हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


नींद का बहाना

Posted: 07 Jun 2013 01:27 AM PDT



मैं उस समय लगभग अट्ठारह साल की थी, तब का यह किस्सा है। मेरे माता-पिता किसी की शादी में बाहर गए हुए थे।

उस दिन मैं एक सेक्सी प्रोग्राम टीवी पर देख रही थी। उसमें एक लड़का लेटा था तथा एक लड़की उसके पास बैठ कर उसके बदन से मस्ती कर रही थी। फिर लड़की ने अपना कुरता खोल दिया, अब वो ब्रा में थी। फिर लड़के से उसने अपनी ब्रा का हुक खुलवा लिया। फिर लड़की ने लड़के के कमीज के सारे बटन खोल दिए। अब लड़का उसके स्तनों से खेलने लगा। लड़की को बड़ा मजा आ रहा था, लड़के का लंड भी उठ गया था तथा वो ऊपर को तन गया था। लड़के ने लड़की की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया। अब लड़की ने भी लड़के की पैंट के बटन खोल कर उसकी चड्डी में हाथ डाल दिया।

मैं यह सब देख रही थी तथा बहुत मजा आ रहा था। मेरी भी चूत अभी गीली हो रही थी। मैंने अपनी चूत में अंगुली डाली तो बड़ा मजा आया। मैंने सोचा कि बिस्तर पर लेट कर मजा लूँगी लेकिन इसी वक्त मुझे लगा कि मरे पीछे भी कोई टीवी देख रहा है। मैंने जल्दी से टीवी बंद किया और पीछे देखा। मेरे अंकल जो फौज में काम करते थे, वो भी देख रहे थे। मैं उनको देख कर मुस्करा दी और बिस्तर पर चली गई, मैं नींद का बहाना करने लगी।

आधे घंटे बाद मुझे लगा कि मेरे साथ कोई सोया हुआ है। मुझे समझते देर नहीं लगी कि यह फौजी अंकल ही होंगे। उन्होंने अपने शरीर को मेरे शरीर से छुआ दिया। मैंने नींद का बहाना जारी रखा। धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे वक्ष पर रखा। फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने हाथ को फिराने लगे। एक चूची से दूसरी चूची तक धीरे धीरे हाथ फिराते रहे।

मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने नींद का बहाना जारी रखा।

धीरे धीरे वो अपने हाथ को मेरी कमर पर ले गए और फिर वो अपना हाथ मेरी टांगों के बीच में ले गए। उन्होंने मेरी चूत पर अपना हाथ फेरा।

मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने नींद का बहाना जारी रखा।

अब वो मेरी कुर्ती के अन्दर हाथ डालने की कोशिश करने लगे। वो अपने हाथ मेरी कमर के नीचे डाल कर मेरी कुर्ती की ज़िप तक पहुँचाना चाहते थे लेकिन कर नहीं पाए। मैं धीरे से टेढ़ी हो गई। इसका फायदा उन्होंने उठाया और जल्दी से मेरी कुर्ती की ज़िप खोल दी। इसके बाद उन्होंने मेरी कुर्ती को भी उतार दिया।

मैंने फिर भी नींद का बहाना जारी रखा।

अब मेरी कमर पे सिर्फ ब्रा थी। अंकल मेरी ब्रा में हाथ डाल कर मेरी चूची को दबाने लगे। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मेरे तन-बदन में आग लग रही थी।

इसी बीच मेरे हाथ के पास एक कड़क चीज थी, यह अंकल का लंड था। अंकल अपना हाथ मेरे नंगे बदन पर घुमाने लगे, मेरे बदन पर चूमने लगे। अब उनका हाथ मेरी सलवार तक पहुँच गया और वो मेरा नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगे। उनसे नाड़ा खुला नहीं और उल्टा उलझ गया।

अब मैं सोचने लगी कि क्या किया जाए !

किस तरह नींद में रह कर नाड़े को खोला जाए?

