बदलते रिश्ते



अरे दीदी, इतना सामान उठा कर कहाँ जा रही हैं आप?” कोई पीछे से बोला तो मैंने पलट कर देखा।यह मेरे पापा के बचपन के दोस्त का एकलौता बेटा था।”लाइए, मैं आपको अपनी बाइक पर घर छोड़ देता हूँ।” उसने आगे कहा।अरे भैया, आप यहाँ क्या कर रहे हो?” मैंने पूछा।”कुछ नहीं दीदी, दोस्त की दूकान पर आया था लेकिन आप बाज़ार से क्या खरीद ले जा रही हो?” उसने पूछा।”कुछ खास नहीं भैया, आज कॉलेज में जल्दी छुट्टी हो गई थी तो मैंने सोचा घर जाते समय बाज़ार से कुछ किताबें खरीद लूं और मम्मी का फ़ोन आया था कि कुछ और सामान भी लेती आना ! वैसे मैं रिक्शा करने की सोच ही रही थी कि आप आ गए!’ मैं बोली।और हम उसकी बाइक पर हमारे घर की तरफ चल पड़े। दरअसल, मेरे पापा और उसके पापा बचपन के दोस्त थे, एक साथ पले-बढ़े और पढ़े-लिखे थे। हमारे परिवारों में बहुत अच्छे सम्बन्ध थे, हमारे घर भी पास-पास ही थे। मैं और मेरी छोटी बहन बचपन में अक्सर उनके घर खेलने जाया करते थे। हमारा कोई सगा भाई तो नहीं था पर इसे हम अपने सगे भाई से भी बढ़ कर मानते थे। उम्र में मेरी छोटी बहन और यह, दोनों ही बराबर थे और मैं इनसे चार साल बड़ी थी। तो इस वजह से यह हमेशा मुझे दीदी कह कर ही संबोधित करता था। हम दोनों बहनों की तो मानो यह जान ही था। मेरी बहन और यह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे, जबकि मैं कॉलेज में बीएससी कर रही थी।अब परीक्षा के दिन थे और कॉलेज में छुट्टियाँ शुरू हो रही थी। ये दोनों भी बारहवीं की बोर्ड-परीक्षा ख़त्म कर के छुट्टियाँ ही मना रहे थे।”अरे भैया, यह तो बताओ कि आगे कौन से कॉलेज में प्रवेश लेना है, इसके बारे में सोचा है?” मैं रास्ते में उससे बातें करती जा रही थी।”अरे नहीं दीदी ! अभी इतनी जल्दी क्या है। और आप तो वैसे भी जानती हैं कि जिस गली में हमारा घर है, उसके कोसों दूर तक भी कहीं विद्या नहीं बसती।” वो हँसते हुए बोला। “लीजिए आपका घर भी आ गया, आपको छोड़ कर मैं निकलता हूँ। आज शाम को हमारी क्रिकेट टीम का पड़ोस के मोहल्ले की टीम के साथ मैच है, तो थोड़ा इन्तज़ाम करना है और सभी लड़कों को इकट्ठा भी करना है।” मुझे छोड़ते वक़्त वो बोला।”क्या भैया, इतने दिनों के बाद आज दिखाई दिए हो और आज भी अपनी दीदी के साथ चाय पीने का वक्त नहीं?” मैं रूठने का नाटक करते हुए बोली।”सॉरी दीदी, पर आज नहीं, फिर कभी ! अच्छा चलता हूँ।” कह कर उसने अपनी बाइक दौड़ा दी।”कौन था दीदी?” मेरी बहन ने घर में घुसते ही पहला सवाल किया।”था अपना इकलौता भाई, जो मुझे बाज़ार से घर तक छोड़ कर गया है, पर जिसके पास अपनी बहनों के साथ बिताने के लिए दस मिनट का समय भी नहीं है।” मैं मानो शिकायत सी करते हुए बोली।”अरे अब वो बड़ा हो गया है। अब वो अपने दोस्तों में रहकर ज्यादा खुश तो होगा ही ना। अब तुम दोनों लड़कियों के बीच उसका क्या काम?” पीछे से मेरी माँ बोली।खैर उसके बाद हम सब अपने अपने कमरे में चले गए। हमारे घर में चार बेडरूम हैं। नीचे वाला एक मम्मी पापा के लिए और एक मेहमानों के लिए।मेरा बेडरूम मम्मी-पापा के कमरे के ऊपर है और मेरी बहन का दूसरे बेडरूम के ऊपर। हम दोनों बहनें एक दूसरे को जान से भी ज्यादा चाहती हैं पर कभी एक साथ नहीं सोई।घर में फालतू कमरे होने की वजह से हम सभी के अपने प्राइवेट रूम थे।