हिंदी सेक्सी कहानियां



हिंदी सेक्सी कहानियां


चीखें बहुत निकलवाते हो - 1

Posted: 14 Jun 2013 08:41 PM PDT



दोस्तो, कहानी पढ़ने से पहले मेरा आप सब से परिचय करवा दूँ। मेरा नाम है शालिनी राठौर यानि लेडी रावड़ी राठौर।

मेरे मोहल्ले के लड़के मुझे सविता भाभी के नाम से जानते हैं क्योंकि मैं एकदम मस्त मौला हूँ और अपनी मर्जी से करती हूँ सब कुछ। लड़कों की हिम्मत नहीं होती मेरे आसपास भी फटकने की।

उम्र है मेरी... !!??!! अरे हट ना ! लड़कियों से उनकी उम्र नहीं पूछी जाती जी।

इतना तो है कि मैं बहुत सुन्दर हूँ और मेरे इलाके के लड़के तो क्या बुड्ढे भी लाइन में खड़े होकर मेरे लिए आहें भरते हैं पर मैं किसी को भी घास नहीं डालती।

भगवान ने मेरा शरीर भी फुरसत से बनाया है, एकदम हरा-भरा। मेरी चूचियों का उत्थान देख कर तो बुड्ढों का लण्ड टपक जाता है। भरपूर गोलाई लिए ऊपर को तनी हुई चूचियाँ हैं मेरी। पतली सी कमर और चूतड़ों की तो पूछो ही मत ! ना जाने कितने घायल होकर गिर पड़ते हैं मेरे मटकते चूतड़ देख कर।

तो ऐसी हूँ मैं !

अब मेरी कहानी !

इस कहानी को आप लोगों के बीच मेरे एक मित्र राज कार्तिक लेकर आ रहे हैं।

तो अब कथा-प्रारम्भ :

मेरी शादी को तब दो महीने ही हुए थे, मेरे चाचा की लड़की सुमन की शादी थी तब, मैं भी शादी में गई थी।

क्या बताऊँ !

उस समय क्योंकि मेरी नई-नई शादी हुई थी या अगर खुले शब्दों में कहें तो मुझे नया-नया लण्ड का मज़ा मिला था तो लण्ड के पानी ने मेरी जवानी को और निखार दिया था।

आप लोगों की भाषा में 'क़यामत' हो गई थी मैं।

शादी में जिसने भी मुझे देखा मेरी तारीफ किये बिना ना रह सका।

सभी की जुबान पर एक ही बात थी- हाय छोरी ! तन्ने कैसै की नजर ना लगै... तू तो बौहोत निखरगी है ब्याह क पाच्छै !

भाभियाँ भी मजाक करने से नहीं चूकी- ननद सा... लागे हमारे ननदोई सा पुरा रगडा लगावे है... रूप निखार दियो तेरी तो..."

दिन बीता और शादी की रात भी आई, और शादी हो गई।

हमारे राजस्थान में शादी के बाद एक रात दूल्हा-दुल्हन एक साथ लड़की के घर पर ही रहते हैं। रात को दूल्हा-दुल्हन को उनके कमरे में छोड़ दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मेरी एक भाभी कुछ शरारती किस्म की है तो वो मुझसे बोली- शालू... देक्खाँ त सई के ननदोई सा रात ने कुछ करें बी क नईं !

मैं शरमाई पर फिर मेरा भी दिल किया कि देखा जाए।

हम दोनों ने जैसे-तैसे कमरे में अंदर झाँकने का रास्ता ढूँढा। अंदर देखा तो मेरे तो कान लाल हो गए। पूरे बदन में झुरझुरी सी फ़ैल गई।

सुमन मेरी चचेरी बहन बिस्तर पर नंगी बैठी थी शरमाई सी। उसके सामने ही मेरे नए जीजाजी जिनका नाम राज है, वो खड़े थे बिल्कुल नंगे।

उनका मुँह दूसरी तरफ था।

मैं उनका लण्ड नहीं देख पा रही थी जिसको देखने की लालसा में मैं भाभी के साथ यहाँ बैठी थी।

वो आपस में धीरे धीरे कुछ बोल रहे थे पर समझ नहीं आ रहा था कि क्या बात कर रहे हैं। तभी राज जीजा हमारी तरफ घूमे तो उनका लण्ड देखते ही मेरी चूत ने तो पानी छोड़ दिया। मस्त मूसल सा लण्ड था राज जीजा का ! एकदम तन कर खड़ा हुआ।

"भाभी आज सुमन की तो खैर नहीं... जीजा इस मूसल से फाड़ डालेंगे सुमन की !"