मैंने नींद में ही कहा- दरवाजा खुला न रहे ! नहीं तो बिल्ली आकर सब दूध पी लेगी।अंकल जल्दी से उठ कर दरवाजा बंद करने चले गए. मैंने जल्दी से अपना नाड़ा खोल कर इस तरह थोड़ा सा बांध दिया कि आसानी से खुल सके।

अंकल दरवाज़ा बंद करके आये। थोड़ी देर बाद हाथ फिरा का मेरा नाड़ा भी खोल दिया। अभी सलवार उतारने के लिए मुझे फिर अंकल की मदद करनी जरुरी थी। अंकल ने मेरी सलवार को नीचे खिसकाना चालू किया तो मैं थोड़ा सा ऊपर हो गई ताकि मेरी सलवार आसानी से उतर सके। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। अंकल का लंड भी बहुत बड़ा और कड़ा हो गया था जो कि मेरे बदन, जांघ से तथा मेरे हाथ से छू रहा था। अंकल कभी मेरी ब्रा में हाथ डालते तो कभी मेरी पैंटी में !

मैं अब तरपने लगी थी। अब अंकल ने अपने होंट मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे चूमने लगे। अब मैंने भी अपनी आँखें खोल दी और उनको चूमने लगी।

अंकल ने पूछा- यह तुमको अच्छा लग रहा था?

मैंने कहा- बहुत अच्छा लग रहा था।

उन्होंने बोला- अब मैं जो करूँगा वो तुम्हें बहुत ज्यादा मजा देगा।

उन्होंने मेरी ब्रा और पैंटी उतार दी। फिर अपनी लुंगी भी खोल दी। उनका लंड एक दम कड़ा और लम्बा था। फिर उन्होंने मुझे पूछा- वैसलीन या घी कहाँ रखा है?

मैंने उनको पूछा- यह क्यों चाहिए?

तब उन्होंने बताया- तुम पहली बार चुदवा रही हो, इसलिए जरुरी है। इससे मेरा लंड तुम्हारी चूत में आराम से घुस जायेगा।

मेरी चूत तथा अपने लंड पर वैसलीन लगा कर वो मेरा चुम्मा लेने लगे तथा जोर जोर से मेरे वक्ष की मालिश करने लगे।

उन्होंने कहा- अब तुम अपने दोनों पांव फ़ैला लो !

मैंने दोनों पांव फ़ैला लिए।

उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया, फिर धीरे धीरे उसे दबाने लगे। मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था तथा दर्द भी हो रहा था। फिर उन्होंने थोड़ा सा लंड और दबा दिया।

अंकल बोले- घबराओ नहीं ! पहली बार दर्द होता हैं लेकिन इतना मजा आता है कि पूछो मत !

सही था, मैं तो पूरा लंड लेना चाहती थी। थोड़ी सी देर में उन्होंने पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। मुझे भी दर्द हुआ तथा खून भी निकला लेकिन इतना मजा आया कि पूछो मत।

अब अंकल ऊपर-नीचे होने लगे और मैं भी अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी। बहुत ज्यादा मजा आ रहां था...

कुछ मिनट तक ऊपर-नीचे करने के बाद अंकल एकदम अकड़ से गए और इसी बीच मेरे चूत के अन्दर भी जूस निकल गया।

इसके बाद तो अंकल मुझे एक जगह लेकर गए, वहाँ हमने चुदाई का बहुत मजा लिया। लेकिन यह सब अगली कहानी में लिखूंगी।

अजब चाची की गजब कहानी

Posted: 07 Jun 2013 01:07 AM PDT


बात सुनो भाई बात सुनो, एक पते की बात सुनो !

मेरे और मेरी चाची के बीच के सेक्स का ये राज सुनो !!

यह हसीन ख्वाब तब से चालू होता है जब से मेरी चाची मेरे चाचा से शादी करके हमारे घर आई। मेरे चाचा एक सुस्त प्रकृति के इंसान हैं, दुबले-पतले मुरझाये से देख के तो यही लगता है कि नपुंसक हैं !

