धीरे उसके नाभि-मण्डल पर ले गया और मेरे होंठों ने भी अपना काम चालू कर दिया था। मेरी तरफ उसकी पीठ होने के कारण मैंने उसकी गरदन को अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठों का रसस्वादन करने लगा। अब मेरा हौंसला भी बुलन्द होने लगा। मैंने उसके कुर्ते को थोड़ा ऊपर किया तो उसने कहा- नहीं जीजू यह सब नहीं ! अगर किसी को मालूम हो गया तो? मैंने चांदनी को समझाते हुए कहा- देखो जान ! इस घर में मेरे व तुम्हारे अलावा कोई नहीं है, तो किस को मालूम होगा और कौन बतायेगा कि हमने क्या किया। चांदनी मेरा मतलब समझ गई और चुप हो गई। अब मैं भी बिन्दास हो गया और चांदनी की कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर बोबों को दबाने व सहलाने लगा। चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम था तो उसमें डर और मजा दोनों का समावेश था। उसके मुख से रह रहकर सिसकारियाँ निकल रही थी- आ....ह........ जीजू............... मैंने चांदनी की कुर्ती को एक झटके में शरीर से अलग कर उसकी ब्रा को खोल दिया और बोबों को मुँह में लेकर चूसने लगा। चांदनी मदहोशी में आंखे बंद किये ही कहने लगी- जीजू ! ऐसे क्या करते हो ! तो मैंने कहा- चांदनी अभी तो बाकी है ऐसे-वैसे सब करेंगे, तुम बस महसूस करो और मजा लो। बोबों को चूसते हुए उसके नाभि-स्थल तक होंठों को फिराता हुआ लाया, नाभि से नीचे जाना चाह रहा था, मगर चांदनी का नाइट पायजामा और पेंटी दीवार बन कर खड़े थे। इधर चांदनी मेरी पीठ को सहला रही थी। मैंने चांदनी की पैंटी और पायजामा एक बार में ही खोल दिया और अपना मुँह चांदनी की गुलाबी चूत पर ले गया, चांदनी की गुलाबी चूत पर नाम मात्र के मुलायम बाल थे जो उसकी गुलाबी चूत की पहरेदारी कर रहे थे। मैंने अंगूठे से उसके पहरेदारों को एक तरफ किया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी सिसकारियाँ लगातार जारी थी- जी......जू..........ये क्या..........कर रहे....... हो..........आ.हहहहहह जी.....जू.........मजजजजजा आाा ररररहा हैं औररररर जोर सेससस चाटटो नााा गुलाबी चूत से रिस रिस कर नमकीन पानी निकल रहा था, उसे चाटने में मुझे भी मजा आ रहा था और शायद अब चांदनी को भी मजा आने लगा था। चांदनी अपनी गांड उठा उठा कर मुखचोदन करा रही थी। आधे घण्टे तक चूत चाटने के बाद हमारे लण्ड महादेव भी हुंकारने लगे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को व्याकुल होने लगे। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लण्ड निकाल कर चांदनी के हाथ में दे दिया। वह लण्ड देखते ही चिल्ला उठी- ये क्याऽऽऽ ? मैंने कहा- लण्ड। बोली- इतना बड़ाऽऽ? मैं मर जाऊंगी जीजू ! नहीं मुझे छोड़ दो ! मैंने उसे समझाया- जानू, तुम्हारी जीजी भी तो इसे लेती हैं, वो तो नहीं मरी। इसे मुँह में लो ! तुम्हें मजा आयेगा ! वह ना ना करती हुई मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी। धीरे धीरे आधा लण्ड मुँह में लेने के बाद मैंने उसके मुंह को चोदना चालू कर दिया। लण्ड चूसने में अब चांदनी को भी मजा आ रहा था। वो अब लण्ड को लॉलीपाप की तरह चूसने लगी। मैं पॉजीशन बदलते हुए ६९ की पॉजीशन में आ गया और अब वो मेरा लण्ड और मैं उसकी चूत चाटने लगा। करीब २०-२५ मिनट में चांदनी दो बार स्खलित हो गई और मैं अब होने वाला था। और मैं........... ये ........