भाभी ने मुझे चुप करवा दिया और खुद भी चुपचाप अंदर देखते हुए अपनी चूचियाँ मसलती रही।

जीजा तेल की शीशी उठाकर फिर से सुमन के पास गए और सुमन को लेटा कर उसकी चूत पर अच्छे से तेल लगाया। सुमन भी मदहोश होकर मज़ा ले रही थी। तेल लगा कर जीजा ने सुमन की चूत पर लण्ड रखा और जोर से धक्का लगा दिया।

सुमन जोर से चीख उठी।

लण्ड चूत को चीरता हुआ अंदर धस गया। राज जीजा ने बिना तरस खाए जोर जोर से दो तीन धक्के और लगा दिए। लण्ड अंदर की तरफ घुसता चला गया जैसे कोई कील गाड़ दी गई हो।

सुमन चीखती जा रही थी पर जीजा पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था, वो तो अपनी ही मस्ती में धक्के पर धक्के लगा रहे थे।

सुमन छटपटाती रही और जीजा चोदते रहे।

जीजा ने करीब आधा घंटा तक सुमन को रगड़ रगड़ कर चोदा था। उनकी चुदाई देख कर मेरी तो चूत-पैंटी-पेटीकोट सब गीले हो गए थे। मेरी चूत ने पानी ही इतना छोड़ दिया था।

फिर भाभी और मैं नीचे अपने कमरे में आकर लेट गए। भाभी की हालत भी खस्ता हो रही थी। सुमन और राज जीजा की चुदाई देख कर उसकी चूत में भी कीड़े कुलबुलाने लगे थे। तभी कमरे के बाहर भाई नजर आये और उन्होंने भाभी को इशारा किया। भाभी तो इसी इशारे में इन्तजार में थी। वो उठ कर चली गई अब कमरे में मैं अकेली थी। चूत मेरी भी लण्ड लेने को छटपटा रही थी पर मैं भला किस से चुदवाती।

मैं कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और फिर उठ कर दुबारा सुमन और जीजा की सुहागरात देखने खिड़की के पास पहुँच गई।

जीजा अब दूसरी बार सुमन को चोद रहे थे और सुमन पहले की तरह ही चीख रही थी। सुमन की चीखों को समझ पाना मुश्किल था क्यूंकि उसकी चीखें कभी तो मस्ती भरी महसूस हो रही थी तो कभी दर्द भरी।

पर अब वो मस्त होकर चुदवा रही थी।

जीजा का गठीला बदन देख कर मेरी चूत फिर से पानी-पानी हो गई। मैं बहुत देर तक अकेली वहाँ बैठी सुमन और जीजा की चुदाई देखती रही।

फिर जब नींद ज्यादा आने लगी तो जाकर सो गई।

सुबह उठते ही मैं सीधा सुमन के कमरे के पास पहुँची। इत्तिफाक ही था कि जैसे ही मैं कमरे के बाहर पहुँची जीजा ने अंदर से दरवाजा खोला।

जीजा बाहर आ रहे थे तो मुझे शरारत सूझी।

"जीजा तुम तो चीखें बहुत निकलवाते हो ...? !"

"तूने कब सुनी...?"

"रात को, जब तुम सुमन को रगड़ रहे थे और वो चीख रही थी, तब सुनी !"

"अजी, हमारे कमरे में तो रात को जो भी रहेगा उसकी ऐसे ही चीखें निकलेंगी... क्यों तुम्हारे वाले नहीं निकलवाते तुम्हारी चीखें?"

"हमारी चीखें निकलवाने वाला तो अभी पैदा ही नहीं हुआ जीजा जी !" कह कर मैं हँस पड़ी।

"और अगर हमने तुम्हारी चीखें निकलवा दी तो ???" जीजा ने भी अपना तीर मुझ पर चलाया।

अगर मैं सतर्क ना होती तो शायद पहली ही बार में घायल हो जाती। पर मैंने अपने ऊपर काबू रखा,"रहने दो जीजा... मैं सुमन नहीं हूँ !"