उनकी शादी के समय तो ऐसा कुछ नहीं हुआ पर जब शादी के बाद एक दिन मैंने चाची को कपड़े बदलते देखा तो मैं पागल सा हो गया। चाची उस समय २९ साल की थी और मैं १८ साल का। मेरे लंड ने नया-नया उठना सीखा था। उनको ब्रा-पैंटी में देखकर मेरा लंड कुमार तो बिलकुल आपे से ही बाहर हो गया ! इच्छा हुई उसी वक़्त जाकर योनि क दर्शन कर आऊं।

कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, फिर एक दिन जब चाची अपने कमरे में अकेली थी तो मैं उनके कमरे में यह देखने गया कि आखिर यह माल कर क्या रहा है !

मैंने देखा कि वो नंगी लेटी हुईं थी और एक बैंगन को अपनी चूत में डाल रही थीं। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैं आँख बंद करके उस मालजादी को चोदने के सपने देखने लगा !

इतने में ही मेरा ध्यान भंग हुआ एक आवाज से, यह आवाज मेरी चाची की ही थी, वो बोलीं- सनी बाहर क्यूँ खड़े हो? अंदर आ जाओ !

मैं एकदम से डर गया- अरे इसने कैसे देख लिया मुझे ?

अंदर गया तो चाची ने तब तक एक गाऊन पहन लिया था ! हाय उस गाऊन में भी क्या लग रही थीं वो ! उफ्फ्फ्फ़ एकदम बम्पर माल !सांवला-सलोना शरीर ! उस पर ये बड़े बड़े दूध ! मस्त चौड़ी गांड और गोल गोल जांघें ! पूरे बदन से यौवन टपक रहा था जैसे ! मैं तो दीवाना हो गया था !

तभी चाची मुझसे बोली- क्या देखते रहते हो सनी तुम मेरे कमरे के बाहर खड़े होकर?

मैं बोला- कुछ नहीं चाची जी ! बस ऐसे ही खड़ा हुआ था !

वो बोली- अगर तू ऐसे ही खड़ा हुआ था तो तेरा यह हथियार क्यूँ इतना खड़ा हुआ है?

मैं यह सुनकर एकदम सकपका गया लेकिन हिम्मत जुटाकर बोला- हथियार ? कौन सा हथियार ?

चाची बोली- अरे मेरे मिटटी के माधव ! हथियार मतलब तुम्हारा पप्पू ! याने कि तुम्हारा लंड !

मैं- नहीं चाची जी ! कैसी बात कर रही हैं आप ? मैं तो बस .. यूँही .. . और कुछ नहीं !

चाची- सुन रे लौंड़े ! जल्दी से बता दे- क्या कर रहा था? नहीं तो सब को बुलाकर बोलूंगी कि यह साला मेरी इज्जत लूटना चाहता है !

मैं तो घबरा गया एकदम से फिर मैं बोला- मैंने आपको नंगा देख रहा था, आप बहुत सुंदर हो ! मुझसे चुदवाओगी क्या आप ?

चाची- हाँ मेरे राजा ! मैं तो कब से चाह रही थी कि कोई माँ का लवड़ा फंसे तो कुछ अपनी भी प्यास शांत हो जावे ! ये तेरा चाचा तो बड़ा थकेला इंसान हैं , साला न चुम्मा लेता हैं न दूध दबाता है और न चूत चाटता है, साला मुझे भी लंड चूसने नहीं देता ! यहाँ तक कि बहनचोद कोई गन्दी बात भी नहीं करता है! शादी को दो महीने हो गए लेकिन इस भोसड़ी वाले ने सिर्फ दो बार चोदा है ! चोदा क्या है, दो मिनट मे लंड हिला के सो जाता है साला ! तू अच्छा हट्टा-कट्टा है ! तेरे से तो कुतिया के जैसे चुदुंगी मैं !