गया वो गया......... और अपना सारा माल उसके मुँह में उड़ेल दिया। और फिर आपस में चिपक कर हांफने लगे। थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आंखे खोली तो देखा कि चांदनी उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेरे आंख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब मेरी साली को जीजू से क्या चाहिये। मेरा लण्ड कब पीछे रहने वाला था, उसने तुरन्त सलामी ठोक दी और चूत पर जाकर पहरेदारों से भिड़ गया। आखिर जीत मेरे लण्ड की हुई और सारी दीवारें तोड़ता हुआ चांदनी की अनछुई गीली, चिकनी चूत में धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा क्योंकि मुझे मालूम था कि चांदनी पहली बार चुदने वाली हैं। जैसे ही लण्ड ने संकरे रास्ते में प्रवेश किया, चांदनी ने रोक दिया- नहीं जीजू ! दर्द हो रहा है ! और चिल्लाने लगी। मैंने सोचा अगर चांदनी की बातों में आ गया तो सारा किया धरा रह जायेगा और मैंने तुरन्त चांदनी के होंठों पर कब्जा कर एक लण्ड की तेज ठोकर लगाई और उसकी चिल्लाहट को होंठों से दबा दिया। मैंने महसूस किया कि लण्ड पर खून का फव्वारा छुट गया और वह हाथ पैर मारने लगी, मगर मैं अपने हाथों से उसके स्तनों को सहलाते हुए और होंठों से अब गाल, कान, गरदन वगैरह चूम कर उसे दिलासा देने लगा और धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा। उसका प्रतिरोध अब कम होता नजर आया और अब शायद उसे भी मजा आने लगा इसलिये गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी और मुंह से अनाप शनाप आवाजें निकालने लगी- जी......जू चो.......दो मुझे.............. चोद...........डालो ! वगैरह वगैरह। लण्ड और चूत की लड़ाई चालू हो गई थी, या यूं कहिये आपस में शास्त्रीय संगीत की प्रतिस्पर्धा चालू हो गई हो। क्योंकि लण्ड जैसे ही अन्दर जाता तो तबले पर पड़ने वाली थाप की आवाज आती और चांदनी के मुँह सिसकारियाँ निकलती। मतलब कि उस वक्त सरगम बज रही थी। १५-२० मिनट बाद मैंने चूत में लण्ड डाले डाले ही उसे घोड़ी बनाया और फिर चालू हो गया। इस दरम्यान वो २-३ बार झड़ चुकी थी मगर मेरा अभी ठिकाना नजर नहीं आ रहा था। मगर घोड़ी की पोजीशन में आते ही मुझे लगने लगा कि अब ज्यादा देर नहीं टिक सकूंगा और मैं भी १५-२० धक्कों के बाद उस पर ढेर हो गया और अपना सारा माल उसकी कोमल चूत में बहा दिया। देर बाद जब हम उठे तो उसकी नजर बिस्तर पर गई जहां खून ही खून और वीर्य उसका और मेरा दोनों का पड़ा था, जिसे देख कर वह डर गई और रोने लगी- जीजू ! यह क्या हुआ ? इतना खून निकल गया। मैंने कहा- साली साहिबा ! यह सब तो पहली बार में होता ही है ! और समझाने लगा। मैंने उस दिन ऑफिस फोन कर छुट्टी ले ली और उस दिन और उसके बाद जब तक मेरी पत्नी नहीं आई तब तक मैं चांदनी को लगातार चोदता रहा कभी घोड़ी-कुतिया तो कभी किचन में एक टांग पर। कुल मिलाकर चांदनी के साथ बिताये वो हर पल आज भी मेरी आंखों के सामने आते हैं तो बस उसे चोदने की इच्छा जागृत हो जाती है। उसके बाद हमें जब भी दिन में, रात में या जब भी मौका मिलता हम एक हो जाते। अब वो हमारे साथ नहीं रहती ! वो अपने घर चली गई, मगर उसकी याद अब भी दिल में बाकी है। यह कहानी आपको कैसी लगी, मेल करें। चोदे, चुदायें और लाइफ बनायें। संजय/पुष्पा sexy_pushpa@yahoo.com |
