The Role of Playful Sex Quotes in Enhancing Intimacy
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In the realm of intimate relationships, maintaining a healthy and vibrant
sex life is often a key component. To infuse a dose of excitement and
playfulne...
हिंदी सेक्सी कहानियां
हिंदी सेक्सी कहानियां |
| Posted: 13 Jun 2013 09:36 AM PDT गलती की सजा - 1 सुन्दरी बोली- सब करेगा? तू अंदर आ ! आज दिखाती हूँ तुझे किसी लड़की को नहाते हुए देखने का मजा ! उसने मुझे अंदर बुलाकर नंगा होने को कहा। मैं बोला- प्लीज़ छोड़ दो ! तो वो बोली- ठीक है ! तुम्हारे पापा को बोलती हूँ ! मैं बोला- मत बोलो ! फिर वो बोली- तो जो मैं कहूँ, वो कर ! मैं धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगा और नंगा हो गया। मुझे नंगा देख कर वो हंसने लगी। वो मेरे पास आई और मेरे लण्ड पर एक झापड़ मारा। झापड़ इतना जोर से मारा कि मेरा लण्ड फिर से उतना ही जोर से खड़ा होकर हिनहिनाता हुआ उसके हाथ को छू गया। अब क्या ! सुन्दरी बोली- वाह क्या लण्ड है ! मुझे चोदेगा क्या? मैं तो अंदर से खुश हो गया पर बोला- नहीं, मुझे छोड़ दो ! इस बार उसने मेरा लण्ड जोर से पकड़ लिया और बोली- नहीं चोदेगा? आज चल, तुझे तेरे बाप के पास इसी हालत में लेकर चलती हूँ ! मैं घबरा गया, बोला- ठीक है ! ठीक है ! आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूँगा। इसके बाद उसने मुझे कहा- चल बहनचोद, मुझे प्यार कर ! मैंने पहले डरते हुए सुन्दरी को बाँहों में भर लिया फिर उससे उठाकर लिटा दिया। जब मैं उसे बाँहों में भर रहा था तो मेरी छाती से उसकी नुकीली चूचियाँ टकरा रही थी जो मेरे लण्ड को और भड़का रही थी। अब तो मैं अपने को जन्नत के समीप पा रहा था। मैंने देखा कि सुन्दरी ने अपनी आँखें बंद कर ली हैं तो मैंने पहले उसके माथे को चूम लिया, उसके बाद उसके गालों को चूमने लगा। फिर क्या, सुन्दरी अपने आपे में ना रही और मेरे होठों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। मेरा जोश तो दुगना हो गया और मैं उसके होंठों को संतरे की फ़ांकों की तरह चूस-चूस कर पीने लगा। मेरा जोश इतना बढ़ गया कि मैंने उसके कमीज की जिप खोल दी और कमीज को उसके सरीर से आज़ाद कर दिया। अब उसकी काली ब्रा उसकी चूचियों को आधा ढकती नज़र आ रही थी। मैंने उसके पेट पर चुम्बन करते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। उसके बाद का दृश्य तो बेहद मनोरम था। मैं तो इतनी मस्त लौंडिया को अपने सामने नंगी पाकर फ़ूला न समाया। उसने काले रंग की चुन्नट वाली कच्छी पहन रखी थी जो उसकी बुर की सुन्दरता पर बादल की तरह मंडरा रही थी। मैंने उसकी बुर पर चूमना शुरु कर दिया तो मुझे बुर से पानी निकलता हुआ सा महसूस हुआ। सुन्दरी बोली- मेरे चन्दन राजा, आज मेरी बुर को फाड़ कर रख दे ! बहुत सताती है यह बहन की लौड़ी ! मैं यह सुनते ही बोला- सुन्दरी डार्लिंग, आज मैं अपने कुंवांरे लण्ड