लेकिन मेरी बहन के कमरे और मेरे कमरे के बीच में एक कॉमन ड्रेसिंग रूम था जिसका एक दरवाजा मेरे कमरे में और दूसरा दरवाजा मेरी बहन के कमरे में खुलता था।अब जैसे मैंने आपको बताया, कुछ दिन में पेपर शुरू हो रहे थे और अगले दिन से कॉलेज में भी छुट्टियाँ थी, तो मैं दिन में थोड़ा सो गई ताकी रात में थोडा देर तक पढ़ सकूं, जैसा कि मेरी आदत थी। अब रात को दो-तीन बजे तक मैं पढ़ती रही और फिर मैं लाइट बंद करके सोने के लिए लेट गई।मुझे लेटे हुए तक़रीबन आधा घंटा हो गया होगा पर मुझे पपेर्स के बारे में सोच कर अब थोड़ी टेंशन हो रही थी तो इस वजह से मैं सो नहीं पा रही थी।मैं शुरू से ही पढ़ाकू किस्म की लड़की थी। हमेशा स्कूल में अव्वल आने वाली कॉलेज में भी मैं पहले दोनों साल की टॉपर थी। पर इस बार हमारे कॉलेज में एक नई लड़की आई थी जिसके साथ मेरा जम कर मुकाबला था कॉलेज मेडल के लिए।इसलिए मुझे टेंशन के मारे नींद नहीं आ रही थी। लेटे लेटे मैं पपेर्स के बारे में ही कुछ सोच रही थी कि मुझे लगा जैसे कोई बातें कर रहा हो।”लो अब टेंशन के मारे मेरे कान भी बजना शुरू हो गए !” मैंने मन ही मन सोचा और मुस्कुरा पड़ी और सोने की बेकार कोशिश करने लगी।अभी लेटे हुए कुछ पल ही और हुए होंगे कि मुझे फिर से ऐसा लगा कि जैसे कोई बातें कर रहा हो। मैं बेड से उठी और खिड़की के पास जाकर मैंने गली में देखा तो वहाँ कोई नहीं था पर आवाजें आ रही थी। मैंने सोचा कि पापा को उठाती हूँ, कहीं कोई चोर ना हों।यह सोच कर जैसे ही मैं अपने कमरे के दरवाज़े की तरफ चली तो ड्रेसिंग रूम के दरवाज़े के पास से गुज़रते वक़्त मुझे लगा जैसे यह आवाजें मेरी बहन के कमरे से आ रही हो।मेरा माथा ठनका, यह माजरा क्या है? मेरी बहन किसके साथ बात कर रही है, और इतनी रात में उसके कमरे में कौन है? मैंने बड़े हल्के से अपने कमरे वाला ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खोला और दबे पाँव ड्रेसिंगरूम में घुस गई। मेरी बहन के कमरे वाला ड्रेसिंग-रूम का दरवाजा थोड़ा खुला था।शायद उसे भूल से खुला रह गया होगा।दरवाजा ड्रेसिंग रूम में अन्दर की तरफ खुलता था। तो मैं दीवार के साथ सट कर खड़ी हो गई और मैंने हल्के से खुले दरवाजे में से मेरी बहन के कमरे के अन्दर देखा। और अन्दर जो देखा वो देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गई और मेरी साँसें गले में ही अटक गई, मानो एक पल के लिए मैं सांस लेना ही भूल गई।कमरे में मेरी बहन के साथ कोई लड़का खिड़की के पास लिपटा खड़ा था और उसके होंठ मेरी बहन के होंठों के साथ एकदम सटे हुए थे।कमरे की सब लाइट बंद थी पर चांदनी रात की रोशनी कमरे को दीप्त करने में काफी थी।उनका लम्बा चुम्बन टूटा तो लड़का दबी हुई आवाज़ में बोला,”अरे डरती क्यों हो जान? मैंने तेरी दीदी को एक घंटा पहले अपने कमरे की लाइट बंद करते देखा था। अरे, अब तक तो वो सो गई होगी और पेपर्स में टॉप करने के अच्छे अच्छे ख्वाब देख रही होगी या फिर फ़ेल होने के भयानक सपने। अभी रात को 3 बजे वो कमरे में अँधेरा करके तो वो पढ़ नहीं सकती। या फिर वो उल्लू है?”यह सुन कर मेरी बहन के मुँह से हंसी छूट पड़ी जिसे उसने उसी पल दबा लिया। पर मुझे लड़के की आवाज़ कुछ जानी पहचानी सी लगी। “इश्क़ में आदमी क्या क्या पापड़ बेलता है। अब पेपर तुम्हारी बहन के हैं और नाइट शिफ्ट मेरी छोटी हो जाएगी। अब हर रोज रात को 3 बजे से पहले मैं तुम्हें मिल नहीं पाऊँगा और 4 बजे के बाद तुम मुझे घर में रुकने नहीं दोगी। तुम्हारा बाप जो सुबह-सुबह उठ जाता है सैर पर जाने के लिए !” वो शिकायत सी करते हुए बोला।”