इस पर जीजा बोले,"तो लगी शर्त? अगर मैंने तुम्हारी चीखें निकलवा दी तो !?"

मैं भी...

कहानी जारी रहेगी !

piyarathore.sr@gmail.com

हम बहुत प्यासे हैं

Posted: 14 Jun 2013 09:12 AM PDT



मेरा नाम नीतू है। हम दिल्ली के पास रहते हैं। मैं एक जिम में जाता हूँ, वहाँ पर महिलाएँ और पुरुष दोनों आते हैं।

कुछ दिन पहले एक बहुत ही मासूम चेहरे वाली महिला ने आना शुरू किया, उसने पहली नज़र में ही दिल को छू लिया।

मैने तो दिल ही दिल में उसके बारे में सोचना शुरू किया, हर समय उसके ख़यालों में रहने लगा। हर समय उसकी उभरी हुई छातियों के बारे में सोचता रहता कि कब इनका रस पी सकूँगा।

आख़िर वो दिन आ गया।

एक दिन जिम में उसके पाँव में मोच आ गई। जिम वाले के पास कोई कार ना होने के कारण जिम वाले ने मुझे उसको छोड़ कर आने के लिए कहा। २-३ महिलाओं ने उसको सहारा देकर मेरी कार में बैठाया। हम धीरे धीरे उसके घर की तरफ चले।

मैंने बहुत हिम्मत करके बातचीत शुरू की, उसका हालचाल पूछा, उसने धन्यवाद किया। फिर वो पूछने लगी कि आप हर समय मुझे देखते क्यों रहते हो?

मैंने कहा- ये आप अपने आप से पूछ सकती हैं।

वो समझ गई कि वो मुझे बहुत पसंद है।

बात करते करते उसका घर आ गया, उसने मुझे डोर बेल बजाने को कहा, पर बार बजाने के बावजूद अंदर से कोई नहीं आया। फिर उसने मुझे प्रार्थना वाले अंदाज में पूछा कि आप मुझे अंदर तक छोड़ देंगे?

मेरे मन में लड्डू फूटने लग गये कि उसके बदन को छूने का मौका तो मिला। मैने धीरे से उसका हाथ थामा और अंदर ले गया। अन्दर जाकर उसने बेडरूम में लेजाकर बेड पे लिटाने को कहा।

वो कहने लगी- प्लीज़ क्रीम उठा कर देते जाओ !

पर उसको दर्द हो रहा था, मेरे से रहा नहीं गया, मैंने उसको आग्रह किया कि अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपके पैर पर थोड़ी सी क्रीम लगा देता हूँ, उसने इनकार नहीं किया। मैंने थोड़ी क्रीम हाथ में ली और धीरे धीरे उसके पैर पर लगा कर सहलाना चालू किया मेरे हाथ का स्पर्श पाते ही उसके गले से सिसकारियाँ निकलने लगी।

मैं मौके को भाँपते हुए बेड के ऊपर बैठ गया और आराम करने के अंदाज में लेट गया। मुझे यह पता करना था कि आग दोनो तरफ है या एक तरफ?

वो देखते ही देखते मेरे साथ बराबर में आ के लेट गयी और कहने लगी- जो भी चाहते हो कर लो सब तुम्हारा है। मेरे पति ने मुझे बीच में ला के खड़ा कर दिया है। काम के सिलसिले मे वो अक्सर बाहर रहते हैं और हम यों ही प्यासे रह जाते हैं ! आज जी भर के हमें प्यार करो, हम बहुत प्यासे हैं। उसने मुझे नंगा कर दिया और अपना भी ट्रैक-सूट उतार कर फेंक दिया और मेरे लंड को जी कार में तन कर मोटा हो गया था, उसको बुरी तरह चूसना चालू कर दिया। वो मेरे लंड महाराज को इस तरह चूस रही थी मानो जन्मों-२ से प्यासी हो फिर उसने अपनी टांगे फैला कर इशारा किया कि आज इसकी प्यास मिटा दो।