को तेरी बुर के लिए कुर्बान कर दूँगा। उसके बाद मैं उसकी गोरी-गोरी बाँहों को चूमने लगा और उसके पीठ पर किस करते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। और उसकी उठती-गिरती चूचियों को गौर से देखने लगा। सुन्दरी की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थी, वो अब चुदने को बेकारार थी। मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा, वो जोर से आ आ आ आह्ह हह हहह..... करने लगी। मैं रुका नहीं, एक चूची को दबाने लगा तथा दूसरी को चूसने लगा। वो अब धीरे धीरे आ आह हह हह ह...! उ उ उ ह ह ह .. सी सी ....! करने लगी। सच बोलूं तो उसके चूची से लग रहा था जैसे कुछ अमृत निकल कर मेरे मुख में आ रहा था और आकर मेरे लण्ड को और भी खड़ा होने के लिए उकसा रहा था। मैंने 10-12 मिनट चूचियाँ को चूसने के बाद पेट को चूमना शुरु कर दिया और फिर धीरे से कब और नीचे चला गया, पता नहीं चला। मैंने सुन्दरी को उसकी कच्छी से आज़ाद कर दिया। वाह ! मैं सुन्दरी की बुर को इतनी पास से देख कर पागल हो गया ! कसम से पूरी बुर क़यामत ही लग रही थी और बुर के गुलाबी छेद के साथ भूरे रंग का गाण्ड का छेद तो क्या कयामत था ! मैंने उसकी गाण्ड मारने का भी सोच लिया। मैं उसकी बुर को सहलाने लगा। सुन्दरी पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुख से अचानक ही निकल पड़ा- और चूस ले मेरे चन्दन राजा आज इसे, मुझे तृप्ति दे दे ! मैं बुर के पास उगे हुए बालों को हटाते हुए छेद में उंगली डालने लगा। वो उई ... माँ आ अ आ .....! आह य या हह हह हह...... करने लगी। मैं उसकी चूत में उंगली घुसा कर बुर के दाने को चूसने लगा। सच बोलूं तो उसके दाने से अजब सा स्वाद आ रहा था जो मुझे बहुत अच्छा लगा। जीवन में पहली बार ऐसा स्वाद मैंने लिया था। उसकी चूत से हल्का-हल्का पानी रिसने लगा जो गाढ़ा और चिपचिपा था। फिर मेरी तृष्णा और बढ़ने लगी और मैं सुन्दरी की चूत को चूसने लगा और सुन्दरी जोर से सिहर-सिहर कर सिसकारियाँ भरने लगी- आह आ आ हह हह हह ह...! ऊ ऊ ओह ह ह ह ह हह ह ह ! माँ आ ई इ इय ई ई य ई य इ ई इ ....! मार दिया आ अ अ अ अ....! खा जाओ....! और चूस ! चूस चूर कर इसका रस निकाल दे....! मैं गाण्ड पर कुछ ज्यादा मर मिटा था.....! मैं सुन्दरी की गाण्ड को भी चाटने लगा और जीभ को गाण्ड के भूरे छेद में घुसेड़ने का प्रयत्न करने लगा। वो गाण्ड उचका-उचका कर चिल्लाने लगी- अब और देर मत कर ! चोद दे, मैं पागल हो जाऊँगी ! लेकिन मैंने अपना खड़ा लण्ड जो लगातार लार बहा रहा था, उसके मुख में डाल दिया। वो झट से उसे चूस-चूस कर पीने लगी। मेरा लण्ड उसके मुख को चोदने लगा। फ़िर 5 मिनट चूसने के बाद बोली- मैंने तुझे बुर चोदने के लिए बोला था, मुंह नहीं ! हरामी कहीं के ! चोद मेरी चूत को ! यह सुनते ही मैंने अपना लण्ड उसकी बुर के मुख पर रखा और रगड़ने लगा। वो अपनी बुर उचकाने लगी। मैंने मौके की नजाकत को देखते हुए एक बहुत ही जोरदार धक्का लगाया और आधा लण्ड उसकी बुर में उतार दिया। वो बिलबिलाने लगी- ....