कुछ दिन की ही तो बात है। उसके बाद तो मैं फिर से हर रात पूरी रात के लिए तुम्हारी दुल्हन बन जाया करूँगी ना। तुम अब बातों में वक्त जाया ना करो और जल्दी से मेरे जिस्म की गर्मी को अपने पाइप के गाढ़े पानी से बुझा दो !” मेरी बहन बोली और उससे लिपट गई।वो दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। उसने मेरी बहन की गर्दन पर चुम्बन किया और उसके नाइट सूट के टॉप की ज़िप को खोला और अपने हाथों से उसके कंधों से सरकाने लगा और साथ साथ उसके नंगे कंधों को चूमने लगा। मेरी बहन ने उसकी टी-शर्ट पकड़ कर उपर खींच दी और उसने अपने दोनों हाथों से मेरी बहन के चूचों को मसल दिया और उसके होंठ चूसने लगा।मैं हक्की-बक्की सी ड्रेसिंग रूम में खड़ी सब कुछ देख रही थी। ड्रेसिंग रूम में अंधेरा था इस वजह से वो मुझे नहीं देख सकते थे, पर चाँदनी रात की वजह से खिड़की के सामने खड़े में उनके साए देख अच्छे से देख सकती थी। सिर्फ़ पहचान में नहीं आ रहा था तो वो जाना पहचाना सा लड़का। अब वो लड़का और मेरी बहन एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे। मेरी बहन ने उस लड़के का चेहरा अपने हाथों में ले रखा था जबके उस लड़के का एक हाथ मेरी बहन की पीठ पर मालिश कर रहा था जबकी दूसरा हाथ उसके चूतड़ों का जायजा ले रहा था।कुछ देर बाद उस लड़के ने मेरी बहन के होठों को छोड़ा और उसके स्तन चूसने लगा और उसके दोनों हाथ मेरी बहन की कमर पर आ टिके। फिर उसने बड़े प्यार से मेरी बहन की स्कर्ट की हुक खोल दी और उसकी स्कर्ट उसके पैरों तक सरक गई और वो लड़का मेरी बहन के स्तन चूसता हुआ नीचे की तरफ बढ़ने लगा। उसने मेरी बहन के पेट पर चुम्बन किया और फिर उसकी टाँगों के बीच में उसने अपना मुँह घुसा दिया और मुझे लगा जैसे वो उसकी योनि को चाट रहा हो।मेरी बहन के मुँह से हल्की सिसकारियाँ छूटने लगी जिन्हें वो बड़ी मुश्किल से ही दबा पा रही थी।”आहह ! मैं गई” उसके मुँह से दबी सी आवाज़ निकली।तो इस पर वो लड़का खड़ा हो गया और उसने फटाफट अपनी पतलून खोली और उतार फेंकी। मेरी नंगी बहन को उसने गोद में उठाया और पलंग की एक तरफ घूम कर उसने उसे पलंग पर लेटा दिया। इस बार एक पल के लिए उसका चेहरा चाँदनी में आया और उस पर एक नज़र पड़ते ही मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। यह तो हमारा मुंहबोला भाई था। मेरे पापा के दोस्त का बेटा। मेरी आँखों में उसी पल आंसू भर आए और मेरे मुँह से दर्द भारी चीख निकलते निकलते रह गई।”नहीं यह सच नहीं हो सकता। मैं ज़रूर पागल हो गई हूँ या फिर मैं यह कोई गंदा और निहायत ही घटिया सपना देख रही हूँ। यह नहीं हो सकता। यह तो मेरा प्यारा छोटा भैया है, यह तो मेरी प्यारी छोटी बहन का चहेता भाई है। यह मेरी बहन के साथ ऐसे… नहीं नहीं !एक ही पल में मेरे दिमाग़ में काई विचार दौड़ गये और मेरी आँखों से लगातार आँसू बहने लगे पर मैंने अपने मुख से एक सिसकी भी निकलने नहीं दी और यह गंदा कांड देखती रही। वो भी बेड पर मेरी बहन के उपर चढ़ गया और उसे फिर चूमने लगा।दोनों एक दूसरे को बड़े मज़े से अच्छी तरह चूस रहे थे। उसने एक हाथ से मेरी बहन की छाती मसलनी शुरू कर दी और उसका दूरा हाथ मेरी बहन की टाँगों के बीच उसकी योनि के पास कहीं अंधेरे में गुम हो गया। ऐसे लगा जैसे वो अपने हाथ को आगे पीछे कर रहा हो।