| Posted: 07 Mar 2013 04:54 AM PST ![]() हाय मैं सुरेश मेरी उम्र २० वर्ष है आपके लिये मै एक ऐसे स्टोरी लेकर आया हूँ जिसे पढकर आपका मन चोदने और चुदवाने का करने लगेगा मेरे घर में चार भाई है और मेरे पिताजी है माँ का देहांत तब ही हो गया था जब मेरी उम्र ९ साल की थी। मेरे दो भाई मुंबई में सॉफ्टवेर इन्जिनेअर है जबकि सबसे बड़ा भाई हमारे साथ ही जालंधर में रहता है। मेरे भाई की शादी हुई तो मैं बड़ा खुश हुआ कि जो माँ का प्यार माँ से नहीं मिला वह भाभी से मिल जायेगा। शादी के बाद भाभी हमारे साथ ही रहने लगी हम गाँव के सबसे बड़े परिवार से ह। पिताजी का धयान रखने के लिए नौकर तो था पर नौकर और घर के सदस्य में रात दिन का अंतर था। भाभी भी मुझसे मजाक किया करती। एक दिन की बात है मैं बाथरूम में नहाने जा रहा था तो मेने भाभी से मेरी अंडरवियर और बनियान मांगी। भाभी बोली कि देवर जी आप नहाना तो शुरू करो मैं ढूँढकर लाती हूँ मेने कहा ठीक है जब मैं नहा लिया और मैं केवल एक पतला सा टॉवेल लपेटकर खडा था तभी भाभी आई और बोली कि लो अपने अंडरवियर लो यह कहकर वो दरवाजे के बहार खड़ी होकर दूर से अपना हाथ दिखा रही मेने भाभी से अंडरवियर लेने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला भाभी ने दरवाजे में जोर से धक्का दिया और मेरे बाथरूम में घुस आई और मेरी कमर पर गुदगुदी करने लगी्। इस मजाक में वह हो ही गया जिसका मुझे डर था मेरा टॉवेल खुल गया और भाभी के हाथ में मेरा लिंग आ गया इसी बीच मैं शर्म के मारे बाथरूम से नंगा बाहर निकल कर भाग गया क्यूंकि उस समय घर पर मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं था इस बात पर मैं भाभी से इतना नाराज़ हुआ कि पूरा दिन बोला नहीं। पर शाम को वह मुझसे बोली कि सुरेश तुम मुझसे नाराज़ हो क्या तो मेने अपनी नाराजगी तोड़ते हुए न कहा दिया। अगले दिन जब मैं पढ़ाई कर रहा था तभी भाभी मुझसे बोली कि सुरेश मैं नहाने जा रही हूँ तुम कल की बात का बदला लेने की कोशिश मत करना, तो मैं बोला नहीं भाभी मैं तो उस बात को कबका भूल चूका हूँ। तभी नहाते हुए भाभी बोली कि सुरेश मुझे एक साबुन लाकर दो मेरा साबुन खत्म हो गया है मैं बोला अभी तो मैं दुकान जाकर साबुन नहीं ला सकता। भाभी बोली कि दुकान से लाने को थोड़े ही कह रही हूँ, मेरे ड्रोर में रखा वहीं से ला दो। जैसे मैं साबुन लेकर आया तो भाभी दरवाजे में से मुह निकालकर झांक रही थी तो जैसे ही मैंने जैसे ही हाथ बढाया तो भाभी ने साबुन लेने के बहाने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया और मैं बाथरूम में गिरने लगा तो भाभी ने हाथ पकड़कर मुझे संभाला तभी मेरा हाथ उनकी चूत पर पड़ गया। मैंने देखा कि भाभी बिलकुल नंगी खड़ी थी और उनके बूब्स बहुत बड़े थे और उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे और उनकी चूत पर बहुत बड़े बाल थे और उन बालो के कारण चूत भी ठीक से नहीं दिख रही थी। तभी मुझे अपन पेंट में कुछ रेंगने का अनुभव हुआ मैंने देखा जब तक तो भाभी मेरे पूरे कपडे (पेंट, अंडरवियर) दोनों उतार चुकी थी्। मैं भाभी के सामने बिलकुल निवस्त्र खडा था और भाभी मेरे लंड को बड़े मजे से चूस रही थी तभी