मैया री मैया.... !मार दे रे आज .....! बड़ी फ़ड़ाफ़ड़ा रही थी....! और जोर से मार.....! मेरा जोश दुगना हो गया और मैंने पूरे जोर से धक्का मारा और पूरा लण्ड उसकी बुर में था। अब वो सिसकार कर बोल रही थी- बड़ा दर्द हो रहा है ! पर तू रुकना मत ! जोर जोर से चोद ! चिथड़े-चिथड़े कर दे मेरी बुर के.....! ओह्ह हह ह हह......! मैं भी अपने सुपारे में थोड़ी जलन महसूस कर रहा था लेकिन मजा बहुत आ रहा था। मेरा काला 7 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा लण्ड आज गोरी चूत को चोद रहा था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे, सुन्दरी भी मेरा साथ देने लगी। सुन्दरी की प्यासी चूत को मैं तृप्त कर रहा था, सुन्दरी उचक-उचक कर मेरा साथ दे रही थी और मनमाफिक लण्ड अपनी चूत में पिलवा रही थी। सुन्दरी बोल रही थी- मेरे चन्दन राजा आज बजा दे मेरी बुर का बाजा ! लण्ड से मेरी बुर को खोद दे ! हह हह ह....! ओऊ ओऊ ओ .....ई ई य य या अ अ ....! मैं भी कम नहीं था- यह लो मेरे लौड़े का वार ! आज चोद चोद के तुझे रानी बना दूंगा ...! ये ले .....संभाल इसे ...सुन्दरी डार्लिंग ....! चोद-चोद के तुझे आज ही माँ बना दूंगा ! सुन्दरी भी और जोर से धका देने लगी- चोद मेरे राजा चोद ........फाड़ दे आज मेरी बुर को ! तेरे लण्ड को नहीं छोड़ूंगी...... आज या तो तेरा लण्ड रहेगा या मेरी बुर .........! मैंने इस बार दांत को पीसते हुए बहुत ही घातक प्रहार किया, सुन्दरी बिलबिला गई- माय...! चोद मेरे रजा ..... मेरा लण्ड उसकी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा था, उसे और भी मजा आने लगा और वो बुर को और भी ऊपर उठा कर पूरा लण्ड को हड़पने लगी। 10-15 मिनट बाद वो जोर से बोलने लगी- जोर से चोद मेरे राजा ! मैं झरने वाली हूँ ... मैं भी अपने चरमसीमा पर पहुँच चुका था, मैंने भी जोर से धक्के लगाने शुरु कर दिए और बोला- ये लो मेरी सुन्दरी रानी, आज अपना अमृत, पुरुष शक्ति तेरी बुर देवी को समर्पित करता हूँ ....! सुन्दरी बकती रही- ओह्ह ह्ह्ह ह्ह्ह .....! और जोर से.... और जोर से मेरे राजा ! फाड़ दे ! फाड़ दे ......आ आ अ आ हह ह हह ....! मैं झड़ी....ओह्ह ह्ह्ह हह ह... आह्ह हह हह ह !!!! वो झर चुकी थी, मैंने भी कुछ धक्कों के बाद अपना लण्ड रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। आपका चन्दन ssm4321@gmail.com |
| Posted: 13 Jun 2013 09:04 AM PDT कुछ दिनों पहले हमारी पुरानी कामवाली भगवान को प्यारी हो गई। तो मम्मी ने एक नई कामवाली रख ली, जिसका नाम शीला है। पुरानी कामवाली तो एक बुढ़िया थी, लेकिन शीला एक जवान नेपालिन थी। उसका पूरा बदन काफी छरहरा था। विशेषकर उसकी कमर बहुत ही पतली और लचीली थी। उसके चूतड़ देखकर ही उन्हें मसलने का दिल करता था। उसके होंठ काफी भरे हुए थे। उसका बदन बिना किसी हेयर-रिमूवर के ही बिना बालों के, चिकना था। हालाँकि उसकी चूचियाँ कुछ ख़ास नहीं थीं लेकिन फिर भी उनमें एक अजीब सा आकर्षण था। जब भी वह काम कर रही होती तो मैं उसकी पसीने से भींगी हुई पीठ देखा करता था। धीरे-धीरे मुझे वह अच्छी लगने लगी (मेरा मतलब उसका जिस्म भाने लगा।)