क्या उसने अपना हाथ या फिर कोई उंगली मेरी बहन की योनि में डाल रखी थी? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था पर मेरी बहन के आहें अब थोड़ी ज़्यादा गरम और लम्बी और थोड़े उँचे स्वर की हो गई थी।”सस्स्शह! आहिस्ता” वो मेरी बहन से बोला।”उन्ह ! मेरी बहन के मुँह से हल्की की आवाज़ में एक मज़े से भारी आह निकली।वो पलंग से उतरा और उसने मेरी बहन को उसके पैरों से पकड़ कर पलंग के एक किनारे की तरफ खींच लिया। अब मेरी बहन का शरीर तो पलंग पर था पर उसके पैर फर्श पर थे। उसने मेरी बहन के पैरों को अलग किया और उसकी टाँगों के बीच बैठ कर उसकी योनि को चाटने लगा।यह सब देखते देखते मेरे आँसू अपने आप ही बंद हो गये थे और मेरा हाथ जाने क्यों अपने आप ही मेरे पेट के नीचे दोनों टाँगों के बीच के हिस्से पर जाकर कस गया था। उधर मेरी बहन अपनी सिसकारियों को दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। फिर अचानक चाँदनी रात के रोशनी में मैंने देखा के मेरी बहन की कमर एक पल के लिए थोड़ा हवा में उठी और फिर एक झटके के साथ फिर बेड पर गिर पड़ी।”औह ! मैं तो झड़ भी गई। जानू अब तो मेरे ऊपर चढ़ जाओ और मुझे चोद दो !” मेरी बहन जैसे उसके आगे गिड़गिड़ाई।”अरे जान, आपका हुकुम सर आँखों पर !” हमारा मुँह बोला बचपन का भाई बोला और उसने मेरी बहन को कमर से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठा कर बेड पर फिर हल्के से पीछे फेंक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। उसने अपना हाथ नीचे किया और उसमें एक पाइप सी पकड़ ली।”अरे बाप रे ! क्या यह सच में वही है जो मैं सोच रही हूँ? क्या ये वाकई में इसकी पेशाब वाली नली है जो इसके हाथ में है? पर यह इतनी बड़ी और इतनी मोटी कैसे हो गई? बचपन में तो मैंने जब भी इससे पानी के टब में नंगे नहाते देखा था तब तो बहुत छोटी सी होती थी !” मेरे मन में बिजली के जैसे काई विचार कौंधे।उसने अपने हाथ में पकड़ी वो मोटी सी पाइप जो शायद उसके पेशाब वाली पाइप ही थी उसे मेरी बहन की योनि के ऊपर टिकाया और मेरी बहन ने अपनी कमर के बल से अपने चूतड़ थोड़े हवा में उठाए और उसकी पाइप मेरी बहन की योनि में समा गई और वो मेरी बहन के ऊपर लेट गया। फिर उसने अपने चूतड़ ऊपर उठा उठा कर नीचे करना शुरू कर दिए जैसे वो अपनी पाइप मेरी बहन की योनि से बार बार अंदर-बाहर कर रहा हो।मेरी बहन हल्की सिसकारियाँ भरने लगी और कमरे में से अजीब सी आवाज़ आने लगी, जैसे कोई दूध से माखन निकल रहा हो और साथ में हल्के पटाखे जैसे आवाज़ें आ रही थी जो शायद दोनो की जांघें आपस में भिड़ने की वजह से आ रही थी।मेरे लिए ये सब कुछ नया था. मैं फाइनल इयर में पहुँच चुकी हूँ पर आज तक क़िसी लड़के ने मुझे छुआ तक नहीं है और ना ही अभी तक मेरा कोई बॉयफ्रेंड हुआ है। मैंने सेक्स के बारे में थोड़ा बहुत जो सुना वो ना चाहते हुए मेरी सहेलियों के मुँह से ही सुना है क्योंकि मैं बहुत ही शर्मीली किस्म की लड़की हूँ और सेक्स का नाम आते ही मुझे शरम आ जाती है और एक मेरी बेशरम बहन है जो धड़ल्ले से बिना किसी ख़ौफ़ के अपने ही मुँह बोले भाई से, जिसे हर साल वो बड़े चाव से उसके घर जा कर राखी बाँध कर आती है, उससे आधी रात में चुद रही है, और न ज़ाने ऐसा कब से हो रहा है।