मैने लंड को दोनों लाइन बीच में रख कर ज़ोर झटका मारा लंड सीधा उसकी गर्मागर्म आग की तरह तपती हुई गांड में गया। उसके मुँह से अजीब सी आवाज़ें निकालने लगी। पूरे १५ मिनट बाद वो खल्लास हो गयी। हम फटाफट फ्रेश हुए, उसने मुहे जाने का इशारा किया क्योंकि उसकी सास का मंदिर से आने का टाइम हो गया था।

उसकी मेरी बहुत अच्छी निभती रही, हमने खूब सारा आनंद लिया।

अभी हम फोन पर प्यार कर लेते हैं।
neetuarora10@gmail.com

मैडम की ज़वानी, लण्ड की दीवानी

Posted: 14 Jun 2013 09:07 AM PDT


हेलो दोस्तो, मैं गुड़गाव का रहने वाला हूँ, मैं आपको कहानी बताने जा रहा हूँ, यह मेरी पहली कहानी है।बात तब की है जब मैं कम्प्यूटर कोर्स करने के लिए ऑफ़टेक में जाता था। वहाँ पर हमारी टीचर सुमन नाम की महिला थी, उसका रंग तो बिल्कुल साफ नहीं था लेकिन उसका फिगर शायद ही किसी हिरोइन से कम हो, दिखने में तो वो हुस्न की मलिका थी, मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी, उसको देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। लेकिन एक समस्या थी कि वो मुझसे एक साल बड़ी थी, लेकिन मैं कुछ ज़्यादा हेल्दी हूँ तो वो मुझसे बड़ी नहीं लगती थी। मैं उसका दीवाना बन गया था, मुझे सब कुछ पता होते हुए भी मैं उसे कुछ ना कुछ पूछता रहता ताकि वो मेरे पास ही रहे।

धीरे धीरे हम अच्छे दोस्त बन गये लेकिन तब तक उसके दिल मेरे लिए कुछ नहीं था। फिर ऐसे ही मैं उसका पीछा करने लगा और जब उसको घर जाना होता तो मैं वहाँ चला जाता और बोलता कि किसी काम से यहाँ आया हूँ, और फिर मैं कभी कभार उसको उसके घर भी छोड़ने चला चला जाता। लेकिन मैं उसको उसके घर के बाहर ही छोड़ता था क्योंकि इससे उसकी पर्सनल लाइफ में परेशानी हो जाती। फिर तो उसको भी मेरी आदत सी हो गई।

फिर एक दिन जब उसके घर जाने का समय हुआ तो काफ़ी तेज बारिश होने लगी, मैंने उसको अपने साथ चलने के लिए बोला तो उसने मना कर दिया लेकिन मैंने उसको ज़ोर देकर मना लिया।

जब हम निकले तो बारिश और भी तेज हो गई थी और हम दोनों बिल्कुल भीग गये थे, उसके बूब्स मेरी कमर से लग रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं गर्म भी होने लगा था। कुछ देर बाद उसको सर्दी लगने लगी तो मैंने बाइक और तेज कर दी और वो मुझसे चिपक गई।

हम उसके घर तक पहुँच गये, मैंने उसको उतारा और चलने लगा तो उसने बोला- तुम काफ़ी भीग गये हो, चाय पीकर जाना।

मैंने मना किया लेकिन वो नहीं मानी और हम दोनों अंदर गये। उसका पति ऑफिस गया हुआ था, घर पर हम दोनों के अलावा कोई नहीं था।

वो बिल्कुल भीग गई थी, उसके उरोज़ टीशर्ट में से बिल्कुल साफ दिख रहे थे, उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। उसने मुझे बाइक पर ही गर्म कर दिया था, तब से मेरा लण्ड खड़ा ही था जो मेरी फॉर्मल पैंट से साफ दिख रहा था और शायन उसने देख भी लिया था।

उसने मुझे बैठने को कहा और वो खुद वॉशरूम में कपड़े बदलने चली गई। पाँच मिनट बाद वो नाइटसूट पहन कर आई लेकिन उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी चूचियाँ बहुत मस्त लग रही थी।

फिर उसने मुझसे चेंज करने के लिए बोला तो मैंने मना कर दिया।

फिर वो चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई, थोड़ी देर बाद चाय बनाकर लाई, हम दोनों चाय पीते हुए बातें करने लगे। मेरी तो नज़र उसकी छाती पर थी, उसको पता भी था कि मैं उसके वक्ष को देख रहा हूँ। उसने मेरे खड़े लण्ड को देख कर मेरे दिल का इरादा जान लिया तो उसने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ़्रेन्ड है?