। लेकिन वह सामान्यतः बड़ा रूखा व्यवहार करती थी। वह मुझे उस नज़र से नहीं देखती थी जिस नज़र से मैं उसे देखा करता था। इसलिए मैं मन-ही-मन उसे अपने जाल में फँसाने की तरक़ीब सोचता रहा और अन्ततः एक दिन मुझे सही तरक़ीब मिल ही गई। शाम का समय था, मेरे सिवा घर के सभी लोग सो रहे थे। शीला काम कर रही थी। मैंने सोचा अपनी चाल चलने का यह सही समय है। शीला हमारे बाहर की गैलरी में झाड़ू लगा रही थी। मैं चुपके से गया और १०० रुपए का एक नोट फर्श पर गिराकर छिप गया। झाड़ू लगाते-लगते जब शीला की नज़र १०० के नोट पर पड़ी, तो उसने आस-पास देखा और वह १०० का नोट उठाकर अपनी ब्लाऊज़ में डाल लिया। इस पर मैं एकदम से बाहर आ गया और उससे कहा, "मैंने सब देख लिया है, तुमने मेरा १०० का नोट उठा लिया है, तुमने चोरी की है।" इसपर वह घबरा गई, "जी? मम्म्म...मैंने... तो कुछ नहीं... उउउ?उउ?ठाया" "झूठ मत बोलो, मैंने तुम्हें नोट उठाते हुए अपनी आँखों से देखा है, मैं अभी मम्मी को बुलाता हूँ।" "ऐसा मत करो!... मेरी नौकरी चली जाएगी।" "तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए।" "मुझे माफ़ कर दीजिए! आईंदा ऐसा फिर कभी नहीं होगा।" "बिल्कुल नहीं, मैं मम्मी को बुलाता हूँ, तुम्हारी नौकरी जाएगी, बदनामी होगी तभी तुम्हें अक्ल आएगी।" "देखिए, मेरी बद़नामी होगी तो मुझे कोई भी नौकरी नहीं देगा।" "तो मैं क्या करूँ?" "मुझे माफ़ कर दीजिए।" "क्यों माफ़ कर दूँ?... इससे मुझे क्या मिलेगा?" "तुम्हारा अहसान होगा! मैं ग़रीब आपको क्या दे सकती हूँ?" "तुम्हारी नौकरी बच सकती है अगर तुम मेरे कुछ काम कर दो तो!" - मैंने पासा फेंक दिया था। "यहाँ कोई हमारी बातें सुन लेगा, तुम काम करने के बाद छत पर आ जाओ।" - मैंने आगे कहा "ठीक है।" फिर शीला कुछ ही देर में छत पर आ गई। "हाँ! क्या कह रहे थे तुम?" - आते ही उसने पूछा। "अगर तुम मेरे लिए कुछ काम कर दो तो तुम बद़नाम और बेरोज़गार होने से बच सकती हो।" "कैसे काम?" "मेरी ज़रूरत पूरी कर दो।" "कैसी ज़रूरत?" "मैं बहुत प्यासा हूँ! आज बुझा दो मेरी प्यास।" "तुम्हारा मतलब है, मैं तुम्हारे साथ वो गन्दे काम करूँ? देखो, यह बात ठीक नहीं है।" "हाँ, और जो तुमने १०० रुपयों की चोरी की, क्या वह बात ठीक है? देख लो... सोच लो... मुझे मम्मी को.. और मम्मी को पूरे मुहल्ले को इकट्ठा करने में समय नहीं लगेगा।" यह कहकर मैं उसके बद़न के बहुत क़रीब आ गया, "देखो, मुझे तुम्हारी सबसे अच्छी चीज़ तुम्हारी कमर लगती है! वैसे तो तुम पूरी तरह चिकनी हो, पर तुम्हारी कमर कुछ ज्यादा ही चिकनी है।" "एक काम करने वाली तुम्हें चिकनी लगती है?" "हाँ... मुझे अपनी कमर चूमने दो, तो शायद मैं तुम्हारी चोरी की बात भूल जाऊँ।" "क्या...? मेरी कमर चूमना चाहते हो?... ठीक