खैर कुछ देर बाद उनकी छप-छप धीमी हो गई और मेरी बहन के मुँह से एक ठंडी आ निकली और मेरा प्यारा भाई भी जैसे थक कर उस पर गिर पड़ा। पता नहीं इतना भारी भरकम शरीर मेरी पतली सी बहन अपने ऊपर कैसे टिकाए पड़ी थी। कुछ पल के बाद उन्होंने एक दूसरे को हल्का फ़ुल्का सा फिर से चूमा और फिर वो उठा, उसने फटाफट अपने कपड़े पहने और बोला- अच्छा जान, मैं चलता हूँ ! तेरे बाप के उठने का टाइम हो रहा है। पर तू वो गोली लेना तो याद रखती है ना जो मैं तेरे लिए केमिस्ट से लाया था। देखना कहीं तेरी एक भूल की वजह से मैं कुँवारा बाप बन जाऊँ !”अरे हाँ बाबा ! तुम घबराओ मत ! मैं गोली हर रोज टाइम से ले रही हूँ।” मेरी बहन बोली।”और उन्हें छुपा कर कहाँ रखा है जान?” उसने पूछा।”मुझे उन्हें छुपा कर रखने की एक अच्छी जगह मिल गई है। हमारे स्टोर में एक पुरानी अलमारी है जिसके निचले हिस्से में एक छेद है, जिसमे मैं वो छुपा के रखती हूँ।” मेरी बहन बोली।”ओके ! बाय डार्लिंग। कल फिर आऊँगा। म्म ! फ्लाइयिंग किस फेंकता हुआ वो लुच्चा मेरा मुंहबोला भाई मेरी बहन से बोला।उसके जाने के बाद भी बहुत देर तक ड्रेसिंग रूम में ही बैठी रही और सोचती रही कि यह सब क्या हो गया है। हमारा भाई ऐसा कब से हो गया और मेरी बहन इतना कब और क्यों बिगड़ गई। सोचते सोचते पता नहीं कितनी बार मेरी आँखों से आंसू बहे। जबकी मेरी बहन मज़े से अपने कमरे में अब नंगी सो रही थी। उसके कमरे से एक अजीब सी गन्ध आ रही थी जैसे कोई पुरानी बिजली की तार जली हो। ऐसी गन्ध कभी कभी मैंने मम्मी पापा के कमरे में से भी आती सूँघी थी। मैं उठ कर धीरे से अपने कमरे में चली गई पर मुझे नींद नहीं आई।अगले कई दिन तक मैं उस रात के बारे में ही सोचती रही। पहले तो मुझे बहुत गुस्सा था और जब भी हमारे वो कुत्ता मुँह बोला भाई हमारे घर आता था तो उसकी शक्ल देख करमेरा दिल करता था कि मैं उसका चेहरा नोच डालूं, पर एक अंजाने से डर की वजह से ना तो मैं उसे कुछ बोल पाई, ना अपनी बहन से कुछ पूछ पाई।बरसों के रिश्ते एक पल में इन दोनों बेवकूफों की ग़लती की वजह से टूट जाएँ और किसी की बदनामी ना हो इस बात के डर से यह बात मैं अपने घर वालों से भी ना कर पाई। मैंने उससे बात करनी ही बंद कर दी और अपनी बहन से भी अब कम की ही बात करती थी मैं और वो भी बड़े रूखे स्वभाव से।सभी मेरी इन हरकतों से हैरान थे पर सबको लगा कि शायद में पेपर्स की वजह से टेंशन में हूँ इसलिए ऐसा कर रही हूँ।पर आज तो पेपर भी ख़त्म हो गये थे और मैं आखिरी पेपर भी अच्छे से देकर हल्के मन के साथ घर की तरफ जा रही थी।अरे दीदी ! आपका पेपर कैसा हुआ?” मेरा लुचा मुँह बोला भाई फिर जाने कहाँ से रास्ते में टकरा गया। और आज उसके साथ एक दोस्त भी था।”तुमसे मतलब?” मैंने गुस्से से कहा और गुस्से से भरी साँसें छोड़ते हुए आगे बढ़ गई।”लगता है आपका पेपर अच्छा नहीं हुआ ! पर उसका गुस्सा आप मुझ पर तो ना उतारो दीदी। वैसे आप कुछ दिनों से मुझसे उखड़ी-उखड़ी हैं, अच्छे से बात नहीं कर रहीं। क्या बात है? मुझसे कोई ग़लती हो गई क्या?”वो बोला।”नहीं ! और प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो !” मैंने फिरे थोड़े उखड़े से मूड में कहा।”लगता है आप क़िसी बात से मुझ से नाराज़ हैं। प्लीज़ दीदी मुझे बताओ तो सही आख़िर बात क्या है?” उसने पूछा पर मैं चुप रही।”अच्छा चलिए, मैं आपको घर तक तो छोड़ दूँ!” वो बोला।”