मैंने ना में उत्तर दिया तो वो बोली- सच सच बताओ !

मैंने बता दिया- नहीं है, सच में !

तब वो बोली- तभी तुम मुझे इतनी प्यासी नज़र से देख रहे हो !

तब मैं तो पानी-पानी हो गया और मेरा लण्ड एकदम से बैठ गया। मैं बिल्कुल चुप हो गया।

तब सुमन बोली- अरे, क्या हुआ? तुम चुप क्यों हो गये?

मैंने बोला- कुछ नहीं !

तो बोली- हम अच्छे दोस्त हैं, मुझसे क्या शर्माना !

तब मेरा डर कुछ कम हुआ और मैं समझ गया कि आज इसका भी इरादा ठीक नहीं है।

तब मैं बोला- मैडम, आप इतनी सेक्सी और हॉट हो कि क्या करूँ, नज़र हटती ही नहीं।

तब वो बोली- कभी सेक्स किया है?

मैंने बता दिया- हाँ एक बार एक कालगर्ल के साथ किया था।

तो वो नाराज़ सी होकर बोली- ऐसे काम मत किया करो !तब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई, मैंने उसकी चूचियों को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा- मैडम आपकी ब्रेस्ट बहुत मस्त है।

तो वो बोली- यह क्या कर रहे हो?

तब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से सहलाना शुरू कर दिया। अब वो भी कुछ ज़्यादा हॉट होने लगी, फिर मैंने उसको अपनी बाहों में ले लिया और उसके पूरे बदन को सहलाने-चूमने लगा।

अब वो बिल्कुल गर्म हो गई थी, मैं उसको उसके बेडरूम में ले गया और उसकी चूचियों को बारी बारी अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

वो आहह आहह की आवाज़ निकालने लगी, अब वो पूरी उत्तेजित हो चुकी थी, उसने मेरे लण्ड को पैंट के ऊपर से पकड़ा और मसलने लगी।

फिर उसने मेरी पैंट उतारी और फिर सारे कपड़े निकाल कर मुझे बिल्कुल नंगा करके मेरे लण्ड को मुँह में लेने लगी।लेकिन मेरा लण्ड थोड़ा मोटा ज़्यादा है और लंबा भी, इसलिए मेरा लण्ड उसके मुँह में ठीक से नहीं जा रहा था।

फिर मैंने उसको खड़ा किया और उसकी नाइट ड्रेस पज़ामा और टॉप उतार दिए, फिर उसके सारे बदन को अपने हाथों से सहलाया, चूमा। फिर मैंने उसको सीधा किया और उसकी टाँगें खोल कर उसकी चूत चाटने लगा, धीरे धीरे मैं अपनी जीभ अंदर डालने लगा, वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ खींचने लगी।

थोड़ी देर बाद उसने पानी छोड़ दिया और बोली- अब मुझसे नहीं रहा जाता, अब जल्दी से अंदर डालो !

तब मैंने उसकी दोनों टांगों को खोल कर अपना लण्ड उसकी टाँगों के बीच रख कर डालने लगा लेकिन अंदर आसानी से नहीं जा रहा था। तब मैंने अपने लण्ड पर थूक लगाया और एक झटका लगाया तो मेरा आधा लण्ड अंदर चला गया और उसने ज़ोर से चीख मारी, बोली- आराम से !

फिर मैंने धीरे धीरे लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू किया और फिर एक ओर तेज़ी से झटका मारा और मेरा पूरा लण्ड अंदर चला गया, उसकी फिर से चीख निकली और मैं ऐसे ही उसके ऊपर लेटा रहा, फिर एक मिनट बाद मैंने झटके मारने शुरू किए।

अब उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। उस दिन मैंने उसको तीन बार चोदा।

कुछ देर हम चिपक कर लेटे रहे, फिर अपने आप ही बताने लगी- मैं शादी से पहले भी अपने बॉय फ़्रेंड से चुदी हूँ, अपने आदमी से भी लेकिन तुमसे जो मज़ा आया, वो कभी नहीं आया।

उसके बाद मैंने उसको बहुत बार चोदा लेकिन फिर वे लोग बेंगलोर चले गये। अब उससे फोन पर तो बात होती है।

बोल रही थी कि जब गुड़गाव आऊँगी तब तुमसे ज़रूर मिलूंगी।

मुझे आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा...

deep.tarun937@gmail.com

गुप्त पति बनोगे ?