है, लेकिन फिर १०० रुपये वाली बात किसी से नहीं कहोगे?" "नहीं कहूँगा... तुम यहाँ लेट जाओ।" "ठीक है... लेकिन ज़रा ज़ल्दी करना... कहीं तुम्हारे घर वालों में से कोई जाग ना जाए।" वह फिर लेट गई और मैं उसकी कमर चूमने लगा। फिर मैंने उसकी नाभि चाटनी शुरू कर दी - "तुम ज़रा उल्टी हो जाओ, मुझे तुम्हारी पीठ बहुत अच्छी लगती है - ख़ास कर जब पसीने में भींगती हो तो..." "हाय रब्बा..., तुम मुझे छुप कर देखते रहते हो क्या?" "हाँ!" - मैं उसकी पीठ चाटने लगा। उसे पसीना आ रहा था और मैं उसका पसीना चाट रहा था। "तुम्हारा पसीना बहुत स्वाद दे रहा है।" "तुम कैसे हो? तुम्हें मेरा पसीना अच्छा लग रहा है?" "हाँ.. अब तुम सीधी लेट जाओ।" "लो... सीधी लेट गई! जल्दी करो>" "अपनी साड़ी का पल्लू हटाओ।" "नहीं। तुमने कहा था कि तुम कमर चूमोगे।" "मम्मी को लगाऊँ आवाज़ और बताऊँ कि तुमने चोरी की है।" "नहीं... नहीं... हटाती हूँ पल्लू।" फिर उसने अपना पल्लू हटा दिया, मैंने उसका पूरा पेट चाटना शुरू कर दिया। मुझे लड़कियों की काँख बहुत आकर्षित करतीं हैं, बड़ी अच्छी लगतीं हैं। मैंने उसके पेट पर हाथ फेरा और कहा - "चलो, अब अपनी बाँहें ऊपर करो।" "क्या? तुम तो बहुत अजीब हो... लो।" मैं उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से ही उसकी काँख चाटने लगा, उसकी ब्लाऊज़ काफ़ी गहरे गले की थी। "तुम्हारी ब्लाऊज़ इतने गहरे गले वाली क्यों है? "क्या है?" "मतलब तुम्हारी ब्लाऊज़ मे इतनी गहराई क्यों है?" "मुझे ऐसे ही अच्छे लगते हैं।" "और मुझे तुम्हारी ब्लाऊज़ की गेन्दें अच्छी लगतीं हैं। चलो अपनी ब्लाऊज़ उतारो और मुझे उनसे खेलने दो।" "तुम बहुत आगे बढ़ रहे हो।" "इसे तुम अपनी चोरी की सज़ा समझ सकती हो! आज मैं जो कहता हूँ, करो तो मैं किसी से भी कुछ नहीं कहूँगा।" "ब्लाऊज़ के हुक सामने ही लगाए हैं, खोल लो।" फिर मैंने उसकी ब्लाऊज़ के हुक खोल दिए। उसमें से मेरा १०० रुपयों का नोट निकला - "ये रहा मेरा १०० का नोट।" "इसे मेरे पास ही रहने दो। आख़िर इसकी वज़ह से ही तो यह सब करवा रही हूँ।" उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी। मैं उसकी चूचियाँ अपने हाथों से मसलने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा था - "मसलोगे भी, या चूसोगे भी? लेकिन जल्दी।" मैंने उसकी घुण्डियों को मुँह में लिया और चूसने लगा - "आआआआहहह... चूसो। चूसो इन्हें.. दबाओ... मसल डालो। आहह्ह्ह्हहहह।" कुछ देर तक तो मैं उसकी घुण्डियाँ चूसता रहा। फिर उसने ख़ुद ही मेरा सिर पकड़ कर अपनी साड़ी ऊपर कर के, मेरा सिर अपनी टाँगों के बीच रख दिया - "असली जगह तो यहाँ है। चूसो मेरी योनि को... चाटो इसे।" "नहीं, पहले तुम अपनी साड़ी उतार दो। मैं तुम्हारे चूतड़ देखना चाहता हूँ।" "साड़ी नहीं उतारूँगी।" मैं साड़ी पूरी ऊपर कर लेती हूँ। लेकिन तुम मेरी योनि चूसते रहो।" "क्या सिर्फ मैं ही चूसूँगा? तुम मेरा कुछ भी नहीं चूसोगी?" "ओफ्फ्फोह। पहले तुम मेरी योनि