नो थैंक्स ! मैं अपने आप चली जाऊँगी” मैंने कहा और मैं आगे चल पड़ी।”क्या बात क्या है?” उसके दोस्त ने उससे पूछा।” क्या तुम लोगों में कोई प्राब्लम हो गई है? तुम तो कहते थे कि तुम्हारे परिवार के इनके परिवार के साथ अच्छे रिलेशन्स हैं। फिर बात क्या है?” उसका दोस्त आगे बोला।पर वो थोड़ा लाजवाब सा हो गया था और मुझे लगा कि कहीं बात बिगड़ ना जाए और कहीं हमारी परिवार के या मेरी बहन की कोई बदनामी ना हो जाए। यह सोच कर मैं बोली,”सॉरी भैया! मेरा मूड थोड़ा ऑफ है। मेरे पिछले कुछ पेपर पहले जैसे अच्छे नहीं हुए। मेरी बातों का आप बुरा मत मानना। आप प्लीज़ मुझे मेरे घर तक छोड़ दो।”मैं यह झूठ बोल कर उसके बाइक पर बैठ गई।”मैं दीदी को 2 मिनट में घर छोड़ कर आया। तू तब तक यहीं रुक !” मेरा लुच्चा भाई अपने दोस्त से बोला और उसने मोटरसाइकल मेरे घर की तरफ सरपट दबा दी।रास्ते में जहाँ-जहाँ वो ब्रेक लगाता मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धंस जाती। ऐसा पहले भी होता था लेकिन तब मैंने कभी ध्यान नहीं दिया था। मुझे लगता था कि यह आजकल के छोकरे इतनी तेज़ बाइक चलाते हैं कि पीछे वाला ब्रेक लगने पर आगे ही तो गिरेगा।पर आज जब जब उसने ब्रेक लगाए और मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धसीं तब गुस्से से मेरे शरीर के रोएँ खड़े हो गये। दिल करता था कि अभी बाइक रुकवा के नीचे उतर कर और इसे जम कर झापड़ लगाऊँ। पर मैंने कुछ ना कहा। सारे रास्ते चुप रही और अब उसने भी कुछ नहीं पूछा। घर पहुँचते ही मैं चुपचाप उसकी बाइक से उतरी और घर के अंदर चली गई और वो अपनी बाइक दौड़ाता अपने रास्ते चला गया।पेपर अच्छा होने की सारी बात मैं अब भूल चुकी थी और मेरी आँखों के सामने बार बार सिर्फ़ उसका और मेरी बहन का उस रात का भद्दा, नंगा और घटिया कामुक दृश्य घूम रहा था। मुझे इस बात पर रह रह कर गुस्सा आ रहा था कि एक छोटा सा प्यारा सा लड़का जिससे मैं और मेरी बहन अपने सगे भाई से भी बढ़ कर मानते थे, वो कैसे इतना लुच्चा, कमीना और गिरा हुआ इंसान बन गया जिसे अपनी मुँह बोली बहन के जिस्म का मज़ा उठाते हुए ज़रा भी शरम नहीं आई। कैसे उसने मेरी भोली भली बहन को बहका कर उसे इतनी नीच और गिरी हुई बना दिया। और तो और मुझे घर छोड़ने के बहाने नज़ाने कितनी बार उसने मेरी छातियों को अपनी पीठ पर रगड़ा है।मैं गुस्से से तिलमिला उठी और मन ही मन उससे कोसती हुई घर में दाखिल हुई।”आ गई बेटा पेपर ख़त्म कर के !” यह मेरी मौसीजी की आवाज़ थी।”अरे मौसीजी, नमस्ते ! आप कब आई?” मैं एक पल में सारा गुस्सा भूल गई और मेरी मौसीजी के गले से लिपट गई।बचपन से ही हम दोनों बहनों का हमारी मौसीजी से खूब गहरा प्यार रहा है।”बस आज ही मैके आई हूँ बेटी। तेरी नानीजी की तबीयत ठीक नहीं रहती तो सोचा उनकी खबर ले आऊँ। अब तुम लोगों के शहर आई हूँ तो अपनी प्यारी भाँजियों से मिले बिना कैसे रह सकती हूँ?” वो बोली।फिर अगले एक घंटे तक हम बहनें अपनी माँ और मौसी के साथ खूब बातें करते रहे।अब शाम हो रही थी तो मौसीजी मेरे नानीजी के घर जाने के लिए उठी तो उन्होंने कहा,”अरे तुम दोनों भी मेरे साथ तुम्हारी नानी के घर क्यों नहीं चलती। कल सुबह जब मैं वापिस जाने के लिए बस लूँगी तो तुम दोनों भी अपने घर वापिस आ जाना।”"