Posted: 14 Jun 2013 09:01 AM PDT


जैसा कि आपको पता है कि मैं अपने घर पर छोटे बच्चों को कोचिंग देता हूँ तो उनमें कुछ बड़े बच्चे भी आते हैं और कुछ छोटे बच्चे भी !

इससे पहले मैंने आपको एक लड़की की कहानी बताई थी जो मेरे पास आती थी पढ़ने के लिए, आज मैं एक आंटी की कहानी बताने जा रहा हूँ।

मेरे पास एक छोटी बच्ची आती थी वो तीसरी कक्षा में पढ़ती थी, उसकी माँ उसके बारे में पूछने के लिए हफ्ते में तीन चार बार आ ही जाती थी। वो हर बार साड़ी पहन कर आती थी और जब भी आती मेरे ऊपर क्या कर जाती कि पूरा दिन फिर मुझे वही याद आती थी। एक दिन की बात है, वो मेरे घर आई अपने बच्चे को लेकर और बैग रखते समय झुकी, और जैसे ही वो झुकी, उसका पल्लू सरक गया और उसके चुच्चों के दर्शन हो गए मुझे। मेरा तो एकदम से तन गया और पूरी रात मैं वही याद करते रह गया और सुबह उठ कर तो मुझे उनके नाम का हिलाना पड़ा। वो क्या चुच्चे दिखा गई थी, मुझे मज़ा आ गया था उस वक्त।

उस दिन के बाद मैं एक दिन अपनी बाइक लेकर कहीं जा रहा था और तभी मुझे सामने से वही आंटी जाती दिखी, मैं उनके बाजू से गया और उनके सामने बाइक रोक के लिफ्ट के लिए बोला तो वो मान गई और मेरे पीछे बैठ गई।

आंटी मुझे चलने से पहले ही बोली- जरा सम्भाल के चलाना, मुझे बाइक पर डर लगता है।

मैंने कहा- आंटी, टेंशन मत लो, बस मुझे पकड़ के बैठ जाओ।

आंटी फिर मुझे पकड़ कर बैठ गई, पहले तो उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा था और फिर कुछ देर के बाद मेरे जांघ पर हाथ रख दिया। उनके घर के सामने मैंने बाइक रोकी, वो उतर गई और मुझे धन्यवाद कह कर अपने घर को जाने लगी।

मैंने उस समय ध्यान दिया कि उस समय उनकी कमर ज्यादा ही मटक रही थी, या फिर आप एक तरह से कह सकते हैं कि मुझे दिखा कर मटका रही थी।

आंटी कुछ दूर जाने के बाद फिर से पलट कर आई और पूछने लगी- मेरी बेटी कैसी चल रही है पढ़ाई में !

मैंने कहा- वैसे तो सभी विषयों में ठीक है पर मैथ्स उसका बहुत कमजोर है, उसमें उसे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।

वो बोली- एक काम कीजिये, आप उसे कुछ अलग से समय दे दीजिये।

मैंने कहा- देखिये, मैं अपने घर पर ज्यादा देर नहीं पढ़ा सकता क्योंकि मेरे घर पर कोई न कोई आता रहता है, इसीलिए मुझे जितना खाली समय मिलता है, मैं उसी में पढ़ा देता हूँ।

वो बोली- आप मेरे घर पर आकर पढ़ा दिया करो।

मैंने कहा- ठीक है, कल सुबह आ जाऊँगा।

दूसरे दिन मैं उनके घर गया तो देखा कि बच्ची सो रही थी।

उन्होंने मुझे कहा- आप बैठिये, मैं छोटी को जगा कर लाती हूँ।

कुछ देर के बाद वो मेरे लिए चाय बना कर लाई और मुझे देने लगी। चाय देते समय चाय मेरे ऊपर गिर गई, पता नहीं जानबूझ कर गिराई या गिर गई, पर गिर गई मेरे ऊपर। वो तो किस्मत अच्छी थी कि चाय ज्यादा गर्म नहीं थी वरना गांड फ़ट जाती मेरी।