क्यूँ नहीं मेरी रानी ! बिलकुल संतुष्ट कर दूंगा, तुझे तो मैं ऐसा चोदूँगा कि तू साली बीच सड़क मे भी चुदवाने के लिए राजी हो जायेगी ! ऐसा माल जैसा शरीर लेकर अभी तक प्यासी बैठी है ? पर अब तेरी गांड को मैं अपने लंड के प्यार से सराबोर कर दूंगा ! एक काम करते हैं, यह चाचा कल जा रहा है बाहर ! तू तो यहीं रहेगी और तेरा कमरा भी घर से थोड़ा हट के है, मैं किसी बहाने से रात को तेरे कमरे में आ जाऊंगा, फिर बहनचोद दोनों मिल के सेक्स का आतंक मचाएंगे !

चाची- प्लान तो मस्त है ! तू एक काम करना, एक अद्धा दारू और एक बटर चिकन भी ले आना ! मस्त दारू पी के मूड बनायेगा ! और हाँ मादरचोद सिगरेट लाना मत भूलना ! साला पूरे तीन महीने हो गए दारू को हाथ लगाये ! इतना सीधा पति मिला है कि साला चूत को भी नहीं देख पाता ! पर आज अभी थोड़ा सा सेक्स तो कर ही लेते हैं ! तेरा लंड तो मैं आज ही चाखुंगी लौंड़े !

फिर मैंने धीरे धीरे चाची के दूध सहलाना चालू कर दिए चाची ने भी मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया ! मैंने चाची के गाऊन को उतार दिया और उनके बटले पीने लगा ! साली रंडी ऐसी आवाजें निकाल रही थी जैसे ब्लू फिल्म में मालू राण्डें निकालती हैं- हाय ! उफ़ सनी मादर चोद ! उफ़ साले और मसल हां हा हाय .... उफ़ ..उफ्फ्फ साले फ़ोड़ दे आज तो तू इनको ! फिर उसने झट से मेरा लौड़ा अपने मुँह मे ले लिया !

और मैं जन्नत में पहुँच गया ! वो खींच खींच कर मेरे लौड़े को चूसने लगी मैं भी उसकी फ़ुद्दी को सहलाने लगा ! आह आह क्या मजा आ रहा था ! आह, लौड़ा तो पूरा टाइट हो गेला था ! फिर सुपाड़े को चूसने लगी मेरी चाची !

फिर मुझसे बोली- अब चल गांडू मेरी बुर चाट तू !

मैं झुका और देखा तो आज क्या दर्शन हुए हैं योनि देवी के ! वाह वाह मजा आ गया- हलकी गुलाबी बुर थी चाची की पर एकदम टाइट न थी। ऐसा लग रहा था कि बहुत चुद चुकी है।

मैंने पूछा- एक बात बता रंडी ! मेरी चाची बनाने से पहले कित्तों से खेली-खाई हैं तू ?

वो बोली- छः महीने तक तो एक बॉयफ्रेंड था, उसने चोदा ! लेकिन इस सील को तोड़ने का श्रेय तो मेरे जीजाजी को जाता है ! वो बहुत अय्याश इंसान हैं ! मेरी दीदी को अलग अलग तरीके से चोदते हैं ! अबकी बार मैं उनके यहाँ जाउंगी तो तू भी चलना ! मेरी दीदी, जीजाजी, जीजाजी के भाई, उनकी पत्नी, जीजाजी की बहन और बहनोई मिलकर ग्रुप सेक्स करते हैं ! हम भी शामिल हो जायेंगे !

फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया ! उसके बाद मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया और धक्के पे धक्का मारने लगा ! वो भी मस्ताती जा रही थी ! आह आह ...उफ़ ...हे ...आह आह मेरे राजा ! मेरे जानेमन ! मुझे कुत्ते के जैसे चोदो ! आहऽऽ फाड़ डालो आज इस बुर को ! चूत के चिथड़े उड़ा डालो आज ! आज आह आज ....... ऐसा चोदो की बस मजा आ जाये !