नहीं मौसीजी, आज मैं बहुत थक चुकी हूँ। आज ही मेरे पेपर ख़त्म हुए हैं। मैं कुछ दिन आराम करके खुद ही आपके शहर कुछ दिन के लिए आ जाऊँगी” मैं बोली।”अरे छोटी, तू तो मेरे साथ वहाँ आज की रात रुक सकती है। वैसे भी तो तू मुझे अपनी स्कूटी पर वहाँ छोड़ने जा ही रही है।” मौसीजी ने मेरी छोटी बहन से कहा।”आ आ ! ठीक है मौसीजी मैं आज आपके साथ वहीं रह जाऊँगी क्योंकि मेरी ट्यूशन शुरू होने वाली हैं, जिस वजह से मैं आपके पास आपके शहर नहीं आ पाऊँगी।” छोटी ने थोड़ा सोच कर कहा।ट्यूशन का तो सारा उसका बहाना था। असली बात तो मैं जानती थी कि अभी तो वो सिर्फ एक रात के लिए अपने यार, हमारे हरामी मुँह बोले भाई से बिछड़ेगी पर अगर कहीं उसे मौसीजी के शहर जाना पड़ गया तो कई रातों की जुदाई बन जाएगी। मैं एक बार फिर गुस्से से भर गई और इस बार मुझे अपनी बहन पर गुस्सा आ रहा था। उस रात की घटना के बाद मैंने यह खास नोट किया था कि पेपर्स के दौरान जैसे ही मैं रात को पढ़ने के बाद अपने कमरे की लाइट बंद करती थी उसके एक आधे घंटे बाद वो लुच्चा लफंगा दीवार और छतें फांद कर मेरी बहन का बिस्तर गर्म करने उसके कमरे में पहुँच जाता था। हालाँकि उस रात के बाद कभी मैं उन्हे दुबारा यह सब करते देख नहीं पाई क्योंकि फिर कभी ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खुला नहीं मिला, पर दरवाजे पर कान लगा कर मैं सब सुन लेती थी। उनकी गरम सरद आहें, सिसकारियाँ और वो छप-छप की आवाज़, और मैं समझ जाती थी कि वो क्या कर रहें हैं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी बहन जो इतनी भोली बनती है वो इतनी गिरी हुई हरकत कर सकती है, उसे अपने मां-बाप की इज़्ज़त का ज़रा भी ख़याल नहीं आया। यह सब सोच कर मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया पर मैंने अपने आपको संभाला।”अच्छा बेटा, अभी मैं चलती हूँ पर तुम कुछ दिन बाद ज़रूर हमारे वहाँ आना !” मेरी मौसीजी जाते जाते बोली।”जी मौसीजी ज़रूर !” मैं मुस्कुरा कर बोली। और वो दोनों मेरी नानी के घर के लिए रवाना हो गये। खैर दिन ढला, शाम बीती और रात आई तो मैं टीवी देखने के लिए सोफे पर बैठी तो मुझे अपने नीचे कुछ पड़ा महसूस हुआ। मैंने उठ कर देखा तो पाया कि मेरी बहन अपना मोबाइल घर में ही भूल गई है। मैंने मोबाइल उठाया और उसे मेज पर रख दिया और टीवी देखने लगी। फिर अचानक मेरे दिमाग़ के विचार आया कि क्यों ना मेरी बहन के मोबाइल की तलाशी ली जाए। पता नहीं मैं क्या देखना चाहती थी पर मैंने मोबाइल उठाया, टीवी बंद किया और अपने कमरे में चली गई। रात के तकरीबन दस बज रहे थे और मेरे घरवाले सो रहे थे।मैं अपने कमरे में गई और अपने बेड पर लाइट कर मोबाइल का लॉक खोलने की कोशिश करने लगी। पर मैं यह पहले भी कई बार ऐसे ही मज़ाक में मेरी बहन के सामने कर चुकी हूँ पर मुझसे कभी लॉक खुला नहीं था और उसने कभी मुझे अनलॉक कोड बताया नहीं था। मैं कुछ देर ट्राई करती रही पर फिर मैं हार कर रुक गई। यह आज मुझसे खुलने वाला नहीं था। फिर अचानक मेरे दिमाग़ में आइडिया आया और मैंने अपने मुँह बोले भाई के नाम के अक्षरों वाले नंबर दबाए और तपाक से फोन खुल गया।”यस्स !” मेरे मुँह से जीत की खुशी की आवाज़ निकली। लॉक खुलते ही सबसे पहले मैं मोबाइल के इन्बोक्स में पहुँची और मेरी बहन को आए मेसेज पढ़ने लगी। सबसे ज़्यादा मेसेज उस हरामी के ही थे।