चूसो, फिर मैं तुम्हारा हथियार चूस दूँगी।" "नहीं, हम दोनों एक साथ चूसेंगे। "वो कैसे?" फिर हमदोनों 69 की मुद्रा में आ गए। "आहह... आहह्ह्ह। तुम मेरे राजा हो। मेरी योनि के राजा।" "तेरी योनि और गाँड पर सौ-सौ के सौ नोट क़ुरबान।" काफ़ी चूसने के बाद वो बोली - "बस राजा बस... अब डाल दो अपना हथियार मेरी चूत में, और मार लो मेरी।" मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत काफ़ी सँकरी थी। उईईई माँआआआआ... मर गईईईई... ओओओहहहह... ओओह। इतना मोटा लण्ड मेरी नाज़ुक चूत में डाल दिया... थोड़ा धीरे-धीरे डालो।" "मेरी रानी की चूत कितनी टाईट है।" "आआहहह.... आआआ.. . मेरे राजा... मेरी गाँड इससे भी अधिक टाईट है।" - उसने मुझे आँख मार कर कहा। फ़िर बाद में मैंने उसकी गाण्ड भी मारी ! sexyboy.900@rediffmail.com |
| Posted: 13 Jun 2013 08:14 AM PDT आजकल सोशल साईट का जमाना है ... मेरी प्रोफाइल पिक्चर देख कर सब लोग मेरे फ्रेंड बनना चाहते थे। मैं नाम से सेक्सी श्रेया आहूजा और फिगर तो पंजाबन वाली लम्बे बाल गोरा चिट्टा रंग ...पीले रंग की टॉप में गोल गोल मम्मे और वक्ष-रेखा पर तिल ! नीचे शॉर्ट-स्कर्ट.. गोरी-मोटी चिकनी जांघें एक के ऊपर एक रखी हुई.. जरा ध्यान से फ़ोटो बड़ी करो तो पैंटी का रंग भी दिख जाये ... यह थी मेरी फ़ोटो दिल्ली की बात है कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो रही थी और जवानी करवट बदल रही थी .. दोस्तों के साथ बात करते वक़्त पैंटी गीली हो जाया करती .... जोजो मुझे साईट पर मिला था उस रात मैंने जोजो को बोल ही दिया- तुम फोन सेक्स करते हो ! चोदोगे कब ?... मेरा बदन तड़प रहा है ... जोजो मेरा जू्नियर था ... पतला दुबला पर लम्बे लंड वाला ... उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया अगले ही दिन ... लड़कों का लॉज था ... कमरा छोटा था ... एक बिस्तर था, मैं बिस्तर पर बैठ गई, वो मुझे चूमने लगा। दिन का समय था, बाहर लड़कों का शोर आ रहा था .... मैं : कोई आ गया तो ? बाहर चलते हैं किसी होटल में ... जोजो : डार्लिंग ! कोई नहीं आयेगा ... लेट्स हैव फन ! उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार उतार दी और मेरी गर्म-गर्म जांघों को मसलने लगा ... ब्रा का हुक खोला और पैंटी भी सरका दिया बिल्कुल नंगी कर दिया। हमने दो दो जाम वोडका शोर्ट्स लगाये और उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया ... जैसे वो मेरे ऊपर आने लगा मैंने देखा दो चार लोग रोशनदान से हमें देख रहे थे। मैं : वाट द फ़क .... जोजो ! हमें वो देख रहे हैं ! जोजो : देखने दे ! कौन सा चोद रहे हैं तुझे ! ... हॉस्टल के लौंडे है उन्हें भी तो पता चले कि मैं कितना बड़ा स्टड हूँ ! कम ऑन बेबी ! उनमें से एक मोबाइल से मेरी फोटो ले रहा था ... दूसरा मुठ मार रहा था। एक लड़का : अरे गुरु ! गांड दिखा लौंडिया की ... चूचियाँ तो मस्त हैं इसकी ! जोजो : हैं ना मस्त माल ! तू देखता जा ... यह देख इसकी गांड ... चोदेगा?? लड़का : एक बार दरवाज़ा खोल दे ...