मैंने चाची को दस मिनट तक चोदा और झड़ गया !

चाची संतुष्ट हो गई थी आज ! बोली- कल रात को चार-पाँच बार चोदना ताकि मेरी ये छिनाल बुर भी पानी छोड़ दे !

फिर मैं बाहर आ गया !

भाई लोग मेल करो कि कहानी कैसी लगी !

sunnyjisaaheb@gmail.com

चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-2

Posted: 07 Jun 2013 12:50 AM PDT



चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-1
वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा।

वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और उसके चूतड़ों पर चूम लिया और पजामा ऊपर कर दिया और अपने कपड़े भी सही कर लिए।

मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?

तो वो मुस्कुराने लगी।

मैंने एक बार और उसको किस किया और हम नीचे आ गये।

अब मुझको इंतजार था अगले सही मौके का जब मैं अपनी परी को अपने बिस्तर के रानी बना सकूँ।

प्लान मेरे पास था और जल्दी ही वो काम भी कर गया।

2-3 दिन के इंतजार के बाद ही एक दिन हम लोग चाचा के घर गए। मैंने रीना को एक तरफ ले जाकर सब कुछ समझा दिया और सब लोगो के साथ आकर बैठ गया। थोड़ी देर में रीना आई और चाची को कहा कि उसको किसी काम से बाहर जाना है।

मैंने कहा- मैं भी चलता हूँ, यहाँ बोर हो जाऊँगा। तुमको जहाँ जाना है, वहाँ छोड़ कर मैं अपने दोस्तों से मिलने निकल जाऊँगा। वापसी में तुमको लेता आऊँगा।

मेरी यह बात सबको सही लगी।

रीना ने कहा- मैं तैयार होकर आती हूँ।

थोड़ी देर में रीना लम्बा स्कर्ट और टॉप पहन के आ गई। मैंने अपनी बाइक उठाई और रीना को पीछे बैठा के अपने योजना के अनुसार अपने घर आ गया। घर के चाबी पहले ही मैंने अपने पास रखी थी ताकि कोई भी मेरे वापस आने तक घर आने की सोच भी ना सके।

मैंने घर का ताला खोला और अन्दर आ गया, मेरे पीछे पीछे रीना भी अन्दर आ गई। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। रीना घर के अन्दर जा रही थी, मैंने पीछे से रीना को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गले पर चुम्बन करने लगा। वो भी आँखें बंद करके मज़े ले रही थी। मैं उसके पेट पर हाथ से सहला रहा था, उसके गालों और गले को चूम रहा था।

मेरा लंड जो अब तक उत्तेजना से खड़ा हो चुका था, उसकी कूल्हों क़ी दरार में घुस रहा था।

थोड़ी देर में वो बोली- भईया, अन्दर चलते हैं, यहाँ मुझको शर्म आ रही है।

मैंने रीना को अपनी गोद में उठा लिया। चूंकि उसने स्कर्ट पहनी थी तो उसको उठाते समय मेरा हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर चला गया और उसकी नंगी टाँगें मेरे हाथ में आ गई। इससे वो और शरमाने लगी और उसने आँखें बंद कर ली।

मैं उसको अपने कमरे में ले आया और बिस्तर में बैठा दिया और खुद नीचे उसके घुटनों पर हाथ रख कर बैठ गया। उसकी आँखों में शर्म साफ़ साफ़ दिख रही थी पर शर्म के साथ वासना भी अपना असर दिखा रही थी।

मैंने उससे पूछा- शुरु से सब कुछ करें या जहाँ छोड़ा था, वहाँ से आगे?