और मेसेज थे इतने लुच्चे कि कुछ को पढ़ कर तो मैं भी शर्म से पानी पानी हो गई। एक मेसेज जो बार बार आया था वो था,”सब सो गये क्या मेरी जान? मैं आ जाऊ क्या?”मैं मन ही मन उस आवारा, घटिया इंसान को कोसने से ना रह सकी। उसके बाद मैंने मोबाइल का आउटबॉक्स देखा तो मेरी प्यारी भोली भाली बहन के लिखे हुए बद से भी बदतर घटिया चीप और लुच्चे मेसेज पढ़ कर मैं भी शरम से पानी पानी हो गई।एक मेसेज था,”जल्दी से आ जाओ मेरी जान, मैं मारे प्यार के मरी जा रही हूँ। मैंने ब्रा और पेंटी भी नहीं पहनी है ताकि तुम्हे ज़्यादा कपड़े ना उतारने पड़े। जल्दी आ जाओ अब अपनी जानू के पास। और कहो तो जो बाकी कपड़े पहने हैं वो भी उतार दूँ क्या। जल्दी आ जाओ वरना मैं दीवार फांद कर मोहल्ले के चौकीदार से चुदने चली जाऊँगी। छीः ! इतना गंदा मेसेज। इससे आगे तो मैं भी ना पढ़ पाई। खैर, अभी मैं मेसेज पढ़ ही रही थी के अचानक उसके मोबाइल पर एकदम से एक मेसेज आया और मैं डर के मारे कांप गई और मोबाइल मेरे हाथ से छूट कर नीचे गिर गया। मेरी साँस फूल गई, मानो मुझे क़िसी ने चोरी करते पकड़ लिया हो। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। फिर कुछ पल बाद मैंने अपने आपको संभाला और स्टडी टेबल पर पड़ा पानी पिया। थोड़ी साँस ठीक हुई तो कुछ हिम्मत कर के मैंने वो मेसेज पढ़ा।”सब सो गये क्या जान? बोलो तो अभी आ जाऊँ !” ये हमारे उस लफंगे मुँह बोले भाई का मेसेज था।शायद मेरी बहन ने उससे बताया नहीं था कि वो आज घर पर नहीं है। बताती भी कैसे, उसका मोबाइल घर पर है, मौसीजी के पास मोबाइल नहीं है और हमारे नानीजी के घर का फोन कल से डेड पड़ा था जो आज भी चालू नहीं हुआ था। मेरे दिमाग़ में एकदम से पता नहीं क्या आया और मैंने तपाक से उसके आउट बॉक्स में से एक मेसेज,” अभी थोड़ा रुकना जान। दीदी अभी जाग रही हैं। थोड़ी देर में आना।” उस लफंगे को सेंड कर दिया।यह मैंने क्या किया? मेसेज सेंड करते ही मैं घबरा गई मेरे होश उड़ गये। मैंने ऐसा क्यों किया? पता नहीं कहाँ से मेरे मन में ये ख़याल आ गया था कि आज इसे मैं घर में बुलाती हूँ और जैसे ही वो मेरी बहन के कमरे में घुसेगा मैं उसे तपाक से एक तमाचा मारूँगी और बत्ती जलाकर उसे बताऊँगी कि यह मेरी बहन नहीं मैं हूँ और उसे खबरदार करूँगी कि आइन्दा अगर उसने ऐसी कोई घटिया हरकत की तो मैं उसकी करतूतों की खबर हमारे और उसके घरवालों को दे दूँगी।यह सोच कर मैं कुछ संभली और मोबाइल साइड में रखा और अपने आप को संभालने के लिए और कपड़े बदलने के लिए ड्रेसिंग रूम में गई। ड्रेसिंग रूम की लाइट जला कर मैंने अपने आप को शीशे में देखा।मैं मेरी बहन की तरह ही गोरी चिट्टी और सुंदर लड़की हूँ। जब भी बन ठन कर क़िसी शादी मैं जाती हूँ तो मेरी उमर से छोटे लड़कों से लेकर मैंने बूढ़े बूढ़े लोगों को नज़रों नज़रों में मेरे कपड़े उतारते महसूस किया है। हमारे सब रिश्तेदार तो यह भी कहते हैं कि बड़ी छोटी से ज़्यादा सुशील ही नहीं बल्कि सुंदर भी है। अपनी सुंदरता छुपाने के लिए मैं जानबूझ कर चश्मे लगाती हूँ ताकि लड़के मुझे तंग ना करें। पर फिर भी बहुत सारे लड़के मेरे साथ बात करने को उतावले रहते हैं।अरे, एक दो बार तो कॉलेज जाते समय मुझे स्कूल के कुछ लड़कों ने भी बस में छेड़ा है। ऐसी पिटाई की थी मैंने उन लड़कों की अब तक उस बस में सफ़र नहीं करते जिसमें मैं बैठी होती हूँ।




 

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