आंटी सॉरी सॉरी बोलते हुए मुझे बोली- अपना टी शर्ट दे दीजिये, मैं धो देती हूँ।

मैंने अपनी टीशर्ट उतार कर उन्हें दी, वो उसे लेकर बाथरूम चली गई और वापस आकर बोली- आपकी पैंट पे भी तो गिरी है, वो भी दीजिए, मैं अभी साफ़ करके लाती हूँ।

मैंने पहले तो मना किया- नहीं, पैंट ठीक है।

पर वो बार बार बोलने लगी और फिर अंत में बोली- इसमें शर्माना क्या, मैं तो तुम्हारी आंटी हूँ न, इतना क्या शरमाते हो।

मैंने कहा- आंटी, अब शर्म नहीं आएगी तो क्या आएगी, आप चीज़ ही ऐसी मांग रही हो।

आंटी फिर से बोली- दे दो और यह तौलिया लपेट लो !

मैंने उनसे तौलिया लिया और उन्हें पैंट उतार कर दे दी।

आंटी मेरी पैंट लेकर चल दी और दो मिनट के बाद फिर से आई और बोली- कहीं जला तो नहीं?

और यह कहते कहते वो मेरे लंड की तरफ देखने लग गई और फिर उस पर हाथ रखने लग गई।

मैं एकदम उठ गया और बोला- अरे आंटी, यह आप क्या कर रही हो?

आंटी बोली- वही जो मैं अपने पति के साथ ठीक से नहीं कर पाती !

और फिर उन्होंने मुझे कस के गले लगा लिया।

मेरा तो पहले से तन चुका था और मौका भी अच्छा था, मैं उन्हें किस करने लगा और वो भी मुझे चूमने लगी। दो मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद उन्होंने हल्का सा हाथ मारा मेरे तौलिए पर और वो गिर गया तो मैं सिर्फ़ चड्डी में आ गया।

उसके बाद मैंने उन्हें कस के गले लगा लिया और वो एक हाथ मेरे लंड पे रख कर उसे मसलने लगी। मैं भी उनके चुचों को मसलने लग गया तो वो बोली- यहाँ नहीं बेडरूम में चलो।

मैं फिर उनके साथ बेडरूम में गया, वहाँ उन्होंने मुझे कस के गले लगा लिया और मुझे चूमने लगी, मैं भी उनके होंठों को चूसने लगा और एक हाथ से उनके चुचों को मसलने लगा।

कुछ देर के बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया और उनके कपड़े उतार कर उन्हें केवल पेंटी और ब्रा में छोड़ दिया। उनके ऊपर मैं फिर लेट गया और उन्हें फिर से चूमने लग गया। थोड़ी देर के बाद मैं उनके चुचों को ब्रा के ऊपर से ही चूमने और काटने लग गया। फिर मैंने उनकी ब्रा उतार दी और उनके गुलाबी और बहुत ही प्यारे प्यारे निप्पल को अपने मुँह में भर कर चाटने और चूसने लग गया।

वो अब सिसकारियाँ लेने लगी- उम्म्म म्म ओह्ह ह्ह्ह अह्ह !

मैं उनकी चूचियों को दोनों तरफ से कस कस कर दबाने लग गया और बीच-बीच में चूसने भी लगा। उनके चुच्चे इतने बड़े थे कि दोनों तरफ से दबाने से में उनके दोनों निप्पल को एक साथ चूस सकता था, मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था। मैं उपर उनके चुचो को चूस रहा था और वो नीचे से मेरे लंड दबाए-सहलाए जा रही थी।

फिर मैं कुछ देर के बाद उठा, उनकी पेंटी निकाल दी और उनकी चिकनी चूत देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया।

मैंने उनसे पूछा- कब साफ़ की?