तो वो कुछ नहीं बोली।

मैंने सोचा कि यह अभी नई है इस खेल में और अभी तक उसने कुछ किया भी नहीं है तो उसको पहले उत्तेजित करना होगा। एकदम करने से उसको दर्द भी ज्यादा होगा और काम खराब होने का डर भी रहेगा।

सो मैंने उसको उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया जैसा हमारे साथ पहली बार हुआ था। वो मेरे लंड पर बैठ गई और मैं उसकी कमर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।

आज चूंकि घर में कोई नहीं था सो हमको कोई डर भी नहीं था। वो भी अपने चूतड़ आगे पीछे करके मेरा साथ देने लगी। आज मेरे हाथ उसके पूरे जिस्म को सहला रहे थे और बार बार उसके मम्मों पर आकर रुक जाते थे। अब चूंकि वो अपनी कमर हिला कर मेरा साथ दे रही थी तो मैंने अपने दोनों हाथ उसके मम्मों पर रख दिए और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा। मैं उसके मम्मों को कभी पकड़ता, दबाता और कभी उसकी नई नई चूचियों को मसल देता। जब भी मैंने ऐसा करता वो सिसक जाती। मेरे होंठ उसके गले और गालों परबराबर घूम रहे थे।

मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी ओर किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एकदम पतले, गुलाब क़ी पंखुड़ियों से लाल रसीले होंठ थे उसके। मैंने उसके होंठ अपने मुँह में लेकर उसको चूसना शुरु कर दिया। फिर मैं कभी उसके ऊपर का होंठ चूसता, कभी नीचे वाला।

वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब तो हम लोगो क़ी जीभ एक दूसरे के मुँह में सैर कर रही थी। मैंने अपने हाथ उसको घुटनों पर रख दिए और उसकी स्कर्ट ऊपर करना शुरु कर दी। जल्दी ही उसकी स्कर्ट उसके घुटनों तक आ गई थी। मैंने उसकी स्कर्ट के अन्दर हाथ डाला और उसकी जांघों को सहलाने लगा। मेरा हाथ उसकी दोनों जांघों के बीच वाले भाग को छू रहा था जिसको हम आम भाषा में चूत कहते है। अब मैंने उसको खड़ा किया और अपनी पैंट निकाल दी और पीछे से उसका स्कर्ट पूरा ऊपर करके उसको अपने ऊपर बैठा लिया। मेरा लंड उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी गांड में सेट हो के आगे पीछे हो रहा था। थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद जब मेरे हाथों ने उसकी चूत को छुआ तो उसकी पैंटी के बीच वाली जगह गीली हो चुकी थी। अपने अनुभव से मैं इतना समझ गया कि अब लड़की मेरे नीचे आने को तैयार है।

मैंने रीना को उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। मेरे शरीर का सारा भार उसके ऊपर था जिसके कारण हमारे बीच जगह कम हो गई थी और उसके उभार मेरे शरीर में घुस रहे थे। नए नए उभरे हुए मम्मे मेरे सीने में गड़ रहे थे जो मुझको और उत्तेजित कर रहे थे। मेरा लण्ड पहली बार उसकी चूत के मुँह पर छू रहा था।

मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों का रस पीने लगा। उसके हाथ मेरी पीठ पर जमे हुए थे और मुझको अपने से और चिपकाने की उसकी कोशिश मुझको साफ़ पता चल रही थी।

हम लोग ऐसे चिपक रहे थे मानो दोनों अपने बीच में हवा तक नहीं आने देना चाहते हो।

दोस्तो, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि आप लोगों को सारी बातें महसूस करा सकूँ पर मेरा निवेदन है कि आप लोग अपनी कल्पना का पूरा इस्तेमाल करें ताकि आप वो फीलिंग महसूस कर सके जो हम लोगों के बीच उस वक़्त थी।

मेरे होंठ उसके होंठों से लगे थे और मेरे हाथ उसके टांगों से लेकर उसके सीने तक पूरे जिस्म पर घूम रहे थे और उसके उभारों और गहराइयों को टटोल रहे थे। उसका स्कर्ट काफी ऊपर हो चुका था और मेरे हाथ उसकी नंगी जाँघों को छू रहे थे जो किसी मक्खन जैसी थी।