भाभी ने नीचे लेट कर पोसिशन ६९ में आ गयी और अब वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उनकी न चाह कर भी उनकी बालो वाली चूत चाट रहा था थोडी देर बाद वह उठी और मुझसे अपना ७' लंबा लंड मेरी चूत में डालने को कहने लगी मैंने जैसे ही अपना लंड भाभी की चूत पर रख कर जोर से धक्का दिया वह भाभी की चूत में न जाकर वहां से फिसलकर पीछे की और सरक गया फिर भाभी बोली जानू ऐसे नहीं और फिर वह साबुन उठाकर अपने हाथ पर लगाकर मेरे लंड पर रगड़ने लगी फिर उसके बाद उन्होंने उतना ही साबुन अपनी चूत पर लगा दिया और फिर बोलीं कि जान अब धक्का दो जैसे ही मैंने जोर से एक धक्का दिया वह चिल्ला पड़ी आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईइह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फिर मैंने एक और झटका देकर पूरा लंड भाभी की चूत में समां दिया और अब उनका और मेरा शरीर आपस में रगड़ने लगे उस दिन भाभी ने मुझे जिन्दगी मैं पहली बार सेक्स करना सिखाया लेकिन उस सेक्स के बाद मुझे उस गलती पर बड़ा पछतावा हुआ और मैंने भाभी के कितना भी उकसाने पर ये गलती न दोहराने का संकल्प लिया। एक दिन जब मैं बाज़ार सामान लेने गया तो मुझे रास्ते जाकर ध्यान आया कि मैं पैसे लाना तो भूल गया हूँ। जैसे ही मैं घर पैसे लेने वापस आया तो देखा कि भाभी एक नौकर के साथ चिपकी हुई थी मुझे देख कर वह दूर हट गयी और फिर नौकर मुझे देख कर चला गया तभी मैंने भाभी से पूंछा तो वह कहने लगी कि तुम्हारे भैया तो बस काम के कारण बाहर ही रहते है उन्हें तो मुझे संतुष्ट करने का तो उन्हें कोई ख्याल नहीं रहता और तुम भी मेरे साथ एक बार सेक्स करके ही रह गए अब तुम ही बताओ ऐसे में मैं क्या करूं वह बोली तुम्हे तो मेरे साथ ........ ऐतराज़ है मै बोला ऐतराज नहीं है मैं इस काम को पाप समझता हूँ वह बोली कि तुम मुझे इस तरह खु्श करो कि तुमसे पाप भी न हो और मुझे मजा भी आ जाये। मैं बोला क्या सच में ऐसा हो सकता हैं वह बोली कि हाँ क्यूँ नहीं तो मैंने कह दिया ठीक है वो मुझे कमरे मैं ले गयी और मेरे होठ चूमने लगी तो मैंने मना किया तो वह बोली कि मैं तुमसे तुम्हारा लंड अपनी चूत में डालने को तो नहीं कह रही हूँ फ़िर उन्होंने मेरे पूरे कपडे उतार दिए फिर अपने कपडे भी उतार कर बैठ गयी और मेरा लंड जोर जोर से चूसने लगी तभी मेरी नज़र उनकी चूत पर गयी आज वह बड़ी सुंदर और चिकनी दिख रही थी अब मुझसे नहीं रहा गया और मैं अपना संकल्प भूलकर पोसिशन ६९ में आकर भाभी की चूत चाटने लगा। फिर भाभी ने मुझे उठाकर मेरा मुंह अपने बूब्स पर रख दिया फिर मैंने दोनों स्तनों से नीचोड़ नीचोड़ कर स्तनपान किया और कुछ देर बाद भाभी की दोनों टांगें विपरीत दिशा में करके उनकी चूत पर लंड फेरने लगा भाभी के मुह से आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊउह्ह्ह्ह्ह ईईईह्ह्ह्ह्ह्ह निकल पड़ा तभी मैंने भाभी की चूत पर एक जोर से झटका मारा तो भाभी और तेज़ और तेज़ कह कर मेरा साथ देने लगी मेरा जोश यह सुनकर दुगना हो गया फिर भाभी और मैं एक साथ स्खलित हो गए उस दिन मुझे पहली बार से भी ज्यादा आनंद आया अब भाभी और मैं जब भी हमें मौका मिलता है तब यह खेल खेलते है gauravyadav58@yahoo.com |
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