तो वो बोली- जिस दिन तुम मुझे बाइक पर बिठा कर ले गये थे, उसी दिन तुम्हारे नाम लेकर साफ़ की थी।

मैंने फिर खुशी से उनकी चूत पर मुँह रख दिया और और कस कस के उनकी चूत की पंखुड़ियों को चूसने लगा और अपने होंठों से उनको काट भी देता।

मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी पंखुड़ियों को अलग किया और उनकी चूत के बीच में अपनी जीभ घुमाने लगा।

वो अब बुरी तरह पागल सी होने लगी थी और मेरे सर को अपने चूत में घुसेड़ने की कोशिश कर रही थी। वो अब जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी और मेरे सर पर हाथ फेरे जा रही थी।

मैं फिर उनकी चूत के छेद में अपनी जीभ डालने लगा तो वो और भी पागल सी हो उठी और उईई ह्म्म अह्ह्ह्ह करने लग गई।

मैंने उनकी दोनों टांगों को उठा दिया और फिर कस कस के चाटने लग गया उनकी चूत को।मैं बीच बीच में उनकी चूत को अपने होंठों से काट भी देता और वो एकदम से सिमट जाती और कराहने लग जाती।

वो मुझे बोली- और देर मत करो, जल्दी से अपना यह लंड उतार दो मेरी चूत में, मेरे पति की तरह मुझे प्यासा मत छोड़ना, जल्दी करो, मैं बहुत प्यासी हूँ ! हम्म अम्म्म्म्मुफ्फ़ ई और करो और करो और और और करो।

मैं उठा और उनकी चूत में लंड सेट किया और धक्का दे दिया, वो एकदम से चीख उठी और बोली- धीरे करो, मैंने इतना मोटा लंड नहीं लिया कभी ! धीरे धीरे करो।

मैं धीरे धीरे पेलने लगा, कुछ देर बाद जब उन्हें मज़ा आने लगा तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी और अब मैं उन्हें कस कस के पेलने लग गया।

मैंने उनकी टाँगें उठा दी और अपने कंधों पर रख के झटके देने लगा और वो उईईइ उ उ ऊ उ हम आह किया जा रही थी और मेरे झटकों के मज़े ले रही थी।

मैं उनके चुचों को पकड़ कर मसल रहा था और नीचे से धक्के देता रहा और वो जोर जोर से चीखते हुए मज़े ले रही थी।

वो अब एक बार झड़ गई पर मैंने अपना धक्के चालू रखे और उन्हें पेलता रहा। कुछ देर बाद उन्होंने अपनी टांगों से मेरे कमर को जकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ कसने लग गई।

मैंने अपनी गति और बढ़ा दी और फिर उनकी टांगों को अपनी कमर से हटा कर पीछे की तरफ कर दिया। तब उन्होंने अपने हाथों से मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने नाखूनों को मेरे बदन में गाड़ने लग गई।

मुझे दर्द तो हो रहा था पर मैं उन्हें अब भी झटके दिए जा रहा था, अब मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है तो मैंने उन्हें कहा- मेरा निकलने वाला है, कहाँ निकालूँ मैं?

वो बोली- अंदर ही निकाल दो !

और फिर यह भी बोली- मैं भी झड़ने वाली हूँ।

अब मैंने अपनी गति और तेज कर दी और कुछ तीन चार झटकों के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और वो भी एकदम से फिर से झड़ गई।

हम दोनों के मिनट तक वैसे ही रहे और मैं अपना पानी उनकी चूत में छोड़ने लगा और वो भी अपना पानी छोड़ने लगी। पूरा पानी निकलने के बाद मुझे काफी खुशी महसूस हुई और वही सुख उनके चेहरे पे भी देखने को मिल रहा था।

पानी निकलने के बाद मैं उनके ऊपर लेट गया और हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे और फिर उन्होंने मुझसे पूछा- तुम क्या मेरे गुप्त पति बनोगे और मुझे इसी तरह खुश रखोगे क्या?

मैंने बोला- इसमें कौन सी बड़ी बात है, मैं अब से आपका पति हूँ और आप मेरी पत्नी।

अब इसके बाद तो हम दोनों के बीच में इसी तरह का खेल हफ्ते में दो तीन बार हो ही जाता है। इस बात को अब चार महीने हो गए और अब तक चलता आ रहा है।

gigolo.rajkot.1988@gmail.com




 

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