मैंने उसको करवट लेकर लिटा दिया और उसके पीछे आकर उसके टॉप में हाथ डाल दिए। मेरे हाथ उसके नंगे पेट को सहलाते हुए उसके मम्मों तक चले गए जो ब्रा क़ी कैद में थे।

मैंने ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को दबाना शुरु कर दिया। सहलाने का वक्त अब जा चुका था और अब वक्त था जंगली सेक्स करने का।

मैं उसके मम्मों को मसलने लगा और वो आँखें बंद करके उसके मज़े ले रही थी। मैंने बिना समय गंवाए उसका टॉप ऊपर कर के उतार दिया और अपनी टीशर्ट भी अलग करके उसके पीछे से चिपक गया। मैं उसकी नंगी पीठ पर किस करने लगा और हाथों से उसके पेट, नाभि, मम्मों को सहलाने और दबाने लगा। मैंने उसकी ब्रा का स्ट्रेप उसके कंधों से नीचे कर दिया और उस जगह किस किया।

अब उसके सीधे होने का समय था। मैंने जब उसको सीधा किया तो उसने अपने हाथों से अपने मम्मों को छिपाने क़ी कोशिश क़ी। उसके ब्रा के स्ट्रेप उसकी कोहनी तक गिर चुके थे और मम्मे आधे चाँद क़ी तरह ब्रा के बाहर झांक रहे थे।

दोस्तो, आप लोगों ने महसूस किया हो तो लडको को लड़की के वो अंग जो पूरे खुले हों, उतने उत्तेजित नहीं करते जितने कि वो अंग करते हैं जो दिख कर भी नहीं दिख पा रहे हों। वही हालत मेरी थी। उसके आधे मम्मे मेरे सामने थे, पूरे दिख नहीं रहे थे। मैंने उसके आधे मम्मों को चूमना शुरु किया और उसकी ब्रा को उसके शरीर से अलग करना शुरु किया।

थोड़ी देर में ही उसका ब्रा उसके जिस्म से अलग होकर मेरे हाथ में झूल रही थी।

ब्रा अलग होते ही उसके आधे कच्चे आम जैसे मम्मे मेरे सामने थे जिन पर छोटी छोटी भूरे से रंग क़ी निप्पल थे। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसके निप्पल पर लगा कर उनको चाटने लगा।

थोड़ी देर में ही उसके मम्मे मेरे मुँह में थे, मैं उनको पूरा अपने मुँह में लेना चाहता था पर हो नहीं पा रहा था। मेरे हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर घुस चुके थे और उसके चूतड़ सहला रहे थे।

मैंने काफी देर तक उसके मम्मों का रस पिया फिर अपनी जीभ से उसके पूरे नंगे जिस्म को चाट चाट कर गीला कर दिया। बाकी काम मेरे हाथ ने उसकी स्कर्ट में कर दिया था। वो सिर्फ आँखें बंद करके सबका मज़ा ले रही थी। हालांकि मुझको यह सब अच्छा लग रहा था क्योंकि जिस लड़की को मैं अपने बिस्तर में लाने क़ी सोच रहा था वो आज मेरे बिस्तर क़ी रानी बन के पूरी नंगी होने को तैयार थी।

मैंने अपनी पैंट उतार दी और उसकी नंगी टांगों चाटने लगा। चाटते चाटते मैं उसकी स्कर्ट पूरी ऊपर कर चुका था और मेरा मुँह उसकी चूत के बिल्कुल पास था जहाँ से मैं उसकी चूत क़ी खुशबू ले रहा था। काला रंग वैसे भी मुझको उत्तेजित करता है और उसने काले रंग क़ी पेंटी पहन रखी थी।

मैंने उसकी स्कर्ट एक झटके में उतार कर फेंक दी। एक जवान खूबसूरत लड़की मेरे बिस्तर पर सिर्फ पेंटी में थी। एकदम गोरा रंग, बिना बालों का नमकीन सा जिस्म।

कहानी जारी रहेगी।

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