बहुत चोदेंगे... साईट से इसी को टिकाया है ना गुरु ?? मैं बहुत डर गई, नशे में थी पर समझ सब रही थी... कहीं सब आ जायें तो .... मैं : जोजो, लीव मी ! जाने दो .... दूसरा लड़का : कुतिया बना के चोद ... घुसा ना ! जोजो ने मुझे घुमाया और घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया ! ई ई बस्स ओह्ह अहह अह्ह्हह्ह अह्ह्ह ! मैं बुरी तरह चुदने लगी अब कंट्रोल नहीं रहा ... ऐसा लग रहा था दुनिया मुझे नंगे चुदते हुए देख रही थी ... दारू और सेक्स का नशा सर चढ़ गया था ! मैंने कभी नहीं सोचा था इस तरह लोग मुझे देखेंगे ... जोजो ने मुझे धोखा दिया था ! मेरी बुर पानी छोड़ रही थी .. मज़ा भी आ रहा था तीसरा लड़का : यार जोजो ! इधर घूम जा ! वीडियो मस्त आयेगा ... एक टांग उठा कर चोद ! जोजो ने मेरी एक टांग उठाई और लंड अन्दर बाहर करने लगा। मैं : बस जोजो अह्ह्ह दर्द हो रहा है .... जाने दो जोजो : अगर अच्छे से नहीं चुदवाओगी तो दरवाज़ा खोल दूंगा ! पूरा हॉस्टल चोदेगा ... ! चल वीडियो बनवा जैसा वो बोले ! सुनती जा समझी ! आज कोई रास्ता नहीं था ! मैं फंस चुकी थी ... बस इन्तज़ार कर रही थी ... कब वापस जा पाऊँगी .... वीडियो वाला लड़का : ओई लौंडी बुर दिखा इधर ... ऐसा हाँ ! मैं : ऐसे न ... यह देख .. गुलाबी है अन्दर इसके ! और क्या देखेगा बोल मादरचोद ! लड़का : हाँ अपने मम्मे मसल ... यार जोजो ! इसकी गांड भी मार ! जोजो मेरी गुदा में अपना लंड घुसाने लगा ! आह्ह्ह ईई आह्ह्हह्ह जोजो नो ... मेरी गांड चुद रही थी बहुत दर्द हो रहा था ! लड़का : वाह ! मार धक्के जोर जोर से ! मार ! चीख साली ! जोर जोर से .... लातें फैला ... अपने बुर में ऊँगली अन्दर-बाहर कर ! वो जैसा बोलता गया मैं करती गई ... एक लड़के ने अपना मुठ रोशनदान से अन्दर गिरा दिया। लड़का : ओये जोजो ! इसके मुँह के अन्दर गिरा ! और तू पी जाना सारा माल ... ओके जोजो ने मेरा मुँह खोला, लंड घुसाया और अपना नमकीन पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया ... उफ़ मुझे निगलना पड़ा ! मैं नंगी जोजो के पैरों में गिर गई ... अब मुझे वापस पहुँचा दो ... लड़के : इसे सेव करता हूँ वाट दा फ़क के नाम से ... और दरवाज़ा खोल हमें भी मौका दे मैं रोने लगी ... जोजो को दया आ गई .... जोजो : बस तीन लोगों के साथ ओरल कर ले... वो मुझे नंगी ही कोरिडोर के तरफ खींचने लगा ... अगर इस तरह बाहर जाती तो न जाने कितने लोग चोद देते मैं : आई लव यू जोजो ! तुम जितना कहो सेक्स करुँगी पर इनसे नहीं करुँगी ! जोजो तो तरस आ गया ... उसने मुझे कपड़े पहनाये ... बाइक पर छोड़कर आया अगर कोई एम एम एस ' वाट दा फ़क' के नाम से मिले समझना कि वो आपकी श्रेया की है ... मैंने फिर जोजो का फ़ोन नहीं उठाया ... आपका फोन ज़रूर रिसीव करुँगी पर आप तो ऐसा धोखा नहीं दोगे ना ?? shreyaahujacool1@rediffmail.com |
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